.. बृहदारण्यकोपनिषत् ..
ch1
ch1 = hbM 10.6.4.1 = hbk16.3.1.1-2
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उषा' वा' अ' श्वस्य मे' ध्यस्य शि' रः,
सू' र्यश्च' क्षुः
वा' तः प्राणो' ,
व्या' त्तमग्नि' र्वैश्वानर' ः,
संवत्सर' आत्मा' श्वस्य मे' ध्यस्य द्यौ' ष् पृष्ठ' म्
अन्त' रिक्षमुद' रं,
पृथिवी' पाजस्य' ं,
दि' शः पार्श्वे' ,
अवान्तरदि' शः प' र्शव,
ऋत' वो' ऽङ्गानि,
मा' साश्चार्धमासा' श्च प' र्वाणि
अहोरात्रा' णि प्रतिष्ठा' ,
न' क्षत्राण्य' स्थीनि,
न' भो माँसा' नि
ऊ' वध्यँ सि' कताः,
सि' न्धवो गु' दा,
य' कृच्च क्लोमा' नश्च प' र्वता,
ओ' षधयश्च व' नस्प' तयश्च लो' मानि
उद्य' न्पूर्वार्धो' ,
निम्लो' चङ्जघनार्धो' ,
य' द्विजृम्भते,
त' द्वि' द्योतते,
य' द्विधूनुते' ,
त' त्स्तनयति,
य' न्मे' हति,
त' द्वर्षति,
वा' गेवा' स्य वा' क् |
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अ' हर्वा' अ' श्वं पुर' स्तान्महिमा' न्वजायत,
त' स्य पू' र्वे समुद्रे' यो' नी;
रा' त्रिरेनं पश्चा' न्महिमा' न्वजायत,
त' स्या' परे समुद्रे' यो' निः
एतौ' वा' अ' श्वं महिमा' नावभि' तः स' म्बभूवतुः |
ह' यो भूत्वा' देवा' न' वहद्
वाजी' गन्धर्वा' न्
अर्वा' सुरान्
अ' श्वो मनुष्या' न्त् |
समुद्र' एवा' स्य ब' न्धुः,
समुद्रो' यो' निः |
ch2 = hbM 10.6.5.1-3 = hbk16.3.2.1-7
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नै' वे' ह' कि' ं चना' ग्र आसीन् |
मृत्यु' नैवे' द' मा' वृतमासीदशनाय' याशनाया' हि' मृत्यु' ः |
त' न्म' नोऽकुरुतात्मन्वी' स्यामि' ति |
सो' ऽर्चन्नचरत् |
त' स्या' र्चत आ' पोऽजायन्ता' र्चते वै' मे क' मभूदि' ति |
त' देवा' र्क्य' स्यार्कत्व' ं |
क' ँ ह वा' अस्मै भवति,
य' एव' मेत' दर्क्य' स्यार्कत्व' ं वे' द |
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आ' पो वा' अर्क' ः |
त' द्य' दपा' ँ श' र आ' सीत्
त' त्स' महन्यत,
सा' पृथिव्य' भवत् |
त' स्यामश्राम्यत् |
त' स्य श्रान्त' स्य तप्त' स्य ते' जो र' सो नि' रवर्तताग्नि' ः |
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स' त्रेधा' त्मा' नं व्य' कुरुतादित्य' ं तृती' यं,
वायु' ं तृती' यँ |
स' एष' प्राण' स् त्रेधाविहित' ः |
त' स्य प्रा' ची दि' क्षि' रोऽसौ' चासौ' चेर्मा' उ
अ' थास्य प्रती' ची दि' क्पु' च्छम्
असौ' चासौ' च सक्थ्यौ' ;
द' क्षिणा चो' दीची च पार्श्वे' ,
द्यौ' ष् पृष्ठ' म्
अन्त' रिक्षमुद' रम्
इय' मु' रः,
स' एषो' ऽप्सु' प्र' तिष्ठितो |
य' त्र क्व' चै' ति,
त' देव' प्र' तितिष्ठत्य् एव' ं विद्वा' न् |
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सो' ऽकामयतः
द्विती' यो म आत्मा' जायेते' ति |
स' म' नसा वा' चं मिथुन' ँ स' मभवदशनाया' ं मृत्यु' ः |
त' द्य' द्रे' त आ' सीत्
स' संवत्सरो' ऽभवन् |
न' ह पुरा' त' तः संवत्सर' आस |
त' मेता' वन्तं काल' मबिभर्या' वान्त्संवत्सर' ः |
त' मेता' वतः काल' स्य पर' स्तादसृजत |
त' ं जात' मभिव्या' ददात्;
स' भा' णकरोत्
सै' व' वा' गभवत् |
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स' ऐक्षतः
य' दि वा' इम' मभिमँस्ये' ,
क' नीयो' ऽन्नं करिष्य इ' ति |
स' त' या वाचा' ते' नात्म' नेद' ँ स' र्वमसृजत,
य' दिद' ं कि' ङ्च' र्चो य' जूँषि सा' मानि छ' न्दाँसि यज्ञा' न्प्रजा' ं पशू' न्त् |
स' य' द्-यदेवा' सृजत,
त' त्-तद' त्तुमध्रियत |
स' र्वं वा' अत्ती' ति,
त' द' दितेरदितित्व' ँ |
स' र्वस्यात्ता' भवति,
स' र्वमस्या' न्नं भवति,
य' एव' मेत' द' दितेरदितित्व' ं वे' द |
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सो' ऽकामयतः
भू' यसा यज्ञे' न भू' यो यजेये' ति |
सो' ऽश्राम्यत्
स' त' पोऽतप्यत |
त' स्य श्रान्त' स्य तप्त' स्य य' शो वीर्य' मु' दक्रामत् |
प्राणा' वै' य' शो वीर्य' ं |
त' त्प्राणे' षू' त्क्रान्तेषु श' रीरँ श्व' यितुमध्रियत;
त' स्य श' रीर एव' म' न आसीत् |
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सो' ऽकामयतः
मे' ध्यं म इद' ँ स्याद्
आत्मन्व्य' ने' न स्यामि' ति |
त' तो' ऽश्वः स' मभवद् |
य' द' श्वत्
त' न्मे' ध्यमभूदि' ति |
त' देवा' श्वमेध' स्याश्वमेधत्व' म् |
एष' ह वा' अश्वमेध' ं वेद,
य' एनमेव' ं वे' द |
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त' म' नवरुध्येवामन्यत |
त' ँ संवत्सर' स्य पर' स्तादात्म' न आ' लभत,
पशू' न्देव' ताभ्यः प्र' त्यौहत् |
त' स्मात्सर्वदेवत्य' ं प्रो' क्षितं प्राजापत्य' मा' लभन्त |
एष' वा' अश्वमेधो' य' एष' त' पति;
त' स्य संवत्सर' आत्मा' य' मग्नि' रर्क' ः
त' स्येमे' लोका' आत्मा' नः |
ता' वेता' वर्काश्वमेधौ' ,
सो' पु' नरे' कैव' देव' ता भवति,
मृत्यु' रेवा' प पुनर्मृत्यु' ं जयति,
नै' नं मृत्यु' राप्नोति,
मृत्यु' रस्यात्मा' भवति
स' र्वमा' युरेति
एता' सां देव' तानामे' को भवति,
य' एव' ं वे' द |
ch3 = hbM 14.4.1.1-33 = hbk16.3.3.1-23
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द्वया' ह प्राजापत्या' ,
देवा' श्चा' सुराश्च |
त' तः कानीयसा' एव' देवा' ,
ज्यायसा' अ' सुराः |
त' एषु' लोके' ष्वस्पर्धन्त |
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ते' ह देवा' ऊचुः
ह' न्ता' सुरान्यज्ञ' उद्गीथे' नात्य' यामे' ति |
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ते' ह वा' चमूचुः
त्व' ं न उ' द्गाये' ति |
त' थे' ति |
ते' भ्यो वा' गु' दगायद् |
यो' वाचि' भो' गस् त' ं देवे' भ्य आ' गायद्
य' त्कल्या' णं व' दति त' दात्म' ने |
ते' ऽविदुः
अने' न वै' न उद्गात्रा' त्येष्यन्ती' ति |
त' मभिद्रु' त्य पाप्म' नाविध्यन्त् |
स' य' ः स' पाप्मा' य' देवे' द' म' प्रतिरूपं व' दति,
स' एव' स' पाप्मा' |
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अ' थ ह प्राण' मूचुः
त्व' ं न उ' द्गाये' ति |
त' थे' ति |
ते' भ्यः प्राण' उ' दगायद् |
य' ः प्राणे' भो' गस् त' ं देवे' भ्य आ' गायद्
य' त्कल्या' णं जि' घ्रति त' दात्म' ने |
ते' ऽविदुः
अने' न वै' न उद्गात्रा' त्येष्यन्ती' ति |
त' मभिद्रु' त्य पाप्म' नाविध्यन्त् |
स' य' ः स' पाप्मा' य' देवे' द' म' प्रतिरूपं जि' घ्रति,
स' एव' स' पाप्मा' |
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अ' थ ह च' क्षुरूचुः
त्व' ं न उ' द्गाये' ति |
त' थे' ति |
ते' भ्यश्च' क्षुरु' दगायद् |
य' श्च' क्षुषि भो' गस् त' ं देवे' भ्य आ' गायद्
य' त्कल्या' णं प' श्यति त' दात्म' ने |
ते' ऽविदुः
अने' न वै' न उद्गात्रा' त्येष्यन्ती' ति |
त' मभिद्रु' त्य पाप्म' नाविध्यन्त् |
स' य' ः स' पाप्मा' य' देवे' द' म' प्रतिरूपं प' श्यति,
स' एव' स' पाप्मा' |
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अ' थ ह श्रो' त्रमूचुः
त्व' ं न उ' द्गाये' ति |
त' थे' ति |
ते' भ्यः श्रो' त्रमु' दगायद् |
य' ः श्रो' त्रे भो' गस् त' ं देवे' भ्य आ' गायद्
य' त्कल्या' णँ शृणो' ति त' दात्म' ने |
ते' ऽविदुः
अने' न वै' न उद्गात्रा' त्येष्यन्ती' ति |
त' मभिद्रु' त्य पाप्म' नाविध्यन्त् |
स' य' ः स' पाप्मा' य' देवे' द' म' प्रतिरूपँ शृणो' ति,
स' एव' स' पाप्मा' |
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अ' थ ह म' न ऊचुः
त्व' ं न उ' द्गाये' ति |
त' थे' ति |
ते' भ्यो म' न उ' दगायद् |
यो' म' नसि भो' गस् त' ं देवे' भ्य आ' गायद्
य' त्कल्या' णँ सङ्कल्प' यति त' दात्म' ने |
ते' ऽविदुः
अने' न वै' न उद्गात्रा' त्येष्यन्ती' ति |
त' मभिद्रु' त्य पाप्म' नाविध्यन्त् |
स' य' ः स' पाप्मा' य' देवे' द' म' प्रतिरूपँ सङ्कल्प' यति,
स' एव' स' पाप्मै' व' मु ख' ल्वेता' देव' ताः पाप्म' भिरु' पासृजन्न्
एव' मेनाः पाप्म' नाविध्यन् |
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अ' थ हेम' मासन्य' ं प्राण' मूचुः
त्व' ं न उ' द्गाये' ति |
त' थे' ति |
ते' भ्य एष' प्राण' उ' दगायत् |
ते' ऽविदुः
अने' न वै' न उद्गात्रा' त्येष्यन्ती' ति |
त' मभिद्रु' त्य पाप्म' नाविव्यत्सन्त् |
स' य' था' श्मानमृत्वा' लोष्टो' विध्व' ँसेतैव' ँ हैव' विध्व' ँसमाना वि' ष्वङ्चो वि' नेशुः |
त' तो देवा' अ' भवन्
प' रा' सुरा |
भ' वत्य् आत्म' ना,
प' रास्य द्विष' न्भ्रा' तृव्यो भवति,
य' एव' ं वे' द |
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ते' होचुः
क्व' नु सो' ऽभूद्
यो' न इत्थ' म' सक्ते' ति |
अय' मास्ये' ऽन्त' रि' ति,
सो' ऽया' स्य;
आङ्गिरसो' ,
अङ्गानाँ हि' र' सः |
pM10/k9
सा' वा' एषा' देव' ता दू' र्ना' म,
दूर' ँ ह्य' स्या मृत्यु' ः |
दूर' ँ ह वा' अस्मा' न्मृत्यु' र्भवति,
य' एव' ं वे' द |
pM11/k10
सा' वा' एषा' देव' तैता' सां देव' तानां पाप्मा' नं मृत्यु' मपह' त्य,
य' त्रासा' ं दिशा' म' न्तः
त' द्गमया' ं चकार,
त' दासां पाप्म' नो विन्य' दधात् |
त' स्मान्न' ज' नमियान्
ना' न्तमियान्
ने' त्पाप्मा' नं मृत्यु' मन्ववा' यानी' ति |
pM12/k11
सा' वा' एषा' देव' तैता' सां देव' तानां पाप्मा' नं मृत्यु' मपह' त्या' थैना मृत्यु' म' त्यवहत् |
pM13/k12
सा' वै' वा' चमेव' प्रथमा' म' त्यवहत् |
सा' यदा' मृत्यु' मत्य' मुच्यत,
सो' ऽग्नि' रभवत्;
सो' ऽय' मग्नि' ः प' रेण मृत्यु' म' तिक्रान्तो दीप्यते |
pM14/k13
अ' थ प्राण' म' त्यवहत् |
स' यदा' मृत्यु' मत्य' मुच्यत,
स' वायु' रभवत्;
सो' ऽय' ं वायु' ः प' रेण मृत्यु' म' तिक्रान्तः पवते |
pM15/k14
अ' थ च' क्षुर' त्यवहत् |
त' द्यदा' मृत्यु' मत्य' मुच्यत,
स' आदित्यो' ऽभवत्;
सो' ऽसा' वादित्य' ः प' रेण मृत्यु' म' तिक्रान्तस् तपति |
pM16/k15
अ' थ श्रो' त्रम' त्यवहत् |
त' द्यदा' मृत्यु' मत्य' मुच्यत,
ता' दि' शोऽभवन्;
ता' इमा' दि' शः प' रेण मृत्यु' म' तिक्रान्ताः |
pM17/k16
अ' थ म' नो' ऽत्यवहत् |
त' द्यदा' मृत्यु' म' त्यमुच्यत,
स' चन्द्र' मा अभवत्;
सो' ऽसौ' चन्द्र' ः प' रेण मृत्यु' म' तिक्रान्तो भाति |
एव' ँ ह वा' एनमेषा' देव' ता मृत्यु' म' तिवहति,
य' एव' ं वे' द |
pM18/k17
अ' थात्म' नेऽन्ना' द्यमा' गायद् |
य' द्धि' कि' ङ्चा' न्नमद्य' ते,
अने' नैव' त' दद्य' त;
इह' प्र' तितिष्ठति |
pM19/k18
ते' देवा' अब्रुवन्न्
एता' वद्वा' इद' ँ स' र्वं य' द' न्नं,
त' दात्म' न आ' गासीः
अ' नु नोऽस्मि' न्न' न्न आ' भजस्वे' ति |
ते' वै' माभिस' ंविशते' ति |
त' थे' ति |
त' ँ समन्त' ं परिण्य' विशन्त |
त' स्माद्य' दने' ना' न्नम' त्ति,
ते' नैता' स् तृप्यन्ति |
एव' ँ ह वा' एनँ स्वा' अभिस' ंविशन्ति,
भ' र्ता स्वा' नाँ श्रे' ष्ठः पुरएता' भवत्यन्नादो' ऽधिपतिः
य' एव' ं वे' द |
pM20/k18
य' उ हैवंवि' दँ स्वे' षु प्रतिप्रति' र्बु' भूषति,
न' हैवा' लं भार्ये' भ्यो भवति
अ' थ य' एवै' त' म' नुभवति,
यो' वैत' म' नु भार्या' न्बु' भूर्षति,
स' हैवा' लं भार्ये' भ्यो भवति |
pM21/k19
सो' ऽया' स्य आङ्गिरसो' ,
अङ्गानाँ हि' र' सः |
प्राणो' वा' अ' ङ्गानाँ र' सः |
प्राणो' हि' वा' अ' ङ्गानाँ र' सः
त' स्माद्य' स्मात्क' स्माच्चा' ङ्गात्प्राण' उत्क्रा' मति,
त' देव' त' च्छुष्यति
एष' हि' वा' अ' ङ्गानाँ र' सः |
pM22/k20
एष' उ एव' बृहस्प' तिः
वा' ग्वै' बृहती' ,
त' स्या एष' प' तिः
त' स्मादु बृहस्प' तिः |
pM23/k21
एष' उ एव' ब्र' ह्मणस्प' तिः
वा' ग्वै' ब्र' ह्म,
त' स्या एष' प' तिः
त' स्मादु ब्र' ह्मणस्प' तिः |
pM24/k22
एष' उ एव' सा' म;
वा' ग्वै' सा' मैष' सा' चा' मश्चे' ति,
त' त्सा' म्नः सामत्व' ं |
य' द्वेव' सम' ः प्लु' षिणा,
समो' मश' केन,
समो' नागे' न,
सम' एभि' स् त्रिभि' र्लोकै' ः,
समो' ऽने' न स' र्वेण,
त' स्माद्वेव' सा' माश्नुते' सा' म्नः सा' युज्यँ सलोक' तां,
य' एव' मेत' त्सा' म वे' द |
pM25/k23
एष' उ वा' उद्गीथ' ः |
प्राणो' वा' उ' त्
प्राणे' न ही' द' ँ स' र्वमु' त्तब्धं |
वा' गेव' गी' थो' च्च गी' था चे' ति,
स' उद्गीथ' ः |
pM26/k24
त' द्धा' पि ब्रह्मदत्त' श्चैकितानेयो' रा' जानं भक्ष' यन्नुवाचाय' ं त्य' स्य रा' जा मूर्धा' नं वि' पातयताद्
य' दितो' ऽया' स्य आङ्गिरसो' ऽन्ये' नोद' गायदि' ति |
वाचा' च ह्य् ए' व' स' प्राणे' न चोद' गायदि' ति |
pM27/k25
त' स्य हैत' स्य सा' म्नो य' ः स्व' ं वे' द,
भ' वति हास्य स्व' ं |
त' स्य वै' स्व' र एव' स्व' ं |
त' स्मादा' र्त्विज्यं करिष्य' न्वाचि' स्व' रमिच्छेत,
त' या वाचा' स्व' रसम्पन्नया' र्त्विज्यं कुर्यात् |
त' स्माद्यज्ञे' स्व' रवन्तं दि' दृक्षन्त एवा' थो य' स्य स्व' ं भ' वति |
भ' वति हास्य स्व' ं,
य' एव' मेत' त्सा' म्नः स्व' ं वे' द |
pM28/k26
त' स्य हैत' स्य सा' म्नो य' ः सुव' र्णं वे' द,
भ' वति हास्य सुव' र्णं |
त' स्य वै' स्व' र एव' सुव' र्णं |
भ' वति हास्य सुव' र्णं,
य' एव' मेत' त्सा' म्नः सुव' र्णं वे' द |
pM29/k27
त' स्य हैत' स्य सा' म्नो य' ः प्रतिष्ठा' ं वे' द,
प्र' ति ह तिष्ठति |
त' स्य वै' वा' गेव' प्रतिष्ठा' ,
वाचि' हि' ख' ल्वेष' एत' त्प्राण' ः प्र' तिष्ठितो गीय' ते' ,
अन्न इ' त्य् उ है' क आहुः |
pM30/k28
अ' था' तः प' वमानानामेवा' भ्यारोह' ः |
स' वै' ख' लु प्रस्तोता' सा' म प्र' स्तौति |
स' य' त्र प्रस्तुया' त्
त' देता' नि जपेद्
अ' सतो मा स' द्गमय
त' मसो मा ज्यो' तिर्गमय,
मृत्यो' र्मामृतं गमये' ति |
pM31/k28
स' य' दा' हा' सतो मा स' द्गमये' ति,
मृत्यु' र्वा' अ' सत्
स' दमृतम्
मृत्यो' र्मामृतं गमयामृतं मा कुर्वि' त्य् एवै' त' दाह |
pM32/k28
त' मसो मा ज्यो' तिर्गमये' ति,
मृत्यु' र्वै' त' मो,
ज्यो' तिरमृतम्
मृत्यो' र्मामृतं गमयामृतं मा कुर्वि' त्य् एवै' त' दाह |
मृत्यो' र्मामृतं गमये' ति,
ना' त्र तिरो' हितमिवास्ति |
pM33/k28
अ' थ या' नी' तराणि स्तोत्रा' णि,
ते' ष्वात्म' नेऽन्ना' द्यमा' गायेत्;
त' स्मादु ते' षु व' रं वृणीत,
य' ं का' मं काम' येत,
त' ँ |
स' एष' एवंवि' दुद्गाता' त्म' ने वा य' जमानाय वा य' ं का' मं काम' यते,
त' मा' गायति |
त' द्धैत' ल् लोकजि' देव' ,
न' हैवा' लोक्य' ताया आशा' स्ति,
य' एव' मेत' त्सा' म वे' द |
ch4 = hbM 14.4.2.1-31 = hbk16.3.4.1-17
pMk1
आत्मै' वे' द' म' ग्र आसीत्पु' रुषविधः |
सो' ऽनुवी' क्ष्य ना' न्य' दात्म' नोऽपश्यत् |
सो' ऽह' मस्मी' त्य' ग्रे व्या' हरत् |
त' तोऽहंना' माभवत् |
त' स्माद' प्य् एत' र्ह्य् आ' मन्त्रितोः
अह' मय' मि' त्य् एवा' ग्र उक्त्वा' थान्य' न्ना' म प्र' ब्रूते य' दस्य भ' वति |
pM2/k1
स' य' त्पू' र्वोऽस्मात्स' र्वस्मात्स' र्वान्पाप्म' न औ' षत्
त' स्मात्पु' रुष |
ओ' षति ह वै' स' त' ं,
यो' ऽस्मात्पू' र्वो बु' भूषति,
य' एव' ं वे' द |
pM3/k2
सो' ऽबिभेत्;
त' स्मादेकाकी' बिभेति |
स' हाय' मीक्षा' ं चक्रेः
य' न्म' दन्य' न्ना' स्ति,
क' स्मान्नु' बिभेमी' ति |
त' त एवा' स्य भय' ं वी' याय |
क' स्माद्ध्य' भेष्यद्
द्विती' याद्वै' भय' ं भवति |
pM4/k3
स' वै' नै' व' रेमे;
त' स्मादेकाकी' न' रमते |
स' द्विती' यमैच्छत् |
स' हैता' वानास य' था स्त्रीपुमा' ँसौ सम्प' रिष्वक्तौ |
pM5/k3
स' इम' मेवा' त्मा' नं द्वेधा' पातयत्;
त' तः प' तिश्च प' त्नी चाभवतां |
त' स्मादिद' मर्धबृगल' मिव स्व इ' ति ह स्माह या' ज्ञवल्क्यः |
त' स्मादय' माकाश' ः स्त्रिया' पूर्य' त एव' |
ता' ँ स' मभवत्
त' तो मनुष्या' अजायन्त |
pM6/k4
सो' हेय' मीक्षा' ं चक्रेः
कथ' ं नु' मात्म' न एव' जनयित्वा' स' म्भवति |
ह' न्त तिरो' ऽसानी' ति |
pM7/k4
सा' गौ' र' भवद्
वृषभ' इ' तरस्;
ताँ स' मेवा' भवत्
त' तो गा' वोऽजायन्त |
pM8/k4
व' डवे' तरा' भवद्
अश्ववृष' इ' तरो;
गर्दभी' तरा,
गर्दभ' इ' तरस्;
ता' ँ स' मेवा' भवत्
त' त ए' कशफमजायत |
pM9/k4
अजे' तरा' भवद्
बस्त' इ' तरो;
अवि' रि' तरा,
मेष' इ' तरस्;
ता' ँ स' मेवा' भवत्
त' तोऽजाव' योऽजायन्तैव' मेव' य' दिद' ं कि' ङ्च मिथुन' मा' पिपी' लिकाभ्यः
त' त्स' र्वमसृजत |
pM10/k5
सो' ऽवेद्
अह' ं वा' व' सृष्टिरस्मि
अह' ँ ही' द' ँ स' र्वम' सृक्षी' ति |
त' तः सृष्टिरभवत् |
सृष्ट्याँ हास्यैत' स्यां भवति,
य' एव' ं वे' द |
pM11/k6
अ' थे' त्यभ्य' मन्थत् |
स' मु' खाच्च यो' नेर्ह' स्ताभ्यां चाग्नि' मसृजत |
त' स्मादेत' दुभ' यमलो' मकमन्तरतो' ,
अलो' मका हि' यो' निरन्तरत' ः |
pM12/k6
त' द्य' दिद' माहुः
अमु' ं यजामु' ं यजे' त्य् ए' कैकं देव' म्
एत' स्यैव' सा' वि' सृष्टिः
एष' उ ह्य् ए' व' स' र्वे देवा' |
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अ' थ य' त्कि' ङ्चेद' मार्द्र' ं,
त' द्रे' तसोऽसृजत;
त' दु सो' म |
एता' वद्वा' इद' ँ स' र्वम' न्नं चैवा' न्नाद' श्च;
सो' म एवा' न्नम्
अग्नि' रन्नाद' ः |
pM14/k6
सै' षा' ब्र' ह्मणो' ऽतिसृष्टिः
य' च्छ्रे' यसो देवा' न' सृजता' थ य' न्म' र्त्यः स' न्नमृतानसृजत,
त' स्माद' तिसृष्टिः
अ' तिसृष्ट्याँ हास्यैत' स्यां भवति,
य' एव' ं वे' द |
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त' द्धेद' ं त' र्ह्य' व्याकृतमासीत् |
त' न्नामरूपा' भ्यामेव' व्या' क्रियतासौ' ना' माय' मिद' ँरूप इ' ति |
त' दिद' म' प्य् एत' र्हि नामरूपा' भ्यामेव' व्या' क्रियत असौ' ना' माय' मिद' ँरूप इ' ति |
pM16/k7
स' एष' इह' प्र' विष्ट आ' नखाग्रे' भ्यो |
य' था क्षुर' ः क्षुरधाने' ऽवहितः स्या' द्
विश्वम्भरो' वा विश्वम्भरकुलाये' ,
त' ं न' प' श्यन्ति
अ' कृत्स्नो हि' स' ः;
pM17/k7
प्राण' न्नेव' प्राणो' ना' म भ' वति,
व' दन्वा' क्
प' श्यंश्च' क्षुः,
शृण्व' ङ्छ्रो' त्रं,
मन्वानो' म' नः |
ता' न्यस्यैता' नि कर्मनामा' न्य् एव' |
स' यो' ऽत ए' कैकमुपा' स्ते,
न' स' वेदा' कृत्स्नो ह्य् ए' षो' ऽत ए' कैकेन भ' वति |
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आत्मे' त्य् एवो' पासीता' त्र ह्य् ए' ते' स' र्व ए' कं भ' वन्ति |
त' देत' त्पदनी' यमस्य स' र्वस्य य' दय' मात्मा' ने' न ह्य् ए' त' त्स' र्वं वे' द |
य' था ह वै' पदे' नानुविन्दे' द्
एव' ं कीर्ति' ँ श्लो' कं विन्दते,
य' एव' ं वे' द |
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त' देत' त्प्रे' यः पुत्रा' त्
प्रे' यो वित्ता' त्
प्रे' योऽन्य' स्मात्स' र्वस्माद्
अ' न्तरतरं,
य' दय' मात्मा' |
स' यो' ऽन्य' मात्म' नः प्रिय' ं ब्रुवाण' ं ब्रूया' त्
प्रिय' ँ रोत्स्यती' तीश्वरो' ह त' थैव' स्याद् |
आत्मा' नमेव' प्रिय' मु' पासीत |
स' य' आत्मा' नमेव' प्रिय' मुपा' स्ते,
न' हास्य प्रिय' ं प्रमा' युकं भवति |
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त' दाहुः
य' द्ब्रह्मविद्य' या स' र्वं भविष्य' न्तो मनुष्या' म' न्यन्ते,
कि' मु त' द्ब्र' ह्मावेद्
य' स्मात्त' त्स' र्वम' भवदि' ति |
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ब्र' ह्म वा' इद' म' ग्र आसीत् |
त' दात्मा' नमेवा' वेद्
अह' ं ब्र' ह्मास्मी' ति;
त' स्मात्त' त्स' र्वमभवत् |
त' द्यो' -यो देवा' नां प्रत्य' बुध्यत,
स' एव' त' द' भवत्
त' थ' र्षीनां,
त' था मनुष्या' णाम् |
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त' द्धैत' त्प' श्यन्नृषिर्वाम' देवः प्र' तिपेदेः
अह' ं म' नुरभवँ सू' र्यश्चे' ति |
त' दिद' म' प्य् एत' र्हि य' एव' ं वे' दाह' ं ब्र' ह्मास्मी' ति,
स' इद' ँ स' र्वं भवति,
त' स्य ह न' देवा' श्चना' भूत्या ईशत,
आत्मा' ह्य् ए' षा' ँ स' भ' वति |
अ' थ यो' ऽन्या' ं देव' तामुपा' स्तेः
अन्यो' ऽसा' उ
अन्यो' ऽह' मस्मी' ति,
न' स' वेद |
य' था पशु' रेव' ँ स' देवा' नां |
य' था ह वै' बह' वः पश' वो मनुष्य' ं भुङ्ज्यु' ः
एव' मे' कैकः पु' रुषो देवा' न्भुनक्ति |
ए' कस्मिन्नेव' पशा' वादीय' माने' ऽप्रियं भवति,
कि' मु बहु' षु;
त' स्मादेषां त' न्न' प्रिय' ं य' देत' न्मनुष्या' विद्यु' ः |
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ब्र' ह्म वा' इद' म' ग्र आसीदे' कमेव' |
त' दे' कँ स' न्न' व्य' भवत् |
त' च्छ्रे' यो रूप' म' त्यसृजत क्षत्र' ं,
या' न्य् एता' नि देवत्रा' क्षत्रा' णी' न्द्रो व' रुणः सो' मो रुद्र' ः पर्ज' न्यो यमो' मृत्यु' री' शान इ' ति |
त' स्मात्क्षत्रा' त्प' रं ना' स्ति;
त' स्माद्! ब्राह्मण' ः क्षत्रि' यं अध' स्तादु' पास्ते राजसू' ये |
क्षत्र' एव' त' द्य' शो दधाति,
सै' षा' क्षत्र' स्य यो' निर्य' द्ब्र' ह्म |
त' स्माद्य' द्य' पि रा' जा परम' तां ग' च्छति,
ब्र' ह्मैवा' न्तत' उपनि' श्रयति स्वा' ं यो' निं |
य' उ एनँ हिन' स्ति,
स्वा' ँ स' यो' निमृच्छति |
स' पा' पीयान्भवति,
य' था श्रे' याँसँ हिँसित्वा' |
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स' नै' व' व्य' भवत् |
स' वि' शमसृजत,
या' न्य् एता' नि देवजाता' नि गणश' आख्याय' न्ते,
व' सवो रुद्रा' आदित्या' वि' श्वे देवा' मरु' त इ' ति |
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स' नै' व' व्य' भवत् |
स' शौ' द्रं व' र्णमसृजत पूष' णम् |
इय' ं वै' पूषे' य' ँ ही' द' ँ स' र्वं पु' ष्यति य' दिद' ं कि' ङ्च |
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स' नै' व' व्य' भवत् |
त' च्छ्रे' यो रूप' म' त्यसृजत ध' र्मं |
त' देत' त्क्षत्र' स्य क्षत्र' ं य' द्ध' र्मः |
त' स्माद्ध' र्मात्प' रं ना' स्ति |
अ' थो अ' बलीयान्ब' लीयाँसमा' शँसते ध' र्मेण य' था रा' ज्ञैव' ं |
यो' वै' स' ध' र्मः,
सत्य' ं वै' त' त् |
त' स्मात्सत्य' ं व' दन्तमाहुः
ध' र्मं वदती' ति,
ध' र्मं वा व' दन्तँ:
सत्य' ं वदती' ति
एत' द्ध्य् ए' वै' त' दुभ' यं भ' वति |
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त' देत' द्ब्र' ह्म क्षत्र' ं वि' ट् शूद्र' ः |
त' दग्नि' नैव' देवे' षु ब्र' ह्मा' भवद्
ब्राह्मणो' मनुष्ये' षु,
क्षत्रि' येण क्षत्रि' यो,
वै' श्येन वै' श्यः,
शूद्रे' ण शूद्र' ः |
त' स्मादग्ना' वेव' देवे' षु लोक' मिच्छन्ते,
ब्राह्मणे' मनुष्ये' षु
एता' भ्याँ हि' रूपा' भ्यां ब्र' ह्मा' भवत् |
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अ' थ यो' ह वा' अस्मा' ल् लोका' त्स्व' ं लोक' म' दृष्ट्वा प्रै' ति,
स' एनम' विदितो न' भुनक्ति;
य' था वे' दो वा' ननूक्तोऽन्य' द्वा क' र्मा' कृतं |
य' दि ह वा' अ' प्य' नेवंविन्महत्पु' ण्यं क' र्म करो' ति,
त' द्धास्यान्तत' ः क्षी' यत एवा' त्मा' नमेव' लोक' मु' पासीत |
स' य' आत्मा' नमेव' लोक' मुपा' स्ते,
न' हास्य क' र्म क्षीयते |
अस्मा' द्ध्य् ए' वा' त्म' नो य' द्-यत्काम' यते,
त' त्-तत्सृजते |
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अ' थो अय' ं वा' आत्मा' स' र्वेषां भूता' नां लोक' ः;
स' य' ज् जुहो' ति,
य' द्य' जते ते' न देवा' नां लोको' ;
अथ य' दनुब्रूते' ,
ते' न' र्षीणाम्;
अ' थ य' त्प्रजा' मिच्छ' ते,
य' त्पितृभ्यो निपृणा' ति,
ते' न पित्ऱ्णा' म्;
अ' थ य' न्मनुष्या' न्वास' यते,
य' देभ्यो' ऽशनं द' दाति,
ते' न मनुष्या' णाम्;
अ' थ य' त्पशु' भ्यस् तृणोदक' ं विन्द' ति,
ते' न पशूना' ं;
य' दस्य गृहे' षु श्वा' पदा व' याँस्य् आ' पिपी' लिकाभ्य उपजी' वन्ति,
ते' न ते' षां लोको' |
य' था ह वै' स्वा' य लोका' या' रिष्टिमिच्छे' द्
एव' ँ हैवंवि' दे सर्वदा' स' र्वाणि भूता' न्य' रिष्टिमिच्छन्ति |
त' द्वा' एत' द्विदित' ं मीमाँसित' म् |
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आत्मै' वे' द' म' ग्र आसीद्
ए' क एव' |
सो' ऽकामयतः
जाया' मे स्याद्
अ' थ प्र' जायेया' थ वित्त' ं मे स्याद्
अ' थ क' र्म कुर्वीये' ति |
एता' वान्वै' का' मो ने' च्छ' ँश्चना' तो भू' यो विन्देत् |
त' स्माद' प्य् एत' र्ह्य् एकाकी' कामयतेः
जाया' मे स्याद्
अ' थ प्र' जायेया' थ वित्त' ं मे स्याद्
अ' थ क' र्म कुर्वीये' ति |
स' या' वद' प्य् एतेषामे' कैकं न' प्राप्नो' ति
अ' कृत्स्न एव' ता' वन्मन्यते |
त' स्यो कृत्स्न' ता |
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म' न एवा' स्यात्मा' ;
वा' ग्जाया' ;
प्राण' ः प्रजा' ;
च' क्षुर्मानुष' ं वित्त' ं,
च' क्षुषा हि' त' द्विन्द' ति;
श्रो' त्रं दै' वं,
श्रो' त्रेण हि' त' च्छृणो' ति
आत्मै' वा' स्य क' र्मात्म' ना हि' क' र्म करो' ति |
स' एष' पा' ङ्क्तो यज्ञ' ः,
पा' ङ्क्तः पशु' ः,
पा' ङ्क्तः पु' रुषः,
पा' ङ्क्तमिद' ँ स' र्वं य' दिद' ं कि' ङ्च |
त' दिद' ँ स' र्वमाप्नोति,
य' एव' ं वे' द |
ch5 = hbM 14.4.3.1-34= hbk16.3.5.1-23
pMk1
य' त्सप्ता' न्नानि मेध' या
त' पसा' जनयत्पितै' -
-कमस्य साधारण' ं,
द्वे' देवा' नभाजयत् |
त्री' ण्य् आत्म' नेऽकुरुत,
पशु' भ्य ए' कं प्रा' यच्छत्;
त' स्मिन्त्स' र्वं प्र' तिष्ठितं,
य' च्च प्रा' णिति य' च्च न' |
क' स्मात्ता' नि न' क्षीयन्ते,
अद्य' मानानि सर्वदा' |
यो' वै' ता' म' क्षितिं वे' द,
सो' ऽन्नमत्ति प्र' तीकेन,
स' देवा' न' पिगच्छति,
स' ऊ' ऋजमु' पजीवती' ति श्लो' काः |
pMk2
य' त्सप्ता' न्नानि मेध' या त' पसा' जनयत्पिते' ति,
मेध' या हि' त' पसा' जनयत्पितै' कमस्य साधारण' मि' तीद' मेवा' स्य त' त्साधारण' म' न्नं,
य' दिद' मद्य' ते |
स' य' एत' दुपा' स्ते,
न' स' पाप्म' नो व्या' वर्तते;
मिश्र' ँ ह्य् ए' त' त् |
pM3/k2
द्वे' देवा' नभाजयदि' ति,
हुत' ं च प्र' हुतं च;
त' स्माद्देवे' भ्यो जु' ह्वति च प्र' च जुह्वति |
अ' थो आहुः
दर्शपूर्णमासा' वि' ति |
त' स्मान्ने' ष्टिया' जुकः स्यात् |
pM4/k2
पशु' भ्य ए' कं प्रा' यच्छदि' ति,
त' त्प' यः;
प' यो ह्य् ए' वा' ग्रे मनुष्या' श्च पश' वश्चोपजी' वन्ति |
त' स्मात्कुमार' ं जात' ं घृत' ं वैवा' ग्रे प्रतिलेह' यन्ति,
स्त' नं वा' नुधापयन्ति;
pM5/k2
अ' थ वत्स' ं जात' माहुः
