॥ श्रीदत्तात्रेयस्तोत्रं २ ॥

॥ ॐ ॥ दत्तात्रेयं प्रियदैवतं सर्वात्मकं विश्वंभरम् । करुणार्णवं विपदाहरं चिन्मयं प्रणमाम्यहम् ॥ १॥ बालरूपं हास्यवदनं शंखचक्रयुतं प्रभुम् । धेनुसहितं त्रिशुलपाणिं चिन्मयं प्रणमाम्यहम् ॥ २॥ षड्भुजं स्तवनप्रियं त्रिगुणात्मकं भवतारकम् । शिवकारकं सुरवंदितं चिन्मयं प्रणमाम्यहम् ॥ ३ ॥ प्रणवगायनतोषितं प्रणवपद्मैः पूजितम् । प्रणवात्मकं परमेश्वरं चिन्मयं प्रणमाम्यहम् ॥ ४॥ कोटिभास्करसदृशं तेजस्विनं तेजोमयम् । सद्गुरूं गुरूणां गुरूं चिन्मयं प्रणमाम्यहम् ॥ ५॥ विश्वनाटकचालकं ज्ञानगम्यं निर्गुणम् । भक्तकारणसंभूतं चिन्मयं प्रणमाम्यहम् ॥ ६॥ बालयोगिध्यानमग्नं त्रिविधतापनिवारकम् । दीननाथं सिद्धिदं चिन्मयं प्रणमाम्यहम् ॥ ७॥ जनकजननीबंधुसुहृदाः आप्तसर्वास्त्वं मम । एहि एहि स्मर्तृगामिन् चिन्मय प्रकटी भव ॥ ८॥ Encoded and proofread by Dinkar Deshpande dinkar.deshpande@gmail.com Sunder Hattangadi sunderh@hotmail.com

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% Transliterated by     : Dinkar Deshpande , sunderh at hotmail.com
% Proofread by          : Dinkar Deshpande , sunderh at hotmail.com
% Latest update         : April 25, 2010
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