अ' तृणाद इ' ति |
त' स्मिन्त्स' र्वं प्र' तिष्ठितं,
य' च्च प्रा' णिति य' च्च ने' ति,
प' यसि ही' द' ँ स' र्वं प्र' तिष्ठितं,
य' च्च प्रा' णिति य' च्च न' |
pM6/k2
त' द्य' दिद' माहु' ः
संवत्सर' ं प' यसा जु' ह्वद' प पुनर्मृत्यु' ं जयती' ति,
न' त' था विद्याद् |
य' द' हरेव' जुहो' ति,
त' द' हः पुनर्मृत्यु' म' पजयत्य् एव' ं विद्वा' न्त्;
स' र्वँ हि' देवे' भ्योऽन्ना' द्यं प्रय' च्छति |
क' स्मात्ता' नि न' क्षीयन्तेऽद्य' मानानि स' र्वदे' ति |
pM7/k2
पु' रुषो वा' अ' क्षितिः,
स' ही' द' म' न्नं पु' नः-पुनर्जन' यते |
यो' वै' ता' म' क्षितिं वे' दे' ति,
पु' रुषो वा' अ' क्षितिः |
स' ही' द' म' न्नं धिया' -धिया जन' यते क' र्मभिः
य' द्धैत' न्न' कुर्या' त्
क्षी' येत ह |
सो' ऽन्नमत्ति प्र' तीकेने' ति,
मु' खं प्र' तीकं,
मु' खेने' त्य् एत' त् |
स' देवा' न' पिगच्छति,
स' ऊ' र्जमु' पजीवती' ति प्रशँसा' |
pM8/k3
त्री' ण्य् आत्म' नेऽकुरुते' तिः
म' नो वा' चं प्राण' ं;
ता' न्य् आत्म' नेऽकुरुतान्य' त्रमना अभूवं,
ना' दर्शम्;
अन्य' त्रमना अभूवं,
ना' श्रौषमि' तिः
म' नसा ह्य् ए' व' प' श्यति,
म' नसा शृणो' ति |
pM9/k3
का' मः सङ्कल्पो' विचिकित्सा' श्रद्धा' श्रद्धा धृतिर' धृतिर्ह्री' र्धी' र्भी' रि' त्य् एत' त्स' र्वं म' न एव' |
त' स्माद' पि पृष्ठ' त उ' पस्पृष्टो म' नसा वि' जानाति |
pM10/k3
य' ः क' श्च श' ब्दो,
वा' गेव' सै' षा' ह्य' न्तं आ' यत्तैषा' हि' न' |
प्राणो' ऽपानो' व्यान' उदान' ः समानो' ऽन' इ' त्य् एत' त्स' र्वं प्राण' एवै' तन्म' यो वा' अय' मात्मा' ः
वाङ्म' यो,
मनोम' यः,
प्राणम' यः |
pM11/k4
त्र' यो लोका' एत' एव' ः
वा' गेवा' य' ं लोको' ,
म' नोऽन्तरिक्षलोक' ः,
प्राणो' ऽसौ' लोक' ः |
pM12/k5
त्र' यो वे' दा एत' एव' ः
वा' गेव' र्ग्वेदो' ,
म' नो यजुर्वेद' ः,
प्राण' ः सामवेद' ः |
pM13/k6
pMk1
देवा' पित' रो मनुष्या' एत' एव' ः वा' गेव' देवा' , म' नः पित' रः, प्राणो' मानुष्या' ः |
pM14/k7
पिता' माता' प्रजै' त' एव' ः
म' न एव' पिता' ,
वा' ङ् माता' ,
प्राण' ः प्रजा' |
pM15/k8
वि' ज्ञातं विजिज्ञा' स्यम' विज्ञातमेत' एव' ः
य' त्कि' ङ्च वि' ज्ञातं वाच' स् त' द्रूप' म्
वा' ग्घि' वि' ज्ञाता,
वा' गेनं त' द्भूत्वा' वति |
pM16/k9
य' त्कि' ङ्च विजिज्ञा' स्यं म' नसस् त' द्रूप' म्
म' नो हि' विजिज्ञा' स्यं,
म' न एनं त' द्भूत्वा' वति |
pM17/k10
य' त्कि' ङ्चा' विज्ञातं प्राण' स्य त' द्रूप' म्
प्राणो' ह्य' विज्ञातः,
प्राण' एनं त' द्भूत्वा' वति |
pM18/k11
त' स्यै वाच' ः पृथिवी' श' रीरं,
ज्यो' ती रूप' मय' मग्नि' ः |
त' द्या' वत्य् एव' वा' क्
ता' वती पृथिवी' ,
ता' वानय' मग्नि' ः |
pM19/k12
अ' थैत' स्य म' नसो द्यौ' ः श' रीरं,
ज्यो' ती रूप' मसा' वादित्य' ः |
त' द्या' वदेव' म' नस् ता' वती द्यौ' ः
ता' वानसा' वादित्य' ः |
तौ' मिथुन' ँ स' मैतां |
त' तः प्राणो' ऽजायत |
स' इ' न्द्रः,
स' एषो' ऽसपत्नो' |
द्विती' यो वै' सप' त्नो |
ना' स्य सप' त्नो भवति,
य' एव' ं वे' द |
pM20/k13
अ' थैत' स्य प्राण' स्या' पः श' रीरं,
ज्यो' ती रूप' मसौ' चन्द्र' ः |
त' द्या' वानेव' प्राण' ः
ता' वत्य आ' पः
ता' वानसौ' चन्द्र' ः |
pM21/k13
त' एते' स' र्व एव' समा' ः,
स' र्वेऽनन्ता' ः |
स' यो' हैता' न' न्तवत उपा' स्ते' ,
अन्तवन्तँ स' लोक' ं जयति
अ' थ यो' हैता' ननन्ता' नुपा' स्ते,
अनन्त' ँ स' लोक' ं जयति |
pM22/k14
स' एष' संवत्सर' ः प्रजा' पतिष् षो' डशकलः |
त' स्य रा' त्रय एव' प' ङ्चदश कला' ;
ध्रुवै' वा' स्य षोडशी' कला' |
स' रा' त्रिभिरेवा' च पूर्यते' ,
अप च क्षीयते |
सो' ऽमावास्या' ँ रा' त्रिमेत' या षोडश्या' कल' या स' र्वमिद' ं प्राणभृदनुप्रवि' श्य,
त' तः प्रात' र्जायते |
त' स्मादेता' ँ रा' त्रिं प्राणभृतः प्राण' ं न' वि' च्छिन्द्याद' पि कृकलास' स्यैत' स्या एव' देव' ताया अ' पचित्यै |
pM23/k15
यो' वै' स' संवत्सर' ः प्रजा' पतिष् षो' डशकालो,
अय' मेव' स' यो' ऽय' मेवंवि' त्पु' रुषः |
त' स्य वित्त' मेव' प' ङ्चदश कला' ः
आत्मै' वा' स्य षोडशी' कला' |
स' वित्ते' नैवा' च पूर्यते' ,
अप च क्षीयते |
त' देत' न्न' भ्यं य' दय' मात्मा' ,
प्रधि' र्वित्त' ं |
त' स्माद्य' दि अ' पि सर्वज्यानि' ं जी' यत,
आत्म' ना चे' ज् जी' वति,
प्रधि' नागादि' त्य् आहुः |
pM24/k16
अ' थ त्र' यो वा' व' लोका' ः
मनुष्यलोक' ः,
पितृलोको' ,
देवलोक' इ' ति |
सो' ऽय' ं मनुष्यलोक' ः पुत्रे' णैव' ज' य्यो,
ना' न्ये' न क' र्मणा;
क' र्मणा पितृलोको' ;
विद्य' या देवलोको' |
देवलोको' वै' लोका' नाँ श्रे' ष्ठस्;
त' स्माद्विद्या' ं प्र' शँसन्ति |
pM25/k17
अ' था' तः सम्प्र' त्तिः |
यदा' प्रैष्य' न्म' न्यते' ,
अथ पुत्र' माहः
त्व' ं ब्र' ह्म,
त्व' ं यज्ञ' ः
त्व' ं लोक' इ' ति |
स' पुत्र' ः प्र' त्याहाह' ं ब्र' ह्माह' ं यज्ञो' ,
अह' म्लोक' इ' ति |
pM26/k17
य' द्वै' कि' ङ्चा' नूक्तं,
त' स्य स' र्वस्य ब्र' ह्मे' त्य् एक' ता |
ये' वै' के' च यज्ञा' ः
ते' षाँ स' र्वेषां यज्ञ' इ' त्य् एक' ता |
ये' वै' के' च लोका' ः
ते' षाँ स' र्वेषां लोक' इ' त्य् एक' तैता' वद्वा' इद' ँ स' र्वम्
एत' न्मा स' र्वँ स' न्नय' मितो' भुनजदि' ति |
त' स्मात्पुत्र' म' नुशिष्टं लोक्य' माहुः
त' स्मादेनम' नुशासति |
स' यदै' वंवि' दस्मा' ल् लोका' त्प्रै' ति
अ' थैभि' रेव' प्राणै' ः सह' पुत्र' मा' विशति |
स' य' द्यने' न कि' ङ्चिदक्ष्णया' कृत' ं भ' वति,
त' स्मादेनँ स' र्वस्मात्पुत्रो' मुङ्चति |
त' स्मात्पुत्रो' ना' म |
स' पुत्रे' णैवा' स्मिल् लोके' प्र' तितिष्ठति
अ' थैनमेते' देवा' ः प्राणा' अमृता आ' विशन्ति |
pM27/k18
पृथिव्यै' चैनमग्ने' श्च दै' वी वा' गा' विशति |
सा' वै' दै' वी वा' ग्य' या,
य' द्-यदेव' व' दति,
त' त्-तद्भवति |
pM28/k19
दिव' श्चैनमादित्या' च्च दै' वं म' न आ' विशति |
त' द्वै' दै' वं म' नो ये' नानन्द्य् ए' व' भ' वति
अ' थो न' शोचति |
pM29/k20
अद्भ्य' श्चैनं चन्द्र' मसश्च दै' वः प्राण' आ' विशति |
स' वै' दै' वः प्राणो' य' ः संच' रँश्चा' संचरँश्च न' व्य' थते' ,
अथो न' रि' ष्यति |
स' एष' एवंवि' त्स' र्वेषां भूता' नामात्मा' भवति |
य' थैषा' देव' तैव' ँ स' |
य' थैता' ं देव' ताँ स' र्वाणि भूता' न्य' वन्ति
एव' ँ हैवंवि' दँ स' र्वाणि भूता' न्यवन्ति |
य' दु कि' ङ्चेमा' ः प्रजा' ः शो' चन्ति
अमै' वा' सां त' द्भवति,
पु' ण्यमेवा' मु' ं गच्छति,
न' ह वै' देवा' न्पाप' ं गच्छति |
pM30/k21
अ' था' तो व्रतमीमाँसा' |
प्रजा' पतिर्ह क' र्माणि ससृजे |
ता' नि सृष्टा' न्यन्यो' ऽन्ये' नास्पर्धन्तः
वदिष्या' म्य् एवा' ह' मि' ति वा' ग्दध्रे;
द्रक्ष्या' म्यह' मि' ति च' क्षुः;
श्रोष्या' म्यह' मि' ति श्रो' त्रम्;
एव' मन्या' नि क' र्माणि यथाकर्म' म् |
pM31/k21
ता' नि मृत्यु' ः श्र' मो भूत्वो' पयेमे,
ता' न्य् आप्नोत्;
ता' न्य् आप्त्वा' मृत्यु' र' वारुन्द्ध |
त' स्माच्छ्रा' म्यत्य् एव' वा' क्
श्रा' म्यति च' क्षुः,
श्रा' म्यति श्रो' त्रम् |
अ' थेम' मेव' ना' प्नोद्
यो' ऽय' ं मध्यम' ः प्राण' ः |
pM32/k21
ता' नि ज्ञा' तुं दध्रिरेः
अय' ं वै' नः श्रे' ष्ठो य' ः संच' रंश्चा' संचरंश्च न' व्य' थते' ,
अथो न' रि' ष्यति |
ह' न्तास्यैव' स' र्वे रूप' ं भ' वामे' ति |
त' एत' स्यैव' स' र्वे रूप' मभवनः |
त' स्मादेत' एते' ना' ख्यायन्ते प्राणा' इ' ति |
ते' न ह वा' व' त' त्कु' लमा' चक्षते,
य' स्मिन्कु' ले भ' वति य' एव' ं वे' द |
य' उ हैवंवि' दा स्प' र्धते
K add..anushushhyati
अनुशु' ष्य हैवा' न्ततो' म्रियत |
इ' त्यध्यात्म' म् |
pM33/k22
अ' थाधिदेवत' म्
ज्वलिष्या' म्य् एवा' ह' मि' त्यग्नि' र्दध्रे;
तप्स्या' म्यह' मि' त्य् आदित्यो' ;
भास्या' म्यह' मि' ति चन्द्र' मा;
एव' मन्या' देव' ता यथादेवत' ँ |
स' य' थैषा' ं प्राणा' नां मध्यम' ः प्राण' ,
एव' मेता' सां देव' तानां वायु' ः |
म्लो' चन्ति ह्य' न्या' देव' ता,
न' वायु' ः |
सै' षा' नस्तमिता देव' ता य' द्वायु' ः |
pM34/k23
अ' थैष' श्लो' को भवतिः
य' तश्चोदे' ति सू' र्यो' ,
अस्तं य' त्र च ग' च्छती' ति
प्राणा' द्वा' एष' उ' देति,
प्राणे' ऽस्तमेति
त' ं देवा' श्चक्रिरे ध' र्मँ,
स' एवा' द्य' ,
स' उ श्व' इ' ति |
य' द्वा' एते' ऽमु' र्ह्य' ध्रियन्त,
त' देवा' प्यद्य' कुर्वन्ति |
त' स्मादे' कमेव' व्रत' ं चरेत् |
प्रा' ण्याच्चैवा' पान्या' च्चः
ने' न्मा पाप्मा' मृत्यु' राप्नवदि' ति |
य' द्य् उ च' रेत्
स' मापिपयिषेत् |
ते' नो एत' स्यै देव' तायै सा' युज्यँ सलोक' तां जयति,
य' एव' ं वे' द |
ch6 = hbM 14.4.4.1-4= hbk16.3.6.1-3
pMk1
त्र' यं वा' इद' ं,
ना' म रूप' ं क' र्म |
ते' षां ना' म्नां वा' गि' त्य् एत' देषामुक्थ' म्
अ' तो हि' स' र्वाणि ना' मान्य् उत्ति' ष्ठन्ति |
एत' देषा' ँ सा' मैत' द्धि' स' र्वैर्ना' मभिः सम' म् |
एत' देषां ब्र' ह्मैत' द्धि' स' र्वाणि ना' मानि बिभ' र्ति |
pMk2
अ' थ रूपा' णां च' क्षुरि' त्य् एत' देषामुक्थ' म्
अ' तो हि' स' र्वाणि रूपा' ण्य् उत्ति' ष्ठन्ति |
एत' देषाँ सा' मैत' द्धि' स' र्वै रूपै' ः सम' म् |
एत' देषां ब्र' ह्मैत' द्धि' स' र्वाणि रूपा' णि बिभ' र्ति |
pMk3
अ' थ क' र्मणामात्मे' त्य् एत' देषामुक्थ' म्
अ' तो हि' स' र्वाणि क' र्माण्य् उत्ति' ष्ठन्ति |
एत' देषाँ सा' मैत' द्धि' स' र्वैः क' र्मभिः सम' म् |
एत' देषां ब्र' ह्मैत' द्धि' स' र्वाणि क' र्माणि बिभ' र्ति |
त' देत' त्त्रय' ँ स' दे' कमय' मात्मा' त्मो' ए' कः स' न्नेत' त्त्रय' ं |
त' देत' दमृतँ सत्ये' न छन्न' ं |
प्राणो' वा' अमृतं,
नामरूपे' सत्य' ं;
ता' भ्यामय' ं प्राण' श्छन्न' ः |
ch2 = hbM 14.5.1-9= hbk16.4.1-9
ch1
pMk1
डृप्तबालाकि' र्हानूचानो' गा' र्ग्य आस |
स' होवाचा' जातशत्रुं का' श्यम्
ब्र' ह्म ते ब्रवाणी' ति |
स' होवाचा' जातशत्रुः
सह' स्रमेत' स्यां वाचि' दद्मोः
जनको' ,
जनक' इ' ति वै' ज' ना धावन्ती' ति |
pMk2
स' होवाच गा' र्ग्योः
य' एवा' सा' वादित्ये' पु' रुष,
एत' मेवा' ह' ं ब्र' ह्मो' पास इ' ति |
स' होवाचा' जातशत्रुः
मा' मैत' स्मिन्त्स' ंवदिष्ठा |
अतिष्ठा' ः स' र्वेषां भूता' नां मूर्धा' रा' जे' ति वा' अह' मेत' मु' पास इ' ति |
स' य' एत' मेव' मुपा' स्ते,
अतिष्ठा' ः स' र्वेषां भूता' नां मूर्धा' रा' जा भवति |
pMk3
स' होवाच गा' र्ग्योः
य' एवा' सौ' चन्द्रे' पु' रुष,
एत' मेवा' ह' ं ब्र' ह्मो' पास इ' ति |
स' होवाचा' जातशत्रुः
मा' मैत' स्मिन्त्स' ंवदिष्ठा |
बृह' न्पा' ण्दरवासाः सो' मो रा' जे' ति वा' अह' मेत' मु' पास इ' ति |
स' य' एत' मेव' मुपा' स्ते' ,
अहर्-अहर्ह सुत' ः प्र' सुतो भवति,
ना' स्या' न्नं क्षीयते |
pMk4
स' होवाच गा' र्ग्योः
य' एवा' य' ं विद्यु' ति पु' रुष,
एत' मेवा' ह' ं ब्र' ह्मो' पास इ' ति |
स' होवाचा' जातशत्रुः
मा' मैत' स्मिन्त्स' ंवदिष्ठाः |
तेजस्वी' ति वा' अह' मेत' मु' पास इ' ति |
स' य' एत' मेव' मुपा' स्ते,
तेजस्वी' ह भवति,
तेजस्वि' नी हास्य प्रजा' भवति |
pMk5
स' होवाच गा' र्ग्योः
य' एवा' य' माकाशे' पु' रुष,
एत' मेवा' ह' ं ब्र' ह्मो' पास इ' ति |
स' होवाचा' जातशत्रुः
मा' मैत' स्मिन्त्स' ंवदिष्ठाः |
पूर्ण' म' प्रवर्ती' ति वा' अह' मेत' मु' पास इ' ति |
स' य' एत' मेव' मुपा' स्ते,
पूर्य' ते प्रज' या पशु' भिः
ना' स्यास्मा' ल् लोका' त्प्रजो' द्वर्तते |
pMk6
स' होवाच गा' र्ग्योः
य' एवा' य' ं वायौ' पु' रुष,
एत' मेवा' ह' ं ब्र' ह्मो' पास इ' ति |
स' होवाचा' जातशत्रुः
मा' मैत' स्मिन्त्स' ंवदिष्ठा |
इ' न्द्रो वैकुण्ठो' ऽपराजिता से' ने' ति वा' अह' मेत' मु' पास इ' ति |
स' य' एत' मेव' मुपा' स्ते,
जिष्णु' र्हा' पराजिष्णुर्भवत्यन्यतस्त्यजायी' |
pMk7
स' होवाच गा' र्ग्योः
य' एवा' य' मग्नौ' पु' रुष,
एत' मेवा' ह' ं ब्र' ह्मो' पास इ' ति |
स' होवाचा' जातशत्रुः
मा' मैत' स्मिन्त्स' ंवदिष्ठा |
विषास' हिरि' ति वा' अह' मेत' मु' पास इ' ति |
स' य' एत' मेव' मुपा' स्ते,
विषास' हिर्ह भवति,
विषास' हिर्हास्य प्रजा' भवति |
pMk8
स' होवाच गा' र्ग्योः
य' एवा' य' मप्सु' पु' रुष,
एत' मेवा' ह' ं ब्र' ह्मो' पास इ' ति |
स' होवाचा' जातशत्रुः
मा' मैत' स्मिन्त्स' ंवदिष्ठाः |
प्रतिरूप' इ' ति वा' अह' मेत' मु' पास इ' ति |
स' य' एत' मेव' मुपा' स्ते,
प्र' तिरूपँ हैवै' नमु' पगच्छति,
ना' प्रतिरूपम्
अ' थो प्र' तिरुपोऽस्माज् जायते |
pMk9
स' होवाच गा' र्ग्योः
य' एवा' य' मादर्शे' पु' रुष,
एत' मेवा' ह' ं ब्र' ह्मो' पास इ' ति |
स' होवाचा' जातशत्रुः
मा' मैत' स्मिन्त्स' ंवदिष्ठा |
रोचिष्णु' रि' ति वा' अह' मेत' मु' पास इ' ति |
स' य' एत' मेव' मुपा' स्ते,
रोचिष्णु' र्ह भवति,
रोचिष्णु' र्हास्य प्रजा' भवति
अ' थो यै' ः संनिग' च्छति,
स' र्वाँस् ता' न' तिरोचते |
pM10/k11
स' होवाच गा' र्ग्योः
य' एवा' य' ं दिक्षु' पु' रुष,
एत' मेवा' ह' ं ब्र' ह्मो' पास इ' ति |
स' होवाचा' जातशत्रुः
मा' मैत' स्मिन्त्स' ंवदिष्ठा |
द्विती' योऽनपग' इ' ति वा' अह' मेत' मु' पास इ' ति |
स' य' एत' मेव' मुपा' स्ते,
द्विती' यवान्ह भवति,
ना' स्माद्गण' श्छिद्यते |
pM11/k10
स' होवाच गा' र्ग्योः
य' एवा' य' ं य' न्तं पश्चा' च्श' ब्दोऽनूदे' ति
एत' मेवा' ह' ं ब्र' ह्मो' पास इ' ति |
स' होवाचा' जातशत्रुः
मा' मैत' स्मिन्त्स' ंवदिष्ठा |
असु' रि' ति वा' अह' मेत' मु' पास इ' ति |
स' य' एत' मेव' मुपा' स्ते,
स' र्वँ हैवा' स्मि' ँल् लोक' आ' युरेति,
नै' नं पुरा' काला' त्प्राणो' जहाति |
pMk12
स' होवाच गा' र्ग्योः
य' एवा' य' ं छायाम' यः पु' रुष,
एत' मेवा' ह' ं ब्र' ह्मो' पास इ' ति |
स' होवाचा' जातशत्रुः
मा' मैत' स्मिन्त्स' ंवदिष्ठा |
मृत्यु' रि' ति वा' अह' मेत' मु' पास इ' ति |
स' य' एत' मेव' मुपा' स्ते,
स' र्वँ हैवा' स्मि' ँल् लोक' आ' युरेति,
नै' नं पुरा' काला' न्मृत्यु' रा' गच्छति |
pMk13
स' होवाच गा' र्ग्योः
य' एवा' य' मात्म' नि पु' रुषो,
एत' मेवा' ह' ं ब्र' ह्मो' पास इ' ति |
स' ह उवाचा' जातशत्रुः
मा' मैत' स्मिन्त्स' ंवदिष्ठा |
अत्मन्वी' ति वा' अह' मेत' मु' पास इ' ति |
स' य' एत' मेव' मुपा' स्त,
आत्मन्वी' ह भवति
आत्मन्वि' नी हास्य प्रजा' भवति |
स' ह तूष्णी' मास गा' र्ग्यः |
pMk14
स' ! होवाचा' जातशत्रुः
एता' वन्न्व्३ इ' ति |
एता' वद्धी' ति |
नै' ता' वता विदित' ं भवती' ति |
स' होवाच गा' र्ग्यः
उ' प त्वायानी' ति |
pMk15
स' होवाचा' जातशत्रुः
प्र' तिलोमं वै' त' द्य' द्ब्राह्मण' ः क्षत्रि' यमुपेया' द्
ब्र' ह्म मे वक्ष्यती' ति |
व्य् ए' व' त्वा ज्ञपयिष्यामी' ति |
त' ं पाणा' वादा' यो' त्तस्थौ |
तौ' ह पु' रुषँ सुप्त' मा' जग्मतुः |
त' मेतै' र्ना' मभिरामन्त्रया' ं चक्रेः
बृह' न्पा' ण्दरवासः,
सो' म राजन्नि' ति |
स' नो' त्तस्थौ |
त' ं पाणि' नापे' षं बोधया' ं चकार |
स' हो' त्तस्थौ |
pMk16
स' होवाचा' जातशत्रुः
य' त्रैष' एत' त्सुप्तो' ऽभूद्
य' एष' विज्ञानम' यः पु' रुषः,
क्वै' ष' तदा' भूत्
कु' त एत' दा' गादि' ति |
त' दु ह न' मेने गा' र्ग्यः |
pMk17
स' होवाचा' जातशत्रुः
य' त्रैष' एत' त्सुप्तो' ऽभूद्
य' एष' विज्ञानम' यः पु' रुषः
त' देषा' ं प्राणा' नां विज्ञा' नेन विज्ना' नमादा' य,
य' एषो' ऽन्त' र्हृदय आकाश' ः
त' स्मिङ्छेते |
pM18/k17
ता' नि यदा' गृह्णा' ति
अ' थ हैत' त्पु' रुषः स्व' पिति ना' म |
त' द्गृहीत' एव' प्राणो' भवति,
गृहीता' वा' ग्
गृहीत' ं च' क्षुः
गृहीत' ँ श्रो' त्रं,
गृहीत' ं म' नः |
pM19/k18
स' य' त्रैत' त्स्वप्न्य' या च' रति,
ते' हास्य लोका' ः |
त' दुते' व महाराजो' भ' वति
उते' व महाब्राह्मण' ,
उते' वोच्चावच' ं नि' गच्छति |
pM20/k18
स' य' था महाराजो' जा' नपदान्गृहीत्वा' स्वे' जनपदे' यथाकाम' ं परिव' र्तेतैव' मेवै' ष' एत' त्प्राणा' न्गृहीत्वा' स्वे' श' रीरे यथाकाम' ं प' रिवर्तते |
pM21/k19
अ' थ यदा' सु' षुप्तो भ' वति,
यदा' न' क' स्य चन' वे' द,
हिता' ना' म नाद्यो' द्वा' सप्ततिः सह' स्राणि हृदयात्पुरीत' तमभिप्र' तिष्ठन्ते ! |
ता' भिः प्रत्यवसृप्य पुरीत' ति शेते |
pM22/k19
स'
K om.
य' था कुमारो'
kadd. vA mahArAjo
वा महाब्राह्मणो' वातिघ्नी' मानन्द' स्य गत्वा' श' यीतैव' मेवै' ष' एत' च्छेते |
pM23/k20
स' य' थोर्णवा' भिस् त' न्तुनोच्च' रेद्
य' था अग्ने' ः क्षुद्रा' विष्फुलि' ङ्गा व्युच्च' रन्ति
एव' मेवा' स्मादात्म' नः स' र्वे प्राणा' ः स' र्वे लोका' ः स' र्वे देवा' ः स' र्वाणि भूता' नि स' र्व एत' आत्म' नो
K om. sarva ...
व्यु' च्चरन्ति |
त' स्योपनिष' त्सत्य' स्य सत्य' मितिः
प्राणा' वै' सत्य' ं,
ते' षामेष' सत्य' म् |
ch2
pMk1
यो' ह वै' शि' शुँ सा' धानँ स' प्रत्याधानँ स' स्थूणँ स' दामं वे' द,
सप्त' ह द्विषतो' भ्रा' तृव्यान' वरुणद्धि |
pM2/k1
अय' ं वा' व' शि' शुर्यो' ऽय' ं मध्यम' ः प्राण' स्;
त' स्येद' मेवा' धा' नम्
इद' ं प्रत्याधा' नं,
प्राण' ः स्थूणा' न्नं दा' म |
pM2/k2
त' मेता' ः सप्ता' क्षितय उ' पतिष्ठन्तेः
pM3/k2
त' द्या' इमा' अक्ष' ँल् लो' हिन्यो रा' जयः
ता' भिरेनँ ऱुद्रो' ऽन्वा' यत्तो' ;
अथ या' अक्ष' न्ना' पः
ता' भिः पर्ज' न्यो;
या' क' नीनका,
त' यादित्यो' ;
य' च्छुक्ल' ं
K kR\^ishhNaM
ते' नाग्नि' ः
य' च्कृष्ण' ं
K shuklaM
ते' ने' न्द्रो' |
अधरयैनं वर्तन्या' पृथिव्य' न्वा' यत्ता,
द्यौ' रु' त्तरया |
ना' स्या' न्नं क्षीयते,
य' एव' ं वे' द |
pM4/k3
त' देष' श्लो' को भवति
अर्वा' ग्बिलश्चमस' ऊर्ध्व' बुध्नस्;
त' स्मिन्य' शो नि' हितं विश्व' रूपं |
त' स्यासत ऋषयः सप्त' ती' रे;
वा' गष्टमी' ब्र' ह्मणा संविदाने' ति |
pM5/k3
अर्वा' ग्बिलश्चमस' ऊर्ध्व' बुध्न इ' तीद' ं त' च्छ' रीर,
एष' ह्य' र्वा' ग्बिलश्चमस' ऊर्ध्व' बुध्नः |
त' स्मिन्य' शो नि' हितं विश्व' रूपमि' ति,
प्राणा' वै' य' शो नि' हितं विश्व' रूपं,
प्राणा' नेत' दाह |
त' स्यासत ऋषयः सप्त' ती' र इ' ति,
प्राणा' वा' ऋषयः,
प्राणा' णेत' दाह |
वा' गष्टमी' ब्र' ह्मणा संविदाने' ति,
वा' ग्घ्य' ष्टमी' ब्र' ह्मणा संवित्ते' |
pM6/k4
इमा' वेव' गोतमभरद्वाजा' उ
अय' मेव' गो' तमो,
अय' ं भ' रद्वाज |
इमा' वेव' विश्वामित्रजमदग्नी' ः
अय' मेव' विश्वा' मित्रो,
अय' ं जमद' ग्निः |
इमा' वेव' वसिष्ठकश्यपा' उ
अय' मेव' व' सिष्ठो,
अय' ं कश्य' पो |
वा' गेवा' त्रिः
वाचा' ह्य' न्नमद्य' ते' ,
अत्तिर्ह वै' ना' मैत' द्य' दत्रिरि' ति |
स' र्वस्यात्ता' भवति,
स' र्वमस्या' न्नं भवति,
य' एव' ं वे' द |
ch3
pMk1
द्वे' वा' व' ब्र' ह्मणो रूपे' ः
मूर्त' ं चैवा' मूर्तं च,
म' र्त्यं चामृतं च,
स्थित' ं च य' च्च,
स' च्च त्य' ं च |
pMk2
त' देत' न्मूर्त' ं य' दन्य' द्वायो' श्चान्त' रिक्षाच्चैत' न्म' र्त्यम्
एत' त्स्थित' म्
एत' त्स' त् |
pM3/k2
त' स्यैत' स्य मूर्त' स्यैत' स्य म' र्त्यस्यैत' स्य स्थित' स्यैत' स्य सत' एष' र' सो य' एष' त' पति;
सतो' ह्य् ए' ष' र' सः |
pM4/k3
अ' था' मूर्तं वायु' श्चान्त' रिक्षश्चैत' दमृतम्
एत' द्य' द्
एत' त्त्य' म् |
pM5/k3
त' स्यैत' स्या' मूर्तस्य,
त' स्यामृतस्यैत' स्य यत' ,
एत' स्य त्य' स्यैष' र' सो य' एष' एत' स्मिन्म' ण्डले पु' रुषस्;
त्य' स्य ह्य् ए' ष' र' स |
इ' त्यधिदेवत' म् |
pM6/k4
अ' थाध्यात्म' म् |
इद' मेव' मूर्त' ं य' दन्य' त्प्राणा' च्च य' श्चाय' मन्त' रात्म' न्नाकाश' ः
एत' न्म' र्त्यम्
एत' त्स्थित' म्
एत' त्स' त् |
pM7/k4
त' स्यैत' स्य मूर्त' स्य,
एत' स्य म' र्त्यस्यैत' स्य स्थित' स्यैत' स्य सत' एष' र' सो य' च्च' क्षुः;
सत' ह्य् ए' ष' र' सः |
pM8/k5
अ' था' मूर्तम्
प्राण' श्च य' श्चाय' मन्त' रात्म' न्नाकाश' ,
एत' दमृतम्
एत' द्य' द्
एत' त्त्य' ं |
pM9/k5
त' स्यैत' स्या' मूर्तस्यैत' स्यामृतस्यैत' स्य यत' ,
एत' स्य त्य' स्यैष' र' सो यो' ऽय' ं दक्षिणे' ऽक्ष' न्पु' रुषस्;
त्य' स्य ह्य् ए' ष' र' सः |
pM10/k6
त' स्य हैत' स्य पु' रुषस्य रूप' ं य' था माहारजन' ं वा' सो,
य' था पाण्ड्वा' विकं,
य' थेन्द्रगोपो' ,
य' थाग्न्यर्चि' ः
य' था पुण्ड' रीकं,
य' था सकृद्विद्युत्त' ँ |
सकृद्विद्युत्ते' व ह वा' अस्य श्री' र्भवति,
य' एव' ं वे' द |
pM11/k6
अ' था' त आदेश' ः
ने' ति ने' ति,
न' ह्य् ए' त' स्मादि' ति ने' त्यन्य' त्प' रमस्ति |
अ' थ नामधे' यँ सत्य' स्य सत्य' मि' तिः
प्राणा' वै' सत्य' ं,
ते' षामेष' सत्य' म् |
ch4
pMk1
मै' त्रेयी' ति होवाच या' ज्ञवल्क्य,
उद्यास्य' न्वा' अरेऽह' मस्मात्स्था' नादस्मि |
ह' न्त तेऽन' या कात्यायन्या' न्तं कर' वाणी' ति |
pMk2
सा' होवाच मै' त्रेयीः
य' न्म इय' ं,
भगोः,
स' र्वा पृथिवी' वित्ते' न पूर्णा' स्या' त्
क' थं ते' नामृता स्यामि' ति |
ने' ति होवाच या' ज्ञवल्क्यो;
य' थैवो' पकरण' वतां जीवित' ं,
त' थैव' ते जीवित' ँ स्याद्;
अमृतत्व' स्य तु' ना' शा' स्ति वित्ते' ने' ति |
pMk3
सा' होवाच मै' त्रेयीः
ये' नाह' ं ना' मृता स्या' ं,
कि' मह' ं ते' न कुर्यां |
य' देव' भ' गवान्वे' द,
त' देव' मे ब्रूही' ति |
pMk4
स' होवाच या' ज्ञवल्क्यः
प्रिया' वतारे
K batAre
नः सती' प्रिय' ं भाषस |
ए' हि
आ' स्व
K Assva
व्या' ख्यास्यामि ते |
व्याच' क्षाणस्य तु' मे नि' दिध्यासस्वे' ति |
ब्र' वितु भ' गवानि' ति
K om. bravitu ...
pMk5
स' होवाच या' ज्ञवल्क्यो
K om.
न' वा' अरे प' त्युः का' माय प' तिः प्रियो' भवति
आत्म' नस् तु' का' माय प' तिः प्रियो' भवति |
न' वा' अरे जाया' यै का' माय जाया' प्रिया' भवति
आत्म' नस् तु' का' माय जाया' प्रिया' भवति |
न' वा' अरे पुत्रा' णां का' माय पुत्रा' ः प्रिया' भवन्ति
आत्म' नस् तु' का' माय पुत्रा' ः प्रिया' भवन्ति |
न' वा' अरे वित्त' स्य का' माय वित्त' ं प्रिय' ं भवति
आत्म' नस् तु' का' माय वित्त' ं प्रिय' ं भवति |
न' वा' अरे ब्र' ह्मणः का' माय ब्र' ह्म प्रिय' ं भवति
आत्म' नस् तु' का' माय ब्र' ह्म प्रिय' ं भवति |
न' वा' अरे क्षत्र' स्य का' माय क्षत्र' ं प्रिय' ं भवति
आत्म' नस् तु' का' माय क्षत्र' ं प्रिय' ं भवति |
न' वा' अरे लोका' नां का' माय लोका' ः प्रिया' भवन्ति
आत्म' नस् तु' का' माय लोका' ः प्रिया' भवन्ति |
न' वा' अरे देवा' नां का' माय देवा' ः प्रिया' भवन्ति
आत्म' नस् तु' का' माय देवा' ः प्रिया' भवन्ति |
न' वा' अरे भूता' नां का' माय भूता' नि प्रिया' णि भवन्ति
आत्म' नस् तु' का' माय भूता' नि प्रिया' णि भवन्ति |
न' वा' अरे स' र्वस्य का' माय स' र्वं प्रिय' ं भवति
आत्म' नस् तु' का' माय स' र्वं प्रिय' ं भवति |
आत्मा' वा' अरे द्रष्ट' व्यः श्रोत' व्यो मन्त' व्यो निदिध्यासित' व्यो |
मै' त्रेयि
आत्म' नो वा' अरे द' र्शनेन श्र' वणेन मत्या' विज्ञा' नेनेद' ँ स' र्वं विदित' म् |
pMk6
ब्र' ह्म त' ं प' रादाद्यो' ऽन्य' त्रात्म' नो ब्र' ह्म वे' द;
क्षत्र' ं त' ं प' रादाद्यो' ऽन्य' त्रात्म' नः क्षत्र' ं वे' द;
लोका' स् त' ं प' रादुर्यो' ऽन्य' त्रात्म' नो लोका' न्वे' द;
देवा' स् त' ं प' रादुर्यो' ऽन्य' त्रात्म' नो देवा' न्वे' द;
भूता' नि त' ं प' रादुर्यो' ऽन्य' त्रात्म' नो भूता' नि वे' द;
स' र्वं त' ं प' रादाद्यो' ऽन्य' त्रात्म' नः स' र्वं वे' देद' ं ब्र' ह्मेद' ं क्षत्र' म्
इमे' लोका' ,
इमे' देवा' ,
इमा' नि भूता' नीद' ँ स' र्वं,
य' दय' मात्मा' |
pMk7
स' य' था दुन्दुभे' र्हन्य' मानस्य न' बा' ह्याङ्छ' ब्दाङ्छक्नुयाद्ग्र' हणाय,
दुन्दुभे' स् तु' ग्र' हणेन दुन्दुभ्याघात' स्य वा श' ब्दो गृहीत' ः;
pM8/k9
स' य' था वी' णायै वाद्य' मानायै न' बा' ह्याङ्छ' ब्दाङ्छक्नुयाद्ग्र' हणाय,
वी' णायै तु' ग्र' हणेन वीणावाद' स्य वा श' ब्दो ग्र्हीत' ः;
pM9/k8
स' य' था शङ्ख' स्य ध्माय' मानस्य न' बा' ह्याङ्छ' ब्दाङ्छक्नुयाद्ग्र' हणाय,
शङ्ख' स्य तु' ग्र' हणेन शङ्खध्म' स्य वा श' ब्दो गृहीत' ः;
pMk10
स' य' थार्द्रैधाग्ने' रभ्या' हितस्य
K abhyAhitAt
पृथग्धूमा' विनिश्च' रन्ति
एव' वा' अरेऽस्य महतो' भूत' स्य नि' श्वसितम्
K niHshvasitam
एत' द्य' दृग्वेदो' यजुर्वेद' ः सामवेदो' ऽथर्वाङ्गिर' स इतिहास' ः पुराण' ं विद्या' उपनिष' दः श्लो' काः सू' त्राण्यनुव्याख्या' नानि व्याख्या' ननि
अस्यै' वै' ता' नि स' र्वाणि नि' श्वसितानि
kniHshvasitAni
pMk11
स' य' था स' र्वासामपा' ँ समुद्र' एकायन' म्
एव' ँ स' र्वेषाँ स्पर्शा' नां त्व' गेकायन' म्
एव' ँ स' र्वेषां गन्धा' नां ना' सिके एकायन' म्
एव' ँ स' र्वेषाँ र' सानां जिह्वै' कायन' म्
एव' ँ स' र्वेषाँ रूपा' णां च' क्षुरेकायन' म्
एव' ँ स' र्वेषँ श' ब्दानाँ श्रो' त्रमेकायन' म्
एव' ँ स' र्वेषाँ सङ्कल्पा' नां म' न एकायन' म्
K variato ordineH
एव' ँ स' र्वेषां वे' दानां वा' गेकायन' म्
एव' ँ स' र्वेषां क' र्मणाँ ह' स्तावेकायन' म्
एव' ँ स' र्वेषाम' ध्वनां पा' दावेकायन' म्
एव' ँ स' र्वेषामानन्दा' नामुप' स्थ एकायन' म्
एव' ँ स' र्वेषां विसर्गा' णां पा' युरेकायन' म्
एव' ँ स' र्वासां विद्या' नाँ हृदयमेकायन' म्
pMk12
स' य' था सैन्धवखिल्य' उदके' प्रा' स्त उदक' मेवा' नुविली' येत,
ना' हास्योद्ग्र' हणायैव'
K na hAsyodgrahaNAyaiva
स्याद्
य' तो-यतस् त्वा' द' दीत लव' णमेवै' व' ं वा' अर इद' ं मह' द्भूत' मनन्त' मपार' ं विज्ञानघन' एवै' ते' भ्यो भूते' भ्यः समुत्था' य,
ता' न्य् एवा' नुवि' नश्यति;
न' प्रे' त्य संज्ञा' स्ती' त्यरे ब्रवीमी' ति होवाच या' ज्ञवल्क्यः |
pMk13
सा' होवाच मै' त्रेयि
अ' त्रैव' मा भ' गवानमूमुहद्
न' प्रे' त्य संज्ञा' स्ती' ति |
pM14/k13
स' होवाच या' ज्ञवल्क्यो
K om.
न' वा' अरेऽह' ं मो' हं ब्रवीमि
अल' ं वा' अर इद' ं विज्ञा' नाय |
pM15/k14
य' त्र हि' द्वैत' मिव भ' वति,
K variato ordineH
त' दि' तर इ' तरं जिघ्रति,
त' दि' तर इ' तरं पश्यति
त' दि' तर इ' तरँ शृणोति,
त' दि' तर इ' तरमभि' वदति,
त' दि' तर इ' तरं मनुते,
त' दि' तर इ' तरं वि' जानाति |
pM16/k14
य' त्र त्व' स्य स' र्वमात्मै' वा' भूत्
kvariato ordineH
त' त्के' न क' ं पश्येत्
त' त्के' न क' ं जिघ्रेत्
त' त्के' न क' ँ शृणुयात्
त' त्के' न क' मभि' वदेत्
त' त्के' न क' ं मन्वीत,
त' त्के' न क' ं वि' जानीयाद् |
ये' नेद' ँ स' र्वं विजाना' ति,
त' ं के' न वि' जानीयाद्
विज्ञाता' रमरे के' न वि' जानीयादि' ति |
ch5
pMk1
इय' ं पृथिवी' स' र्वेषां भूता' नां म' धु
अस्यै' पृथिव्यै' स' र्वाणि भूता' नि म' धु;
य' श्चाय' मस्या' ं पृथिव्या' ं तेजोम' योऽमृतम' यः पु' रुषो,
य' स् चाय' मध्यात्म' ँ शारीर' स् तेजोम' योऽमृतम' यः पु' रुषो,
अय' मेव' स' यो' ऽय' मात्मे' द' ममृतम्
इद' ं ब्र' ह्म,
इद' ँ स' र्वम् |
pMk2
इमा' आ' पः स' र्वेषां भूता' नां म' धु
आसा' मपा' ँ स' र्वाणि भूता' नि म' धु;
य' श्चाय' मास्व' प्सु' तेजोम' योऽमृतम' यः पु' रुषो,
य' श्चाय' मध्यात्म' ँ रैतस' स् तेजोम' योऽमृतम' यः पु' रुषो,
अय' मेव' स' यो' ऽय' मात्मे' द' ममृतम्
इद' ं ब्र' ह्म,
इद' ँ स' र्वम् |
pMk3
अय' मग्नि' ः स' र्वेषां भूता' नां म' धु
अस्याग्ने' ः स' र्वाणि भूता' नि म' धु;
य' श्चाय' मस्मि' न्नग्नौ' तेजोम' योऽमृतम' यः पु' रुषो,
य' श्चाय' मध्यात्म' ं वाङ्म' यस् तेजोम' योऽमृतम' यः पु' रुषो,
अय' मेव' स' यो' ऽय' मात्मे' द' ममृतम्
इद' ं ब्र' ह्म,
इद' ँ स' र्वम् |
pM4/k10
अय' माकाश' ः स' र्वेषां भूता' नां म' धु
अस्याकाश' स्य स' र्वाणि भूता' नि म' धु;
य' श्चाय' मस्मि' न्नाकाशे' तेजोम' योऽमृतम' यः पु' रुषो,
य' श्चाय' मध्यात्म' ँ हृद्य् आकाश' स् तेजोम' योऽमृतम' यः पु' रुषो,
अय' मेव' स' यो' ऽय' मात्मे' द' ममृतम्
इद' ं ब्र' ह्मेद' ँ स' र्वम् |
pM5/k4
अय' ं वायु' ः स' र्वेषां भूता' नां म' धु
अस्य वायो' ः स' र्वाणि भूता' नि म' धु;
य' श्चाय' मस्मि' न्वायौ' तेजोम' योऽमृतम' यः पु' रुषो,
य' श्चाय' मध्यात्म' ं प्राण' स् तेजोम' योऽमृतम' यः पु' रुषो,
अय' मेव' स' यो' ऽय' मात्मे' द' ं अमृतम्
इद' ं ब्र' ह्मेद' ँ स' र्वम् |
pM6/k5
अय' मादित्य' ः स' र्वेषां भूता' नां म' धु
अस्यादित्य' स्य स' र्वाणि भूता' नि म' धु;
य' श्चाय' मस्मि' न्नादित्ये' तेजोम' योऽमृतम' यः पु' रुषो,
य' श्चाय' मध्यात्म' ं चाक्षुष' स् तेजोम' योऽमृतम' यः पु' रुषो,
अय' मेव' स' यो' ऽय' मात्मे' द' ममृतम्
इद' ं ब्र' ह्मेद' ँ स' र्वम् |
pMk7
अय' ं चन्द्र' ः स' र्वेषां भूता' नां म' धु
अस्य चन्द्र' स्य स' र्वाणि भूता' नि म' धु;
य' श्चाय' मस्मि' न्चन्द्रे' तेजोम' योऽमृतम' यः पु' रुषो,
य' श्चाय' मध्यात्म' ं मानस' स् तेजोम' योऽमृतम' यः पु' रुषो,
अय' मेव' स' यो' ऽय' मात्मे' द' ममृतम्
इद' ं ब्र' ह्मेद' ँ स' र्वम् |
pM8/k6
इमा' दि' शः स' र्वेषां भूता' नां म' धु
आसा' ं दिशा' ँ स' र्वाणि भूता' नि म' धु;
य' श्चाय' मासु' दिक्षु' तेजोम' योऽमृतम' यः पु' रुषो,
य' श्चाय' मध्यात्म' ँ श्रौत्र' ः प्रातिश्रुत्क' स् तेजोम' योऽमृतम' यः पु' रुषो,
अय' मेव' स' यो' ऽय' मात्मे' द' ममृतम्
इद' ं ब्र' ह्मेद' ँ स' र्वम् |
pM9/k8
इय' ं विद्यु' त्स' र्वेषां भूता' नं म' धु
अस्यै' विद्यु' तः स' र्वाणि भूता' नि म' धु;
य' श्चाय' मस्या' ं विद्यु' ति तेजोम' योऽमृतम' यः पु' रुषो,
य' श्चाय' मध्यात्म' ं तैजस' स् तेजोम' योऽमृतम' यः पु' रुषो,
अय' मेव' स' यो' ऽय' मात्मे' द' ममृतम्
इद' ं ब्र' ह्मेद' ँ स' र्वम् |
pM10/k9
अय' ँ स्तनयित्नु' ः स' र्वेषां भुता' नां म' धु
अस्य स्तनयित्नो' ः स' र्वाणि भूता' नि म' धु;
य' श्चाय' मस्मि' न्त्स्तनयित्नौ' तेजोम' योऽमृतम' यः पु' रुषो,
य' श्चाय' मध्यात्म' ँ शाब्द' ः सौवर' स् तेजोम' योऽमृतम' यः पु' रुषो,
अय' मेव' स' यो' ऽय' मात्मे' द' ममृतम्
इद' ं ब्र' ह्मेद' ँ स' र्वम् |
pMk11
अय' ं धर्म' ः स' र्वेषां भूता' नां म' धु
अस्य धर्म' स्य स' र्वाणि भूता' नि म' धु;
य' श्चाय' मस्मि' न्धर्मे' तेजोम' योऽमृतम' यः पु' रुषो,
य' श्चाय' मध्यात्म' ं धार्म' स् तेजोम' योऽमृतम' यः पु' रुषो,
अय' मेव' स' यो' ऽय' मात्मे' द' ममृतम्
इद' ं ब्र' ह्मेद' ँ स' र्वम् |
pMk12
इद' ँ सत्य' ँ स' र्वेषां भूता' नां म' धु
अस्य सत्य' स्य स' र्वाणि भूता' नि म' धु;
य' श्चाय' मस्मि' न्त्सत्ये' तेजोम' योऽमृतम' यः पु' रुषो,
य' श्चाय' मध्यात्म' ँ सात्य' स् तेजोम' योऽमृतम' यः पु' रुषो,
अय' मेव' स' यो' ऽय' मात्मे' द' ममृतम्
इद' ं ब्र' ह्मेद' ँ स' र्वम् |
pMk13
इद' ं मानुष' ँ स' र्वेषां भूता' नां म' धु
अस्य मानुष' स्य स' र्वाणि भूता' नि म' धु;
य' श्चाय' मस्मि' न्मानुषे' तेजोम' योऽमृतम' यः पु' रुषो,
य' श्चाय' मध्यात्म' ं मानुष' स् तेजोम' योऽमृतम' यः पु' रुषो,
अय' मेव' स' यो' ऽय' मात्मे' द' ममृतम्
इद' ं ब्र' ह्मेद' ँ स' र्वम् |
pMk14
अय' मात्मा' स' र्वेषां भूता' नां म' धु
अस्यात्म' नः स' र्वाणि भूता' नि म' धु;
य' श्चाय' मस्मि' न्नात्म' नि तेजोम' योऽमृतम' यः पु' रुषो,
य' श्चाय' मात्मा' तेजोम' योऽमृतम' यः पु' रुषो,
अय' मेव' स' यो' ऽय' मात्मे' द' ममृतम्
इद' ं ब्र' ह्मेद' ँ स' र्वम् |
pMk15
स' वा' अय' मात्मा' स' र्वेषां अ' धिपतिः,
स' र्वेषां भूता' नाँ रा' जा |
त' द्य' था रथनाभौ' च रथनेमौ' चा' राः स' र्वे स' मर्पिता,
एव' मेवा' स्मि' न्नात्म' नि स' र्वाणि भूता' नि स' र्वे देवा' ः स' र्वे लोका' ः स' र्वे प्राणा' ः स' र्व एत' आत्मा' नः स' मर्पिताः |
pMk16
इद' ं वै' त' न्म' धु डध्य' ङ्ङ् अथर्वणो' ऽश्वि' भ्यामुवाच |
त' देत' दृषिः प' श्यन्नवोचत्
lv 1.116.12:
त' द्वां,
नरा,
सन' ये द' ँस उग्र' म्
आवि' ष् कृणोमि,
तन्यतु' र्न' वृष्टि' ं,
डध्य' ङ् ह य' न्म' ध्व् अथर्वणो' वाम्
अ' श्वस्य शीर्ष्णा' प्र' य' दीमुवा' चे' ति |
pMk17
इद' ं वै' त' न्म' धु डध्य' ङ्ङ् अथर्वणो' ऽश्वि' भ्यामुवाच |
त' देत' दृषिः प' श्यन्नवोचत्
lv 1.117.22:
अथर्वणा' याश्विना डधीचे' ऽश्व्यँ शि' रः प्र' त्यैरयतं;
स' वां म' धु प्र' वोचदृताय' न्
त्वाष्ट्र' ं य' द्
दस्राउ
अपिकक्ष्य' ं वामि' ति |
pMk18
इद' ं वै' त' न्म' धु डध्य' ङ्ङ् अथर्वणो' ऽश्वि' भ्यामुवाच |
त' देत' दृषिः प' श्यन्नवोचत्
पु' रश्चक्रे द्विप' दः,
पु' रश्चक्रे च' तुष्पदः;
पु' रः स' ,
पक्षी' भुत्वा' ,
पु' रः पु' रुष आ' विशदि' ति |
स' वा' अय' ं पु' रुषः स' र्वासु पूर्षु' पुरिशयो' ;
नै' नेन कि' ं चना' नावृतं,
नै' नेन कि' ं चना' सम्वृतम् |
pMk19
इद' ं वै' त' न्म' धु डध्य' ङ्ङ् अथर्वणो' ऽश्वि' भ्यामुवाच |
त' देत' दृषिः प' श्यन्नवोचत्
lv 6.47.18:
रूप' ँ-रूपं प्र' तिरूपो बभूव,
त' दस्य रूप' ं प्रतिच' क्षणाये' -
-न्द्रो माया' भिः पुरुरू' प ईयते,
युक्ता' ह्य' स्य ह' रयः शता' द' शे' ति |
अय' ं वै' ह' रयो,
अय' ं वै' दश च सह' स्रणि बहू' नि चानन्ता' नि च |
त' देत' द्ब्र' ह्मापूर्व' मनपर' मनन्तर' मबाह्य' म्
अय' मात्मा' ब्र' ह्म स' र्वानुभूः |
इ' त्यनुशा' सनम् |
[पनुस्तुब्]
pM20
pro m5,20-22 schribitkrishna 6; vide infra
अ' थ वँश' ः |
त' दिद' ं वय' ँ
हौ' र्पणाय्याच्,
छौ' र्पणय्यो गौ' तमाद्
गौ' तमो व' त्स्याद्
व' त्स्यो वा' त्स्याच्च पाराशर्या' च्च,
पा' राशर्यः षा' ंक्त्याच्च भा' रद्वाजाच्च,
भा' रद्वाज औदावहे' श्च हा' ण्डिल्याच्च,
हा' ण्डिल्यो वै' जवापाच्च गौतमा' च्च,
गौ' तमो वै' जवापायनाच्च वैष्टपुरेया' च्च,
वै' ष्टपुरेयः हा' ण्डिल्याच्च ऱौहिणायना' च्च,
ऱौ' हिणायनः हौ' नकाच्चात्रेया' च्च ऱैभ्या' च्च,
ऱै' भ्यः पौ' तिमाष्यायणाच्च कौण्डिन्यायना' च्च,
कौ' ण्डिन्यायनः कौ' ण्डिन्यात्
कौ' ण्डिन्यः कौ' ण्डिन्यात्
कौ' ण्डिन्यः कौण्डिन्या' च्चाग्निवेश्या' च्च,
pM21
pro m5,20-22 schribitkrishna 6; vide infra
अग्निवेश्य' ः षौ' तवात्
षौ' तवः पा' राशर्यात्
पा' राशर्यः जा' तुकर्ण्यात्
जा' तुकर्ण्यो भा' रद्वाजाद्
भा' रद्वाजो भारद्वाजा' च्चासुरायणा' च्च गौतमा' च्च,
गौ' तमो भा' रद्वाजाद्
भा' रद्वाजो वैजवापायना' च्,
वै' जवापायनः कशिकायने' ः,
कशिकायनि' र्घृतकौशिका' द्
घृतकौशिक' ः पा' राशर्यात्
पा' राशर्यः पा' राशर्यात्
पा' राशर्यः जा' तुकर्ण्यात्
जा' तुकर्ण्यो भा' रद्वाजाद्
भा' रद्वाजो भारद्वाजा' च्चासुरायणा' च्यस्का' च्च,
असुरायण' स् ट्रै' वणेः
ट्रै' वणिराउ' पजन्धनेः
आउ' पजन्धनिःअसुरेः
असुरिर्भा' रद्वाजाद्
भा' रद्वाजो अत्रेया' त्
pM22
pro m5,20-22 schribitkrishna 6; vide infra
अत्रेयो' मा' ण्टेः,
मा' ण्टिर्गौ' तमाद्
गौ' तमो गौ' तमाद्
गौ' तमो वा' त्स्याद्
वा' त्स्यः हा' ण्डिल्याच्,
छा' ण्डिल्यः कै' शोर्यात्का' प्यात्
कै' शोर्यः का' प्यः कुमारहरिता' त्
कुमारहरितो' गालवा' द्
गालवो' विदर्भीकौण्डिन्या' द्
विदर्भीकौण्डिन्यो' बा' भवाद्वत्सनपा' द्
बा' भवः पथ' ः षौ' भरात्
प' न्थाः षौ' भरोऽया' स्यादङ्गिरसा' द्
आया' स्यो अङ्गिरस' ऽभुतेस् ट्वा' ष्ट्राद्
अभुतिः ट्वा' ष्ट्रो विश्व' रूपाद्ट्वा' ष्ट्राद्
विश्व' रूपस् ट्वा' ष्ट्रोऽश्वि' भ्याम्
आश्वि' नौ डधि' च अथर्वना' द्
डध्य' ङ्ङ् अथर्वनो' ऽथर्वनो डै' वाद्
अथर्वा डै' व मृत्यो' ः प्राद्ध' ँसनान्
मृत्यु' ः प्राद्ध' ँसनः ष' नगात्
ष' नगः परेष्टि' णः
परेष्टी' ब्र' ह्मनो
ब्र' ह्म स्व' यंभु,
ब्र' ह्मणे न' मः |
chk6
schribitkrishna pro m5,20-22; vide supra
pk1
अथ वँशः
पशुतिमाष्यो गौपवनाद्
गौपवनः पशुतिमाष्यात्
पशुतिमाष्यो गौपवनाद्
गौपवनः कौशिकात्
कौशिकः कौण्डिन्यात्
कौण्डिन्यः हाण्डिल्यात्
हाण्डिल्यः कौशिकाच्च गौतमाच्च,
गौतमो
pk2
अग्निवेश्याद्
अग्निवेश्यः हाण्डिल्याच्चानभिम्लाताच्च,
अनभिम्लात अनभिम्लाताद्
अनभिम्लात अनभिम्लाताद्
अनभिम्लातो गौतमाद्
गौतमः षैतवप्राचीनयोग्याभ्याँ,
षैतवप्राचीनयोग्यौ पाराशर्यात्
पाराशर्यो भारद्वाजाद्
भारद्वाजो भारद्वाजाच्च गौतमाच्च,
गौतमो भारद्वाजाद्
भारद्वाजः पाराशर्यात्
पाराशर्यो वैजवापायनाद्
वैजवापायनः कौशिकायनेः,
कौशिकायनिर्
pk3
घृतकौशिकाद्
घृतकौशिकः प्राशर्यायणात्
पारशर्यायणः पाराशर्यात्
पाराशर्यो जातूकर्ण्यात्
जातूकर्ण्य असुरायणाच्च यास्काच्च,
असुरायणस् ट्रैवणेः,
ट्रैवणिरौपजन्धनेः,
औपजन्धनिरसुरेः,
असुरिर्भारद्वाजाद्
भारद्वाज अत्रेयाद्
अत्रेयो माण्टेः,
माण्टिर्गौतमाद्
गौतमो वात्स्याद्
वात्स्यः हाण्डिल्याच्,
छाण्डिल्यः कैशोर्यात्काप्यात्
कैशोर्यः काप्यः कुमारहारितात्
कुमारहारितो गालवाद्
गालवो विदर्भीकौण्डिन्याद्
विदर्भीकौण्डिन्यो वत्सनपातो बाभ्रवाद्
वत्सनपाद्बाभ्रवः पथः षौभरात्
पन्थाः षौभरोऽयास्यादङ्गिरसाद्
आयास्य अङ्गिरस अभूतेस् ट्वाष्ट्राद्
अभूतिस् ट्वाष्ट्रो विश्वरूपात्ट्वाष्ट्राद्
विश्वरूपस् ट्वाष्ट्रोऽव्शि' भ्याम्
आश्वि' नौ डधीच अथर्वणाद्
डध्यङ्ङ् अथर्वणोऽथर्वणो डैवाद्
आथर्वा डैवो मृत्योः प्राध्वँसनान्
मृत्यु' ः प्राध्वँसनः प्रध्वँसनात्
प्रध्वँसन एकर्षेः
एकर्षिर्विप्रचित्तेः
विप्रचित्तिर्व्यष्टेः
व्यष्टिः षनारोः,
षनारुः षनातनात्
षनातनः षनगात्
षनगः परमेष्ठिनः,
परमेष्ठी ब्रह्मणो;
ब्रह्म स्वयंभु,
ब्रह्मणे नमः |
[प्नोर्मल्]
ch3 = hbM 14.6. = hbk16.6.
ch1
pMk1
जनको' ह वै' देहो बहुदक्षिणे' न यज्ञे' नेजे |
त' त्र ह कुरुपङ्चाला' नां ब्राह्मणा' अभिस' मेता बभूवुः |
त' स्य ह जनक' स्य वै' देहस्य विजिज्ञा' सा
Ai.gH II 2, paH 142a[Tgrx16]AH +vijiGYAsA\`
बभूवः
क' ः स्विदेषा' ं ब्राह्मणा' नामनूचान' तम इ' ति |
pM2/k1
स' ह ग' वाँ सह' स्रम' वरुरोध;
द' श-दश पा' दा ए' कैकस्याः शृङ्गयोरा' बद्धा बभूवुः |
pM2/k2
ता' न्होवाचः
ब्रा' ह्मणा भगवन्तो,
यो' वो ब्र' ह्मिष्ठः,
स' एता' गा' उ' दजतामि' ति |
ते' ह ब्राह्मणा' न' दधृषुः |
pM3/k2
अ' थ ह या' ज्ञवल्क्यः स्व' मेव' ब्रह्मचारि' णमुवाचैता' ः,
सौम्यो' दज,
षामश्रवा३ इ' ति |
ता' होदा' चकार |
ते' ह ब्राह्मणा' श्चुक्रुधुः
कथ' ं नु' नो ब्र' ह्मिष्ठो ब्रुवीते' ति |
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अ' थ ह जनक' स्य वै' देहस्य हो' ताश्वलो' बभूव |
स' हैनं पप्रच्छः
त्व' ं नु' ख' लु नो,
याज्ञवल्क्य,
ब्र' ह्मिष्ठोऽसी३ इ' ति |
स' होवाचः
न' मो वय' ं ब्र' ह्मिष्ठाय कुर्मो;
गो' कामा एव' वय' ँ स्म इ' ति |
त' ँ ह त' त एव' प्र' ष्टुं दध्रे हो' ताश्वल' ः
pM5/k3
या' ज्ञवल्क्ये' ति होवाच,
य' दिद' ँ स' र्वं मृत्यु' नाप्त' ँ,
स' र्वं मृत्यु' नाभि' पन्नं,
के' न य' जमानो मृत्यो' रा' प्तिम' तिमुच्यत इ' ति |
हो' त्रर्त्वि' जाग्नि' ना वाचा' ;
वा' ग्वै' यज्ञ' स्य हो' ता |
त' द्ये' य' ं वा' क्सो' ऽय' मग्नि' ः स' हो' ता सा' मु' क्तिः सा' तिमुक्तिः |
pM6/k4
या' ज्ञवल्क्ये' ति होवाच,
य' दिद' ँ स' र्वमहोरात्रा' भ्यामाप्त' ँ,
स' र्वमहोरात्रा' भ्यामभि' पन्नं,
के' न य' जमानोऽहोरात्र' योरा' प्तिम' तिमुच्यत इ' ति |
अध्वर्यु' णर्त्वि' जा च' क्षुषादित्ये' न;
च' क्षुर्वै' यज्ञ' स्याध्वर्यु' ः |
त' द्य' दिद' ं च' क्षुः,
सो' ऽसा' वादित्य' ः;
सो' ऽध्वर्यु' ः सा' मु' क्तिः सा' तिमुक्तिः |
pM7/k5
या' ज्ञवल्क्ये' ति होवाच,
य' दिद' ँ स' र्वं पूर्वपक्षापरपक्षा' भ्यामाप्त' ँ,
स' र्वं पूर्वपक्षापरपक्षा' भ्यामभि' पन्नं,
के' न य' जमानः पूर्वपक्षापरपक्ष' योरा' प्तिम' तिमुच्यत इ' ति |
ब्रह्म' णर्त्वि' जा म' नसा चन्द्रे' ण;
म' नो वै' यज्ञ' स्य ब्रह्मा' |
त' द्य' दिद' ं म' नः,
सो' ऽसौ' चन्द्र' ः स' ब्रह्मा' सा' मु' क्तिः सा' तिमुक्तिः |
pM8/k6
या' ज्ञवल्क्ये' ति होवाच,
य' दिद' मन्त' रिक्षमनारम्बण' मिव;
के' नाक्रमे' ण य' जमानः स्वर्ग' ं लोक' मा' क्रमत इ' ति |
उद्गात्र' र्त्वि' जा वयु' ना प्राणे' न;
प्राणो' वै' यज्ञ' स्योद्गाता' |
त' द्यो' ऽय' ं प्राण' ः स' वायु' ः स' उद्गाता' सा' मु' क्तिः सा' तिमुक्तिः |
इ' त्य' तिमोक्षा,
अ' थ संप' दः |
pM9/k7
या' ज्ञवल्क्ये' ति होवाच,
क' तिभिरय' मद्य' र्ग्भि' र्हो' तास्मि' न्यज्ञे' करिष्यती' ति |
तिसृभिरि' ति |
कतमा' स् ता' स् ति' स्र इ' ति |
पुरोनुवाक्या' च याज्या' च श' स्यैव' तृती' या |
कि' ं ता' भिर्जयती' ति |
पृथिवीलोक' मेव' पुरोनुवाक्य' या ज' यति
अन्तरिक्षलोक' ं याज्य' या,
द्यौर्लोक' ँ श' स्यया
pM10/k8
या' ज्ञवल्क्ये' ति होवाच,
क' त्यय' मद्या' ध्वर्यु' रस्मि' न्यज्ञ' आ' हुतीर्होष्यती' ति |
तिस्र' इ' ति |
कतमा' स् ता' स् ति' स्र इ' ति |
या' हुता' उज्ज्व' लन्ति,
या' हुता' अतिने' दन्ति,
या' हुता' अधिशे' रते |
कि' ं ता' भिर्जयती' ति |
या' हुता' उज्ज्व' लन्ति,
देवलोक' मेव' ता' भिर्जयतिः
दी' प्यत इव हि' देवलोको' |
या' हुता' अतिने' दन्ति,
मनुष्यलोक' म्
K pitR\^ilokam
एव' ता' भिर्जयति
अ' तीव हि' मनुष्यलोको'
K pitR\^iloko
या' हुता' अधिशे' रते,
पितृलोक' म्
K manushhyalokam
एव' ता' भिर्जयति
अध' इव हि' पितृलोक' ः
K manushhyaloka\`H
pM11/k9
या' ज्ञवल्क्ये' ति होवाच,
क' तिभिरय' मद्य' ब्रह्मा' यज्ञ' ं दक्षिणतो' देव' ताभिर्गोपायिष्य' ती' त्य्
K gopAyatIty
ए' कये' ति |
कतमा' सै' के' ति |
म' न एवे' ति |
अनन्त' ं वै' म' नो,
अनन्ता' वि' श्वे देवा' |
अनन्त' मेव' स' ते' न लोक' ं जयति |
pM12/k10
या' ज्ञवल्क्ये' ति होवाच,
क' त्यय' मद्यो' द्गाता' स्मि' न्यज्ञे' स्तोत्रि' याः स्तोष्यती' ति |
तिस्र' इ' ति |
कतमा' स् ता' स् ति' स्र इ' ति |
पुरोनुवाक्या' च याज्या' च श' स्यैव' तृती' याधिदेवत' म्
अ' थाध्यत्म' ं
K om. adhidevatam...
कतमा' स् ता' या' अध्यात्म' मि' ति |
प्राण' एव' पुरोनुवाक्या' पानो' याज्या' ,
व्यान' ः श' स्या |
कि' ं ता' भिर्जयती' ति |
य' त्कि' ङ्चेद' ं प्राणभृदि' ति
kpro ya\`t...
schribitpR\^ithivIlokameva puronuvAkyayA jayati
त' तो ह हो' ताश्वल' उ' परराम |
ch2
pMk1
अ' थ हैनं जारत्कारव' आ' र्तभागः पप्रच्छ |
या' ज्ञवल्क्ये' ति होवाच,
क' ति ग्र' हाः,
क' त्यतिग्रहा' इ' ति |
अष्टौ' ग्र' हा,
अष्टा' वतिग्रहा' इ' ति |
ये' ते' ऽष्टौ' ग्र' हा,
अष्टा' वतिग्रहा' ः,
कतमे' त' इ' ति |
pMk2
प्राणो' वै' ग्र' हः |
सो' ऽपाने' नातिग्रहे' ण
K sa gandhenAtigraheNa
गृहीतो' |
अपाने' न
K prANena
हि' गन्धा' ङ्जि' घ्रति |
pM3/k4
जिह्वा' वै' ग्र' हः |
स' र' सेनातिग्रहे' ण गृहीतो' ;
जिह्व' या हि' र' सान्विजाना' ति |
pM4/k3
वा' ग्वै' ग्र' हः |
स' ना' म्नातिग्रहे' ण गृहीतो' ;
वाचा' हि' ना' मान्यभिव' दति |
pMk5
च' क्षुर्वै' ग्र' हः |
स' रूपे' णातिग्रहे' ण गृहीत' श्;
च' क्षुषा हि' रूपा' णि प' श्यति |
pMk6
श्रो' त्रं वै' ग्र' हः |
स' श' ब्देनातिग्रहे' ण गृहीत' ः;
श्रो' त्रेण हि' श' ब्दाङ्छृणो' ति |
pMk7
म' नो वै' ग्र' हः |
स' का' मेनातिग्रहे' ण गृहीतो' ;
म' नसा हि' का' मान्काम' यते |
pMk8
ह' स्तौ वै' ग्र' हः |
स' क' र्मणातिग्रहे' ण गृहीतो' ;
ह' स्ताभ्याँ हि' क' र्म करो' ति |
pMk9
त्व' ग्वै' ग्र' हः |
स' स्प' र्शेनातिग्रहे' ण गृहीत' स्;
त्वचा' हि' स्प' र्शान्वेद' यत |
इ' त्यष्टौ' ग्र' हा,
अष्टा' वतिग्रहा' ः |
pMk10
या' ज्ञवल्क्ये' ति होवाच,
य' दिद' ँ स' र्वं मृत्यो' र' न्नं,
का' स्वित्सा' देव' ता,
य' स्या मृत्यु' र' न्नमि' ति |
अग्नि' र्वै' मृत्यु' ः,
सो' ऽपा' म' न्नम्
अ' प पुनर्मृत्यु' ं जयति |
pM11/k12
या' ज्ञवल्क्ये' ति होवाच,
य' त्राय' ं पु' रुषो म्रिय' ते,
कि' मेनं न' जहाती' ति |
ना' मे' ति
अनन्त' ं वै' ना' मानन्ता' वि' श्वे देवा' ;
अनन्त' मेव' स' ते' न लोक' ं जयति |
pM12/k11
या' ज्ञवल्क्ये' ति होवाच,
य' त्राय' ं पु' रुषो म्रिय' त,
उ' दस्मा' त्प्राणा' ः क्रामन्ति
आ' हो ने' ति |
ने' ति होवाच या' ज्ञवल्क्यो' ,
अत्रैव' सम' वनीयन्ते,
स' उ' च्छ्वयति
आ' ध्मायति
आ' ध्मातो मृत' ः शेते |
pMk13
या' ज्ञवल्क्ये' ति होवाच,
य' त्रास्य पु' रुषस्य मृत' स्याग्नि' ं वा' गप्ये' ति,
वा' तं प्राण' श्,
च' क्षुरादित्य' ं,
म' नश्चन्द्र' ं,
दि' शः श्रो' त्रं,
पृथिवी' ँ श' रीरम्
आकाश' मात्मौ' षधीर्लो' मानि,
व' नस्प' तीन्के' शा,
अप्सु' लो' हितं च रे' तश्च निधी' यते,
क्वा' य' ं तदा' पु' रुषो भवती' ति |
आ' हर,
सौम्य,
ह' स्तम् |
pM14/k13
आ' र्तभागे' ति होवाचावा' म्
K om. iti hovAcha
एवै' त' द्
kevaitasya
वेदिष्या' वो;
न' नावेत' त्सजन' इ' ति |
तौ' होत्क्र' म्य मन्त्रया' ं चक्रतुस्
K chakrAte
तौ' ह य' दूच' तुः,
क' र्म हैव' त' दूचतुः
अ' थ ह य' त्प्रशँस' तुः,
क' र्म हैव' त' त्प्र' शँसतुः
पु' ण्यो वै' पु' ण्येन क' र्मणा भवति,
पा' पः पा' पेने' ति |
त' तो ह जारत्कारव' आ' र्तभाग उ' परराम |
ch3
pMk1
अ' थ हैनं भुज्यु' र्ला' ह्यायनिः पप्रच्छ |
या' ज्ञवल्क्ये' ति होवाच,
मद्रे' षु च' रकाः प' र्यव्रजाम;
ते' पत' ङ्चलस्य का' प्यस्य गृहा' नै' म |
त' स्यासीद्दुहिता' गन्धर्व' गृहीता;
त' मपृच्छामः
को' ऽसी' ति |
सो' ऽब्रवीत्
षुधन्वा' ङ्गिरस' इ' ति |
त' ं यदा' लोका' नाम' न्तान' पृच्छामा' थैत' द्
K athainam
अब्रूमः
क्व' पारिक्षिता' अभवन्नि' ति |
क्व' पारिक्षिता' अभवन्नि' ति |
kabhavant.
त' त्
K sa
त्वा पृच्छामि,
याज्ञवल्क्यः
क्व' पारिक्षिता' अभवन्नि' ति |
pMk2
स' होवाचोवा' च वै' स' त' द्
अगच्छन्वै' ते' त' त्र,
य' त्राश्वमेधयाजि' नो ग' च्छन्ती' ति |
क्व' न्व' श्वमेधयाजि' नो गच्छन्ती' ति |
द्वा' त्रिँशत वै' देवरथाह्न्या' न्यय' ं लोक' स्;
त' ँ समन्त' ं लोक' ं द्विस्ता' वत्पृथिवी'
K samantaM pR\^ithivI dvistAvat
प' र्येति;
ता' ँ
K tA.N samantaM
पृथिवी' ं द्विस्ता' वत्समुद्र' ः प' र्येति |
त' द्या' वती क्षुर' स्य धा' रा,
या' वद्वा म' क्षिकायाः प' त्त्रं,
ता' वान' न्तरेणाकाश' ः |
ता' न्९न्द्रः सुपर्णो' भूत्वा' वाय' वे प्रा' यच्छत्;
ता' न्वायु' रात्म' नि धित्वा' त' त्रागमयद्य' त्र परिक्षिता'
K ashvamedhayAjino
अ' भवन्नि' ति |
एव' मिव वै' स' वायु' मेव' प्र' शशँस;
त' स्माद्वायु' रेव' व्य' ष्टिः
वायु' ः स' मष्टिः |
अ' प पुनर्मृत्यु' ं जयति,
स' र्वमा' युरेति
K om. sarvamAyureti
य' एव' ं वे' द |
त' तो ह भुज्यु' र्ला' ह्यायनिरु' परराम |
chM4/k5
pMk1
अ' थ हैनं कहो' डः
K kaholaH
कौ' षीतकेयः पप्रच्छः
या' ज्ञवल्क्ये' ति होवाच,
य' द्
K add. eva
साक्षा' द' परोक्षाद्ब्र' ह्म य' आत्मा' सर्वान्तर' ः
त' ं मे व्या' चक्ष्वे' ति |
एष' त आत्मा' सर्वान्तर' ः |
कतमो' ,
याज्ञवल्क्य,
सर्वान्तरो' |
यो' ऽशनाया' पिपासे' शो' कं मो' हं जरा' ं मृत्यु' मत्ये' ति |
एत' ं वै' त' मात्मा' नं विदित्वा' ,
ब्राह्मणा' ः पुत्रैषणा' याश्च वित्तैषणा' याश्च लोकैषणा' याश्च व्युत्था' या' थ भिक्षाच' र्यं चरन्ति |
या' ह्य् ए' व' पुत्रैषणा' सा' वित्तैषणा' ,
या' वित्तैषणा' सा' लोकैषणो' भे' ह्य् ए' ते' ए' षणे एव' भ' वतः |
त' स्माद्पण्डित' ः
K brAmaNaH
पा' ण्डित्यं निर्वि' द्य,
बा' ल्येन तिष्ठा' सेद्;
बा' ल्यं च पा' ण्डित्यं च निर्वि' द्या' थ मुनि' ः
अमौन' ं च मौन' ं च निर्वि' द्या' थ ब्राह्मण' ः |
स' ब्राह्मण' ः के' न स्याद् |
ये' न स्या' त्
ते' नेदृश एव' भवति,
य' एव' ं वे' द
K evAto.anyadArtaM
त' तो ह कहो' डः
K kaholaH
कौ' षीतकेय उ' परराम |
chM5/k4
pMk1
अ' थ हैनमूषस्त' श्चा' क्रायणः पप्रच्छ |
या' ज्ञवल्क्ये' ति होवाच,
य' त्साक्षा' द' परोक्षाद्ब्र' ह्म य' आत्मा' सर्वान्तर' ः
त' ं मे व्या' चक्ष्वे' ति |
एष' त आत्मा' सर्वान्तर' ः |
कतमो' ,
याज्ञवल्क्य,
सर्वान्तरो' |
य' ः प्राणे' न प्रा' णिति,
स' त आत्मा' सर्वान्तरो' ;
यो' ऽपाने' नापा' निति,
स' त आत्मा' सर्वान्तरो' ;
यो' व्याने' न व्य' निति,
स' त आत्मा' सर्वान्तरो' ;
य' उदाने' नोद' निति,
स' त आत्मा' सर्वान्तरो' |
य' ः समाने' न सम' निति,
स' त आत्मा' सर्वन्तर' .
K om. yaH ...
एष' त आत्मा' सर्वान्तर' ः |
pM1/k2
स' होवाचोषस्त' श्चा' क्रायणोः
य' था वै' ब्रूया' दसौ' गौ' ः
असा' व' श्व इ' ति
एव' मेवै' त' द्व्य' पदिष्टं भवति |
य' देव' साक्षा' द' परोक्षाद्ब्र' ह्म य' आत्मा' सर्वान्तर' ः
त' ं मे व्या' चक्ष्वे' ति |
एष' त आत्मा' सर्वान्तर' ः |
कतमो' ,
याज्ञवल्क्य,
सर्वान्तरो' |
न' दृष्टेर्द्रष्टा' रं पश्येः
न' श्रु' तेः श्रोता' रँ शृणुया;
न' मते' र्मन्ता' रं मन्वीथा,
न' वि' ज्ञातेर्विज्ञाता' रं वि' जानीया |
एष' त आत्मा' सर्वान्तरो' |
अतोऽन्य' दा' र्तं |
त' तो होषस्त' श्चा' क्रायण उ' परराम |
ch6
pMk1
अ' थ हैनं गा' र्गी वाचक्न' वी पप्रच्छः
या' ज्ञवल्क्ये' ति होवाच,
य' दिद' ँ स' र्वमप्स्वो' तं च प्रो' तं च,
क' स्मिन्नु'
K nu khalv
आ' प ओ' ताश्च प्रो' ताश्चे' ति |
वायौ' ,
गार्गी' ति |
क' स्मिन्नु'
K nu khalu
वायु' रो' तश्च प्रो' तश्चे' ति |
आकाश' एव'
K antarikshalokeshhu
गार्गी' ति |
क' स्मिन्न्वा' काश'
K nu khalvantarikshalokA\`
ओ' तश्च प्रो' तश्चे' ति |
अन्तरिक्षलोके' षु
K gandharvalokeshhu
गार्गी' ति |
क' स्मिन्नु' ख' ल्वन्तरिक्षलोका'
K gandharvalokA
ओ' ताश्च प्रो' ताश्चे' ति |
द्यौर्लोके' षु,
गार्गी' ति |
क' स्मिन्नु' ख' लु द्यौर्लोका' ओ' ताश्च प्रो' ताश्चे' त्य्
K om. dyaurlokeshhu ...
अदित्यलोके' षु,
गार्गी' ति |
क' स्मिन्नु' ख' ल्वादित्यलोका' ओ' ताश्च प्रो' ताश्चे' ति |
चन्द्रलोके' षु,
गार्गी' ति |
क' स्मिन्नु' ख' लु चन्द्रलोका' ओ' ताश्च प्रो' ताश्चे' ति |
नक्षत्रलोके' षु,
गार्गी' ति |
क' स्मिन्नु' ख' लु नक्षत्रलोका' ओ' ताश्च प्रो' ताश्चे' ति |
देवलोके' षु,
गार्गी' ति |
क' स्मिन्नु' ख' लु देवलोका' ओ' ताश्च प्रो' ताश्चे' ति |
गन्धर्वलोके' षु
K indralokeshhu
गार्गी' ति |
क' स्मिन्नु' ख' ल्व् गन्धर्वलोका'
K indralokA
ओ' ताश्च प्रो' ताश्चे' ति |
प्रजापतिलोके' षु,
गार्गी' ति |
क' स्मिन्नु' ख' लु प्रजापतिलोका' ओ' ताश्च प्रो' ताश्चे' ति |
ब्रह्मलोके' षु,
गार्गी' ति |
क' स्मिन्नु' ख' लु ब्रह्मलोका' ओ' ताश्च प्रो' ताश्चे' ति |
स' होवाचः
गा' र्गि,
मा' तिप्राक्षीः
मा' ते मूर्धा' व्य' पप्तद्
K vipaptad
अनतिप्रश्न्या' ं वै' देव' ताम' तिपृच्छसि |
गा' र्गि,
मा' तिप्राक्षीरि' ति |
त' तो ह गा' र्गी वाचक्न' व्य् उ' परराम |
chM7
K ex parte aliteH vide infra
pMk1
अ' थैनमूद्दा' लक आ' रुणिः पप्रच्छः
या' ज्ञवल्क्ये' ति होवाच,
मद्रे' ष्ववसाम पतङ्चल' स्य का' प्यस्य गृहे' षु,
यज्ञ' मधीयाना' ः |
त' स्यासीद्भार्या' गन्धर्व' गृहीता |
त' मपृच्छामः
को' ऽसी' ति |
सो' ऽब्रवीत्
कब' न्ध अथर्वण' इ' ति |
pM2/k1
सो' ऽब्रवीत्पतङ्चल' ं का' प्यं याज्ञिका' ँश्चः
वे' त्थ नु' त्व' ं,
काप्य,
त' त्सू' त्रं य' स्मिन्नय' ं च लोक' ः प' रश्च लोक' ः स' र्वाणि च भूता' नि स' ंदृब्धानि भवन्ती' ति |
सो' ऽब्रवीत्पतङ्चल' ः का' प्योः
ना' ह' ं त' द्
भगवन्
वेदे' ति |
pM3/k1
सो' ऽब्रवीत्पतङ्चल' ं का' प्यं याज्ञिका' ँश्चः
वे' त्थ नु' त्व' ं,
काप्य,
त' मन्तर्यामि' णं,
य' इम' ं च लोक' ं प' रं च लोक' ँ स' र्वाणि च भूता' न्य' न्तरो यम' यती' ति |
सो' ऽब्रवीत्पतङ्चल' ः का' प्योः
ना' ह' ं त' ं,
भगवन्
वेदे' ति |
pM4/k1
सो' ऽब्रवीत्पतङ्चल' ं का' प्यं याज्ञिका' ँश्चः
यो' वै' त' त्
काप्य,
सू' त्रं विद्या' त्त' ं चान्तर्यामि' णँ,
स' ब्रह्मवि' त्
स' लोकवि' त्
स' देववि' त्
स' वेदवि' त्
स' यज्ञवि' त्
K om.
स' भूतवि' त्
स' आत्मवि' त्
स' सर्ववि' दि' ति ते' भ्योऽब्रवीत् |
त' दह' ं वेद |
त' च्चे' त्त्व' ं,
याज्ञवल्क्य,
सू' त्रम' विद्वाँस् त' ं चान्तर्यामि' णं ब्रह्मगवी' रुद' जसे,
मूर्धा' ते वि' पतिष्यती' ति |
pM5/k1
वे' द वा' अह' ं,
गौतम,
त' त्सू' त्रं त' ं चान्तर्यामि' णमि' ति |
यो' वा' इद' ं क' श्च ब्रूया' द्
वे' द वेदे' ति |
य' था वे' त्थ,
त' था ब्रूही' ति |
pM6/k2
K sa hovachaH
वायु' र्वै' ,
गौतम,
त' त्सू' त्रं;
वायु' ना वै' ,
गौतम,
सू' त्रेणाय' ं च लोक' ः प' रश्च लोक' ः स' र्वाणि च भूता' नि स' ंदृब्धानि भवन्ति |
त' स्माद्वै' ,
गौतम,
पु' रुषं प्रे' तमाहुः
व्य' स्रँसिषतास्या' ङ्गानी' ति;
वायु' ना हि' ,
गौतम,
सू' त्रेण स' म्दृब्धानि भवन्ती' ति |
एव' मेवै' त' द्
K om. eva
याज्ञवल्क्यान्तर्यामि' णं ब्रूही' ति |
pM7/k3
य' ः पृथिव्या' ं ति' ष्ठन्पृथिव्या' अ' न्तरो,
य' ं पृथिवी' न' वे' द,
य' स्य पृथिवी' श' रीरं,
य' ः पृथिवी' म' न्तरो यम' यति,
स'
K eshha
त आत्मा' न्तर्याम्य' मृतः |
pM8/k4
यो' ऽप्सु' ति' ष्ठन्नद्भ्यो' ऽन्तरो,
य' मा' पो न' विदु' ः
य' स्या' पः श' रीरं,
यो' ऽपो' ऽन्तरो यम' यति
स'
K eshha
त आत्मा' न्तर्याम्य' मृतः |
pM9/k5
यो' ऽग्नौ' ति' ष्ठन्नग्ने' र' न्तरो,
य' मग्नि' र्न' वे' द,
य' स्याग्नि' ः श' रीरं,
यो' ऽग्नि' म' न्तरो यम' यति,
स'
K eshha
त आत्मा' न्तर्याम्य' मृतः |
pM10/k6
यो' ऽन्त' रिक्षे ति' ष्ठन्नन्त' रिक्षाद' न्तरो,
य' मन्त' रिक्षं न' वे' द,
य' स्यान्त' रिक्षँ श' रीरं,
यो' ऽन्त' रिक्षम' न्तरो यम' यति,
स'
K eshha
त आत्मा' न्तर्याम्य' मृतः |
pM11/k7
यो' वायौ' ति' ष्ठन्वायो' र' न्तरो,
य' ं वायु' र्न' वे' द,
य' स्य वायु' ः श' रीरं,
यो' वायु' म' न्तरो यम' यति,
स'
K eshha
त आत्मा' न्तर्याम्य' मृतः |
pk8
add. K
यो दिवि तिष्ठन्दिवोऽन्तरो,
यं द्यौर्न वेद,
यस्य द्यौः शरीरं,
यो दिवमन्तरो यमयति
एष त आत्मान्तर्याम्यमृतः |
pM12/k9
य' आदित्ये' ति' ष्ठन्नादित्या' द' न्तरो,
य' मादित्यो' न' वे' द,
य' स्यादित्य' ः श' रीरं,
य' आदित्य' म' न्तरो यम' यति,
स'
K eshha
त आत्मा' न्तर्याम्य' मृतः |
pM13/k11
य' श्चन्द्रतारके' ति' ष्ठङ्चन्द्रतारका' द' न्तरो,
य' ं चन्द्रतारक' ं न' वे' द,
य' स्य चन्द्रतारक' ँ श' रीरं,
य' श्चन्द्रतारक' म' न्तरो यम' यति,
स'
K eshha
त आत्मा' न्तर्याम्य' मृतः |
pk12
add. K
य आकाशे तिष्ठन्नाकाशादन्तरो,
यमाकाशो न वेद,
यस्याकाशः शरीरं,
य आकाशमन्तरो यमयति
एष त आत्मान्तर्याम्यमृतः |
pM14/k10
यो' दिक्षु' ति' ष्ठन्दिग्भ्यो' ऽन्तरो,
य' ं दि' शो न' विदु' ः
य' स्य दि' शः श' रीरं,
यो' दिशो' ऽन्तरो यम' यति,
स'
K eshha
त आत्मा' न्तर्याम्य' मृतः |
pM15/k om |
यो' विद्यु' ति ति' ष्ठन्विद्यु' तो' ऽन्तरो,
य' ं विद्यु' न्न' वे' द,
य' स्य विद्यु' च्छ' रीरं,
यो' विद्यु' तो' ऽन्तरो यम' यति,
स' त आत्मा' न्तर्याम्य' मृतः |
pM16/k om |
यो' स्तनयित्नौ' ति' ष्ठन्स्तनयित्नो' र' न्तरो,
य' ँ स्तनयित्नु' र्न' वे' द,
य' स्य स्तनयित्नु' ः श' रीरं,
यो' स्तनयित्नो' र' न्तरो यम' यति,
स' त आत्मा' न्तर्याम्य' मृतः |
pM17/k om |
यो' स' र्वेषु लोके' षु ति' ष्ठन्स' र्वेभ्यो लोके' भ्यो' ऽन्तरो,
य' ँ स' र्वे लोका' न' विदु' ः
य' स्य स' र्वे लोका' ः श' रीरं,
यो' स' र्वेभ्यो लोके' भ्यो' ऽन्तरो यम' यति,
स' त आत्मा' न्तर्याम्य' मृतः |
pM18/k om |
यो' स' र्वेषु वे' देषु ति' ष्ठन्स' र्वेभ्यो वे' देष्व' न्तरो,
य' ँ स' र्वे वे' दा न' विदु' ः
य' स्य स' र्वे वे' दाः श' रीरं,
यो' स' र्वेभ्यो वे' देभ्यो' ऽन्तरो यम' यति,
स' त आत्मा' न्तर्याम्य' मृतः |
pM19/k om |
यो' स' र्वेषु यज्ञे' षु ति' ष्ठन्स' र्वेभ्यो यज्ञे' भ्यो' ऽन्तरो,
य' ँ स' र्वे यज्ञा' न' विदु' ः
य' स्य स' र्वे यज्ञा' ः श' रीरं,
यो' स' र्वेभ्यो यज्ञे' भ्यो' ऽन्तरो यम' यति,
स' त आत्मा' न्तर्याम्य' मृतः |
pM20/k15
य' ः स' र्वेषु भूते' षु ति' ष्ठन्त्स' र्वेभ्यो भूते' भ्यो' ऽन्तरो,
य' ँ स' र्वाणि भूता' नि न' विदु' ः
य' स्य स' र्वाणि भुता' नि श' रीरं,
य' ः स' र्वाणि भूता' न्य' न्तरो यम' यति,
स'
K eshha
त आत्मा' न्तर्याम्य' मृत |
इ' त्य् उ एवा' धिभूत' म्
K om. u eva
अ' थाध्यात्म' म् |
pM21/k16
य' ः प्राणे' ति' ष्ठन्प्राणा' द' न्तरो,
य' ं प्राणो' न' वे' द,
य' स्य प्राण' ः श' रीरं,
य' ः प्राण' म' न्तरो यम' यति,
स'
K eshha
त आत्मा' न्तर्याम्य' मृतः |
pM22/k17
यो' वाचि' ति' ष्ठन्वाचो' ऽन्तरो,
य' ं वा' ङ् न' वे' द,
य' स्य वा' क्ष' रीरं,
यो' वा' चम' न्तरो यम' यति,
स'
K eshha
त आत्मा' न्तर्याम्य' मृतः |
pM23/k18
यश्च' क्षुषि ति' ष्ठङ्च' क्षुषो' ऽन्तरो,
य' ं च' क्षुर्न' वे' द,
य' स्य च' क्षुः श' रीरं,
य' श्च' क्षुर' न्तरो यम' यति,
स'
K eshha
त आत्मा' न्तर्याम्य' मृतः |
pM24/k19
य' ः श्रो' त्रे ति' ष्ठङ्छ्रो' त्राद' न्तरो,
य' ँ श्रो' त्रं न' वे' द,
य' स्य श्रो' त्रँ श' रीरं,
य' ः श्रो' त्रम' न्तरो यम' यति,
स'
K eshha
त आत्मा' न्तर्याम्य' मृतः |
pM25/k20
यो' म' नसि ति' ष्ठन्म' नसो' ऽन्तरो,
य' ं म' नो न' वे' द,
य' स्य म' नः श' रीरं,
यो' म' नो' ऽन्तरो यम' यति,
स'
K eshha
त आत्मा' न्तर्याम्य' मृतः |
pM26/k21
य' स् त्व' चि ति' ष्ठँस् त्व' चो' ऽन्तरो,
य' ं त्व' ङ् न' वे' द,
य' स्य त्व' क्ष' रीरं,
य' स् त्व' चम' न्तरो यम' यति,
स'
K eshha
त आत्मा' न्तर्याम्य' मृतः |
pk22
add. K
यो विज्ञाने तिष्ठन्विज्ञानादन्तरो,
यं विज्ञानं न वेद,
यस्य विज्ञानँ शरीरं,
यो विज्ञानमन्तरो यमयति
एष त आत्मान्तर्याम्यमृतः |
pM27/k14
य' स् ते' जसि ति' ष्ठँस् ते' जसो' ऽन्तरो,
य' ं ते' जो न' वे' द,
य' स्य ते' जः श' रीरं,
य' स् ते' जो' ऽन्तरो यम' यति,
स'
K eshha
त आत्मा' न्तर्याम्य' मृतः |
pM28/k13
य' स् त' मसि ति' ष्ठँस् त' मसो' ऽन्तरो,
य' ं त' मो न' वे' द,
य' स्य त' मः श' रीरं,
य' स् त' मो' ऽन्तरो यम' यति,
स'
K eshha
त आत्मा' न्तर्याम्य' मृतः |
pM29/k23
यो' रे' तसि ति' ष्ठँ रे' तसो' ऽन्तरो,
य' ं रे' तो न' वे' द,
य' स्य रे' तः श' रीरं,
यो' रे' तो' ऽन्तरो यम' यति,
स'
K eshha
त आत्मा' न्तर्याम्य' मृतः |
pM30/k om |
य' आत्म' नि ति' ष्ठन्नात्म' नो' ऽन्तरो,
य' मात्मा' न' वे' द,
य' स्यात्मा' श' रीरं,
य' आत्मा' न्तरो यम' यति,
स' त आत्मा' न्तर्याम्य' मृतः |
pM31/k23
अ' दृष्टो द्रष्टा' श्रुतः श्रोता' मतो मन्ता' विज्ञतो विज्ञाता' |
ना' न्यो' ऽतोऽस्ति द्रष्टा' ,
ना' न्यो' ऽतोऽस्ति श्रोता' ,
ना' न्यो' ऽतोऽस्ति मन्ता' ,
ना' न्यो' ऽतोऽस्ति विज्ञातै' ष' त आत्मा' न्तर्याम्य' मृतो' |
अतोऽन्य' दा' र्तं |
त' तो होद्दा' लक आ' रुणिरु' परराम |
ch8
pMk1
अ' थ ह वाचक्न' व्य् उवाचः
ब्रा' ह्मणा भगवन्तो,
ह' न्ताह' मिम' ं या' ज्ञवल्क्यं
K om.
द्वौ' प्रश्नौ' प्रक्ष्या' मि;
तौ' चे' न्मे विवक्ष्य' ति
K om. vi
न' वै'
K om.
जा' तु युष्मा' कमिम' ं क' श्चिद्ब्रह्मो' द्यं जेते' ति |
तौ' चे' द्मे न' विवक्ष्य' ति,
मुर्धा' स्य वि' पतिष्यती' ति
K om. tau ...
पृच्छ, गार्गी' ति |
pMk2
सा' होवाचाह' ं वै' त्वा, याज्ञवल्क्य ! ,
य' था का' श्यो वा वै' देहो वोग्रपुत्र' ,
उज्ज्य' ं धनु' र' धिज्यं कृत्वा' ,
द्वौ' बा' णवन्तौ सपत्नातिव्याधि' नौ ह' स्ते कृत्वो' पोत्तिष्ठे' द्
एव' मेवा' ह' ं त्वा द्वा' भ्यां प्रश्ना' भ्यामुपो' दस्थां |
तौ' मे ब्रूही' ति |
पृच्छ, गार्गी' ति |
pMk3
सा' होवाचः
य' दूर्ध्व' ं,
याज्ञवल्क्य,
दिवो' ,
य' दवा' क्पृथिव्या' ,
य' दन्तरा' द्या' वापृथिवी' इमे' ,
य' द्भूत' ं च भ' वच्च भविष्य' च्चे' त्य् आच' क्षते,
क' स्मिँस् त' दो' तं च प्रो' तं चे' ति |
pMk4
स' होवाचः
य' दूर्ध्व' ं,
गार्गि,
दिवो' ,
य' दवा' क्पृथिव्या' ,
य' दन्तरा' द्या' वापृथिवी' इमे' ,
य' द्भूत' ं च भ' वच्च भविष्य' च्चे' त्य् आच' क्षत,
आकाशे' त' दो' तं च प्रो' तं चे' ति |
pMk5
सा' होवचः
न' मस् ते
K add..astu
याज्ञवल्क्य,
यो' म एत' ं व्य' वोचो' |
अपरस्मै धार' यस्वे' ति |
पृच्छ, गार्गी' ति |
pMk6
सा' होवाचः
य' दूर्ध्व' ं,
याज्ञवल्क्य,
दिवो' ,
य' दवा' क्पृथिव्या' ,
य' दन्तरा' द्या' वापृथिवी' इमे' ,
य' द्भूत' ं च भ' वच्च भविष्य' च्चे' त्य् आच' क्षते,
क' स्मिँस् त' दो' तं च प्रो' तं चे' ति |
pMk7
स' होवाचः
य' दूर्ध्व' ं,
गार्गि,
दिवो' ,
य' दवा' क्पृथिव्या' ,
य' दन्तरा' द्या' वापृथिवी' इमे' ,
य' द्भूत' ं च भ' वच्च भविष्य' च्चे' त्य् आच' क्षत,
आकाश' एव' त' दो' तं च प्रो' तं चे' ति |
कस्मिन्नु' ख' ल्वाकाश' ओ' तश्च प्रो' तश्चे' ति |
pMk8
स' होवाचैत' द्वै' त' दक्ष' रं,
गार्गि,
ब्राह्मणा' अभि' वदन्ति
अ' स्थूलम' नणु
अ' ह्रस्वम' दीर्घम्
अलो' हितमस्नेह' म्
अच्छाय' मतमो' ,
अवाय्व' नाकाश' म्
असङ्ग' म्
अस्पर्श' म्
K om.
अगन्ध' म्
अरस' म्
K arasam.h agandham
अचक्षु' ष्कम्
अश्रोत्र' म्
अवा' ग्
अमनो' ,
अतेज' स्कम्
अप्राण' म्
अ' मुखम्
अ' नामा' गोत्रम्
अज' रम्
अम' रम्
अभ' यम्
अमृतम्
अरजो' ,
अशब्द' म्
अ' विवृतम्
अ' संवृतम्
अपूर्व' म्
अनपर' म्
अनन्तर' म्
K pro anAma ... anantaram.h
schribitamAtram.h anantaram
अबाह्य' ं;
न' त' दश्नोति
K ashnAti
क' ं चन'
kkiM chana
न' त' दश्नोति
K ashnAti
क' श्चन' |
pMk9
एत' स्य वा' अक्ष' रस्य प्रशा' सने,
गार्गि,
द्या' वापृथिवी' वि' धृते तिष्ठत;
एत' स्य वा' अक्ष' रस्य प्रशा' सने,
गार्गि,
सूर्यचन्द्रम' सौ वि' धृतौ तिष्ठत;
एत' स्य वा' अक्ष' रस्य प्रशा' सने,
गार्गि
K add. nimeshhA muhUrtA
अहोरात्रा' णि~
kadd. ardhamAsA\`
मा' सास्~ ऋत' वस्~ संवत्सरा' स्~
kadd. i\`ti
वि' धृतास् तिष्ठन्ति~
K add. nimeshhA muhUrtA
अहोरात्रा' ण्य्
kadd. ardhamsA\`
मा' सा ऋत' वः संवत्सरा'
kadd. i\`ti
वि' धृतास् तिष्ठन्ति
एत' स्य वा' अक्ष' रस्य प्रशा' सने,
गार्गि,
प्रा' च्योऽन्या' न' द्यः स्यन्दन्ते श्वेते' भ्यः प' र्वतेभ्यः,
प्रती' च्योऽन्या' ,
या' ंयां च दि' शम्
K add. anv
एत' स्य वा' अक्ष' रस्य प्रशा' सने,
गार्गि,
द' दतं
K dadato
मनुष्या' ः प्र' शसन्ति,
य' जमानं देवा' ,
द' र्व्यं
K darvIM
पित' रोऽन्वा' यत्ताः |
pMk10
यो' वा' एत' दक्ष' रम' विदित्वा,
गार्गि
K gArgi aviditvA
अस्मि' ँल् लोके' जुहो' ति,
द' दाति
K yajate
त' पस्यति~ अ' पि
K ta\`pas ta\`pyate
बहू' नि वर्षसहस्रा' णि~ अ' न्तवन्
kantavad
एव' ~ अस्य स' लोक' स्~
ktad
pro sa loko
भवति
यो' वा' एत' दक्ष' रम' विदित्वा,
गार्ग्य्
K gArgi aviditvA
अस्मा' ल् लोका' त्प्रै' ति,
स' कृपणो' ;
अथ य' एत' दक्ष' रं,
गार्गि,
विदित्वा' स्मा' ल् लोका' त्प्रै' ति,
स' ब्राह्मण' ः |
pMk11
त' द्वा' एत' दक्ष' रं,
गार्गि
अ' दृष्टं द्रष्ट्र' श्रुतं श्रोत्र' मतं मन्त्र' विज्ञातं विज्ञातृ;
ना' न्य' द्
K add. ato
अस्ति द्रष्टृ,
ना' न्य' द्
K add. ato
अस्ति श्रोतृ,
ना' न्य' द्
K add. ato
अस्ति मन्तृ,
ना' न्य' द्
K add. ato
अस्ति विज्ञात्रे' त' द्वै' अक्ष' रं,
गार्गि,
य' स्मिन्
kviGYatretasminnu\` kha\`lvakshare, gArgy),
आकाश' ओ' तश्च प्रो' तश्च |
pMk12
सा' होवाचः
ब्रा' ह्मणा भगवन्तः
त' देव' बहु' मन्यध्वम्~
य' दस्मा' न्नमस्कारे' ण मुच्या' ध्वम्~
K muchyedhvam
न' वै' जा' तु युष्मा' कमिम' म्~ क' श्चिद्ब्रह्मो' द्यम्~ जेता' ~ इ' ति
त' तो ह वाचक्न' व्य् उ' परराम |
ch9
pMk1
अ' थ हैनं विदग्ध' ः हा' कल्यः पप्रच्छः
क' ति देवा' ,
याज्ञवल्क्ये' ति |
स' हैत' यैव' निवि' दा प्र' तिपेदे,
या' वन्तस्~ वैश्वदेव' स्य निवि' दि~ उच्य' न्ते त्र' यश्च त्री' च शता' त्र' यस्~ च त्री' च सह' स्रा~ इ' ति~
ओ' म् इ' ति होवाच;
pM2/k1
क' त्य् एव' देवा' ,
याज्ञवल्क्ये' ति |
त्र' यस्त्रिँशदि' ति |
ओ' मि' ति होवाच |
क' त्य् एव' देवा' ,
याज्ञवल्क्ये' ति |
ष' ड् इ' ति |
ओ' मि' ति होवाच |
क' त्य् एव' देवा' ,
याज्ञवल्क्ये' ति |
त्र' य इ' ति |
ओ' मि' ति होवाच |
क' त्य् एव' देवा' ,
याज्ञवल्क्ये' ति |
द्वा' वि' ति |
ओ' मि' ति होवाच |
क' त्य् एव' देवा' ,
याज्ञवल्क्ये' ति |
अ' ध्यर्ध इ' ति |
ओ' मि' ति होवाच |
क' त्य् एव' देवा' ,
याज्ञवल्क्ये' ति |
ए' क इ' ति |
ओ' मि' ति होवाच |
कतमे' ते' त्र' यश्च त्री' च शता' त्र' यश्च त्री' च सह' स्रे' ति |
pM3/k2
स' होवाचः
महिमा' न एवै' षामेते' ,
त्र' यस्त्रिंशत्त्वे' व' देवा' इ' ति |
कतमे' ते' त्र' यस्त्रिँशदि' ति |
अष्टौ' व' सव,
ए' कादश ऱुद्रा' ,
द्वा' दशादित्या' ः
त' ए' कत्रिंशद्
९न्द्रश्चैव' प्रजा' पतिश्च त्र' यस्त्रिंशावि' ति |
pM4/k3
कतमे' व' सव इ' ति |
आग्नि' श्च पृथिवी' च वायु' श्चान्त' रिक्षं चादित्य' श्च ड्यौ' ः च चन्द्र' माश्च ण' क्षत्राणि चैते' व' सव;
एते' षु ही' द' ँ स' र्वँ व' सु
K om.
हित' ं
kadd. ity
एते' ही' द' ँ स' र्वं वस' यन्ते |
त' द्य' दिद' ँ स' र्वं वस' यन्ते
K om. ete hIda.N ...
त' स्माद्व' सव इ' ति |
pM5/k4
कतमे' ऱुद्रा' इ' ति |
द' शेमे' पु' रुषे प्राणा' ,
आत्मै' कादश' स्;
ते' यदा' स्मा' न्म' र्त्याच्छ' रीराद्
K sharIrAnmartyAd
उत्क्रा' मन्ति
अ' थ रोदयन्तिः
त' द्य' द्रोद' यन्ति,
त' स्माद्ऱुद्रा' इ' ति |
pM6/k5
कतम' अदित्या' इ' ति |
द्वा' दश
K add. vai
मा' साः संवत्सर' स्यैत' अदित्या' ;
एते' ही' द' ँ स' र्वमाद' दाना यन्ति;
त' द्
K te
य' दिद' ँ स' र्वमाद' दाना य' न्ति,
त' स्माददित्या' इ' ति |
pM7/k6
कतम' ९न्द्रः,
कतम' ः प्रजा' पतिरि' ति |
स्तनयित्नु' रेवे' न्द्रो,
यज्ञ' ः प्रजा' पतिरि' ति |
कतम' ः स्तनयित्नु' रि' ति |
अश' निरि' ति |
कतमो' यज्ञ' इ' ति |
पश' व इ' ति |
pM8/k7
कतमे' ष' ड् इ' ति |
आग्नि' श्च पृथिवी' च वायु' श्चान्त' रिक्षश्चादित्य' श्च ड्यौ' श्चैते' ष' ड् इ' त्य्
K om. ity
एते' ह्य् ए' वे' द' ँ
K hIda.N
स' र्वं ष' ड् इ' ति |
pM9/k8
कतमे' ते' त्र' यो देवा' इ' ती-
-म' एव' त्र' यो लोका' ,
एषु' ही' मे' स' र्वे देवा' इ' ति |
कतमौ'
K add. tau
द्वौ' देवा' वि' ति |
अ' न्नं चैव' प्राण' श्चे' ति |
कतमो' ऽध्यर्ध इ' ति |
यो' ऽय' ं प' वत इ' ति |
pM10/k9
त' दाहुः
य' दय' मे' क एव'
K eka ivaiva
प' वते' ,
अथ कथ' म' ध्यर्ध इ' ति |
य' दस्मिन्निद' ँ स' र्वमध्या' र्ध्नोत्
ते' ना' ध्यर्ध इ' ति |
कतम' ए' को देव' इ' ति |
K prANa iti;
स' ब्र' ह्म त्य' दि' त्य् आ' चक्षते |
pM11/k10
पृथिव्य् ए' व' य' स्याय' तनं,
च' क्षुर्
K agnir
लोको' ,
म' नो ज्यो' तिः
यो' वै' त' ं पु' रुषं विद्या' त्स' र्वस्यात्म' नः परा' यणँ,
स' वै' वेदिता' स्याद्
याज्ञवल्क्य |
वे' द वा' अह' ं त' ं पु' रुषँ स' र्वस्यात्म' नः परा' यणं,
य' मा' त्थ;
य' एवा' य' ँ शारीर' ः पु' रुषः,
स' एष' |
व' दैव' ,
हाकल्य,
त' स्य का' देव' ते' ति |
स्त्रि' य
K amR\^itam
इ' ति होवाच |
pM14/k11
का' म एव' य' स्याय' तनं,
च' क्षुर्
K hR\^idayaM
लोको' ,
म' नो ज्यो' तिः
यो' वै' त' ं पु' रुषं विद्या' त्स' र्वस्यात्म' नः परा' यणँ,
स' वै' वेदिता' स्याद्
याज्ञवल्क्य |
वे' द वा' अह' ं त' ं पु' रुषँ स' र्वस्यात्म' नः परा' यणं,
य' मा' त्थ;
य' एवा' सौ' चन्द्रे'
K evAyaM kAmamayaH
पु' रुषः,
स' एष' |
व' दैव' ,
हाकल्य,
त' स्य का' देव' ते' ति |
म' न
K striya
इ' ति होवाच |
pMk12
रूपा' ण्य् एव' य' स्याय' तनं,
च' क्षुर्लोको' ,
म' नो ज्यो' तिः
यो' वै' त' ं पु' रुषं विद्या' त्स' र्वस्यात्म' नः परा' यणँ,
स' वै' वेदिता' स्याद्
याज्ञवल्क्य |
वे' द वा' अह' ं त' ं पु' रुषँ स' र्वस्यात्म' नः परा' यणं,
य' मा' त्थ;
य' एवा' सा' वादित्ये' पु' रुषः,
स' एष' |
व' दैव' ,
हाकल्य,
त' स्य का' देव' ते' ति |
च' क्षुर्
K satyam
इ' ति होवाच |
pMk13
आकश' एव' य' स्याय' तनं,
च' क्षुर्
K shrotraM
लोको' ,
म' नो ज्यो' तिः
यो' वै' त' ं पु' रुषं विद्या' त्स' र्वस्यात्म' नः परा' यणँ,
स' वै' वेदिता' स्याद्
याज्ञवल्क्य |
वे' द वा' अह' ं त' ं पु' रुषँ स' र्वस्यात्म' नः परा' यणं,
य' मा' त्थ;
य' एवा' य' म्वायौ'
K shrautaH prAtishrutaH
पु' रुषः,
स' एष' |
व' दैव' ,
हाकल्य,
त' स्य का' देव' ते' ति |
प्राण'
K disha
इ' ति होवच |
pM15/k om |
ते' ज एव' य' स्याय' तनं,
च' क्षुर्लोको' ,
म' नो ज्यो' तिः
यो' वै' त' ं पु' रुषं विद्या' त्स' र्वस्यात्म' नः परा' यणँ,
स' वै' वेदिता' स्याद्
याज्ञवल्क्य |
वे' द वा' अह' ं त' ं पु' रुषँ स' र्वस्यात्म' नः परा' यणं,
य' मा' त्थ;
य' एवा' य' मग्नौ' पु' रुषः,
स' एष' |
व' दैव' ,
हाकल्य,
त' स्य का' देव' ते' ति |
वा' गि' ति होवाच |
pM16/k14
त' म एव' य' स्याय' तनं,
च' क्षुर्
K hR\^idayaM
लोको' ,
म' नो ज्यो' तिः
यो' वै' त' ं पु' रुषं विद्या' त्स' र्वस्यात्म' नः परा' यणँ,
स' वै' वेदिता' स्याद्
याज्ञवल्क्य |
वे' द वा' अह' ं त' ं पु' रुषँ स' र्वस्यात्म' नः परा' यणं,
य' मा' त्थ;
य' एवा' य' ं छायाम' यः पु' रुषः,
स' एष' |
व' दैव' ,
हाकल्य,
त' स्य का' देव' ते' ति |
मृत्यु' इ' ति होवाच |
pM17/k16
आप' एव' य' स्याय' तनं,
च' क्षुर्
K hR\^idayaM
लोको' ,
म' नो ज्यो' तिः
यो' वै' त' ं पु' रुषं विद्या' त्स' र्वस्यात्म' नः परा' यणँ,
स' वै' वेदिता' स्याद्
याज्ञवल्क्य |
वे' द वा' अह' ं त' ं पु' रुषँ स' र्वस्यात्म' नः परा' यणं,
य' मा' त्थ;
य' एवा' य' ं अप्सु' पु' रुषः,
स' एष' |
व' दैव' ,
हाकल्य,
त' स्य का' देव' ते' ति |
व' रुण इ' ति होवाच |
pM18/k17
रे' त एव' य' स्याय' तनं,
च' क्षुर्
K hR\^idayaM
लोको' ,
म' नो ज्यो' तिः
यो' वै' त' ं पु' रुषं विद्या' त्स' र्वस्यात्म' नः परा' यणँ,
स' वै' वेदिता' स्याद्
याज्ञवल्क्य |
वे' द वा' अह' ं त' ं पु' रुषँ स' र्वस्यात्म' नः परा' यणं,
य' मा' त्थ;
य' एवा' य' ं पुत्रम' यः पु' रुषः,
स' एष' |
व' दैव' ,
हाकल्य,
त' स्य का' देव' ते' ति |
प्रजा' पतिरि' ति होवाच |
pM19/k18
हा' कल्ये' ति होवाच या' ज्ञवल्क्यः
त्वा' ँ स्विदिमे' ब्राह्मणा' अङ्गारावक्ष' यणमक्रता३ इ' ति |
pM20/k19
या' ज्ञवल्क्ये' ति होवाच हा' कल्यो,
य' दिद' ं कुरुपङ्चाला' नां ब्राह्मना' नत्य' वादीः,
कि' ं ब्र' ह्म विद्वा' नि' ति |
दि' शो वेद स' देवाः स' प्रतिष्ठा इ' ति |
य' द्दि' शो वे' त्थ स' देवाः स' प्रतिष्ठाः,
pM21/k20
कि' ंदेवतोऽस्या' ं प्रा' च्यां दिश्य' सी' ति |
आदित्य' देवत इ' ति |
स' आदित्य' ः क' स्मिन्प्र' तिष्ठित इ' ति |
च' क्षुषी' ति |
क' स्मिन्नु' च' क्षुः प्र' तिष्ठितं भवती' ति
K om. bhavati
रूपे' ष्वि' ति;
च' क्षुषा हि' रूपा' णि प' श्यति |
क' स्मिन्नु' रूपा' णि प्र' तिष्ठितानि भवन्ती' ति
K om. bhavanti
हृदय इ' ति होवाच;
हृदयेन हि' रूपा' णि जाना' ति,
हृदये ह्य् ए' व' रूपा' णि प्र' तिष्ठितानि भवन्ती' ति |
एव' मेवै' त' द्
याज्ञवल्क्य |
pM22/k21
कि' ंदेवतोऽस्या' ं द' क्षिणायां दिश्य' सी' ति |
यम' देवत इ' ति |
स' यम' ः क' स्मिन्प्र' तिष्ठित इ' ति |
kadd. yaGYa iti.
द' क्षिणायामि' ति |
क' स्मिन्नु' द' क्षिणा प्र' तिष्ठिता भवती' ति
K om. bhavati
श्रद्धा' यामि' ति;
यदा' ह्य् ए' व' श्रद्धत्ते' ,
अथ द' क्षिणां ददाति;
श्रद्धा' याँ ह्य् ए' व' द' क्षिणा प्र' तिष्ठिता भवती' ति
K om. bhavati
क' स्मिन्नु' श्रद्धा' प्र' तिष्ठिता भवती' ति
K om. bhavati
हृदय इ' ति होवाच;
हृदयेन हि' श्रद्धत्ते'
K shraddhAM jAnAti
हृदये ह्य् ए' व' श्रद्धा' प्रतिष्ठिता ! भवती' ति |
एव' मेवै' त' द्
याज्ञवल्क्य |
pM23/k22
कि' ंदेवतोऽस्या' ं प्रती' च्यां दिश्य' सी' ति |
व' रुणदेवत इ' ति |
स' व' रुणः क' स्मिन्प्र' तिष्ठित इ' ति |
अप्स्वि' ति |
क' स्मिन्न्वा' पः प्र' तिष्ठिता भवन्ती' ति
K om. bhavanti
रे' तसी' ति |
क' स्मिन्नु' रे' तः प्र' तिष्ठितं भवती' ति
K om. bhavati
हृदय,
इ' ति
K add. hovAcha
त' स्माद' पि प्र' तिरूपं जात' माहुः
हृदयादिव सृप्तो' ,
हृदयादिव नि' र्मित इ' ति;
हृदये ह्य् ए' व' रे' तः प्र' तिष्ठितं भवती' ति |
एव' मेवै' त' द्
याज्ञवल्क्य |
pM24/k23
कि' ंदेवतोऽस्या' मुदी' च्यां दिश्य' सी' ति |
सो' मदेवत इ' ति |
स' सो' मः क' स्मिन्प्र' तिष्ठित इ' ति |
दीक्षा' यामि' ति |
क' स्मिन्नु' दिक्षा' प्र' तिष्ठिता भवती' ति
K om. bhavati
सत्य' इ' ति;
त' स्माद' पि दीक्षित' माहुः
सत्य' ं वदे' ति;
सत्ये' ह्य् ए' व' दीक्षा' प्र' तिष्ठिता भवती' ति
K om. bhavati
क' स्मिन्नु' सत्य' ं प्र' तिष्ठितम्भवती' ति
K om. bhavati
हृदये इ' ति
K add. hovAcha
हृदयेन हि' सत्य' ं जाना' ति;
हृदये ह्य् ए' व' सत्य' ं प्र' तिष्ठितं भवती' ति |
एव' मेवै' त' द्
याज्ञवल्क्य |
pM25/k24
कि' ंदेवतोऽस्या' ं ध्रुवा' यां दिश्य' सी' ति |
अग्नि' देवत इ' ति |
सो' ऽग्नि' ः क' स्मिन्प्र' तिष्ठितो भवती' ति
K om. bhavati
वाची' ति |
क' स्मिन्नु' वा' क्प्र' तिष्ठिता भवती' ति
K om. bhavati
म' नसी' ति
K hR\^idaya iti
क' स्मिन्नु' म' नस्
K hR\^idayaM
प्र' तिष्ठितं भवती' ति
kom. bhavati
pM26/k25
अ' हल्लिके' ति होवाच या' ज्ञवल्क्यो,
य' त्रैत' दन्य' त्रास्मन्मन्या' सै |
य' त्रैत' द्
K yaddhy etad
अन्य' त्रास्मत्स्या' च्,
छ्वा' नो वैनदद्युः
व' याँसि वैनद्वि' मथ्नीरन्नि' ति |
pM27/k26
क' स्मिन्नु' त्व' ं चात्मा' च प्र' तिष्ठितौ ! स्थ इ' ति |
प्राण' इ' ति |
क' स्मिन्नु' प्राण' ः प्र' तिष्ठित इ' ति |
अपान' इ' ति |
क' स्मिन्न्व' पान' ः प्र' तिष्ठित इ' ति |
व्यान' इ' ति |
क' स्मिन्नु' व्यान' ः प्र' तिष्ठित इ' ति |
उदान' इ' ति |
क' स्मिन्नू' दान' ः प्र' तिष्ठित इ' ति |
समान' इ' ति |
pM28/k26
स' एष' ः
ने' ति,
ने' त्य् आत्मा' गृह्यो,
न' हि' गृह्य' ते' ;
अशीर्यो,
न' हि' शीर्य' ते' ;
असङ्गो' ऽसितो न' सज्य' ते,
न' व्य' थत इ' त्य्
असितो न व्यथते,
एता' न्यष्टा' वाय' तनानि
अष्टौ' लोका' ,
K add. ashhTau devAH
अष्टौ' पु' रुषाः |
स' य' स् ता' न्पु' रुषान्व्युदु' ह्य
K niruhya
प्रत्यु' ह्यात्य' क्रामीत्
त' ं त्वौपनिषद' ं पु' रुषं पृच्छामि |
त' ं चे' न्मे न' विवक्ष्य' सि,
मूर्धा' ते वि' पतिष्यती' ति |
त' ँ ह हा' कल्यस् न' मेने
K ta.N ha na mene hAkalyas
त' स्य ह मूर्धा' वि' पपात;
त' स्य हा' प्यन्य' न्म' न्यमानाः परिमोषि' णो' ऽस्थिन्य' पजह्रुः
K api hAsya parimoshhiNo.asthInyapajahruHanya\`nmanyamAnAH
pM29/k27
अ' थ या' ज्ञवल्क्यो होवाच
K hovAcha yAGYavalkyo
ब्रा' ह्मणा भगवन्तो,
यो' वः काम' यते,
स' मा पृच्छतु,
स' र्वे वा मा पृच्छत;
यो' वः काम' यते,
त' ं वः पृच्छामि,
स' र्वान्वा वः पृच्छामी' ति |
ते' ह ब्राह्मणा' न' दधृषुः |
pM30/k28
ता' न्हैतै' ः श्लो' कैः पप्रच्छः
य' था वृक्षो' व' नस्प' तिः
त' थैव' पु' रुषोऽमृषा' ः
त' स्य पर्णा' नि लो' मानि
K lomAni parNAni
त्व' गस्योत्पा' टिका बहि' ः |
pM31/k28
त्वच' एवा' स्य रु' धिरं
प्रस्य' न्दि त्वच' उ' त्पटस्;
त' स्मात्त' दा' तुन्नात्
K AtR\^iNNAt
प्रैति,
र' सो वृक्षा' दिवा' हतात् |
pM32/k28
माँसा' न्यस्य श' कराणि,
कि' नाटँ स्ना' व,
त' त्स्थिर' म्;
अ' स्थीन्य' न्तरतो दा' रुणि,
मज्जा' मज्जोपमा' कृता' |
pM33/k28
य' द्वृक्षो' वृक्णो' रो' हति
मू' लान्न' वतरः पु' नः
म' र्त्यः स्विन्मृत्यु' ना वृक्ण' ः
क' स्मान्मू' लात्प्र' रोहति |
pMk34/k28
K variato ordineH 3-4 post9-10
रे' तस इ' ति मा' वोचतः
जी' वतस् त' त्प्र' जायते;
जात' एव' न' जायते,
को' न्वे' नं जनयेत्पु' नः
धाना' रुह
K add. iva
वै' वृक्षो'
अन्य' तः
K a~NjasA
प्रे' त्य स' म्भवो |
य' त्स' मूलमुद्वृहे' युर्
K AvR\^iheyur
वृक्ष' ं,
न' पु' नरा' भवेद्;
म' र्त्यः स्विन्मृत्यु' ना वृक्ण' ः
क' स्मान्मू' लात्प्र' रोहति |
विज्ञा' नमानन्द' ं ब्र' ह्म,
राते' र्
K rAtir
दा' तुः,
परा' यणं
ति' ष्ठमानस्य तद्वि' द इ' ति |
ch4
ch1 = hbM 14.6.10?? = hbk16.6.1??
pMk1
जनको' ह वै' देह आसा' ं चक्रे' |
अथ ह या' ज्ञवल्क्य आ' वव्राज |
स' होवाच जनको' वै' देहो
K ta.N hovAcha
या' ज्ञवल्क्य,
कि' म' र्थमचारीः,
पशू' निच्छ' न' ण्वन्तानी' ति |
उभ' यमेव' ,
सँराड्,
इ' ति होवाच |
pM2/k3
K add. yadeva te kashchidabravIt.h tachchhR\^iNavAmety.
अ' ब्रवीन्म ऊदङ्क' ः हौल्वायन' ः
K haulbAyanaH
प्राणो' वै' ब्र' ह्मे' ति |
य' था मातृमा' न्पितृमा' नाचार्य' वान्ब्रूया' त्
त' था त' च्छौल्वायनो'
K chhaulbAyano
अब्रवीत्
प्राणो' वै' ब्र' ह्मे' ति,
अ' प्राणतो हि' कि' ँ स्या' दि' ति |
अ' ब्रवीत्तु' ते त' स्याय' तनं प्रतिष्ठा' ं |
न' मेऽब्रवीदि' ति |
एकपा' द्वा' एत' त्
सम्राड्,
इ' ति |
pMk3
स' वै' नो ब्रूहि,
याज्ञवल्क्य |
स'
K prANa
एवा' य' तनम्
आकाश' ः प्रतिष्ठा' ,
प्रिय' मि' त्य् एनदु' पासीत |
का' प्रिय' ता,
याज्ञवल्क्य |
प्राण' एव' ,
सम्राड्,
इ' ति होवाच;
प्राण' स्य वै' ,
सम्राट्,
का' मायायाज्य' ं याजयति
अप्रतिगृह्य' स्य प्र' तिगृह्णाति
अ' पि त' त्र वधाशङ्गा'
K vadhAshaN\^kA
भवति,
या' ं दि' शमे' ति प्राण' स्यैव' ,
सम्राट्,
का' माय;
प्राणो' वै' ,
सम्राट्,
परम' ं ब्र' ह्म |
नै' नं प्राणो' जहाति,
स' र्वाण्य् एनं भूता' न्यभि' क्षरन्ति |
pM4/k3
देवो' भूत्वा' देवा' न' प्येति,
य' एव' ं विद्वा' नेत' दुपा' स्ते |
हस्त्य्\Shabha.N सह' स्रं ददामी' ति होवाच जनको' वै' देहह् |
स' होवाच या' ज्ञवल्क्यः
पिता' मेऽमन्यत,
ना' ननुशिष्य ह' रेते' ति |
क' एव' ते कि' मब्रवीदि' ति
K om. ka\` ...
pM5/k2
K add. yatte kashchidabravIt.htachchhR\^iNavAmety.
अ' ब्रवीन्मे जि' त्वा हैलिनो'
K hailinir
वा' ग्वै' ब्र' ह्मे' ति |
य' था मातृमा' न्पितृमा' नाचार्य' वान्ब्रूया' त्
त' था त' च्छैलिनो'
K chhailinir
अब्रवीद्
वा' ग्वै' ब्र' ह्मे' ति
अ' वदतो हि' कि' ँ स्या' दि' ति |
अ' ब्रवीत्तु' ते त' स्याय' तनं प्रतिष्ठा' ं |
न' मेऽब्रवीदि' ति |
एकपा' द्वा' एत' त्
सम्राड्,
इ' ति |
pM6/k2
स' वै' नो ब्रूहि,
याज्ञवल्क्य |
वा' गेवा' य' तनम्
आकाश' ः प्रतिष्ठा' ,
प्रज्ञे' त्य् एनदु' पासीत |
का' प्रज्ञ' ता,
याज्ञवल्क्य |
वा' गेव' ,
सम्राड्,
इ' ति होवाच;
वाचा' वै' ,
सम्राड्,
ब' न्धुः प्र' ज्ञायत;
ऋग्वेदो' यजुर्वेद' ः सामवेदो' ऽथर्वाङ्गिर' स इतिहास' ः पुराण' ं विद्या' उपनिष' दः श्लो' काः सू' त्राण्यनुव्याख्या' नानि व्याख्या' नानि
K add. ishhTa.N hutamAshitaM pAyitamayaM cha lokaH parashcha lokaH sarvANi cha bhUtAni
वाचै' व' ,
संराट्,
प्र' ज्ञायन्ते;
वा' ग्वै' ,
सम्राट्,
परम' ं ब्र' ह्म;
नै' नं वा' ग्जहाति,
स' र्वाण्य् एनं भूता' न्यभि' क्षरन्ति |
pM7/k2
देवो' भूत्वा' देवा' न' प्येति,
य' एव' ं विद्वा' नेत' दुपा' स्ते |
हस्त्य्\Shabha.N सह' स्रं ददामी' ति होवाच जनको' वै' देहः |
स' होवाच या' ज्ञवल्क्यः
पिता' मेऽमन्यत,
ना' ननुशिष्य ह' रेते' ति |
क' एव' ते कि' मब्रवीदि' ति
K om. ka\` ...
pM8/k4
K add. yadeva te kashchidabravIt.htachchhR\^iNavAmety.
अ' ब्रवीन्मे बर्कु' र्वार्ष्ण' श्:
च' क्षुर्वै' ब्र' ह्मे' ति |
य' था मातृमा' न्पितृमा' नाचार्य' वान्ब्रूया' त्
त' था त' द्वार्ष्णो' ऽब्रवीच्:
च' क्षुर्वै' ब्र' ह्मे' ति
अ' पश्यतो हि' कि' ँ स्या' दि' ति |
अ' ब्रवीत्तु' ते त' स्याय' तनं प्रतिष्ठा' ं |
न' मेऽब्रवीदि' ति |
एकपा' द्वा' एत' त्
सम्राड्,
इ' ति |
pM9/k4
स' वै' नो ब्रूहि,
याज्ञवल्क्य |
च' क्षुरेवा' य' तनम्
आकाश' ः प्रतिष्ठा' ,
सत्य' मि' त्य् एत' दु' पासीत |
का' सत्य' ता,
याज्ञवल्क्य |
च' क्षुरेव' ,
सम्राड्,
इ' ति होवाच;
च' क्षुषा वै' ,
सम्राट्,
प' श्यन्तमाहुः
अ' द्राक्षीरि' ति |
स' आहा' द्राक्षमि' ति,
त' त्सत्य' ं भवति;
च' क्षुर्वै' ,
सम्राट्,
परम' ं ब्र' ह्म;
नै' नम्च' क्षुर्जहाति,
स' र्वाण्य् एनं भूता' न्यभि' क्षरन्ति |
pM10/k4
देवो' भूत्वा' देवा' न' प्येति,
य' एव' ं विद्वा' नेत' दुपा' स्ते |
हस्त्य्\Shabha.N सह' स्रं ददामी' ति होवाच जनको' वै' देहः |
स' होवाच या' ज्ञवल्क्यः
पिता' मेऽमन्यत,
ना' ननुशिष्य ह' रेते' ति |
क' एव' ते कि' मब्रवीदि' ति
K om. ka\` ...
pM11/k5
K add. yadeva te kashchidabravIt.h tachchhR\^iNavAmety.
अ' ब्रवीन्मे गर्दभी' विपीतो भा' रद्वाजः
श्रो' त्रं वै' ब्र' ह्मे' ति;
य' था मातृमा' न्पितृमा' नाचार्य' वान्ब्रूयात्
त' था त' द्भा' रद्वाजोऽब्रवीच्:
छ्रो' त्रं वै' ब्र' ह्मे' ति
अ' शृण्वतो हि' कि' ँ स्या' दि' ति |
अ' ब्रवीत्तु' ते त' स्याय' तनं प्रतिष्ठा' ं |
न' मेऽब्रवीदि' ति |
एकपा' द्वा' एत' त्
सम्राड्,
इ' ति |
pM12/k5
स' वै' नो ब्रूहि,
याज्ञवल्क्य |
श्रो' त्रमेवा' य' तनम्
आकाश' ः प्रतिष्ठा' नन्त' मि' त्य् एनदु' पासीत |
का' नन्त' ता,
याज्ञवल्क्य |
दि' श एव' ,
सम्राड्,
इ' ति होवाच;
त' स्माद्वै' ,
सम्राड्,
K add. a\`pi
या' ं का' ङ्च दि' शं ग' च्छति नै' वा' स्या अ' न्तं गच्छति
अनन्ता' हि' दि' शः,
श्रो' त्रँ हि' दि' शः
kdisho vai,
सम्राट्,
shrotra.N
श्रो' त्रं वै' ,
सम्राट्,
परम' ं ब्र' ह्म |
नै' नं श्रो' त्रं जहाति,
स' र्वाण्य् एनं भूता' न्यभि' क्षरन्ति |
pM13/k5
देवो' भूत्वा' देवा' न' प्येति,
य' एव' ं विद्वा' नेत' दुपा' स्ते |
हस्त्य्\Shabha.N सह' स्रं ददामी' ति,
होवाच जनको' वै' देहः |
स' होवाच या' ज्ञवल्क्यः
पिता' मेऽमन्यत,
ना' ननुशिष्य ह' रेते' ति |
क' एव' ते कि' मब्रवीदि' ति
K om. ka\` ...
pM14/k6
kadd. yadeva te kashchidabravIt.h
tachchhR\^iNavAmety.
अ' ब्रवीन्मे षत्य' कामो जाबालो' ः
म' नो वै' ब्र' ह्मे' ति;
य' था मातृमा' न्पितृमा' नाचार्य' वान्ब्रूया' त्
त' था त' त्षत्य' कामो
K jAbAlo
अब्रवीद्
म' नो वै' ब्र' ह्मे' ति
अ' मनसो हि' कि' ँ स्या' दि' ति |
अ' ब्रवीत्तु' ते त' स्याय' तनं प्रतिष्ठा' ं |
न' मेऽब्रवीदि' ति |
एकपा' द्वा' एत' त्
सम्राड्,
इ' ति |
pM15/k6
स' वै' नो ब्रूहि,
याज्ञावल्क्य |
म' न एवा' य' तनम्
आकाश' ः प्रतिष्ठा' नन्द' इ' त्य् एनदु' पासीत |
का' नन्द' ता,
याज्ञवल्क्य |
म' न एव' ,
सम्राड्,
इ' ति होवाच;
म' नसा वै' ,
सम्राट्,
स्त्रि' यमभि' हर्यति
K abhihAryate
त' स्यां प्र' तिरूपः पुत्रो' जायते;
स' आनन्दो' |
म' नो वै' ,
सम्राट्,
परम' ं ब्र' ह्म;
नै' नं म' नो जहाति,
स' र्वाण्य् एनं भूता' न्यभि' क्षरन्ति |
pM16/k6
देवो' भूत्वा' देवा' न' प्येति,
य' एव' ं विद्वा' नेत' दुपा' स्ते |
हस्त्य्\Shabha.N सह' स्रं ददामी' ति होवाच जनको' वै' देहः |
स' होवाच या' ज्ञवल्क्यः
पिता' मेऽमन्यत,
ना' ननुशिष्य ह' रेते' ति |
क' एव' ते कि' मब्रवीदि' ति
K om. ka\` ...
pM17/k7
kadd. yadeva te kashchidabravIt.h
tachchhR\^iNavAmety.
अ' ब्रवीन्मे विदग्ध' ः हा' कल्योः
हृदयं वै' ब्र' ह्मे' ति;
य' था मातृमा' न्पितृमा' नाचार्य' वान्ब्रूया' त्
त' था त' च्छा' कल्योऽब्रवीद्
धृदयं वै' ब्र' ह्मे' ति
अ' हृदयस्य हि' कि' ँ स्या' दि' ति |
अ' ब्रवीत्तु' ते त' स्याय' तनं प्रतिष्ठा' ं ! |
न' मेऽब्रवीदि' ति |
एकपा' द्वा' एत' त्
सम्राड्,
इ' ति |
pM18/k7
स' वै' नो ब्रूहि,
याज्ञवल्क्य |
हृदयमेवा' य' तनम्
आकाश' ः प्रतिष्ठा' ;
स्थिति' रि' त्य् एनदु' पासीत |
का' स्थिति' ता,
याज्ञवल्क्य |
हृदयमेव' ,
सम्राड्,
इ' ति होवाच;
हृदयं वै' ,
सम्राट्,
स' र्वेषां भूता' नामाय' तनँ;
हृदयं वै' ,
सम्राट्,
स' र्वेषां भूता' नां प्रतिष्ठा' ,
हृदये ह्य् ए' व' ,
सम्राट्,
स' र्वाणि भूता' नि प्र' तिष्ठितानि भवन्ति;
हृदयं वै' ,
सम्राट्,
परम' ं ब्र' ह्म;
नै' नँ हृदयं जहाति,
स' र्वाण्य् एनं भूता' न्यभि' क्षरन्ति |
pM19/k7
देवो' भूत्वा' देवा' न' प्येति,
य' एव' ं विद्वा' नेत' दुपा' स्ते |
हस्त्य्\Shabha.N सह' स्रं ददामी' ति होवाच जनको' वै' देहः |
स' होवाच या' ज्ञवल्क्यः
पिता' मेऽमन्यत ना' ननुशिष्य ह' रेते' ति |
क' एव' ते कि' मब्रवीदि' ति
K om. ka\` ...
ch2 = hbM 14.6.11?? = hbk16.6.2??
pMk1
अ' थ ह जनको'
K janako ha
वै' देहः कूर्चा' दुपावस' र्पन्नुवाचः
न' मस् ते
K add..astu
याज्ञवल्क्या' नु मा शाधी' ति |
स' होवाचः
य' था वै' ,
सम्राड्,
महा' न्तम' ध्वानमेष्य' न्र' थं वा ना' वं वा समाद' दीतैव' मेवै' ता' भिरुपनिष' द्भिः समा' हितात्मासि
एव' ं वृन्दारक आढ्य' ः स' न्नधीतवे' द उक्तो' पनिषत्क इतो' विमुच्य' मानः क्व' गमिष्यसी' ति |
ना' ह' ं त' द्
भगवन्
वे' द य' त्र गमिष्यामी' ति |
अ' थ वै' तेऽह' ं त' द्वक्ष्यामि य' त्र गमिष्यसी' ति |
ब्र' वीतु भ' गवानि' ति |
pMk2
स' होवाच
K om.
इ' न्धो ह वै' ना' मैष' यो' ऽय' ं दक्षिणे' ऽक्ष' न्पु' रुषस्;
त' ं वा' एत' मि' न्धँ स' न्तमि' न्द्र इ' त्य् आ' चक्षते परो' क्षेणैव' ;
परो' क्षप्रिया इव हि' देवा' ः प्रत्य' क्षद्विषः |
pMk3
अ' थैत' द्वा' मेऽक्षि' णि
krishna.akshan
पु' रुषरूपम्
एषा' स्य प' त्नी विरा' ट्,
त' योरेष' सँस्तावो' य' एषो' ऽन्त' र्हृदय आकाशो' |
अथैनयोरेत' द' न्नं य' एषो' ऽन्त' र्हृदये लोहित' पिण्डो' |
अथैनयोरेत' त्प्रावर' णं य' देत' दन्त' र्हृदये जालक' मिवा' थैनयोरेषा' सृतिः स' ती
K om.
संच' रणी यै' षा' हृदयादूर्ध्वा' नाड्य् उ' च्च' रति |
pM4/k3
ता' वा' अस्यैता' हिता' ना' म नाड्यो' य' थ के' शः सहस्रधा' भिन्न'
K yathA keshaH sahasradhA bhinna evamasyaitA hitA nAma nADyo.antarhR\^idaye pratishhThitA bhavanty
एता' भिर्वा' एत' म्
K etad
आस्र' वदा' स्रवति;
त' स्मादेष' प्रवि' विक्ताहारतर इव भवत्यस्मा' च्छारीरा' दात्म' नः |
pM5/k4
त' स्य वा' एत' स्य पु' रुषस्य
K om. vA ...
प्रा' ची दि' क्प्रा' ङ्चः प्राणा' ,
द' क्षिणा दि' ग्द' क्षिणाः प्राणा' ः,
प्रती' ची दि' क्प्रत्य' ङ्चः प्राणा' ,
उ' दीची दि' गु' दङ्चः प्राणा' ,
ऊर्ध्वा' दि' गूर्ध्वा' ः प्राणा' ,
अ' वाची दि' ग' वाङ्चः प्राणा' ः,
स' र्वा दि' शः स' र्वे प्राणा' ः |
pM6/k4
स' एष' ने' ति ने' त्य् आत्मा' गृह्यो न' हि' गृह्य' ते' ऽशीर्यो न' हि' शीर्य' ते' ऽसङ्गो' ऽसितो न' सज्य' ते न' व्य' थते'
krishna.asaN\^go na hi sajyate asito na vyathate na rishhyaty
अभयं वै' ,
जनक,
प्राप्तो' ऽसी' ति होवाच या' ज्ञवल्क्यः |
स' होवाच जनको' वै' देहोः
न' मस् ते,
याज्ञवल्क्या' भयं त्वा' गच्छताद्यो' नो,
भगवन्
अ' भयं वेद' यस
K add.:
स होवाच जनको वैदेहोऽभयं त्वागच्छताद्
याज्ञवल्क्य,
यो नो,
भगवन्
अभयं वेदयसे;
नमस् तेऽस्तु
इमे' विदेहा' अय' मह' मस्मी' ति |
ch3 = hbM 14.7.1 = hbk16.6.3
pMk1
जनक' ँ ह वै' देहं या' ज्ञवल्क्यो जगामः
स' मेनेन वदिष्य इ' त्य्
K sa meneH na vadishhya ity
अ' थ ह य' ज् जनक' श्च वै' देहो या' ज्ञवल्क्यश्चाग्निहोत्रे' समूद' तुस्
K samUdAte
त' स्मै ह या' ज्ञवल्क्यो व' रं ददौ |
स' ह कामप्रश्न' मेव' वव्रे |
त' ँ हास्मै ददौ |
त' ँ ह सम्रा' ड् एव' पू' र्वः पप्रच्छ |
pMk2
या' ज्ञवल्क्य,
कि' ंज्योतिरय' ं पु' रुष इ' ति |
आदित्य' ज्योतिः,
सम्राड्,
इ' ति होवाचादित्ये' नैवा' य' ं ज्यो' तिषास्ते प' ल्ययते क' र्म कुरुते विप' र्येती' ति |
एव' मेवै' त' द्
याज्ञवल्क्य |
pMk3
अ' स्तमित आदित्ये' ,
याज्ञवल्क्य,
कि' ंज्योतिरेवा' य' ं पु' रुष इ' ति |
चन्द्र' ज्योतिः,
सम्राड्,
इ' ति होवाच;
चन्द्रे' णैवा' य' ं
K chandramA evAsya jyotirbhavati chandramasaivAyaM
ज्यो' तिषास्ते प' ल्ययते क' र्म कुरुते विप' र्येती' ति |
एव' मेवै' त' द्
याज्ञवल्क्य |
pMk4
अ' स्तमित आदित्ये' ,
याज्ञवल्क्य,
चन्द्र' मस्य' स्तमिते,
कि' ंज्योतिरेवा' य' ं पु' रुष इ' ति |
अग्नि' ज्योतिः,
सम्राड्,
इ' ति होवाच
K agnirevAsya jyotirbhavaty
अग्नि' नैव' ज्यो' तिषास्ते प' ल्ययते क' र्म कुरुते विप' र्येती' ति |
एव' मेवै' त' द्
याज्ञवल्क्य |
pMk5
अ' स्तमित आदित्ये' ,
याज्ञवल्क्य,
चन्द्र' मस्य' स्तमिते,
शान्ते' ऽग्नौ' ,
कि' ंज्योतिरेवा' य' ं पु' रुष इ' ति |
वा' ग्ज्योतिः,
सम्राड्, !
इति होवाच
K vAgevAsya jyotirbhavati
वाचै' वा' य' ं ज्यो' तिषास्ते प' ल्ययते क' र्म कुरुते विप' र्येति |
त' स्माद्वै' ,
सम्राड्,
अ' पि य' त्र स्व' ः पाणि' र्न' विनिर्ज्ञा' यते' ,
अथ य' त्र वा' गुच्च' रति
उ' पैव' त' त्र न्ये' ती' ति |
एव' मेवै' त' द्
याज्ञवल्क्य |
pMk6
अ' स्तमित आदित्ये' ,
याज्ञवल्क्य,
चन्द्र' मस्य' स्तमिते,
शान्ते' ऽग्नौ' ,
शान्ता' यां वाचि' ,
कि' ंज्योतिरेवा' य' ं पु' रुष इ' ति |
आत्म' ज्योतिः,
सम्राड्,
इ' ति होवाच
K AtmaivAsya jyotirbhavaty !
आत्म' नैवा' य' ं ज्यो' तिषास्ते प' ल्ययते क' र्म कुरुते विप' र्येती' ति |
pMk7
कतम' आत्मे' ति |
यो' ऽय' ं विज्ञानम' यः पु' रुषः प्राणे' षु हृद्य' न्त' र्ज्योतिः
K viGYAnamayaH prANeshhu hR\^idyanta\`rjyotiH purushhaH
स' समान' ः स' न्नुभौ' लोकौ' स' ंचरति
K anusaMcharati
ध्या' यतीव लेला' यतीव स' धीः
K sa\` hi
स्व' प्नो भूत्वे' म' ं लोक' म' तिक्रामति
kadd. mR\^ityo rUpANi
pMk8
स' वा' अय' ं पु' रुषो जा' यमानः श' रीरमभिसम्प' द्यमानः पाप्म' भिः स' ँसृज्यते |
स' उत्क्रा' मन्म्रिय' माणः पाप्म' नो वि' जहाति
K nijahAti
मृत्यो' रूपा' णि
kom.
pMk9
त' स्य वा' एत' स्य पु' रुषस्य द्वे' एव' स्था' ने भवतः
इद' ं च परलोकस्था' नं च;
स' न्ध्यं तृती' यँ स्वप्नस्था' नं;
त' स्मिन्त्स' न्ध्ये स्था' ने ति' ष्ठनुभे' स्था' ने पश्यतीद' ं च परलोकस्था' नं च |
pM10/k9
अ' थ यथाक्र' मोऽय' ं परलोकस्था' ने भ' वति;
त' माक्र' ममाक्र' म्योभ' यान्पाप्म' न आनन्दा' ँश्च पश्यति |
स' य' त्राय' ं
K om.
प्रस्व' पिति
अस्य' लोक' स्य सर्वा' वतो मा' त्रामपादा' य,
स्वय' ं विह' त्य स्वय' ं निर्मा' य स्वे' न भासा' स्वे' न ज्यो' तिषा प्र' स्वपिति
अ' त्राय' ं पु' रुषः स्वय' ंज्योतिर्भवति |
pM11/k10
न' त' त्र र' था न' र' थयोगा न' प' न्थानो भवन्ति
अ' थ र' थान्र' थयोगान्पथ' ः सृजते |
न' त' त्रानन्दा' मु' दः प्रमु' दो भवन्ति
अ' थानन्दा' न्मु' दः प्रमु' दः सृजते |
न' त' त्र वेशा' न्ताः स्र' वन्त्यः पुष्करि' ण्यो
K pushhkariNyaH sravantyo
भवन्ति
अ' थ वेशा' न्तान्स्र' वन्तीः पुष्करि' णीः
K pushhkariNIH sravantIH
सृजते;
स' हि' कर्ता' |
pM12/k11
त' द' प्य् एते' श्लो' काः
K tadete shlokA bhavanti
स्व' प्नेन शारीर' मभिप्रह' त्या' -
-सुप्तः सुप्ता' नभि' चाकशीति
शु' क्रमादा' य पु' नरै' ति स्था' नं
हिरण्म' यः पौरुष'
K purushha
एकहँस' ः |
pM13/k12
प्राणे' न र' क्षन्न' परं
K avaraM
कुलाय' ं
बहि' ः कुलाया' दमृतश्चरित्वा' ,
स' ईयतेऽमृतो यत्रकाम' ं
हिरण्म' यः पौरुष'
K purushha
एकहँस' ः |
pM14/k13
स्वप्नान्त' उच्चावच' मीय' मानो
रूपा' णि देव' ः कुरुते बहू' न्य्
उते' व स्त्री' भिः सह' मो' दमानो
ज' क्षदुते' वा' पि भ' यानि प' श्यन् |
pM15/k14
आराम' मस्य पश्यन्ति
न' त' ं क' श्चन' पश्यती' ति
K pashyati kashchaneti
त' ं ना' यतं बोधयेदि' त्य् आहुः
दु' र्भिषज्यँ हास्मै' भवति,
य' मेष' न' प्रतिप' द्यते |
pM16/k14
अ' थो ख' ल्वाहुः
जागरितदेश' एवा' स्यैस' ;
या' नि ह्य् ए' व' जा' ग्रत्प' श्यति ता' नि सुप्त' इ' त्य' त्राय' ं पु' रुषः स्वय' ंज्योतिर्भवती' ति |
एव' मेवै' त' द्
या' ज्ञवल्क्यः
K om. i\`ti ...
सो' ऽह' ं भ' गवते सह' स्रं ददामि |
अ' त ऊर्ध्व' ं विमोक्षा' यैव'
K om.
ब्रूही' ति |
pM17/k15
sedchf. infra 40 : K 34
स' वा' एष' एत' स्मिन्त्स्वप्नान्ते'
K saMprasAde
रत्वा' चरित्वा' दृष्ट्वै' व' पु' ण्यं च पाप' ं च पु' नः प्रतिन्याय' ं प्रतियो' न्य् आ' द्रवति बुद्धान्ता' यैव'
ksvapnAyaiva
स' य' द' त्र
K tatra
कि' ङ्चित्प' श्यत्य' नन्वागतस् ते' न भवति
अ' सङ्गो ह्य' य' ं पु' रुष इ' ति |
एव' मेवै' त' द्
याज्ञवल्क्य |
सो' ऽह' ं भ' गवते सह' स्रं ददामि |
अ' त ऊर्ध्व' ं विमोक्षा' यैव' ब्रूही' ति |
pk16
add. K
स वा एष एतस्मिन्त्स्वप्ने रत्वा चरित्वा दृष्ट्वैव पुण्यं च पापं च पुनः प्रतिन्यायं प्रतियोन्य् आद्रवति बुद्धान्तायैव;
स यत्तत्र किङ्चित्पश्यत्यनन्वागतस् तेन भवति
असङ्गो ह्ययं पुरुष इति |
एवमेवैतद्
याज्ञवल्क्य |
सोऽहं भगवते सहस्रं ददामि |
अत ऊर्ध्वं विमोक्षायैव ब्रूहीति |
pk17
add. K
स वा एष एतस्मिन्बुद्धान्ते रत्वा चरित्वा दृष्ट्वैव पुण्यं च पापं च पुनः प्रतिन्यायं प्रतियोन्य् आद्रवति स्वप्नान्तायैव |
pMk18
त' द्य' था महामत्स्य' उभे' कू' ले अनुसंच' रति पू' र्वं चा' परं चैव' मेवा' य' ं पु' रुष एता' उभा' व' न्तावनुस' ंचरति स्वप्नान्त' ं च बुद्धान्त' ं च
pMk19
त' द्य' थास्मि' न्नाकाशे' श्येनो' वा सुपर्णो' वा विपरिप' त्य रान्त' ः सँह' त्य पक्षौ' संलया' यैव' ध्रिय' त,
एव' मेवा' य' ं पु' रुष एत' स्मा अ' न्ताय धवति य' त्र सुप्तो' न' क' ं चन' का' मं काम' यते न' क' ं चन' स्व' प्नं पश्यति |
pMk20
ता' वा' अस्यैता' हिता' ना' म नाड्यो' य' था के' शः सहस्रधा' भिन्न' स् ता' वताणिम्ना' तिष्ठन्ति शुक्ल' स्य नील' स्य पिङ्गल' स्य ह' रितस्य लो' हितस्य पूर्णा' |
अ' थ य' त्रैनं घ्न' न्तीव जिन' न्तीव हस्ती' व विच्छाय' यति ग' र्तमिव प' तति य' देव' जा' ग्रद्भ' यं प' श्यति त' द' त्रा' विद्यया भ' यं
K om.
मन्यते' |
अथ य' त्र रा' जेव देव' इवाह' म्
K deva iva rAjevAham
एव' इद' ँ स' र्वं
ksarvo
अस्मी' ति मन्यते सो' ऽस्य परमो' लोको' |
अथ सुप्तो' न' क' ं चन' का' मं काम' यते न' क' ं चन' स्व' प्नं पश्यति
K om. atha ...
pMk21
त' द्वा' अस्यैत' दात्म' काममाप्त' काममकाम' ं
K etadatichchhando.apahatapApmAbhaya.N
रूप' ं |
त' द्य' था प्रिय' या स्त्रिया' संप' रिष्वक्तो न' बा' ह्यं कि' ं चन' वेद ना' न्तरमेव' मेवा' य' ं पु' रुषः शारिर' आत्मा'
K om. ambo
प्राज्ञ' नात्म' ना संप' रिष्वक्तो न' बा' ह्यं कि' ं चन' वेद ना' न्तरं |
pM22/k21
त' द्वा' अस्यैत' द' तिच्छन्दो' ऽपहतपाप्माभय' ँ
K etadAptakAmamAtmakAmamakAmaM
रूप' म' शोकान्तरम्
kshokAntaram
pM22/k22
अ' त्र पिता' पिता भवति माता' माता लोका' अ' लोका देवा' अ' देवा वे' दा अ' वेदा यज्ञो' ऽयज्ञो'
K om. ambo
अत्र स्तेनो' ऽस्तेनो भवति भ्रूणहा' भ्रूणहा पौल्कसो' ऽपौल्कसश्चाण्डालो' ऽचण्डालः
K chANDyAlo.achaNDyAlaH paulkaso.apaulkaso
श्रमणो' ऽश्रमणस् तापसो' ऽतापसो' ऽनन्वागतः पु' ण्येना' नन्वागतः पापे' न;
तीर्णो' हि' तदा' स' र्वाङ्शो' कान्हृदयस्य भवति |
pMk23
य' द्वै' त' न्न' प' श्यति,
प' श्यन्वै' त' द्द्रष्ट' व्यं
K om.
न' पश्यतिः
न' हि' द्रष्टु' र्दृष्टे' र्विपरिलोपो' विद्य' ते' ऽविनाशित्वान्;
न' तु' त' द्द्विती' यमस्ति,
त' तोऽन्य' द्वि' भक्तं य' त्प' श्येत् |
pMk24
य' द्वै' त' न्न' जि' घ्रति,
जि' घ्रन्वै' त' द्घ्रात' व्यं
K om.
न' जिघ्रति;
न' हि' घ्रातु' र्घ्राते' र्विपरिलोपो' विद्य' ते' ऽविनाशित्वान्
न' तु' त' द्द्विती' यमस्ति,
त' तोऽन्य' द्वि' भक्तं य' ज् जि' घ्रेत् |
pMk25
य' द्वै' त' न्न' रस' यति,
विजान' न्वै' त' द्र' सं
K rasayanvai tan
न' रसयति;
न' हि' रसयितू' र' साद्
K rasayiter
विपरिलोपो' विद्य' ते' ऽविनाशित्वान्
न' तु' त' द्द्विती' यमस्ति,
त' तोऽन्य' द्वि' भक्तं य' द्रस' येत् |
pMk26
य' द्वै' त' न्न' व' दति,
व' दन्वै' त' द्वक्त' व्यं
K om.
न' वदति;
न' हि' वक्तु' र्व' चो
K vakter
विपरिलोपो' विद्य' ते' ऽविनाशित्वान्
न' तु' त' द्द्विती' यमस्ति,
त' तोऽन्य' द्वि' भक्तं य' द्व' देत् |
pMk27
य' द्वै' त' न्न' शृणो' ति,
शृण्व' न्वै' त' च्छ्रोत' व्यं
K om.
न' शृणोति;
न' हि' श्रोतु' ः श्रुते' र्विपरिलोपो' विद्य' ते' ऽविनाशित्वान्
न' तु' त' द्द्विती' यमस्ति,
त' तोऽन्य' द्वि' भक्तं य' च्छृणुया' त् |
pMk28
य' द्वै' त' न्न' मनुते' ,
मन्वानो' वै' त' न्मन्त' व्यं
K om.
न' मनुते;
न' हि' मन्तु' र्मते' र्विपरिलोपो' विद्य' ते' ऽविनाशित्वान्
न' तु' त' द्द्विती' यमस्ति,
त' तोऽन्य' द्वि' भक्तं य' न्मन्वीत' |
pMk29
य' द्वै' त' न्न' स्पृश' ति,
स्पृश' न्वै' त' त्स्प्रष्ट' व्यं
K om.
न' स्पृशति;
न' हि' स्प्रष्टु' ः स्पृष्टे' र्विपरिलोपो' विद्य' ते' ऽविनाशित्वान्
न' तु' त' द्द्विती' यमस्ति,
त' तोऽन्य' द्वि' भक्तं य' त्स्पृशे' त् |
pMk30
य' द्वै' त' न्न' विजाना' ति,
विजान' न्वै' त' द्विज्ञे' यं
K om.
न' वि' जानाति;
न' हि' विज्ञातु' र्विज्ञा' नाद्
K viGYAter
विपरिलोपो' विद्य' ते' ऽविनाशित्वान्
न' तु' त' द्द्विती' यमस्ति,
त' तोऽन्य' द्वि' भक्तं य' द्विजानीया' त् |
pk31
add. K
यत्र वा अन्यदिव स्यात्
तत्रान्योऽन्यत्पश्येद्
अन्योऽन्यज् जिघ्रेद्
अन्योऽन्यद्रसयेद्
अन्योऽन्यद्वदेद्
अन्योऽन्यच्छृणुयाद्
अन्योऽन्यन्मन्वीता
-न्योऽन्यत्स्पृशेद्
अन्योऽन्यद्विजानीयात् |
pM31/k32
सलिल' ए' को द्रष्टा' द्वैतो भवति
एष' ब्रह्मलोक' ः,
सम्राड्,
इ' ति हैनमुवाचैषा' स्य
K iti hainamanushashAsa yAGYavalkya. eshhA\`sya
परमा' गतिः
एषा' स्य परमा' संप' द्
एषो' ऽस्य परमो' लोक' ,
एषो' ऽस्य परम' आनन्द' ,
एत' स्यैवा' नन्द' स्यान्या' नि भूता' नि मा' त्रामु' पजीवन्ति |
pM32
pro m32-42, schribitkrishna 33-36; vide infra
स' यो' मनूष्या' णाँ राद्ध' ः स' मृद्धो भ' वत्यन्ये' षाम' धिपतिः स' र्वैर्मा' नुष्यकैः का' मैः स' म्पन्नतमः,
स' मनुष्या' णां परम' आनन्द' ः |
pM33
pro m32-42, schribitkrishna 33-36; vide infra
अ' थ ये' शत' ं मनुष्या' णामानन्दा' ः,
स' ए' कः पित्ऱ्णा' ं जित' लोकानामानन्द' ः |
pM34
pro m32-42, schribitkrishna 33-36; vide infra
अ' थ ये' शत' ं पित्ऱ्णा' ं जित' लोकानामानन्दा' ः,
स' ए' कः क' र्मदेवानामानन्दो' ,
ये' क' र्मणा देवत्व' मभिसम्प' द्यन्ते |
pM35
pro m32-42, schribitkrishna 33-36; vide infra
अ' थ ये' शत' ं क' र्मदेवानामानन्दा' ः,
स' ए' क आजा' नदेवानामानन्दो' ,
य' श्च [+]+[/+]श्रो' त्रियोऽवृजिनो' ऽकामहतः |
pM36
pro m32-42, schribitkrishna 33-36; vide infra
अ' थ ये' शत' माजा' नदेवानामानन्दा' ः,
स' ए' को देवलोक' आनन्दो' ,
य' श्च [+]+[/+]श्रो' त्रियोऽवृजिनो' ऽकामहतः |
pM37
pro m32-42, schribitkrishna 33-36; vide infra
अ' थ ये' शत' ं देवलोक' आनन्दा' ः,
स' ए' को गन्धर्वलोक' आनन्दो' ,
य' श्च [+]+[/+]श्रो' त्रियोऽवृजिनो' ऽकामहतः |
pM38
pro m32-42, schribitkrishna 33-36; vide infra
अ' थ ये' शत' ं गन्धर्वलोक' आनन्दा' ः,
स' ए' कः प्रजापतिलोक' आनन्दो' ,
य' श्च [+]+[/+]श्रो' त्रियोऽवृजिनो' ऽकामहतः |
pM39
pro m32-42, schribitkrishna 33-36; vide infra
अ' थ ये' शत' ं प्रजापतिलोक' आनन्दा' ः,
स' ए' को ब्रह्मलोक' आनन्दो' ,
य' श्च [+]+[/+]श्रो' त्रियोऽवृजिनो' ऽकामहत |
एष' ब्रह्मलोक' ः,
सम्राड् |
इ' ति हैनं अ' नुशशासैत' दमृतँ |
सो' ऽह' ं भ' गवते सह' स्रं ददामि |
अ' त ऊर्ध्व' ं विमोक्षा' यैव' ब्रूही' ति |
pM40
pro m32-42, schribitkrishna 33-36; vide infra
स' वा' एष' एत' स्मिन्त्सम्प्रसा' दे रत्वा' चरित्वा' दृष्ट्वै' व' पु' ण्यं च पाप' ं च पु' नः प्रतिन्याय' ं प्रतियो' न्य् आ' द्रवति बुद्धान्ता' यैव' ;
स' य' द' त्र कि' ङ्चित्प' श्यत्य' नन्वागतस् ते' न भवति
अ' सङ्गो ह्य' य' ं पु' रुष इ' ति |
एव' मेवै' त' द्
याज्ञवल्क्य |
सो' ऽह' ं भ' गवते सह' स्रं ददामि |
अ' त ऊर्ध्व' ं विमोक्षा' यैव' ब्रूही' ति |
pM41
pro m32-42, schribitkrishna 33-36; vide infra
अ' त्र ह या' ज्ञवल्क्यो बिभाया' ं चकार |
मेधा' वी रा' जा स' र्वेभ्यो मा' न्तेभ्य उ' दरौत्सीदि' ति |
स' य' त्र अणिमा' नं न्ये' ति जर' या वोपत' पता वाणिमान' ं निग' च्छति य' थाम्र' ं वोदु' म्बरं वा पि' प्पलं वा ब' न्धनात्प्रमुच्ये' तैव' एवा' य' ं शारिर' आत्मै' भ्यो' ऽङ्गेभ्यः सप्रमु' च्य पु' नः प्रतिन्याय' ं प्रतियो' न्य् आ' द्रवति प्राणा' यैव' |
pM42
pro m32-42, schribitkrishna 33-36; vide infra
त' द्य' था' नः सु' समाहितमुत्स' र्जद्याया' देव' मेवा' य' ं शारीर' आत्मा' प्राज्ञे' नात्म' नान्वा' रूढ उत्स' र्जद्याति |
pk33
K schribit33-36 pro m32-42; vide supra
स यो मनूष्याणाँ राद्धः समृद्धो भवत्यन्येषामधिपतिः सर्वैर्मानुष्यकैर्भोगैः सम्पन्नतमः,
स मनुष्याणां परम आनन्दो |
अथ ये शतं मनुष्याणामानन्दाः,
स एकः पितृणां जितलोकानामानन्दो |
अथ ये शतं पितृणां जितलोकानामानन्दाः,
स एको गन्धर्वलोक आनन्दो |
अथ ये शतं गन्धर्वलोक आनन्दाः,
स एकः कर्मदेवानामानन्दो ये कर्मणा देवत्वमभिसम्पद्यन्ते |
अथ ये शतं कर्मदेवानामानन्दाः,
स एक आजानदेवानामानन्दो,
यश्च श्रोत्रियोऽवृजिनोऽकामहतो |
अथ ये शतमाजानदेवानामानन्दाः,
स एकः प्रजापतिलोक आनन्दो यश्च श्रोत्रियोऽवृजिनोऽकामहतो |
अथ ये शतं प्रजापतिलोक आनन्दाः,
स एको ब्रह्मलोक आनन्दो यश्च श्रोत्रियोऽवृजिनोऽकामहतो |
अथैष एव परम आनन्द एष ब्रह्मलोकः,
सम्राड्,
इति होवाच याज्ञवल्क्यः |
सोऽहं भगवते सहस्रं ददामि |
अत ऊर्ध्वं विमोक्षायैव ब्रूहीति |
अत्र ह याज्ञवल्क्यो बिभयां चकारः
मेधावी राजा सर्वेभ्यो मान्तेभ्य उदरौत्सीदिति |
pk34
K schribit33-36 pro m32-42; vide supra
स वा एष एतस्मिन्त्स्वप्नान्ते रत्वा चरित्वा दृष्ट्वैव पुण्यं च पापं च पुनः प्रतिन्यायं प्रतियोन्य् आद्रवति बुद्धान्तायैव |
pk35
K schribit33-36 pro m32-42; vide supra
तद्यथानः सुसमाहितमुत्सर्जं यायादेवमेवायं शारीर आत्मा प्राज्ञेनात्मनान्वारूढ उत्सर्जं याति यत्रैतदूर्ध्वोच्छ्वासी भवति |
pk36
K schribit33-36 pro m32-42; vide supra
स यत्रायमणिमानं न्येति जरया वोपतपता वाणिमानं निगच्छति,
तद्यथाम्रं वोदुम्बरं वा पिप्पलं वा बन्धनात्प्रमुच्यत,
एवमेवायं पुरुष एभ्योऽङ्गेभ्यः संप्रमुच्य पुनः प्रतिन्यायं प्रतियोन्य् आद्रवति प्राणायैव |
pM43/k37
त' द्य' था रा' जानमाय' न्तमु' ग्राः प्र' त्येनसः सूतग्रामण्यो' ऽन्नैः पा' नैरवसथै' ः प्रतिक' ल्पन्तेः
अय' मा' यात्यय' मा' गच्छती' ति
एव' ँ हैवंवि' दँ स' र्वाणि भूता' नि प्र' तिकल्पन्तः
इद' ं ब्र' ह्मा' यातीद' मा' गच्छती' ति |
pM44/k38
त' द्य' था रा' जानं प्रयियास' न्तमु' ग्राः प्र' त्येनसः सूतग्रामण्य' उपसमाय' न्त्य्
krishna.abhisamAyanty
एव' म्हैवंवि' दं
K evamevemamAtmAnamantakAle
स' र्वे प्राणा' उ' पसमायन्ति
kabhisamAyanti
य' त्रैत' दूर्ध्वोच्छ्वासी' भ' वति |
ch4 = hbM 14.7.2 = hbk16.6.4
pMk1
स' य' त्राय' म्शारिर' ं
K om.
आत्मा' बल्यं नी' त्य
knyetya
संमोह' मिव न्ये' ति
अ' थैनमेते' प्राणा' अभिसमा' यन्ति;
स' एता' स् तेजोमात्रा' ः समभ्याद' दानो हृदयमेवा' न्व' वक्रामति |
pM2/k1
स' य' त्रैष' चा' क्षुषः पु' रुषः प' राङ् पर्याव' र्तते' ,
अथा' रूपज्ञो भवति |
pM2/k2
एकी' भवति न' पश्यती' त्य् आहुः
एकी' भवति न' जिघ्रती' त्य् आहुः
एकी' भवति न' रसयती' त्य् आहुः
एकी' भवति न' वदती' त्य् आहुः
एकी' भवति न' शृणोती' त्य् आहुः
एकी' भवति न' मनुत इ' त्य् आहुः
एकी' भवति न' स्पृशती' त्य् आहुः
एकी' भवति न' वि' जानाती' त्य् आहुः |
pM3/k2
त' स्य हैत' स्य हृदयस्या' ग्रं प्र' द्योतते;
ते' न प्रद्योते' नैष' आत्मा' नि' ष्क्रामति,
चक्षुष्टो' वा मूर्ध्नो' वान्ये' भ्यो वा शरीरदे' शेभ्यः |
त' मुत्क्रा' मन्तं प्राणो' ऽनू' त्क्रामति,
प्राण' मनूत्क्रा' मन्तँ स' र्वे प्राणा' अनू' त्क्रामन्ति |
संजा' नं एवा' न्व' वक्रामति,
स' एष' ज्ञ' ः स' विज्ञानो भवति
त' ं विद्याकर्म' णी समन्वा' रभेते पूर्वप्रज्ञा' च |
pM4/k3
त' द्य' था तृणजलायुका' तृणस्या' न्तं गत्वा' त्म' नं
K gatvAnyamAkramamAkramyAtmAnam
उपसँह' रति
एव' मेवा' य' म्पु' रुष इद' ं
K AtmedaM
श' रीरं निह' त्या' विद्यां गमयित्वा' त्म' नं
kgamayitvAnyamAkramamAkramyAtmAnam
उपस' ँहरति |
pM5/k4
त' द्य' था पेशस्कारी' पे' शसो मा' त्रामपादा' यान्य' न्
K upAdAyAnyan
न' वतरं कल्याण' तरँ रूप' ं तनुत,
एव' मेवा' य' म्पु' रुष
K AtmA
इदं श' रीरं निह' त्या' विद्यां गमयित्वा' न्य' न्न' वतरं कल्याण' तरँ रूप' ं तनुते
kkurute
पि' त्र्यं वा गान्धर्व' ं वा ब्राह्म' ं वा प्राजापत्य' ं वा दै' वं वान्ये' भ्यो वा भूते' भ्यः
kgAndharvaM vA daivaM vA prAjApatyaM vA brAhmaM vAnyeshhAM vA bhUtAnAM
pM6/k5
स' वा' अय' मात्मा' ब्र' ह्म विज्ञानम' यो मनोम' यो वाङ्म' यः
K om.
प्राणम' यश्चक्षुर्म' यः श्रोत्रम' य आकाशम' यो वायुम' यस् तेजोम' य आपोम' यः पृथिवीम' यः क्रोधम' योऽक्रोधम' यो हर्षम' योऽहर्षम' यः
kshrotramayaH pR\^ithivImaya Apomayo vAyumaya AkAshamayas tejomayo.atejomayaH kAmamayo.akAmamayaH krodhamayo.akrodhamayo
धर्मम' योऽधर्मम' यः सर्वम' यः |
त' द्यदे' दंम' यो
K tadyadetadidaMmayo
अदोम' य इ' ति यथाकारी' यथाचारी' त' था भवति |
साधुकारी' साधु' र्भवति,
पापकारी' पापो' भवति,
पु' ण्यः पु' ण्येन क' र्मणा भवति पाप' ः पापे' न |
pM7/k5
अ' थो ख' ल्वाहुः
कामम' य एवा' य' ं पु' रुष इ' ति;
स' य' थाकामो भवति,
त' थाक्रतुर्
K tatkratur
भवति;
य' थाक्रतुर्
K yatkratur
भवति,
त' त्क' र्म कुरुते' ;
य' त्क' र्म कुरुते'
त' दभिस' ंपद्यते |
pM8/k6
त' देष' श्लो' को भवतिः
त' देव' स' त्त' त्
K saktaH
सह' क' र्मणैति
लिङ्ग' ं म' नो य' त्र नि' षक्तमस्य
प्रा' प्या' न्तं क' र्मणस् त' स्य
य' त्कि' ङ्चेह' करो' त्यय' ं
त' स्माल् लोका' त्पु' नरै' ति
अस्मै' लोका' य क' र्मण,
इ' ति नु' काम' यमानो' ;
अथाकाम' यमानो यो' ऽकामो' नि' ष्काम आत्म' काम आप्त' कामो भ' वति
K AptakAma AtmakAmo
न' त' स्माद्
ktasya
प्राणा' उ' त्क्रामन्ति
अ' त्रैव' सम' वनीयन्ते
K om. atra ...
ब्र' ह्मैव स' न्ब्र' ह्मा' प्येति |
pM9/k7
त' देष' श्लो' को भवतिः
यदा' स' र्वे प्रमुच्य' न्ते
का' मा ये' ऽस्य हृदि' श्रिता'
अ' थ म' र्त्योऽमृतो भवत्य्
अ' त्र ब्र' ह्म स' मश्नुत इ' ति |
pM10/k7
त' द्य' थाहिनिर्व्लयनी' वल्मी' के मृता' प्र' त्यस्ता श' यीतैव' मेवे' द' ं श' रीरं शेते' |
अथाय' मन' स्थिकोऽशरी' रः प्राज्ञ' आत्मा'
K ayamasharIro.amR\^itaH prANo
ब्र' ह्मैव' लोक'
kteja
एव' ,
सम्राड्,
इ' ति होवाच या' ज्ञवल्क्यः
K om. iti ...
सो' ऽह' ं भ' गवते सह' स्रानि ददामी' ति होवाच जनको' वै' देहः |
pM11/k8
त' द' प्य् एते' श्लो' का
K tadete shlokA bhavanty
अ' णुः प' न्था वि' तरः
K vitataH
पुराणो' ;
मा' ँ स्पृष्टो' ऽनुवित्तो म' यैव'
ते' न धी' रा अ' पियन्ति ब्रह्मवि' द
उत्क्र' म्य स्वर्ग' ं लोक' मितो' वि' मुक्ताः
K svargaM lokamita UrdhvaM vimuktAH
pM12/k9
त' स्मिङ्छुक्ल' मुत' नी' लमाहुः
पि' ङ्गलँ ह' रितं लो' हितं चै-
-ष' प' न्था ब्र' ह्मणा हा' नुवित्तस्
ते' नैति ब्रह्मवि' त्तैजस' ः पुण्यकृच्च
K puNyakR\^ittaijasashcha
pM13/k10
अन्ध' ं त' मः प्र' विशन्ति
ये' ऽसम्भूति' म्
krishna.avidyAm
उपा' सते;
त' तो भू' य इव ते' त' मो
य' उ सम्भूत्या' ँ
K vidyAyA.N
रता' ः |
pM14/k11
असुर्या'
K anandA
ना' म ते' लोका'
अन्धे' न त' मसा' वृतास्
ता' ँस् ते' प्रे' त्या' पिगच्छत्य्
abhigachchhantय्
अ' विद्वाँसोऽबुधा' ज' नाः |
pM15/k14
त' देव' स' न्तस् त' दु भवामो
K ihaiva santo.atha vidmas tadvayaM
न' चे' दवेदी
K avedir
म' हती वि' नष्टिर्
ये' त' द्विदु' रमृतास् ते' भवन्त्य्
अ' थे' तरे दुःख' मेवो' पयन्ति
K apiyanti
pM16/k12
आत्मा' नं चे' द्विजानीया' द्
अय' मस्मी' ति पु' रुषः
कि' मिच्छ' न्क' स्य का' माय
श' रीरम' नु स' ंचरेत्
K saMjvaret
pM17/k13
य' स्या' नुवित्तः प्र' तिबुद्ध आत्मा' -
-स्मि' न्त्संदेह्ये' ग' हने प्र' विष्टः
स' विश्वकृत्
स' हि' स' र्वस्य कर्ता'
त' स्य लोक' ः,
स' उ लोक' एव' |
pM18/k15
यदै' त' मनुप' श्यति
अत्मा' नं देव' म' ङ्जसे' -
-शानं भूतभव्य' स्य
न' त' दा वि' चिकित्सति
K tato vi\`jugupsate
pM19/k17
य' स्मिन्प' ङ्च पङ्चजना'
आकाश' श्च प्र' तिष्ठितस्
त' मेव' मन्य आत्मा' नं
विद्वा' न्ब्र' ह्मामृतोऽमृतं |
pM20/k16
य' स्माद' र्वाक्संवत्सरो'
अहोभिः परिव' र्तते
त' द्देवा' ज्यो' तिषां ज्यो' तिर्
आ' युर्ह्य् उ' पा' सते
K hopAsate
अमृतं |
pM21/k18
प्राण' स्य प्राण' मुत' च' क्षुषश्च' क्षुर्
उत' श्रो' त्रस्य श्रो' त्रम' न्नस्या' न्नं
म' नसो ये' म' नो विदु' ः
ते' नि' चिक्युर्ब्र' ह्म पुराण' म' ग्र्यं
K 19
म' नसैवा' प्त' व्यं
K anudrashhTavyaM
ने' ह' ना' नास्ति कि' ं चन' |
pM22/k19
मृत्यो' ः स' मृत्यु' माप्नोति
य' इह' ना' नेव प' श्यति
K 20
म' नसैवा' नुद्रष्ट' व्यं
K ekadhaivAnudrashhTavyam
एत' दप्र' मयं ध्रुव' म् |
pM23/k20
वि' रजः प' र आकाशा' द्
अज' आत्मा' महा' न्ध्रुव' स्
K 21
त' मेव' धी' रो विज्ञा' य
प्रज्ञा' ं कुर्वीत ब्राह्मणो'
ना' नुध्यायाद्बहू' ङ्छ' ब्दान्
वाचो' विग्ला' पनँ हि' त' द्
इ' ति |
pM24/k22
स' वा' अय' मात्मा'
ksa vA eshha mahAnaja AtmA yo.ayaM viGYAnamayaH prANeshhu;
य एषोऽन्तर्हृदय आकाशः
tasmi~Nchhete
स' र्वस्य व' शी स' र्वस्ये' शानः स' र्वस्या' धिपतिः स' र्वमिद' ं प्र' शास्ति य' दिद' ं कि' ङ्च
K om. sarvam...
स' न' साधु' ना क' र्मणा भू' यान्नो' एवा' साधु' ना क' नीयान्
K add. eshha sarveshvara
एष' भूताधिपति' र्
K add. eshha bhUtapAla
एष' लोकेश्वर' एश' लोकपाल'
kom. ambo
स' से' तुर्वि' धरण एषा' ं लोका' नाम' संभेदाय |
pM25/k22
त' मेत' ं वेदानुवचने' न
K add. brAhmaNA
विविदिष' न्ति,
ब्रह्मचर्ये' न त' पसा श्रद्ध' या यज्ञे' ना' नाशकेन चैत' म्
K brahmacharyena yaGYena dAnena tapasAnAshakenaitam
एव' विदित्वा' मुनि' र्भवति
एत' मेव' प्रव्रा' जिनो लोक' मीप्स' न्तः
K ichchhantaH
प्र' व्रजन्ति |
pM26/k22
एत' द्ध स्म वै' त' त्पू' र्वे ब्रह्मणा' अनुचाना'
K om. ambo
विद्वा' ँसः प्रजा' ं न' कामयन्तेः
कि' ं प्रज' या करिष्यामो ये' षां नोऽय' मात्मा' य' म्लोक' इ' ति |
ते' ह स्म पुत्रैषणा' याश्च वित्तैषणा' याश्च लोकैषणा' याश्च व्युत्था' या' थ भिक्षाच' र्यं चरन्ति;
या' ह्य् ए' व' पुत्रैषणा' सा' वित्तैषणा' ,
या' वित्तैषणा' सा' लोकैषणो' भे' ह्य् ए' ते' ए' षणे एव' भ' वतः |
pM27/k22
स' एष' ने' ति ने' त्य् आत्मा' गृह्यो न' हि' गृह्य' ते' ,
अशीर्यो न' हि' शीर्य' ते' ,
असङ्गो' ऽसितो न' सज्य' ते न' व्य' थते'
k.asaN\^go na hi sajyate,
.asito na vyathate na rishhyatय्
अतः [+]+[/+]पाप' मकरवमि' त्य' तः कल्या' णमकरवमि' त्य् उभे' -उभे ह्य् ए' ष'
K ubhe u haivaishha
एते' त' रति
अमृतः साध्वसाधु' नी
K om. amR\^itaH ...
नै' नं कृता' कृते तपतः |
pM28/k23
त' देत' दृचा' भ्यु' क्तम्
एष' नि' त्यो महिमा' ब्राह्मण' स्य
न' क' र्मणा वर्धते नो' क' नीयान् |
त' स्यैव' स्यात्पदवित्त' ं विदित्वा'
न' क' र्मणा लिप्यते
K lipyate karmaNA
पाप' केने' ति |
त' स्मादेवंवि' च्छान्तो' दान्त' उ' परतस् तितिक्षु' ः श्रद्धा' वित्तो
K samAhito
भूत्वा' त्म' न्य् एवा' त्मा' नं पश्येत्!
kpashyati
स' र्वमात्मा' नं पश्यति,
स' र्वोऽअस्यात्मा' भवति स' र्वस्यात्मा' भवति
K om. sarvo ...,
add. nainaM pApmA tarati
स' र्वं पाप्मा' नं तरति,
नै' नं पाप्मा' तपति,
स' र्वं पाप्मा' नं तपति,
विपापो' विरजो' विजिघत्सो' ऽपिपसो'
K om. ambo, add..avichikitso
ब्राह्मणो' भवति,
य' एव' ं वे' द
kom. ya ...,
add. eshha brahmalokaH,
सम्राड्,
एनं प्राप्तोऽसीति होवाच याज्ञवल्क्यः |
so.ahaM bhagavate videhAndadAmi mAmchApi saha dAsyAyeti
pMk24
स' वा' एष' महा' नज' आत्मा' न्नादो' वसुदा' नः |
स' यो' हैव' मेत' ं महा' न्तमज' मात्मा' नमन्नाद' ं वसुदा' नं वे' द,
विन्दते व' सु
kvasudAno.
विन्दते वसु,
ya evaM veda
pM30/k25
स' वा' एष' महा' नज' आत्मा' ज' रोऽम' रोऽभ' योऽमृतो
krishna.amR\^ito.abhayo
ब्र' ह्मा' भयं वै' ,
जनक,
प्रा' प्तोऽसी' ति होवाच या' ज्ञवल्क्यः
K add.:
सो' ऽह' ं भ' गवते विदेहा' न्ददामि माम्चा' पि सह' दा' स्याये' ति
K om. so ...
ch5 = hbM 14.7.3 = hbk16.6.4.
pMk1
अ' थ ह या' ज्ञवल्क्यस्य द्वे' भार्ये' बभूवतुर्मै' त्रेयी च कात्यायनी' च;
त' योर्ह मै' त्रेयी ब्रह्मवादि' नी बभूव,
स्त्रीप्रज्ञै' व' त' र्हि कात्यायनी' |
सो' ऽन्य' द्वृत्त' मुपाकरिष्य' माण
K atha ha yAGYavalkyo.anyadvR\^ittamupAkarishhyan
pMk2
या' ज्ञवल्क्योः
मै' त्रेयी' ति होवाच
K maitreyIti hovAcha yAGYavalkyaH
प्रव्रजिष्य' न्वा' अरेऽह' मस्मात्स्था' नादस्मि |
ह' न्त तेऽन' या कत्यायन्या' न्तं कर' वाणी' ति |
pMk3
सा' होवाच मै' त्रेयीः
य' न्नु' म इय' ं,
भगोः,
स' र्वा पृथिवी' वित्ते' न पूर्णा' स्या' त्
स्या' ं न्व' ह' ं ते' नामृता' हो३ ने' ति |
ने' ति होवाच या' ज्ञवल्क्यो,
य' थैवो' पकरण' वतां जीवित' ं,
त' थैव' ते जीवित' ँ स्याद्
अमृतत्व' स्य तु' ना' शा' स्ति वित्ते' ने' ति |
pMk4
सा' होवाच मै' त्रेयीः
ये' नाह' ं ना' मृता स्या' ं,
कि' मह' ं ते' न कुर्यां |
य' देव' भ' गवान्वे' द,
त' देव' मे ब्रूही' ति |
pMk5
स' होवाच या' ज्ञवल्क्यः
प्रिया'
K add. vai
ख' लु नो भ' वती सती' ,
प्रिय' म' वृतद्
K avR\^idhad
ध' न्त ख' लु
K tarhi
भवति,
तेऽह' ं त' द्वक्ष्यामि,
व्या' ख्यामि ते;
वा' चं तु' मे नि' दिध्यासस्वे' ति
K add.:
एतद्व्याख्यास्यामि ते;
vyAchakshANasya tu\` me nididhyAsasveti
ब्र' वितु भ' गवानि' ति
K om.
pMk6
स' होवाच या' ज्ञवल्क्यो
K om.
न' वा' अरे प' त्युः का' माय प' तिः प्रियो' भवति
आत्म' नस् तु' का' माय प' तिः प्रियो' भवति;
न' वा' अरे जाया' यै का' माय जाया' प्रिया' भवति
आत्म' नस् तु' का' माय जाया' प्रिया' भवति;
न' वा' अरे पुत्रा' णां का' माय पुत्रा' ः प्रिया' भवन्ति
आत्म' नस् तु' का' माय पुत्रा' ः प्रिया' भवन्ति;
न' वा' अरे वित्त' स्य का' माय वित्त' ं प्रिय' ं भवति
आत्म' नस् तु' का' माय वित्त' ं प्रिय' ं भवति;
न' वा' अरे ब्र' ह्मणः का' माय ब्र' ह्म प्रिय' ं भवति
आत्म' नस् तु' का' माय ब्र' ह्म प्रिय' ं भवति;
न' वा' अरे क्षत्र' स्य का' माय क्षत्र' ं प्रिय' ं भवति
आत्म' नस् तु' का' माय क्षत्र' ं प्रिय' ं भवति;
न' वा' अरे लोका' नां का' माय लोका' ः प्रिया' भवन्ति
आत्म' नस् तु' का' माय लोका' ः प्रिया' भवन्ति;
न' वा' अरे देवा' नां का' माय देवा' ः प्रिया' भवन्ति
आत्म' नस् तु' का' माय देवा' ः प्रिया' भवन्ति;
न' वा' अरे भूता' नां का' माय भूता' नि प्रिया' णि भवन्ति
आत्म' नस् तु' का' माय भूता' नि प्रिया' णि भवन्ति;
न' वा' अरे स' र्वस्य का' माय स' र्वं प्रिय' ं भवति
आत्म' नस् तु' का' माय स' र्वं प्रिय' ं भवति
आत्मा' वा' अरे द्रष्ट' व्यः श्रोत' व्यो मन्त' व्यो निदिध्यासित' व्यो,
मै' त्रेयि
आत्म' नो वा' अरे द' र्शनेन श्र' वणेन मत्या' विज्ञा' नेनेद' ँ स' र्वं विदित' म् |
pMk7
ब्र' ह्म त' ं प' रादाद्
यो' ऽन्य' त्रात्म' नो वे' दान्वे' द;
वे' दास् त' ं प' रादुः
यो' ऽन्य' त्रात्म' नो वे' दान्वे' द;
यज्ञा' स् त' ं प' रादुः
यो' ऽन्य' त्रात्म' नो यज्ञा' न्वे' द
K add.:
योऽन्यत्रात्मनो ब्रह्म वेद;
क्षत्रं तं परादाद्
योऽन्यत्रात्मनः क्षत्रं वेद;
लोकास् तं परादुः
योऽन्यत्रात्मनो लोकान्वेद;
देवास् तं परादुः
योऽन्यत्रात्मनो देवान्वेद;
वेदास् तं परादुः
yo.anyatrAtmano vedAnveda
भूता' नि त' ं प' रादुः
यो' ऽन्य' त्रात्म' नो भूता' नि वे' द;
स' र्वं त' ं प' रादाद्
यो' ऽन्य' त्रात्म' नः स' र्वं वे' द;
इद' ं ब्र' ह्मेद' ं क्षत्र' मिमे' लोका' इमे' देवा' इमे' वे' दा इमा' नि भूता' नीद' ँ स' र्वं य' दय' मात्मा' |
pMk8
स' य' था दुन्दुभे' र्हन्य' मानस्य न' बा' ह्याङ्छ' ब्दाङ्छक्नुया' द्ग्र' हणाय,
दुन्दुभे' स् तु' ग्र' हणेन दुन्दुभ्याघात' स्य वा श' ब्दो गृहीत' ः |
pM9/k10
स' य' था वी' णायै वाद्य' मानायै न' बा' ह्याङ्छ' ब्दाङ्छक्नुया' द्ग्र' हणाय,
वी' णायै तु' ग्र' हणेन वीणावाद' स्य वा श' ब्दो ग्र्हीत' ः |
pM10/k9
स' य' था शङ्ख' स्य ध्माय' मानस्य न' बा' ह्याङ्छ' ब्दाङ्छक्नुया' द्ग्र' हणाय,
शङ्ख' स्य तु' ग्र' हणेन शङ्खध्म' स्य वा श' ब्दो गृहीत' ः |
pMk11
स' य' थार्द्रैधाग्ने' रभ्या' हितस्य पृथग्धूमा' विनिश्च' रन्ति
एव' ं वा' अरेऽस्य महतो' भूत' स्य नि' श्वसितम्
K niHshvasitam
एत' द्य' दृग्वेदो' यजुर्वेद' ः सामवेदो' ऽथर्वाङ्गिर' स इतिहास' ः पुराण' ं विद्या' उपनिष' दः श्लो' काः सू' त्राण्यनुव्याख्या' नानि व्याख्या' ननि दत्त' म्
kishhTaM
हुत' माशित' ं पायित' मय' ं च लोक' ः प' रश्च लोक' ः स' र्वाणि च भूता' न्यस्यै' वै' ता' नि स' र्वाणि नि' श्वसितानि
kniHshvasitAni
pMk12
स' य' था स' र्वासामपा' ँ समुद्र' एकायन' म्
एव' ँ स' र्वेषाँ स्पर्शा' नां त्व' गेकायन' म्
एव' ँ स' र्वेषां गन्धा' नां ना' सिके एकायन' म्
एव' ँ स' र्वेषाँ र' सानां जिह्वै' कायन' म्
एव' ँ स' र्वेषाँ रूपा' णां च' क्षुरेकायन' म्
एव' ँ स' र्वेषं श' ब्दानां श्रो' त्रमेकायन' म्
एव' ँ स' र्वेषाँ सङ्कल्पा' नां म' न एकायन' म्
kmana ekAyanam
एव' ँ स' र्वेषां वे' दानां हृदयमेकायन' म्
एव' ँ स' र्वेषां क' र्मणाँ ह' स्तावेकायन' म्
एव' ँ स' र्वेषाम' ध्वनां पा' दावेकायन' म्
एव' ँ स' र्वेषामानन्दा' नामुप' स्थ एकायन' म्
एव' ँ स' र्वेषां विसर्गा' णां पा' युरेकायन' म्
एव' ँ स' र्वासां विद्या' नाँ वा' गेकायन' म्
pMk13
स' य' था सैन्धवघनो' ऽनन्त' रो' ऽबाह्य' ः कृत्स्नो' रसघन' एव' स्या' द्
K om.
एव' ं वा' अरे इद' ं मह' द्भूत' मनन्त' मपर' ं
K are.ayamAtmAnantaro.abAhyaH
कृत्स्न' ः प्रज्ञानघन' एवै' ते' भ्यो भूते' भ्यः समुत्था' य ता' नि~ एवा' नुवि' नयति;
न' प्रे' त्य संज्ञा' स्ती' त्यरे ब्रविमी' ति होवाच या' ज्ञवल्क्यः |
pMk14
सा' होवाच मै' त्रेयि
अ' त्रैव' मा भ' गवान्मोहान्त' मा' पीपदन्
न' वा' अह' मिम' ं वि' जानामी' तिः
न' प्रे' त्य संज्ञा' स्ती' ति
K om. na ...
pM15/k14
स' होवाच या' ज्ञवल्क्यो
K om.
न' वा' अरेऽह' ं मो' हं ब्रवीमि
अविनाशी' वा' अरेऽय' मात्मा' नुच्छित्तिधर्मा,
मात्रासँसर्ग' स् त्व' स्य भवति
K om. mAtrAx ...
pMk16
pro m16-25, K schribit15; vide infra
य' द्वै' त' न्न' प' श्यति,
प' श्यन्वै' त' द्द्रष्ट' व्यं न' पश्यति;
न' हि' द्रष्टु' र्दृष्टे' र्विपरिलोपो' विद्य' ते' ऽविनाशित्वान्
न' तु' त' द्द्विती' यमस्ति,
त' तोऽन्य' द्वि' भक्तं य' त्प' श्येत् |
pMk17
pro m16-25, K schribit15; vide infra
य' द्वै' त' न्न' जि' घ्रति,
जि' घ्रन्वै' त' द्घ्रत' व्यं न' जिघ्रति;
न' हि' घ्रातु' र्घ्राते' र्विपरिलोपो' विद्य' ते' ऽविनाशित्वान्
न' तु' त' द्द्विती' यमस्ति,
त' तोऽन्य' द्वि' भक्तं य' ज् जि' घ्रेत्
pMk18
pro m16-25, K schribit15; vide infra
य' द्वै' त' न्न' रस' यति,
विजान' न्वै' त' द्र' सं न' रसयति;
न' हि' रसयितू' र' साद्विपरिलोपो' विद्य' ते' ऽविनाशित्वान्
न' तु' त' द्द्विती' यमस्ति,
त' तोऽन्य' द्वि' भक्तं य' द्रस' येत् |
pMk19
pro m16-25, K schribit15; vide infra
य' द्वै' त' न्न' व' दति,
व' दन्वै' त' द्वक्त' व्यं न' वदति;
न' हि' वक्तु' र्व' चो विपरिलोपो' विद्य' ते' ऽविनाशित्वान्
न' तु' त' द्द्विती' यमस्ति,
त' तोऽन्य' द्वि' भक्तं य' द्व' देत् |
pMk20
pro m16-25, K schribit15; vide infra
य' द्वै' त' न्न' शृणो' ति,
शृण्व' न्वै' त' च्छ्रोत' व्यं न' शृणोति;
न' हि' श्रोतु' ः श्रुते' र्विपरिलोपो' विद्य' ते' ऽविनाशित्वान्
न' तु' त' द्द्विती' यमस्ति,
त' तोऽन्य' द्वि' भक्तं य' च्छृणुया' त् |
pMk21
pro m16-25, K schribit15; vide infra
य' द्वै' त' न्न' मनुते' ,
मन्वानो' वै' त' न्मन्त' व्यं न' मनुते;
न' हि' मन्तु' र्मते' र्विपरिलोपो' विद्य' ते' ऽविनाशित्वान्
न' तु' त' द्द्विती' यमस्ति,
त' तोऽन्य' द्वि' भक्तं य' न्मन्वीत' |
pMk22
pro m16-25, K schribit15; vide infra
य' द्वै' त' न्न' स्पृश' ति,
स्पृश' न्वै' त' त्स्प्रष्ट' व्यं न' स्पृशति;
न' हि' स्प्रष्टु' ः स्पृष्टे' र्विपरिलोपो' विद्य' ते' ऽविनाशित्वान्
न' तु' त' द्द्विती' यमस्ति,
त' तोऽन्य' द्वि' भक्तं य' त्स्पृशे' त् |
pMk23
pro m16-25, K schribit15; vide infra
य' द्वै' त' न्न' विजाना' ति,
विजान' न्वै' त' द्विज्ञे' यं न' वि' जानाति;
न' हि' विज्ञातु' र्विज्ञा' नाद्विपरिलोपो' विद्य' ते' ऽविनाशित्वान्
न' तु' त' द्द्विती' यमस्ति,
त' तोऽन्य' द्वि' भक्तं य' द्विजानीया' त् |
pM24
pro m16-25, K schribit15; vide infra
य' त्र वा' अन्य' दिव स्या' त्
त' त्रऽन्यो' ऽन्य' त्पश्येद्
अन्यो' ऽन्य' ज् जिघ्रेद्
अन्यो' ऽन्य' द्रसयेद्
अन्यो' ऽन्य' द्वदेद्
अन्यो' ऽन्य' च्छृणुयाद्
अन्यो' ऽन्य' न्मन्वीतान्यो' ऽन्य' त्स्पृशेद्
अन्यो' ऽन्य' द्वि' जानीयात् |
pM25
pro m16-25, K schribit15; vide infra
य' त्र त्व' स्य स' र्वमात्मै' वा' भूत्
त' त्के' न क' ं पश्येत्
त' त्के' न क' ं जिघ्रेत्
त' त्के' न क' ँ रसयेत्
त' त्के' न क' मभि' वदेत्
त' त्के' न कं शृणुयात्
त' त्के' न क' ं मन्वीत,
त' त्के' न कँ स्पृशेत्
त' त्के' न क' ं वि' जानीयाद् |
ये' नेद' ँ स' र्वं विजाना' ति,
त' ं के' न वि' जानीयाद् |
विज्ञाता' रमरे के' न वि' जानीयादि' त्य् उक्ता' नुशासनासि,
मै' त्रेयि
एता' वदरे ख' ल्वमृतत्व' मि' ति होक्त्वा' या' ज्ञवल्क्यो प्र' वव्रज |
pk15
K schribitpro m24-25; vide supra
यत्र हि द्वैतमिव भवति,
तदितर इतरं पश्यति,
तदितर इतरं जिघ्रति,
तदितर इतरँ रसयति,
तदितर इतरमभिवदति,
तदितर इतरँ शृणोति,
तदितर इतरं मनुते,
तदितर इतरँ स्पृशति,
तदितर इतरं विजानाति |
यत्र त्वस्य सर्वमात्मैवाभूत्
तत्केन कं पश्येत्
तत्केन कं जिघ्रेत्
तत्केन कँ रसयेत्
तत्केन कमभिवदेत्
तत्केन कँ शृणुयात्
तत्केन कं मन्वीत,
तत्केन कँ स्पृशेत्
तत्केन कं विजानीयाद् |
येनेदँ सर्वं विजानाति,
तं केन विजानीयात् |
स एष नेति नेत्य् आत्मागृह्यो न हि गृह्यते,
अशीर्यो न हि शीर्यते,
असङ्गो न हि सज्यते,
असितो न व्यथते न रिष्यति |
विज्ञातारमरे केन विजानीयादित्य् उक्तानुशासनासि,
मैत्रेयि
एतावदरे खल्वमृतत्वमिति होक्त्वा याज्ञवल्क्यो विजहार |
[पनुस्तुब्]
pM26
pro m5,26-28, schribitkrishna 6; vide infra
अ' थ वँश' ः |
त' दिद' ं वय' ं
हौ' र्पणाय्याच्,
छौ' र्पणय्यो गौ' तमाद्
गौ' तमो व' त्स्याद्
व' त्स्यो वा' त्स्याच्च पाराशर्या' च्च,
पाराशर्य' ः षा' ंकृत्याच्च भा' रद्वाजाच्च,
भा' रद्वाज औदावहे' श्च हा' ण्डिल्याच्च,
हा' ण्डिल्यो वै' जवापाच्च गौतमा' च्च,
गौ' तमो वै' जवापायनाच्च वैष्टपुरेया' च्च,
वै' ष्टपुरेयः हा' ण्डिल्याच्च ऱौहिणायना' च्च,
ऱौ' हिणायनः हौ' नकाच्च जैवन्तायना' च्च ऱैभ्या' च्च,
ऱै' भ्यः पौ' तिमाष्यायणाच्च कौण्डिन्यायना' च्च,
कौ' ण्डिन्यायनः कौण्डिन्या' भ्यां,
कौ' ण्डिन्या और्णवाभे' भ्यः,
और्णवाभाः कौण्डिन्या' त्
कौ' ण्डिन्यः कौण्डिन्या' च्चाग्निवेश्या' च्च,
pM27
pro m5,26-28, schribitkrishna 6; vide infra
अग्निवेश्य' ः षौ' तवात्
षौ' तवः पा' राशर्यात्
पा' राशर्यो जा' तुकर्ण्यात्
जा' तुकर्ण्यो भा' रद्वाजाद्
भा' रद्वाजो भारद्वाजा' च्चासुरायणा' च्च गौतमा' च्च,
गौ' तमो भा' रद्वाजाद्
भा' रद्वाजो वलाकाकौशिता' द्
वलाकाकौशित' ः काषायणा' त्
काषायण' ः षौ' करायना' त्
षौ' करायन' स् ट्रै' वणेः
ट्रै' वणिराउ' पजन्धनेः
आउ' पजन्धनिर्षायकायना' त्
षायकायन' ः कौशिकायने' ः,
कौशिकायनि' र्घृतकौशिका' द्
घृतकौशिक' ः पा' राशर्यात्
पा' राशर्यः पा' राशर्यात्
पा' राशर्यः जा' तुकर्ण्यात्
जा' तुकर्ण्यो भा' रद्वाजाद्
भा' रद्वाजो भारद्वाजा' च्चासुरायणा' च्यस्का' च्च,
असुरायण' स् ट्रै' वणेः
ट्रै' वणिराउ' पजन्धने' ः
आउ' पजन्धनि' ःअसुरेः
असुरिर्भा' रद्वाजाद्
भा' रद्वाजो अत्रेया' त्
pM28
pro m5,26-28 schribitkrishna 6; vide infra
अत्रेयो' मा' ण्टेः,
मा' ण्टिर्गौ' तमाद्
गौ' तमो गौ' तमाद्
गौ' तमो वा' त्स्याद्
वा' त्स्यः हा' ण्डिल्याच्,
छा' ण्डिल्यः कै' शोर्यात्का' प्यात्
कै' शोर्यः का' प्यः कुमारहरिता' त्
कुमारहरितो' गालवा' द्
गालवो' विदर्भीकौण्डिन्या' द्
विदर्भीकौण्डिन्यो' वत्स' नपातो बा' भवाद्
वत्स' नपाद्बा' भवः पथ' ः षौ' भरात्
प' न्थाः षौ' भरोऽया' स्यादाङ्गिरसा' द्
आया' स्योऽङ्गिरस' ऽभुतेस् ट्वा' ष्ट्राद्
आ' भुतिः ट्वा' ष्ट्रो विश्व' रूपात्ट्वा' ष्ट्राद्
विश्व' रूपस् ट्वा' ष्ट्रोऽश्वि' भ्यां,
आश्वि' नौ डधि' च अथर्वणा' द्
डध्य' ङ्ङ् अथर्वणो' ऽथर्वणो' डै' वाद्
आथर्वा डै' वोः मृत्यो' ः प्राध्व' ँसनान्
मृत्यु' ः प्राध्व' ँसनः प्राध्व' ँसनान्
प्राध्व' ँसनः एकर्षे' ः
एकर्षि' र्विप्र' जित्तेः
विप्र' जित्तिर्व्य' ष्टेः
व्य' ष्टिः षना' रोः,
षना' रुः षनात' नात्
षनात' नः ष' नगात्
ष' नगः परमेष्टि' णः,
परमेष्टी' ब्र' ह्मणो |
ब्र' ह्म स्वय' म्भू ब्र' ह्म न' मः |
chk6
schribitpro m5,26-28
pk1
अथ वँशः
पशुतिमाष्यो गौपवनाद्
गौपवनः पशुतिमाष्यात्
पशुतिमाष्यो गौपवनाद्
गौपवनः कौशिकात्
कौशिकः कौण्डिन्यात्
कौण्डिन्यः हाण्डिल्याच्,
छाण्डिल्यः कौशिकाच्च गौतमाच्च,
गौतमो
pk2
अग्निवेश्याद्
अग्निवेश्यो गार्ग्याद्
गार्ग्यो गार्ग्याद्
गार्ग्यो गौतमाद्
गौतमः षैतवात्
षैतवः पाराशर्यायणात्
पाराशार्यायणो गार्ग्यायणाद्
गार्ग्यायण ऊद्दालकायनाद्
ऊद्दालकायनो जाबालायनात्
जाबालायनो माध्यन्दिनायनान्
माध्यन्दिनायनः षौकरायणात्
षौकरायणः काषायणात्
काषायणः षायकायनात्
षायकायनः कौशिकायनेः,
कौशिकायनिः
pk3
घृतकौशिकाद्
घृतकौशिकः प्राशर्यायणात्
पारशर्यायणः पाराशर्यात्
पाराशर्यो जातूकर्ण्यात्
जातूकर्ण्य असुरायणाच्च यास्काच्च,
असुरायणस् ट्रैवणेः
ट्रैवणिरौपजन्धनेः,
औपजन्धनिरसुरेः,
असुरिर्भारद्वाजाद्
भारद्वाज अत्रेयाद्
अत्रेयो माण्टेः,
माण्टिर्गौतमाद्
गौतमो गौतमाद्
गौतमो वात्स्याद्
वात्स्यः हाण्डिल्याच्,
छाण्डिल्यः कैशोर्यात्काप्यात्
कैशोर्यः काप्यः कुमारहारितात्
कुमारहारितो गालवाद्
गालवो विदर्भीकौण्डिन्याद्
विदर्भीकौण्डिन्यो वत्सनपातो बाभ्रवाद्
वत्सनपाद्बाभ्रवः पथः षौभरात्
पन्थाः षौभरोऽयास्यादङ्गिरसाद्
आयास्य अङ्गिरस अभूतेस् ट्वाष्ट्राद्
अभूतिस् ट्वाष्ट्रो विवरूपात्ट्वाष्ट्राद्
विश्वरूपस् ट्वाष्ट्रोऽव्शि' भ्याम्
आश्वि' नौ डधीच अथर्वणाद्
डध्यङ्ङ् अथर्वणोऽथर्वणो डैवाद्
आथर्वा डैवो मृत्योः प्राध्वँसनान्
मृत्यु' ः प्राध्वँसनः प्रध्वँसनात्
प्रध्वँसन एकर्षेः,
एकर्षिर्विप्रचित्तेः,
विप्रचित्तिर्व्यष्टेः,
व्यष्टिः षनारोः,
षनारुः षनातनात्
षनातनः षनगात्
षनगः परमेष्ठिनः,
परमेष्ठी ब्रह्मणो,
ब्रह्म स्वयंभु,
ब्रह्मणे नमः |
[प्नोर्मल्]
ch5 = hbM 14.8 = hbk16.7
ch1
पूर्ण' मद' ः,
पूर्ण' मिद' ं,
पूर्णा' त्पूर्ण' मु' दच्यते |
पूर्ण' स्य पूर्ण' मादा' य,
पूर्ण' मेवा' वशिष्यते |
ख' ं ब्र' ह्म,
ख' ं पुराण' ं,
वायु' रं ख' म्
इ' ति ह स्माह कौ' रव्यायणीपु' त्रो |
वे' दोऽय' ं,
ब्राह्मणा' विदुः
वे' दैनेन य' द्वेदित' व्यम् |
ch2
pMk1
त्र' याः प्राजापत्या' ः प्रजा' पतौ पित' रि ब्रह्मच' र्यमूषुः
देवा' मनुष्या' अ' सुराः |
pM2/k1
उषित्वा' ब्रह्मच' र्यं देवा' ऊचुः
ब्र' वीतु नो भ' वानि' ति |
ते' भ्यो हैत' दक्ष' रमुवाचः
द' इ' ति;
व्य' ज्ञासिष्टा३ इ' ति |
व्य' ज्ञासिष्मे' ति होचुः
दा' म्यते' ति न आत्थे' ति |
ओ' मि' ति होवाच,
व्य' ज्ञासिष्टे' ति |
pM3/k2
अ' थ हैनं मनुष्या' ऊचुः
ब्र' वीतु नो भ' वानि' ति |
ते' भ्यो हैत' देवा' क्ष' रमुवाचः
द इ' ति;
व्य' ज्ञासिष्टा३ इ' ति |
व्य' ज्ञासिष्मे' ति होचुः
दत्ते' ति न आत्थे' ति |
ओ' मि' ति होवाच,
व्य' ज्ञासिष्टे' ति |
pM4/k3
अ' थ हैनम' सुरा ऊचुः
ब्र' वीतु नो भ' वानि' ति |
ते' भ्यो हैत' देवा' क्ष' रमुवाचः
द इ' ति;
व्य' ज्ञासिष्टा३ इ' ति |
व्य' ज्ञासिष्मे' ति होचुः
द' यध्वमि' ति न आत्थे' ति |
ओ' मि' ति होवाच,
व्य' ज्ञासिष्टे' ति |
त' देत' देवै' षा' दै' वी वा' ग' नुवदति स्तनयित्नु' ः
ददद इ' ति;
द' म्यत दत्त' द' यध्वमि' ति |
त' देत' त्त्रय' ँ शिक्षे' द्
दम' ं,
दा' नं,
दया' मि' ति |
chM3/k om |
वायु' र' निलममृतं भ' स्मन्तँ श' रीरम् |
ओ३म्
क्र' तो स्मर,
क्लिबे' स्मर,
कृत' ँ स्मरा' - |
-ग्ने,
न' य सुप' था राये' अस्मा' न्
वि' श्वानि,
देव,
वयु' नानि विद्वा' न्
युयोध्य' स्म' ज् जुहुराण' मे' नो
भू' यिष्ठां ते न' मःउक्तिं विधेम |
chM4/k3
एष' प्रजा' पतिर्य' द्धृदयम्
एत' द्ब्र' ह्मैत' त्स' र्वं |
त' देत' त्त्र्य' क्षरँ:
हृदयमि' ति |
हृ इ' त्य् ए' कमक्ष' रम्
अभि' हरन्त्यस्मै स्वा' श्चान्ये' च,
य' एव' ं वे' द |
द' इ' त्य् ए' कमक्ष' रम्
द' दन्त्य्
K dadaty
अस्मै स्वा' श्चान्ये' च,
य' एव' ं वे' द |
य' मि' त्य् ए' कमक्ष' रम्
ए' ति स्वर्ग' ं लोक' ं,
य' एव' ं वे' द |
chM5/k4
त' द्वै' त' द्
एत' देव' त' दास,
सत्य' मेव' |
स' यो' ह एव' म्
K om.
एत' न्मह' द्यक्ष' ं प्रथमज' ं वे' दः
सत्य' ं ब्र' ह्मे' ति,
ज' यतीमा' ँल् लोका' न् |
जित' इ' न्न्व' सा' वसद्
य' एव' मेत' न्मह' द्यक्ष' ं प्रथमज' ं वे' दः
सत्य' ं ब्र' ह्मे' ति;
सत्य' ँ ह्य् ए' व' ब्र' ह्म |
ch6
pM1/k5,4
आ' प एवे' द' म' ग्र आसुस्;
ता' आ' पः सत्य' मसृजन्त,
सत्य' ं ब्र' ह्म,
ब्र' ह्म प्रजा' पतिं,
प्रजा' पतिर्देवा' न् |
pM2/kch6, p1
ते' देवा' ः सत्य' मि' त्य्
K eva!
उ' पासते
त' देत' त्त्र्य' क्षरँ:
सत्य' म्
K satiyam
इ' ति |
स' इ' त्य् ए' कमक्ष' रं;
ती' त्य् ए' कमक्ष' रं,
अ' म्
K yam
इ' त्य् ए' कमक्ष' रं |
प्रथमोत्तमे' अक्ष' रे सत्य' ं,
मध्यतो' ऽनृतम्
त' देत' द' नृतम्
K add. ubhayataH
सत्ये' न प' रिगृहीतँ सत्य' भूयमेव' भवति |
नै' वंविद्वा' ँसम' नृतँ हिनस्ति |
pM3/k2
त' द्य' त्त' त्सत्य' मसौ' स' आदित्यो' |
य' एष' एत' स्मिन्म' ण्डले पु' रुषो य' श्चाय' ं दक्षिणे' ऽक्ष' न्पु' रुषः
ता' वेता' वन्यो' ऽन्य' स्मिन्प्र' तिष्ठितौ;
रश्मि' भिरेषो' ऽस्मि' न्प्र' तिष्ठितः,
प्राणै' रय' ममु' ष्मिन् |
स' यदो' त्क्रमिष्य' न्भ' वति,
शुद्ध' मेवै' त' न्म' ण्डलं पश्यतिः
नै' नमेते' रश्म' यः प्रत्या' यन्ति |
pM4/k3
य' एष' एत' स्मिन्म' ण्डले पु' रुषः
त' स्य भू' रि' ति शि' रः
ए' कँ शि' र,
ए' कमेत' दक्ष' रं;
भु' व इ' ति बाहू' ः
द्वौ' बाहू' ,
द्वे' एते' अक्ष' रे;
स्व' रि' ति प्रतिष्ठा' ः
द्वे' प्रतिष्ठे' द्वे' एते' अक्ष' रे |
त' स्योपनिष' द' हरि' ति |
ह' न्ति पाप्मा' नं जहाति च,
य' एव' ं वे' द |
pM5/k4
अ' थ
K om.
यो' ऽय' ं दक्षिणे' ऽक्ष' न्पु' रुषः
त' स्य भू' रि' ति शि' रः
ए' कँ शि' र,
ए' कमेत' दक्ष' रं;
भु' व इ' ति बाहू' ः
द्वौ' बाहू' ,
द्वे' एते' अक्ष' रे;
स्व' रि' ति प्रतिष्ठा' ः
द्वे' प्रतिष्ठे' ,
द्वे' एते' अक्ष' रे |
त' स्योपनिष' दह' मि' ति |
ह' न्ति पाप्मा' नं जहाति च,
य' एव' ं वे' द |
ch7
विद्यु' द्ब्र' ह्मे' त्य् आहुः |
विदा' नाद्विद्यु' द्;
विद्य' त्य् एनं पाप्म' नो,
य' एव' ं वेदः
विद्यु' द्ब्र' ह्मे' ति |
विद्यु' द्ध्य् ए' व' ब्र' ह्म |
chM8/k6
मनोम' योऽय' ं पु' रुषो,
भा' ःसत्यः
त' स्मिन्नन्त' र्हृदये य' था व्रीहि' र्वा य' वो वैव' मय' मन्त' रात्म' न्पु' रुषः
K om. evam...
स' एष' स' र्वस्य व' शी
K om.
स' र्वस्ये' शानः,
स' र्वस्या' धिपतिः;
स' र्वमिद' ं प्र' शास्ति य' दिद' ं कि' ङ्च,
य' एव' ं वे' द
K om.
chM9/k8
वा' चं धेनु' मु' पासीत |
त' स्याश्चत्वा' रः स्त' नाः
स्वाहाकारो' वषट्कारो' हन्तकार' ः स्वधा' कारः |
त' स्यै द्वौ' स्त' नौ देवा' उ' पजीवन्ति,
स्वाहाकार' ं च वषट्कार' ं च;
हन्तकार' ं मनुष्या' ः,
स्वधा' कारं पित' रः |
त' स्याः प्राण' ऋषभो' ,
म' नो वत्स' ः |
chM10/k9
अय' माग्नि' र्वैश्वानरो' यो' ऽय' मन्त' ः पु' रुषे,
ये' नेद' म' न्नं पच्य' ते य' दिद' मद्य' ते |
त' स्य एष' घो' षो भवति,
य' मेत' त्क' र्णावपिधा' य शृणो' ति |
स' यदो' त्क्रमिष्य' न्भ' वति,
नै' नं घो' षँ शृणोति |
ch11
एत' द्वै' परम' ं त' पो य' द्व्या' हितस् तप्य' ते;
परम' ँ हैव' लोक' ं जयति,
य' एव' ं वे' दैत' द्वै' परम' ं त' पो य' ं प्रे' तम' रण्यँ ह' रन्ति;
परम' ँ हैव' लोक' ं जयति,
य' एव' ं वे' दैत' द्वै' परम' ं त' पो य' ं प्रे' तमग्ना' वभ्याद' धति;
परम' ँ हैव' लोक' ं जयति,
य' एव' ं वे' द |
chM12/k10
यदा' वै' पु' रुषोऽस्मा' ल् लोका' त्प्रै' ति,
स' वायु' मा' गच्छति;
त' स्मै स' त' त्र वि' जिहीते य' था रथचक्र' स्य ख' ं;
ते' न स' ऊर्ध्व' आ' क्रमते |
स' आदित्य' मा' गच्छति;
त' स्मै स' त' त्र वि' जिहीते य' थाड' म्बरस्य
K alambarasya
ख' ं;
ते' न स' ऊर्ध्व' आ' क्रमते |
स' चन्द्र' मसमा' गच्छति;
त' स्मै स' त' त्र वि' जिहीते य' था दुन्दुभे' ः ख' ं;
ते' न स' ऊर्ध्व' आ' क्रमते |
स' लोक' मा' गच्छत्यशोक' म' हिमं;
त' स्मिन्वसति शा' श्वतीः स' माः |
chM13/k12
pMk1
अ' न्नं ब्र' ह्मे' त्य् ए' क आहुः |
त' न्न' त' था,
पू' यति वा' अ' न्नमृते' प्राणा' त् |
प्राणो' ब्र' ह्मे' त्य् ए' क आहुः |
त' न्न' त' था,
शु' ष्यति वै' प्रण' ऋते' ऽन्नाद् |
एते' ह त्वे' व' देव' ते,
एकधाभू' यं भूत्वा' ,
परम' तां गच्छतः |
pM2/k1
त' द्ध स्माह प्रातृद' ः पित' रम्
कि' ँ स्विदेवै' वंविदु' षे साधु' कुर्यां,
कि' मेवा' स्मा असाधु' कुर्यामि' ति |
स' ह स्माह पाणि' नाः
मा' ,
प्रातृद,
क' स् त्वे' नयोरेकधाभू' यं भूत्वा' परम' तां गच्छती' ति |
pM3/k1
त' स्मा उ हैत' दुवाचः
वी' ति
अ' न्नं वै' वि
अ' न्ने ही' मा' नि स' र्वाणि भूता' नि विष्टा' नि |
र' मि' ति,
प्राणो' वै' र' ं,
प्राणे' ही' मा' नि स' र्वाणि भूता' नि रता' नि
K ramante
स' र्वाणि ह वा' अस्मिन्भूता' नि विशन्ति,
स' र्वाणि भूता' नि रमन्ते,
य' एव' ं वे' द |
chM14/k13
pMk1
उक्थ' ं,
प्राणो' वा' उक्थ' ं,
प्राणो' ही' द' ँ स' र्वमुत्थाप' यति |
उ' द्धास्मा
K dhasmAd
उक्थवि' द्वीर' स् तिष्ठति
उक्थ' स्य सा' युज्यँ सलोक' तां जयति,
य' एव' ं वे' द |
pMk2
य' जुः,
प्राणो' वै' य' जुः,
प्राणे' ही' मा' नि स' र्वाणि भूता' नि युज्य' न्ते |
युज्य' न्ते हास्मै स' र्वाणि भूता' नि श्रै' ष्ठ्याय,
य' जुषः सा' युज्यँ सलोक' तां जयति,
य' एव' ं वे' द |
pMk3
सा' म,
प्राणो' वै' सा' म,
प्राणे' ही' मा' नि स' र्वाणि भूता' नि सम्य' ङ्चि |
सम्य' ङ्चि हास्मै स' र्वाणि भूता' नि श्रै' ष्ठ्याय कल्पन्ते,
सा' म्नः सा' युज्यँ सलोक' तां जयति,
य' एव' ं वे' द |
pMk4
क्षत्र' ं,
प्राणो' वै' क्षत्र' ं,
प्राणो' हि' वै' क्षत्र' म्
त्रा' यते हैनं प्राण' ः क्षणि' तोः |
प्र' क्षत्र' मात्र' म्
K atram
आप्नोति,
क्षत्र' स्य सा' युज्यँ सलोक' तां जयति,
य' एव' ं वे' द |
chM15/k14
pMk1
भू' मिरन्त' रिक्षं द्यौ' रि' त्यष्टा' व् ! अक्ष' राणि
अष्टा' क्षरँ ह वा' ए' कं गायत्र्यै' पद' म्;
एत' दु हैवा' स्या एत' त् |
स' या' वदेषु' त्रिषु' लोके' षु,
ता' वद्ध जयति यो' ऽस्या एत' देव' ं पद' ं वे' द |
pMk2
ऋचो य' जूषि सा' मानी' त्यष्टा' वक्ष' राणि
अष्टा' क्षरँ ह वा' ए' कं गायत्र्यै' पद' म्;
एत' दु हैवा' स्या एत' त् |
स' या' वतीय' ं त्रयी' विद्या' ,
ता' वद्ध जयति,
यो' ऽस्या एत' देव' ं पद' ं वे' द |
pMk3
प्राणो' ऽपानो' व्यान' इ' त्यष्टा' वक्ष' राणि
अष्टा' क्षरँ ह वा' ए' कं गायत्र्यै' पद' म्;
एत' दु हैवा' स्या एत' त् |
स' या' वदिद' ं प्राणि' ,
ता' वद्ध जयति,
यो' ऽस्या एत' देव' ं पद' ं वे' द |
pM4/k3
अ' थास्या एत' देव' तु' रीयं दर्शत' ं पद' ं परो' रजा य' एष' त' पतिः
य' द्वै' च' तुर्थं त' त्तु' रीयं;
दर्शत' ं पद' मि' ति,
ददृश' इव ह्य् ए' ष' ः;
परो' रजा इ' ति,
स' र्वमु ह्य् ए' वै' ष' रज' उप' र्य्-उपरि त' पति |
एव' ँ हैव' श्रिया' य' शसा तपति,
यो' ऽस्या एत' देव' ं पद' ं वे' द |
pM5/k4
सै' षा' गायत्र्य् ए' त' स्मिँस् तु' रीये दर्शते' पदे' परो' रजसि प्र' तिष्ठिता;
त' द्वै' त' त्सत्ये' प्र' तिष्ठिता
K pratishhThitaM
च' क्षुर्वै' सत्य' ं,
च' क्षुर्हि' वै' सत्य' म्
त' स्माद्य' दिदा' नीं द्वौ' विव' दमानावेया' तम्
अह' मद्राक्षम्
K adarsham
अह' मश्रौषमि' ति,
य' एव'
K evaM
ब्रूया' द्
अह' मद्राक्षम्
K adarsham
इ' ति,
त' स्मा एव' श्रद्दध्यात्
K shraddadhyAma
pM6/k4
त' द्वै' त' त्सत्य' ं ब' ले प्र' तिष्ठितं;
प्राणो' वै' ब' लं;
त' त्प्राणे' प्र' तिष्ठितं;
त' स्मादाहुः
ब' लँ सत्या' दो' जीय इ' ति |
एव' ं वेषा' गायत्र्य' ध्यात्म' ं प्र' तिष्ठिता |
pM7/k4
सा हैषा' ग' याँस् तत्रे;
प्राणा' वै' ग' यास्;
त' त्प्राणा' स् तत्रे;
त' द्य' द्ग' याँस् तत्रे,
त' स्माद्गायत्री' ना' म |
स' या' मेवा' मूँ
K add. sAvitrIm
अन्वा' हैषै' व' सा' |
स' य' स्मा अन्वा' ह,
त' स्य प्राणा' स् त्रायते |
pM8/k5
ता' ँ ह
K add. etAm
ए' के सावित्री' मनुष्टु' भम' न्वाहुः
वा' गनुष्टु' ब्;
एत' द्वा' चम' नुब्रूम इ' ति |
न' त' था कुर्याद् |
गायत्री' मेवा' नुब्रूयाद्
K eva sAvitrIm...
य' दि ह वा' अ' पि
K add. evaMvi\`d
बह्वि' व प्रतिगृह्णा' ति,
न' हैव' त' द्गायत्र्या' ए' कं चन' पद' ं प्र' ति |
pM9/k6
स' य' इमा' ँस् त्री' ंल् लोका' न्पूर्णा' न्प्रतिगृह्णीया' त्
सो' ऽस्या एत' त्प्रथम' ं पद' माप्नुयाद्;
अ' थ या' वतीय' ं त्रयी' विद्या' ,
य' स् ता' वत्प्रतिगृह्णीया' त्
सो' ऽस्या एत' द्द्विती' यं पद' माप्नुयाद्;
अ' थ या' वदिद' ं प्राणि' ,
य' स् ता' वत्प्रतिगृह्णीया' त्
सो' ऽस्या एत' त्तृती' यं पद' माप्नुयाद्;
अ' थास्या एत' देव' तुरी' यं दर्शत' ं पद' ं,
परो' रजा य' एष' त' पति,
नै' व' के' न चना' प्यम्
कु' त उ एता' वत्प्र' तिगृह्णीयात् |
pM10/k7
त' स्या उपस्था' नम्
गा' यत्रि
अस्य् ए' कपदी द्विप' दी त्रिप' दी च' तुष्पदि
अप' दसि,
न' हि' प' द्यसे |
न' मस् ते तुरीया' य दर्शता' य पदा' य परो' रजसेः
असा' वदो' मा' प्रा' पदि' ति,
य' ं द्विष्या' द्;
असा' वस्मै का' मो मा' समर्धी' ति वा,
न' हैवा' स्मै स' का' मः स' मृध्यते य' स्मा एव' मुपति' ष्ठते;
अह' मद' ः प्रा' पमि' ति वा |
pM11/k8
एत' द्ध वै' त' ज् जनको' वै' देहो बुढिल' मा' श्वतराश्विमुवाचः
य' न्नु' हो त' द्गायत्रीवि' द' ब्रूथा,
अ' थ कथ' ँ हस्ती' भूतो' वहसी' ति |
मु' खँ ह्य' स्याः,
सम्राड्,
न' विदा' ं चकरे' ति होवाच |
pM12/k8
त' स्या आग्नि' रेव' मु' खं;
य' दि ह वा' अ' पि बह्वि' वाग्ना' वभ्याद' धति,
स' र्वमेव' त' त्स' ंदहति |
एव' ँ हैवै' वंवि' द्
य' द्य' पि बह्वि' व पाप' ं करो' ति
K kurute
स' र्वमेव' त' त्संप्सा' य शुद्ध' ः पूतो' ऽज' रोऽमृतः स' ंभवति |
chk15
add. K
हिरण्मयेन पात्रेण
सत्यस्यापिहितं मुखं;
तत्त्वं,
पूषन्न्
अपावृणु
सत्यधर्माय दृष्टये |
पूषन्न्
एकर्षे,
यम,
षूर्य,
प्राजापत्य,
व्यूह रश्मीन्
समूह तेजो;
यत्ते रूपं
कल्याणतमं,
तत्ते पश्यामि |
योऽसावसौ पुरुषः,
सोऽहमस्मि |
वायुरनिलममृतम्
अथेदं भस्मान्तँ शरीरं |
क्रतो,
स्मर,
कृतँ स्मर,
क्रतो,
स्मर,
कृतँ स्मरा- |
-ग्ने,
नय सुपथा रायेऽस्मान्
विश्वानि,
देव,
वयुनानि विद्वान्;
युयोध्यस्मज् जुहुराणमेनो,
भूयिष्ठां ते नमःउक्तिं विधेम |
ch6 = hbM 14.9 = hbk16.8
chM1/k2
pMk1
ह्वेत' केतुर्ह
k. om.
वा' अरुणेय' ः पन्चाला' नां परिष' दमा' जगाम |
स' आ' जगाम जै' वलं प्रवा' हणं परिचार' यमाणं |
त' मुदी' क्ष्याभ्यु' वादः
कु' मारा३ इ' ति |
स' भो' र्३ इ' ति प्र' तिशुश्रावा' - |
-नुशिष्टो न्व' सि पित्रे' ति |
ओ' मि' ति होवाच |
pMk2
वे' त्थ य' थेमा' ः प्रजा' ः प्रय' त्यो विप्रतिप' द्यन्ता३ इ' ति |
ने' ति होवाच |
वे' त्थ
K vettho
य' थेम' ं लोक' ं पु' नराप' द्यन्ता३ इ' ति |
ने' ति हैवो' वाच |
वे' त्थ
K vettho
य' थासौ' लोक' एव' ं बहु' भिः पु' नः-पुनः प्रय' द्भिर्न' संपूर्य' ता३ इ' ति |
ने' ति हैवो' वाच |
pM3/k2
वे' त्थ
K vettho
य' तिथ्यामा' हुत्याँ हुता' यामा' पः पुरुषवा' चो भूत्वा' समुत्था' य व' दन्ती३ इ' ति |
ने' ति हैवो' वाच |
वे' त्थो देवया' नस्य वा पथ' ः प्रतिप' दं पितृया' णस्य वा,
य' त्कृत्वा' देवया' नं वा प' न्थानं प्रतिप' द्यन्ते पितृया' णं वा
pM4/k2
अ' पि हि' न ऋषेर्व' चः श्रुत' म्
द्वे' सृती' अशृणवं पित्ऱ्णा' म्
अह' ं देवा' नामुत' म' र्त्यानां;
ता' भ्यामिद' ं वि' श्वमे' जत्स' मेति
य' दन्तरा' पित' रं मात' रं चे' ति |
ना' ह' म' त ए' कं चन' वेदे' ति होवाच |
pM5/k3
अ' थ हैनं
K om. ha
व' सत्योपमन्त्रया' ं चक्रे' |
अनादृत्य व' सतिं कुमार' ः प्र' दुद्राव |
स' आ' जगाम पित' रं,
त' ँ होवाचे' ति वा' व' कि' ल नो भ' वान्पुरा' नुशिष्टान' वोच इ' ति |
कथ' ँ,
सुमेध इ' ति |
प' ङ्च मा प्रश्ना' न्राजन्य' बन्धुरप्राक्षीत्
त' तो नै' कं चन' वेदे' ति होवाच
K om. hovAcha
कतमे' त' इ' ती-
-म' इ' ति ह प्र' तीकान्य् उदा' जहार |
pM6/k4
स' होवाचः
त' था नस् त्व' ं,
तत,
जानीथा य' था,
य' दह' ं कि' ंच वे' द,
स' र्वमह' ं त' त्तु' भम' वोचं |
प्रे' हि तु' ,
त' त्र प्रती' त्य,
ब्रह्मचर्य' ं वत्स्याव इ' ति |
भ' वानेव' गच्छत्वि' ति |
pM7/k4
स' आ' जगाम गौतमो' य' त्र प्रवा' हणस्य जै' वलेरा' स |
त' स्मा आसन' माहा' र्योदक' ं
K AhR\^ityodakam
आहारया' ं चकारा' थ हास्मा अर्घ' ं
karghyaM
चकार |
pM8/k4
त' ँ होवाचः
व' रं भ' वते
kbhagavate
गौतमा' य दद्म इ' ति |
pM8/k5
स' होवाचः
प्र' तिज्ञतो म एष' व' रो;
या' ं तु' कुमार' स्या' न्ते वा' चम' भाषथाः
ता' ं मे ब्रूही' ति |
pM9/k6
स' होवाचः
दै' वेषु वै' ,
गौतम,
त' द्व' रेषु,
मा' नुषाणां ब्रूही' ति |
pM10/k7
स' होवाचः
विज्ञा' यते हा' स्ति हि' रण्यस्या' पात्तं गोअश्वा' नां दासी' नां प्रवारा' णां परिधाना' नां,
मा' नो भ' वान्बहो' रनन्त' स्यापर्यन्त' स्याभ्यवदा' न्यो भूदि' ति |
स' वै' ,
गौतम,
तीर्थे' नेच्छसा इ' ति
उपै' म्यह' ं भ' वन्तमि' ति वाचा' ह स्मैव' पू' र्व उ' पयन्ति |
pM11/k7
स' होपायनकीर्ता' उवाच
K sa upAyanakIrtyovAsa
pM11/k8
त' था नस् त्व' ं,
गौतम,
मा' पराधास्
K aparAdhas
त' व च पितामहा' ,
य' थेय' ं विद्ये' त' ः पू' र्वं न' क' स्मिँश्चन' ब्राह्मन' उवा' स;
ता' ं त्व' ह' ं तु' भ्यं वक्ष्यामिः
को' हि' त्वैव' ं ब्रु' वन्तम' र्हति प्रत्या' ख्यातुमि' ति |
pM12/k9
असौ' वै' लोको' ऽग्नि' ः
गौतम |
त' स्यादित्य' एव' समि' द्
रश्म' यो धूमो' ,
अहरर्चि' श्,
चन्द्र' मा अ' ङ्गारा
K disho.aN\^gArA
न' क्षत्राणि
K avAntaradisho
विष्फुलि' ङ्गाः |
त' स्मिन्नेत' स्मिन्नग्नौ' देवा' ः श्रद्धा' ं जुह्वति;
त' स्या आ' हुतेः सो' मो रा' जा स' ंभवति |
pM13/k10
पर्ज' न्यो वा' अग्नि' ः
गौतम |
त' स्य संवत्सर' एव' समि' द्
अभ्रा' णि धूमो' ,
विद्यु' दर्चि' ः
अश' निर' ङ्गारा,
ह्रादु' नयो विष्फुलि' ङ्गाः |
त' स्मिन्नेत' स्मिन्नग्नौ' देवा' ः सो' मं
K add. rAjAnaM
जुह्वति;
त' स्या आ' हुतेर्वृष्टि' ः स' ंभवति |
pM14/k11
अय' ं वै' लोको' ऽग्नि' ः
गौतम |
त' स्य पृथिव्य् ए' व' समि' द्
वायु' र्
K agnir?
धूमो' ,
रा' त्रिरर्चि' ः
दिशो'
K chandramA
अ' ङ्गारा,
अवन्तरदि' शो
nakshatrANi
विष्फुलि' ङ्गाः |
त' स्मिन्नेत' स्मिन्नग्नौ' देवा' वृष्टि' ं जुह्वति;
त' स्या आ' हुतेर' न्नँ स' ंभवति |
pM15/k12
पु' रुषो वा' अग्नि' ः
गौतम |
त' स्य व्या' त्तमेव' समि' त्
प्राणो' धूमो' ,
वा' गर्चि' श्,
च' क्षुर' ङ्गाराः,
श्रो' त्रं विष्फुलि' ङ्गाः |
त' स्मिन्नेत' स्मिन्नग्नौ' देवा' अ' न्नं जुह्वति;
त' स्या आ' हुते रे' तः स' ंभवति |
pM16/k13
यो' षा वा' आग्नि' ः
गौतम |
त' स्या उप' स्थ एव' समि' ल्,
लो' मानि धूमो' ,
यो' निरर्चि' ः
य' दन्त' ः करो' ति,
ते' ऽङ्गारा,
अभिन' न्दा विष्फुलि' ङ्गाः |
त' स्मिन्नेत' स्मिन्नग्नौ' देवा' रे' तो जुह्वति;
त' स्या आ' हुतेः पु' रुषः स' ंभवति |
स' जायते
K om.
स' जीवति या' वज् जी' वति
अ' थ यदा' म्रिय' ते' ,
pM16/k14
अथैनमग्न' ये हरन्ति |
pM17/k14
त' स्याग्नि' रेवा' ग्नि' र्भवति,
समि' त्समि' द्
धूमो' धूमो' ,
अर्चि' रर्चि' ः
अ' ङ्गारा अ' ङ्गारा,
विष्फुलि' ङ्गा विष्फुलि' ङ्गाः |
त' स्मिन्नेत' स्मिन्नग्नौ' देवा' ः पु' रुषं जुह्वति;
त' स्या आ' हुतेः पु' रुषो भा' स्वरवर्णः स' ंभवति |
pM18/k15
ते' य' एव' मेत' द्विदु' ः
ये' चामी' अ' रण्ये श्रद्धा' ँ सत्य' मुपा' सते,
ते' ऽर्चि' रभिस' ंभवन्ति
अर्चि' षो' ऽहः
अ' ह्न आपूर्यमाणपक्ष' म्
आपूर्यमाणपक्षा' द्या' न्ष' ण्मा' सानु' दङ्ङ् आदित्य' ए' ति,
मा' सेभ्यो देवलोक' ं,
देवलोका' दादित्य' म्
आदित्या' द्वै' द्युतं;
ता' न्वै' द्युतात्
K vaidyutAn
पु' रुषो मानस' ए' त्य ब्रह्मलोका' न्गमयति;
ते' ते' षु ब्रह्मलोके' षु प' राः पराव' तो वसन्ति |
ते' षां इह'
K om.
न' पु' नरावृत्तिरस्ति
kom.
pM19/k16
अ' थ ये' यज्ञे' न दाने' न त' पसा लोक' ं
K lokA~N
ज' यन्ति,
ते' धूम' मभिस' ंभवन्ति,
धूमा' द्रा' त्रिँ,
रा' त्रेरपक्षीयमाणपक्ष' म्
अपक्षीयमाणपक्षा' द्या' न्ष' ण्मा' सान्दक्षिणा' दित्य' ए' ति,
मा' सेभ्यः पितृलोक' ं,
पितृलोका' च्चन्द्र' ं;
ते' चन्द्र' ं प्रा' प्या' न्नं भवन्ति;
ता' ँस् त' त्र देवा' य' था सो' मँ रा' जानम्
आ' प्यायस्व,
अ' पक्षीयस्वे' ति
एव' मेनाँस् त' त्र भक्षयन्ति |
ते' षां यदा' त' त्पर्यवै' ति
अ' थेम' मेवा' काश' मभिनि' ष्पद्यन्त,
आकाशा' द्वायु' ं,
वायो' र्वृष्टि' ं,
वृष्टे' ः पृथिवी' ं;
ते' पृथिवी' ं प्राप्या' न्नं भवन्ति;
kadd. te punaH purushhAgnau hUyante,
ततो योषाग्नौ जायन्ते |
lokAnpratyuthAyinas
त' एव' मेवा' नुप' रिवर्तन्ते' |
अथ य' एतौ' प' न्थानौ न' विदु' ः
ते' कीटा' ः,
पत' ङ्गा,
य' दिद' ं दन्दशू' कम् |
chM2/k1
pMk1
यो' ह वै' ज्ये' ष्ठं च श्रे' ष्ठं च वे' द,
ज्ये' ष्ठश्च श्रे' ष्ठश्च स्वा' नां भवति |
प्राणो' वै' ज्ये' ष्ठश्च श्रे' ष्ठश्च |
ज्ये' ष्ठश्च श्रे' ष्ठश्च स्वा' नां भवति
अ' पि च ये' षां बु' भूषति,
य' एव' ं वे' द |
pMk2
यो' ह वै' व' सिष्ठां वे' द,
व' सिष्ठः स्वा' नां भवति |
वा' ग्वै' व' सिष्ठा |
व' सिष्ठः स्वा' नां भवति
K add. api cha yeshhAM bubhUshhati
य' एव' ं वे' द |
pMk3
यो' ह वै' प्रतिष्ठा' ं वे' द,
प्र' तितिष्ठति समे' ,
प्र' तितिष्ठति दुर्गे' |
च' क्षुर्वै' प्रतिष्ठा' ;
च' क्षुषा हि' समे' च दुर्गे' च प्र' तितिष्ठति |
प्र' तितिष्ठति समे' ,
प्र' तितिष्ठति दुर्गे' ,
य' एव' ं वे' द |
pMk4
यो' ह वै' संप' दं वे' द,
स' ँ हास्मै पद्यते,
य' ं का' मं काम' यते |
श्रो' त्रं वै' संप' च्;
छ्रो' त्रे ही' मे' स' र्वे वे' दा अभिस' ंपन्नाः |
स' ँ हास्मै पद्यते,
य' ं का' मं काम' यते,
य' एव' ं वे' द |
pMk5
यो' ह वा' आय' तनं वे' दाय' तनँ स्वा' नां भवति
आय' तनं ज' नानां |
म' नो वा' आय' तनम् |
आय' तनँ स्वा' नां भवति
आय' तनं ज' नानां,
य' एव' ं वे' द |
pMk6
यो' ह वै' प्र' जातिं वे' द,
प्र' जायते ह प्रज' या पशु' भी |
रे' तो वै' प्र' जातिः |
प्र' जायते
K add. ha
प्रज' या पशु' भिः
य' एव' ं वे' द |
pMk7
ते' हेमे' प्राणा' ,
अहँश्रे' यसे विव' दमाना,
ब्र' ह्म जग्मुः
K add. ta\`ddhochuH
को' नो व' सिष्ठ इ' ति |
editio una indicha etkrishna add. taddhovAchaH
य' स्मिन्व उ' त्क्रान्त इद' ँ श' रीरं पा' पियो म' न्यते,
स' वो व' सिष्ठ इ' ति |
pMk8
वा' ग्घो' च्चक्राम |
सा' संवत्सर' ं प्रो' ष्याग' त्योवाचः
कथ' मशकत म' दृते' जी' वितुमि' ति |
ते' होचुः
य' था कडा'
K kalA
अवद' न्तो वाचा' ,
प्राण' न्तः प्राणे' न,
प' श्यन्तश्च' क्षुषा,
शृण्व' न्तः श्रो' त्रेण,
विद्वा' ँसो म' नसा,
प्रजा' यमाना रे' तसैव' मजीविष्मे' ति |
प्र' विवेश ह वा' क् |
pMk9
च' क्षुर्हो' च्चक्राम |
त' त्संवत्सर' ं प्रो' ष्याग' त्योवाचः
कथ' मशकत म' दृते' जी' वितुमि' ति |
ते' होचुः
य' थान्धा' ,
अपश्य' न्तश्च' क्षुषा,
प्राण' न्तः प्राणे' न,
व' दन्तो वाचा' ,
शृण्व' न्तः श्रो' त्रेण,
विद्वा' ँसो म' नसा,
प्रजा' यमाना रे' तसैव' मजीविष्मे' ति |
प्र' विवेश ह च' क्षुः |
pMk10
श्रो' त्रँ हो' च्चक्राम |
त' त्संवत्सर' ं प्रो' ष्याग' त्योवाचः
कथ' मशकत म' दृते' जी' वितुमि' ति |
ते' होचुः
य' था बधिरा' ,
अशृण्व' न्तः श्रो' त्रेण,
प्राण' न्तः प्राणे' न,
व' दन्तो वाचा' ,
प' श्यन्तश्च' क्षुषा,
विद्वा' ँसो म' नसा,
प्रजा' यमाना रे' तसैव' मजीविष्मे' ति |
प्र' विवेश ह श्रोत्रम् |
pMk11
म' नो हो' च्चक्राम |
त' त्संवत्सर' ं प्रो' ष्याग' त्योवाचः
कथ' मशकत म' दृते' जी' वितुमि' ति |
ते' होचुः
य' था मुग्धा' ,
अविद्वा' ँसो म' नसा,
प्राण' न्तः प्राणे' न,
व' दन्तो वाचा' ,
प' श्यन्तश्च' क्षुषा,
शृण्व' न्तः श्रो' त्रेण,
प्रजा' यमाना रे' तसैव' मजीविष्मे' ति |
प्र' विवेश ह म' नः |
pMk12
रे' तो हो' च्चक्राम |
त' त्संवत्सर' ं प्रो' ष्याग' त्योवाचः
कथ' मशकत म' दृते' जी' वितुमि' ति |
ते' होचुः
य' था क्लीबा' ,
अप्रजा' यमाना रे' तासा,
प्राण' न्तः प्राणे' न,
व' दन्तो वाचा' ,
प' श्यन्तश्च' क्षुषा,
शृण्व' न्तः श्रो' त्रेण,
विद्वा' ँसो म' नसैव' मजीविष्मे' ति |
प्र' विवेश ह रे' तः |
pMk13
अ' थ ह प्राण' उत्क्रमिष्य' न्
य' था महासुहय' ः सैन्धव' ः पड्वी' शशङ्खून्त्संवृहे' द्
एव' ँ हैवे' मा' न्प्राणा' न्त्स' ंववर्ह |
ते' होचुः
मा' ,
भगव,
उ' त्क्रमीः
न' वै' शक्ष्यामस् त्व' दृते' जी' वितुमि' ति |
त' स्यो मे बलि' ं कुरुते' ति |
त' थे' ति |
pMk14
सा' ह वा' गुवाचः
य' द्वा' अह' ं व' सिष्ठा' स्मि,
त्व' ं त' द्व' सिष्ठोऽसी' ति |
च' क्षुर्
K chakshuH
infine
य' द्वा' अह' ं प्रतिष्ठा' स्मि,
त्व' ं त' त्प्रतिष्ठो' ! ऽसी' ति |
श्रो' त्रं
K shrotraM
infine
य' द्वा' अह' ँ संप' द' स्मि,
त्व' ं त' त्संप' दसी' ति |
म' नो
K mano
infine
य' द्वा' अह' माय' तनम' स्मि,
त्व' ं त' दाय' तनमसी' ति |
रे' तो
K retas
infine
य' द्वा' अह' ं प्र' जातिर' स्मि,
त्व' ं त' त्प्र' जातिरसी' ति |
त' स्यो मे कि' म' न्नं,
कि' ं वा' स इ' ति |
य' दिद' ं कि' ङ्चा' श्वभ्य' ,
आ' क्रि' मिभ्य
K kR\^imibhya
आ' कीटपतङ्गे' भ्यः
त' त्ते' ऽन्नम्;
आ' पो वा' स इ' ति |
न' ह वा' अस्या' नन्नं जग्ध' ं भवति,
ना' नन्नं प्र' तिगृहीतं य' एव' मेत' दन' स्या' न्नं वे' द |
pM15/k14
त' द्विद्वा' ँसः श्रो' त्रिया अशिष्य' न्त आ' चामन्ति
अशित्वा' चामन्ति
एत' मेव' त' दन्न' म' नग्नं कुर्व' न्तो मन्यन्ते |
त' स्मादेवंवि' दशिष्य' ना' चमेद्
अशित्वा' चमेद् |
एत' मेव' त' दन' म' नग्नं कुरुते
K om. tasmAd...
ch3
pMk1
स' य' ः काम' यतेः
मह' त्प्राप्नुयामि' ति
उदगयन' आपूर्यमाणपक्षे'
K ApUryamANapakshasya
पुण्या' हे,
द्वा' दशाहमुपसद्व्रती' भूत्वौ' दुम्बरे कँसे' चमसे' वा सर्वौषध' ं फ' लानी' ति संभृत्य,
परिसमु' ह्य,
परिलि' प्याग्नि' मुपसमाधा' यावृताज्यँ
K upasamAdhAya, paristIryAvR\^itAjya.N
सँस्कृत्य,
पुँसा' नक्षत्रे' ण म' न्थँ संनी' य,
जुहोतिः
pM2/k1
या' वन्तो देवा' स् त्व' यि,
जातवेदः
तिर्य' ङ्चो घ्न' न्ति पु' रुषस्य का' मान्
ते' भ्योऽह' ं भागधे' यं जुहोमि,
ते' मा तृप्ता' ः
K add. sarvaiH
का' मैस् तर्पयन्तु,
स्वा' हा |
pM3/k1
या' तिर' श्ची निप' द्यसेः
अह' ं विधरणी' इ' ति,
ता' ं त्वा घृत' स्य धा' रया
य' जे स' ँराधनीमह' ँ |
स्वा' हा |
प्र' जायते न' त्व' देता' न्यन्य' इ' ति
तृती' यं जुहोति.
K om. pra\`jAyate ...
pM4/k2
ज्ये' ष्ठाय स्वा' हा,
श्रे' ष्ठाय स्वा' हे' ति
अग्नौ' हुत्वा' ,
म' न्थे सँस्रव' म' वनयति |
प्राणा' य स्वा' हा,
व' सिष्ठायै स्वा' हे' ति
अग्नौ' हुत्वा' ,
म' न्थे सँस्रव' म' वनयति |
वाचे' स्वा' हा,
प्रतिष्ठा' यै स्वा' हे' ति
अग्नौ' हुत्वा' ,
म' न्थे सँस्रव' म' वनयति |
च' क्षुषे स्वा' हा,
संप' दे स्वा' हे' ति
अग्नौ' हुत्वा' ,
म' न्थे सँस्रव' म' वनयति |
श्रो' त्राय स्वा' हाय' तनाय स्वा' हे' ति
अग्नौ' हुत्वा' ,
म' न्थे सँस्रव' म' वनयति |
म' नसे स्वा' हा,
प्र' जात्यै स्वा' हे' ति
अग्नौ' हुत्वा' ,
म' न्थे सँस्रव' म' वनयति |
रे' तसे स्वा' हे' ति
अग्नौ' हुत्वा' ,
म' न्थे सँस्रव' म' वनयति |
pM5
K 3, variato ordine; vide infra
भूता' य स्वा' हे' ति
अग्नौ' हुत्वा' ,
म' न्थे सँस्रव' म' वनयति |
भविष्य' ते स्वा' हे' ति
अग्नौ' हुत्वा' ,
म' न्थे सँस्रव' म' वनयति |
वि' श्वाय स्वा' हे' ति
अग्नौ' हुत्वा' ,
म' न्थे सँस्रव' म' वनयति |
स' र्वाय स्वा' हे' ति
अग्नौ' हुत्वा' ,
म' न्थे सँस्रव' म' वनयति |
पृथिव्यै' स्वा' हे' ति
अग्नौ' हुत्वा' ,
म' न्थे सँस्रव' म' वनयति |
अन्त' रिक्षाय स्वा' हे' ति
अग्नौ' हुत्वा' ,
म' न्थे सँस्रव' म' वनयति |
दिवे' स्वा' हे' ति
अग्नौ' हुत्वा' ,
म' न्थे सँस्रव' म' वनयति |
दिग्भ्य' ः स्वा' हे' ति
अग्नौ' हुत्वा' ,
म' न्थे सँस्रव' म' वनयति |
ब्र' ह्मणे स्वा' हे' ति
अग्नौ' हुत्वा' ,
म' न्थे सँस्रव' म' वनयति |
क्षत्रा' य स्वा' हे' ति
अग्नौ' हुत्वा' ,
म' न्थे सँस्रव' म' वनयति |
pM7
K 3, variato ordine; vide infra
भू' ः स्वा' हे' ति
अग्नौ' हुत्वा' ,
म' न्थे सँस्रव' म' वनयति |
भु' वः स्वा' हे' ति
अग्नौ' हुत्वा' ,
म' न्थे सँस्रव' म' वनयति |
स्व' ः स्वा' हे' ति
अग्नौ' हुत्वा' ,
म' न्थे सँस्रव' म' वनयति |
भू' र्भु' वः स्वा' हे' ति
अग्नौ' हुत्वा' ,
म' न्थे सँस्रव' म' वनयति |
pM8
K 3, variato ordine; vide infra
अग्न' ये स्वा' हे' ति
अग्नौ' हुत्वा' ,
म' न्थे सँस्रव' म' वनयति |
सो' माय स्वा' हे' ति
अग्नौ' हुत्वा' ,
म' न्थे सँस्रव' म' वनयति |
ते' जसे स्वा' हे' ति
अग्नौ' हुत्वा' ,
म' न्थे सँस्रव' म' वनयति |
श्रियै' स्वा' हे' ति
अग्नौ' हुत्वा' ,
म' न्थे सँस्रव' म' वनयति |
लक्ष्म्यै' स्वा' हे' ति
अग्नौ' हुत्वा' ,
म' न्थे सँस्रव' म' वनयति |
सवित्रे' स्वा' हे' ति
अग्नौ' हुत्वा' ,
म' न्थे सँस्रव' म' वनयति |
स' रस्वत्यै स्वा' हे' ति
अग्नौ' हुत्वा' ,
म' न्थे सँस्रव' म' वनयति |
वि' श्वेभ्यो देवे' भ्यः स्वा' हे' ति
अग्नौ' हुत्वा' ,
म' न्थे सँस्रव' म' वनयति |
प्रजा' पतये स्वा' हे' ति
अग्नौ' हुत्वा' ,
म' न्थे सँस्रव' म' वनयति |
pk3
K schribitpro m5-8; vide supra
अग्नये स्वाहेति
अग्नौ हुत्वा,
मन्थे सँस्रवमवनयति |
सोमाय स्वाहेति
अग्नौ हुत्वा,
मन्थे सँस्रवमवनयति |
भूः स्वाहेति
अग्नौ हुत्वा,
मन्थे सँस्रवमवनयति |
भुवः स्वाहेति
अग्नौ हुत्वा,
मन्थे सँस्रवमवनयति |
स्वः स्वाहेति
अग्नौ हुत्वा,
मन्थे सँस्रवमवनयति |
भूर्भुवः स्वः स्वाहेति
अग्नौ हुत्वा,
मन्थे सँस्रवमवनयति |
ब्रह्मणे स्वाहेति
अग्नौ हुत्वा,
मन्थे सँस्रवमवनयति |
क्षत्राय स्वाहेति
अग्नौ हुत्वा,
मन्थे सँस्रवमवनयति |
भूताय स्वाहेति
अग्नौ हुत्वा,
मन्थे सँस्रवमवनयति |
भविष्यते स्वाहेति
अग्नौ हुत्वा,
मन्थे सँस्रवमवनयति |
विश्वाय स्वाहेति
अग्नौ हुत्वा,
मन्थे सँस्रवमवनयति |
सर्वाय स्वाहेति
अग्नौ हुत्वा,
मन्थे सँस्रवमवनयति |
प्रजापतये स्वाहेति
अग्नौ हुत्वा,
मन्थे सँस्रवमवनयति |
pM9/k4
अ' थैनमभि' मृशतिः
भ्र' म्
K bhramad
असि,
ज्वल' दसि,
पूर्ण' मसि,
प्रस्तब्ध' मसि
एकसभ' मसि,
हिङ्कृत' मसि,
हिङ्क्रियमान' मसि
उद्गीथ' मसि
उद्गीयमान' मसि,
श्रावित' मसि,
प्रत्याश्रावित' मसि
आ' र्द्रे संदीप्त' मसि,
विभू' रसि,
प्रभू' रसि,
ज्यो' तिरसि
अ' न्नमसि,
K variato ordineH annamasi, jyotirasi
निध' नमसि,
संवर्गो' ऽसी' ति |
pM10/k5
अ' थैनमु' द्यच्छति
आमो' ऽस्य्
K Ama.Nsy
आम' ँ हि' ते म' यि
K mahi
स' हि' रा' जे' शानो' ऽधिपतिः,
स' माँ रा' जे' शनो' ऽधिपतिं करोत्वि' ति |
pM11/k6
अ' थैनमा' चामतिः
त' त्षवितु' र्व' रेण्यं
म' धु वा' ता ऋतायते'
म' धु क्षरन्ति सि' न्धवो;
मा' ध्वीर्नः सन्त्वो' षधीः |
भू' ः स्वा' हा |
pM12/k6
भ' र्गो देव' स्य धीमहि
म' धु न' क्तमुतो' ष' सो,
म' धुमत्पा' र्थिवँ र' जो,
म' धु द्यौ' रस्तु नः पिता' |
भु' वः स्वा' हा |
pM13/k6
धियो' यो' नः प्रचोद' याद् |
म' धुमान्नो व' नस्प' तिः
म' धुमाँ२ अस्तु सू' र्यो,
मा' ध्वीर्ग' वो भवन्तु नः |
स्व' ः स्वा' हे' ति |
स' र्वां च सावित्री' म' न्वाह,
स' र्वाश्च म' धुमतीः स' र्वाश्च व्या' हृतीर्
K om. sarvAsh ...
अह' मेवे' द' ँ स' र्वं भू' यासं |
भू' र्भु' वः स्व' ः स्वाहे' ति |
अन्तत' आच' म्य,
प्रक्षा' ल्य पाणी'
K pANI prakshAlya
जघ' नेनाग्नि' ं प्रा' क्षिराः स' ंविशति |
pM14/k6
प्रात' रादित्य' मु' पतिष्ठतेः
दिशा' मेकपुण्डरीक' मसि
अह' ं मनुष्या' णामेकपुण्डरीक' ं भू' यासमि' ति |
य' थेत' मे' त्य,
जघ' नेनाग्नि' मा' सीनो वँश' ं जपतिः
pM15/k7
त' ँ हैत' मूद्दा' लक आ' रुणिर्वाजसनेया' य याज्ञवल्क्या' यान्तेवासि' न उक्त्वो' वाचा' पि य' एनँ शु' ष्के स्थाणौ' निषिङ्चे' द्
जा' येरङ्छा' खाः,
प्ररोहे' युः प' लाशानी' ति |
pM16/k8
एत' मु हैव' वाजसनेयो' या' ज्नवल्क्यो मधुका' य पैङ्ग्या' यान्तेवासि' न उक्त्वो' वाचा' पि य' एनँ शु' ष्के स्थाणौ' निषिङ्चे' द्
जा' येरङ्छा' खाः,
प्ररोहे' युः प' लाशानी' ति |
pM17/k9
एत' मु हैव' म' धुकः पै' ङ्ग्यश्चू' डाय
K chUlAya
भागवित्त' येऽन्तेवासि' न उक्त्वो' वाचा' पि य' एनँ शु' ष्के स्थाणौ' निषिङ्चे' द्
जा' येरङ्छा' खाः,
प्ररोहे' युः प' लाशानी' ति |
pM18/k10
एत' मु हैव' चू' डो
K chUlo
भा' गवित्तिर्जानक' य अयस्थूणा' यान्तेवासि' न
kayaHsthUNAyAntevAsina
उक्त्वो' वाचा' पि य' एनँ शु' ष्के स्थाणौ' निषिङ्चे' द्
जा' येरङ्छा' खाः,
प्ररोहे' युः प' लाशानी' ति |
pM19/k11
एत' मु हैव' जा' नकिरा' यस्थूणः
K ayaHsthUNaH
षत्य' कामाय जाबाला' यान्तेवासि' न उक्त्वो' वाचा' पि य' एनँ शु' ष्के स्थाणौ' निषिङ्चे' द्
जा' येरङ्छा' खाः,
प्ररोहे' युः प' लाशानी' ति |
pM20/k12
एत' मु हैव' षत्य' कामो जाबालो' ऽन्तेवासि' भ्य उक्त्वो' वाचा' पि य' एनँ शु' ष्के स्थाणौ' निषिङ्चे' द्
जा' येरङ्छा' खाः,
प्ररोहे' युः प' लाशानी' ति |
त' मेत' ं ना' पुत्राय वा' नन्तेवासिने वा ब्रूयात् |
pM21/k13
चतुरौदुम्बरो' भवति
औ' दुम्बरश्चमस'
औ' दुम्बरः स्रुव
औ' दुम्बर इध्म' ,
औ' दुम्बर्या उपमन्थन्यौ' |
pM22/k13
दश ग्राम्या' णि धान्या' नि भवन्तिः
व्रीहिय' वास् ति' लमा' षा अ' णुप्रिय' ंगवो गोधू' माश्च मसू' राश्च ख' ल्वाश्च खल' कुलाश्च;
ता' न्त्सार्ध' ं पिष्ट्वा' दध्ना' म' धुना घृते' नो' पसिङ्चत्य्
K tAnpishhTAndadhani madhuni ghR\^ita upasi~Nchaty
आ' ज्यस्य जुहोति |
ch4
pMk1
एषा' ं वै' भूता' नां पृथिवी' र' सः,
पृथिव्या' आ' पो,
अपा' मो' षधय,
ओ' षधीनां पुष्पा' णि,
पुष्पा' णां फ' लानि,
फ' लानां पु' रुषः,
पु' रुषस्य रे' तः |
pMk2
स' ह प्रजा' पतिरीक्षा' ं चक्रेः
ह' न्तास्मै' प्रतिष्ठा' ं कल्प' यानी' ति;
स' स्त्रि' यँ ससृजे |
ता' ँ सृष्ट्वा' ध' उ' पास्तः
त' स्मात्स्त्रि' यमध' उ' पासीत,
श्री' र्ह्य् ए' शा'
K om. shrIr...
स' एत' ं प्रा' ङ्चं ग्रा' वाणमात्म' न एव' समु' दपारयत्
ते' नैनामभ्य' सृजत |
pMk3
त' स्या वे' दिरुप' स्थो,
लो' मानि बर्हि' श्,
च' र्माधिष' वणे,
स' मिद्धो मध्यत' स् तौ' मुष्कौ' |
स' या' वान्ह वै' वाजपे' येन य' जमनस्य लोको' भ' वति,
ता' वानस्य लोको' भवति,
य' एव' ं विद्वा' नधो' पहासं च' रति;
आ' स'
K AsA.N
स्त्रीणा' ँ सुकृत' ं वृङ्क्ते' |
अथ य' इद' म' विद्वानधो' पहासं च' रति
आ' स्य स्त्रि' यः सुकृत' ं वृङ्जते |
pMk4
एत' द्ध स्म वै' त' द्विद्वा' नूद्दा' लक आ' रुनिराहैत' द्ध स्म वै' त' द्विद्वा' न्णा' को मौ' द्गल्य आहैत' द्ध स्म वै' त' द्विद्वा' न्कुमारहारित' आहः
बह' वो म' र्या ब्राह्मनायना' निरिन्द्रिया' विसुकृतोऽस्मा' ल् लोका' त्प्र' यन्ति,
य' इद' म' विद्वाँसोऽधो' पहासं चरन्ती' ति |
pM5/k4
बहु' वा' इद' ँ सुप्त' स्य वा जा' ग्रतो वा रे' तः स्कन्दति |
pM5/k5
त' दभि' मृशेद्
अ' नु वा मन्त्रयेतः
य' न्मेऽद्य' रे' तः पृथिवी' म' स्कान्त्सीद्
य' दो' षधीर' प्य' सरद्
य' दप' ,
इद' मह' ं त' द्रे' त आ' ददे;
पु' नर्मामै' तु इन्द्रिय' ं,
पु' नस् ते' जः,
पु' नर्भ' गः;
पु' नरग्न' यो धि' ष्ण्या
यथास्थान' ं कल्पन्तामि' त्य्
अनामिकाङ्गुष्ठा' भ्यामादा' यान्तरे' ण स्त' नौ वा भ्रु' वौ वा नि' मृज्यात् |
pMk6
अ' थ य' द्य् उदक' आत्मा' नं प' श्येत्
त' दभि' मन्त्रयेतः
म' यि ते' ज इन्द्रिय' ं य' शो द्र' विणँ सुकृत' मि' ति |
pM7/k6
श्री' र्ह वा' एषा' स्त्रीणा' ं य' न्मलोद्वा' साः |
त' स्मान्मलोद्वा' ससं यशस्वि' नीमभिक्र' म्यो' पमन्त्रयेत |
pM7/k7
सा' चे' दस्मै' न' दद्या' त्
का' ममेनाम' पक्रिणीयात्
K avakriNIyAt
सा' चे' दस्मै' नै' व' दद्या' त्
का' ममेनां यष्ट्या' वा पाणि' ना वोपह' त्या' तिक्रामेद्
इन्द्रिये' न ते य' शसा य' श आ' दद,
इ' त्य्
अयशा' एव' भवति |
pk8
add. K
सा चेदस्मै दद्याद्
इन्द्रियेण ते यशसा यश आदधामीति
यशस्विनावेव भवतः |
pM8/k9
स' या' मिच्छे' त्
काम' येत मे' ति,
त' स्याम' र्थं निष्ठा' प्य !
K nishhThAya
मु' खेन मु' खँ संधा' योप' स्थमस्या अभिमृश्य,
जपेद्
अ' ङ्गाद' ङ्गात्स' ंभवसि,
हृदयाद' धिजायसे;
स' त्व' मङ्गकषायो' ऽसि,
दि' ग्धविद्धामिव मादये' ति
K add. imAmamUM mayIti
pM9/k10
अ' थ या' मिच्छे' द्
न' ग' र्भं दधीते' ति,
त' स्याम' र्थं निष्ठा' प्य
K nishhThAya
मु' खेन मु' खँ संधा' याभिप्रा' ण्या' पान्याद्
इन्द्रिये' ण ते रे' तसा रे' त आ' दद,
इ' त्यरेता' एव' भवति |
pM10/k11
अ' थ या' मिच्छे' द्
ग' र्भं दधीते' ति,
त' स्याम' र्थं निष्ठा' प्य
K nishhThAya
मु' खेन मु' खँ संधा' यापा' न्याभिप्रा' ण्याद्
इन्द्रिये' ण ते रे' तसा रे' त आ' दधामी' ति;
गर्भि' ण्य् एव' भवति |
pM11/k12
aliteH vide infra
अ' थ य' स्य जाया' यै जार' ः स्या' त्
त' ं चे' द्द्विष्या' द्
आ' मपात्रेऽग्नि' मुपसमाधा' य,
प्रतिलोम' ँ शरबर्हि' ः स्तीर्त्वा' ,
त' स्मिन्नेता' ः तिस्र' ः शर' भृष्टीः प्रतिलोमा' ः सर्पि' षाक्ता' जुहुयान्
म' म स' मिद्धे' ऽहौषीः
अशापराकाशौ' त आ' ददे,
असा' वि' ति ना' म गृभ्णाति
म' म स' मिद्धे' ऽहौषीः,
पुत्रपशू' ँस् त आ' ददे,
असा' वि' ति ना' म गृब्णाति
म' म स' मिद्धे' ऽहौषीः,
प्राणापानौ' त आ' ददे,
असा' वि' ति ना' म गृब्णाति
स' वा' एष' निरिन्द्रियो' विसुकृदस्मा' ल् लोका' द्प्रै' ति,
य' मेवंवि' द्ब्राह्मण' ः श' पति |
त' स्मादेवंवित्श्रो' त्रियस्य जाया' योपहास' ं ने' च्छेद्;
उत' ह्य् ए' वंवि' त्प' रो भवति |
pk12
m11 aliteH vide supra
अथ यस्य जायायै जारः स्यात्
तं चेद्द्विष्याद्
आमपात्रेऽग्निमुपसमाधाय,
प्रतिलोमँ शरबर्हिः स्तीर्त्वा,
तस्मिन्नेताः शरभृष्टीः प्रतिलोमाः सर्पिषाक्ता जुहुयान्
मम समिद्धेऽहौषीः,
प्राणापानौ त आददे,
असाविति |
मम समिद्धेऽहौषीः,
पुत्रपशूँस् त आददे,
असाविति |
मम समिद्धेऽहौषीः
अशापराकाशौ त आददे
असाविति |
मम समिद्धेऽहौषीः
इष्टासुकृते त आददे,
असाविति |
स वा एष निरिन्द्रियो' विसुकृतोऽस्माल् लोकाद्प्रैति,
यमेवंविद्ब्राह्मणः शपति |
तस्मादेवंवित्श्रो' त्रियस्य दारेण नोपहासमिच्छेद्;
उत ह्य् एवंवित्परो भवति |
pM12/k13
अ' थ य' स्य जाया' मार्तव' ं विन्दे' त्
त्र्यह' ं कँसे' न' पिबेद' हतवासा;
नै' नां वृषलो,
न' वृषल्य् उ' पहन्यात्
K apahanyAt
त्रिरात्रान्त' आप्लू' य
K Aplutya
व्रीही' न' वघातयेत् |
pM13/k14
स' य' इच्छे' त्
पुत्रो' मे गौरो'
K shuklo
जायेत,
वे' दम' नुब्रुवीत,
स' र्वमा' युरियादि' ति,
क्षीरौ' दनं पाचयित्वा' स' र्पिष्मन्तमश्नीया' ताम्;
ईश्वरौ' ज' नयितवै' |
pM14/k15
अ' थ य' इच्छे' त्
पुत्रो' मे कपिल' ः पिङ्गलो' जायेत,
द्वौ' वे' दाव' नुब्रुवीत,
स' र्वमा' युरियादि' ति,
दध्यो' दनं पाचयित्वा' स' र्पिष्मन्तमश्नीया' ताम्;
ईश्वरौ' ज' नयितवै' |
pM15/k16
अ' थ य' इच्छे' त्
पुत्रो' मे श्यामो' लोहिताक्षो' जायेत,
त्री' न्वे' दान' नुब्रुवीत,
स' र्वमा' युरियादि' ति
उदौ' दनं पाचयित्वा' स' र्पिष्मन्तमश्नीया' ताम्;
ईश्वरौ' ज' नयितवै' |
pM16/k17
अ' थ य' इच्छे' द्
दुहिता' मे पण्डिता' जायेत,
स' र्वमा' युरियादि' ति,
तिलौ' दनं पाचयित्वा' स' र्पिष्मन्तमश्नीया' ताम्;
ईश्वरौ' ज' नयितवै' |
pM17/k18
अ' थ य' इच्छे' त्
पुत्रो' मे पण्डितो' विजिगीथ' ः
K vigItaH
समिति' ंगमः शुश्रू' षितां वा' चं भा' षिता जायेत,
स' र्वान्वे' दान' नुब्रुवीत,
स' र्वमा' युरियादि' ति,
माँसौ' दनं पाचयित्वा' स' र्पिष्मन्तमश्नीया' ताम्;
ईश्वरौ' ज' नयितवाइ |
अ' उक्ष्णे' ण
K auksheNa
वा' र्षभेण वा |
pM18/k19
अ' थाभिप्रात' रेव' स्थालीपाकावृता' ज्यँ चेष्टित्वा' ,
स्थालीपाक' स्योपघा' तं जुहोति
आग्न' ये स्वा' हा' -
-नुमतये स्वा' हा
देवा' य षवित्रे' सत्य' प्रसवाय स्वा' हे' ति,
हुत्वो' द्धृत्य प्रा' श्नाति |
प्रा' श्ये' तरस्याः प्र' यच्छति |
प्रक्षा' ल्य पाणी' ,
उदपात्र' ं पूरयित्वा' ,
ते' नैनां त्रि' रभ्यु' क्षति
उ' त्तिष्ठा' तो,
विश्वावसौ
अन्या' मिच्छ प्रफर्व्य' म्
K prapUrvyAm
स' ं जाया' ं प' त्या सहे' ति |
pM19/k20
अ' थैनामभि' पद्यते' ः
अमोऽह' मस्मि,
सा' त्व' ँ;
सा' त्व' मसि
अमो' ऽह' ँ;
सा' माह' मस्मि
ऋक्त्व' ं;
द्यौ' रह' ं,
पृथिवी' त्व' ं |
ता' वे' हि सँरभा' वहै,
सह' रे' तो दधा' वहै
पुँसे' पुत्रा' य वित्त' य इ' ति |
pM20/k21
अ' थास्या ऊरू' वि' हापयतिः
वि' जिहीथां द्यावापृथिवी' इ' ति |
त' स्याम' र्थं निष्ठा' प्य
K nishhThAya
मु' खेन मु' खँ संधा' य,
त्रि' रेनाम' नुलोमाम' नुमार्ष्टिः
वि' ष्णुर्यो' निं कल्पयतु,
ट्व' ष्टा रूपा' णि पिंशतु
आ' सिन्चतु प्रजा' पतिः
धा' ता ग' र्भं दधातु ते |
ग' र्भं धेहि,
षिनीवालि;
ग' र्भं धेहि,
पृथुष्टुके |
ग' र्भं ते आश्वि' नौ देवा' व्
आ' धत्तां पुष्करस्र' जौ |
pM21/k22
हिरण्य' नी
K hiraNmayI
अ' रणी
या' भ्यां निर्म' न्थतामाश्वि' नौ देवौ'
K om.
त' ं ते ग' र्भँ हवामहे,
दशमे' मासि' सू' तवे
K sUtaye
य' थाग्नि' गर्भा पृथिवी' ,
य' था द्यौ' र्९न्द्रेण गर्भि' णी,
वायुर्दिशा' ं य' था ग' र्भ,
एव' ं ग' र्भं दधामि ते,
असा' वि' ति ना' म गृह्णाति
K om. nA\`ma ...
pM22/k23
सोष्य' न्तीम' द्भिरभ्यु' क्षतिः
य' था वा' तः
K vAyuH
पुष्करि' णीँ
समिङ्ग' यति सर्व' त
एवा' ते ग' र्भ ए' जतु,
सहा' वैतु जरा' युणे' -
-न्द्रस्याय' ं व्रज' ः कृत' ः
सा' र्गलः स' परिश्रयस्;
त' म्
ईन्द्र,
नि' र्जहि
ग' र्भेण सा' वराँ सहे' ति |
pM23/k24
जाते' ऽग्नि' मुपसमाधा' याङ्क' आधा' य,
कँसे' पृषदाज्य' ँ संनी' य,
पृषदाज्य' स्योपघा' तं जुहोति
अस्मि' न्त्सह' स्रं पुष्यासम्
ए' धमानः स्व' गृहे
K sve gR\^ihe
अस्यो' पसद्यां
krishna.asyo\`pasandyAM
मा' छैत्सीत्
प्रज' या च पशु' भिश्च,
स्वा' हा |
म' यि प्राणा' ँस् त्व' यि म' नसा जुहोमि,
स्वा' हा |
pMk24
य' त्क' र्मणात्य' रीरिचं,
य' द्वा न्यू' नमिहा' करम्
आग्नि' स् त' त्स्विष्टकृद्विद्वा' न्त्
स्वि' ष्टँ सु' हुतं करोतु नः,
स्वा' हे' ति |
pM25
pro m25 schribitkrishna 25-26; vide infra
अ' थास्यायुष्य' ं करोति द' क्षिणं क' र्णमभिनिधा' यः
वा' ग्वा' गि' ति त्रि' ः |
अ' थास्य नामधे' यं करोतिः
वे' दोऽसी' ति,
त' दस्यैत' द्गु' ह्यमेव' ना' म स्याद् |
अ' थ द' धि म' धु घृत' ँ सँसृज्या' नन्तर्हितेन जातरूपे' ण प्रा' शयतिः
भू' स् त्व' यि दधामि,
भु' वस् त्व' यि दधामि,
स्व' स् त्व' यि दधामि;
भू' र्भु' वः स्व' ः स' र्वं त्व' यि दधामी' ति |
pk25
maliteH vide supra
अथास्य दक्षिणं कर्णमभिनिधायः
वाग्वागिति त्रिः |
अथ,
दधि मधु घृतँ संनीयानन्तर्हितेन जातरूपेण प्राशयतिः
भूस् ते दधामि,
भुवस् ते दधामि,
स्वस् ते दधामि;
भूर्भुवः स्वः सर्वं त्वयि दधामीति |
pk26
k; maliteH vide supra
अथास्य नाम करोतिः
वेदोऽसीति |
तदस्यैतद्गुह्यमेव नाम भवति |
pM26
K om.
अ' थैनमभि' मृषति
अ' श्मा भव परशु' र्भव हि' रण्यमस्रुत' ं भव;
आत्मा' वै' पुत्रना' मासि |
स' जी' व शर' दः शत' मि' ति |
pM27/k28
अ' थास्य मात' रमभि' मन्त्रयतः
९डासि मैत्रावरुणी' ;
वीरे' वीर' मजीजनथाः
K ajIjanat
सा' त्व' ं वीर' वती भव,
या' स्मा' न्वीर' वतोऽकरदि' ति |
pM28/k27
अ' थैनं मात्रे' प्रदा' य स्त' नं प्र' यच्छतिः
य' स् ते स्त' नः शशयो' यो' मयोभू' र्
यो' रत्नधा' वसुवि' द्य' ः सुद' त्रो,
ये' न वि' श्वा पु' ष्यसि वा' र्याणि,
ष' रस्वति,
त' मिह' धा' तवे क' रि' ति |
pM29/k28
त' ं वा' एत' माहुः
अ' तिपिता बता' भूः
अ' तिपितामहो बता' भूः |
परमा' ं बत का' ष्ठां प्रा' प श्रिया' य' शसा ब्रह्मवर्चसे' न,
य' एवंवि' दो ब्राह्मण' स्य पुत्रो' जा' यत इ' ति |
[पनुस्तुब्]
pM30
pro m4,30-33, K schribit5; vide infra
अ' थ वँश' स्;
त' दिद' ं वय' ं
भा' रद्वाजीपु' त्राद्
भा' रद्वाजीपु' त्रो वा' त्सीमाण्डवीपु' त्राद्
वा' त्सीमाण्डवीपु' त्रः पा' राशरीपु' त्राद्
पा' राशरीपु' त्रो गा' र्गीपु' त्राद्
गा' र्गीपु' त्रः पा' रशरीकौण्डिनीपु' त्रात्
पा' रशरीकौण्डिनीपु' त्रो गा' र्गीपु' त्राड्,
गा' र्गीपु' त्रो गा' र्गीपु' त्राड्,
गा' र्गीपु' त्रो बा' डेयीपु' त्राद्
बा' डेयीपु' त्रो मौ' षिकीपु' त्रान्
मौ' षीकिपु' त्रो हा' रिकर्णीपु' त्राद्
ढा' रिकर्णीपु' त्रो भा' रद्वाजीपु' त्राद्
भा' रद्वाजीपु' त्रः पै' ङ्गीपु' त्रात्
पै' ङ्गीपु' त्रः
pM31
pro m4,30-33, K schribit5; vide infra
का' श्यपीबालाक्यामाठरीपु' त्रात्
का' श्यपीबालाक्यामाठरीपु' त्रो कौ' त्सीपु' त्रात्
कौ' त्सीपु' त्रो भौ' धीपु' त्राद्
भौ' धीपु' त्रः हा' लङ्कायनीपु' त्राच्,
हा' लङ्कायनीपु' त्रो वा' र्षमणीपु' त्राद्
वा' र्षमणीपु' त्रो गौ' तमीपु' त्राद्
गौ' तमीपु' त्रऽत्रेयीपु' त्राद्
अत्रेयीपु' त्रो गौ' तमीपु' त्राद्
गौ' तमीपु' त्रो वा' त्सीपु' त्राद्
वा' त्सीपु' त्रो भा' रद्वाजीपु' त्राद्
भा' रद्वाजीपु' त्रः पा' राशरीपु' त्रात्
पा' राशरीपु' त्रो वा' र्कारुणीपु' त्रात्
वा' र्कारुणीपु' त्रोऽर्तभागीपु' त्रात्
अर्तभागीपु' त्रः हौ' ङ्गीपु' त्राच्,
छौ' ङ्गीपु' त्रः षा' ंकृतिपु' त्रात्
षा' ंकृतिपु' त्र
pM32
pro m4,30-33, K schribit5; vide infra
अलम्बीपु' त्रात्
अलम्बीपु' त्रऽलम्बायनीपुत्रात्
अलम्बायनीपु' त्रो जा' यन्तीपु' त्रात्
जा' यन्तीपु' त्रो मा' ण्डूकायनीपु' त्रान्
मा' ण्डूकायनीपु' त्रो मा' ण्डूकीपु' त्रान्
मा' ण्डूकीपु' त्रः हा' ण्डिलीपु' त्रात्
हा' ण्डिलीपु' त्रो ऱा' थीतरीपु' त्राद्
ऱा' थीतरीपु' त्रो क्रौ' ङ्चिकीपु' त्राभ्यां,
क्रौ' ङ्चिकीपु' त्रौ वै' दभृतीपु' त्राद्
वै' दभृतीपु' त्रो भा' लुकीपु' त्राद्
भा' लुकीपु' त्रः प्रा' चीनयोगीपु' त्रात्
प्रा' चीनयोगीपु' त्रः षा' ंजीवीपु' त्रात्
षा' ंजीवीपु' त्रः का' र्शकेयीपु' त्रात्
का' र्शकेयीपु' त्रः
pM33
pro m4,30-33, K schribit5; vide infra
प्रा' श्नीपु' त्राद्
असुरिवा' सिनः प्रा' श्नीपु' त्र असुरायना' द्
असुरायण' असुरे' ः
असुरि' ः या' ज्ञवल्क्याद्
या' ज्ञवल्क्य ऊद्दा' लकाद्
ऊद्दा' लको' ऽरुणाद्
अरुण ओपवेशेः
ओपवेशिः कु' श्रेः,
कु' श्रिर्वाजश्रवसो,
वाजश्रवा जीह्वा' वतो बा' ध्योगात्
जीह्वा' वान्बा' ध्योगो' ऽसिताद्वा' र्षगणाद्
असितो वा' र्षगणो ह' रितात्क' श्यपाद्
ढ' रितः क' श्यपः हि' ल्पात्क' श्यपाच्,
छि' ल्पः क' श्यपः क' श्यपान्णै' ध्रुवेः,
क' श्यपो णै' ध्रुविर्वा' चो,
वा' गाम्भि' ण्या,
आम्भि' ण्य् अदित्या' द्
आदित्या' नीमा' नि शुक्ला' नि य' जूँषि वाजसनेयेन या' ज्ञवल्क्येनाख्ययन्ते |
chk5
schribitkrishna pro m4,30-33
pk1
अथ वँशः
पौतिमाषीपुत्रः कात्यायनीपुत्रात्
कात्यायनीपुत्रो गौतमीपुत्राद्
गौतमीपुत्रो भारद्वाजीपुत्राद्
भारद्वाजीपुत्रः पाराशरीपुत्रात्
पाराशरीपुत्र औपस्वस्तीपुत्राद्
औपस्वस्तीपुत्रः पाराशरीपुत्रात्
पाराशरीपुत्रः कात्यायनीपुत्रात्
कात्यायनीपुत्रः कौशिकीपुत्रात्
कौशिकीपुत्र अलम्बीपुत्राच्च वैयाघ्रपदीपुत्राच्च,
वैयाघ्रपदीपुत्रह् काण्वीपुत्राच्च कापीपुत्राच्च,
कापीपुत्रः
pk2
अत्रेयीपुत्राद्
अत्रेयीपुत्रो गौतमीपुत्राद्
गौतमीपुत्रो भारद्वाजीपुत्राद्
भारद्वाजीपुत्रः पाराशरीपुत्रात्
पाराशरीपुत्रो वात्सीपुत्राद्
वात्सीपुत्रः पाराशरीपुत्रात्
पाराशरीपुत्रो वार्कारुनीपुत्राद्
वार्कारुणीपुत्रो वार्कारुणीपुत्राद्
वार्कारुणीपुत्र अर्तभागीपुत्राद्
अर्तभागीपुत्रः हौङ्गीपुत्राच्,
छौङ्गीपुत्रः षान्कृतीपुत्रात्
षाङृतीपुत्र अलम्बायनीपुत्राद्
अलम्बायनीपुत्र अलम्बीपुत्राद्
अलम्बीपुत्रो जायन्तीपुत्रात्
जायन्तीपुत्रो माण्डूकायनीपुत्रान्
माण्डूकायनीपुत्रो माण्डूकीपुत्रान्
माण्डूकीपुत्रः हाण्डिलीपुत्राच्,
छाण्डिलीपुत्रो ऱाथीतरीपुत्राद्
ऱाथीतरीपुत्रो भालुकीपुत्राद्
भालुकीपुत्रः क्रौङ्चिकीपुत्राभ्यां,
क्रौङ्चिकीपुत्रौ वैदभृतीपुत्राद्
वैदभृतीपुत्रः कार्शकेयीपुत्रात्
कार्शकेयीपुत्रः प्राचीनयोगीपुत्रात्
प्राचीनयोगीपुत्रः षाङ्जीवीपुत्रात्
षाङ्जीवीपुत्रः प्राश्नीपुत्रादसुरिवासिनः,
प्राश्नीपुत्र असुरायणाद्
असुरायण असुरेः
असुरिः
pk3
याज्ञवल्क्याद्
याज्ञवल्क्य ऊद्दालकाद्
ऊद्दालकोऽरुणाद्
आरुण ऊपवेशेः
ऊपवेशिः कुश्रेः,
कुश्रिर्वाजश्रवसो,
वाजश्रवा जीह्वावतो बाध्योगात्
जीह्वावान्बाध्योगोऽसिताद्वार्षगणाद्
आसितो वार्षगणो हरितात्कश्यपाद्
ढरितः कश्यपः हिल्पात्कश्यपात्
हिल्पः कश्यपः कश्यपान्णैध्रुवेः,
कश्यपो णैध्रुविर्वाचो,
वागाम्भिण्या,
आम्भिण्य् अदित्याद्;
आदित्यानीमानि शुक्लानि यजूँषि वाजसनेयेन याज्ञवल्क्येनाख्ययन्ते |
pk4
षमानमा षाङ्जीवीपुत्रात्
षङ्जिवीपुत्रो माण्डूकायनेः
माण्डूकायनिर्माण्डव्याद्
माण्डव्यः कौत्सात्
कौत्सो माहित्थेः
माहित्थिर्वामकक्षायणाद्
वामकक्षायणः हाण्डिल्याच्,
छाण्डिल्यो वात्स्याद्
वात्स्यः कुश्रेः,
कुश्रिर्यज्ञवचसः ऱाजस्तम्बायनाद्
यज्ञवचा ऱाजस्तम्बायनः टुरात्कावषेयात्
टुरः कावषेयः प्रजापतेः,
प्रजापतिर्ब्रह्मणो;
ब्रह्म स्वयंभु |
ब्रह्मणे नमः |
[Ttitus]TITUS[Tn16]
|AYVW
[Ttitle]B.rhad-(raNyaka-UpaniSad[Tn16]
|BBAUp
[Tsubtitle]MAdhyandina-Recension / KANva-Recension[Tn16]
[Ttextdescr]edited by Marcos Albino,
Erlangen 1996-1997;
TITUS version by Jost Gippert,
Frankfurt a/M, 31.1.1997 / 28.2.1998 / 21.6.1998[Tn16]
[Tec12][Divergences between both recensions are marked by colours.][Tn16]
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