॥ श्रीसुदर्शनकवचम् २ ॥

ऊपरी बाधा, अला-बला, भूत, भूतिनी, यक्षिणी, प्रेतिनी किसी भी तरह की ओपरी विपत्ति में सुदर्शन कवच रक्षा करता है । यह अद्वितीय तान्त्रिक शक्ति से युक्त है । अतः सुदर्शनचक्र की भान्ति पाठक की सदैव रक्षा करता है । ॐ अस्य श्री सुदर्शन कवच महामन्त्रस्य नारायण ऋषिः श्री सुदर्शनो देवता, गायत्री छन्दः दृष्टं दारय इति कीलकम् । हन हन द्विषय इति बीजम् , सर्वशत्रुक्षयार्थे सुदर्शन स्तोत्रपाठे विनियोगः ॥ १॥ अथ न्यासः ॐ नारायण ऋषये नमः शिरसे स्वाहा । ॐ गायत्री छन्दसे नमः मुखे नेत्रत्रयाय वौषट् । ॐ दुष्टं दारय दारयेति कीलकाय नमः हृदये कवचाय हुम् । ॐ ह्रां ह्रीं ह्रूं द्विष इति बीजम् गुह्ये शिखायै वषट् । ॐ सुदरशन ज्वलत्पावकसङ्काशेति कीलकाय सर्वाङ्गे अस्त्राय फट् इति ऋष्यादि । पश्चान्मूलमन्त्रेण न्यासध्यानं कुर्यात् ॥ २॥ अथ मूलमन्त्रः ॐ ह्रां ह्रीं नमो भगवते भो भो सुदर्शनचक्र दुष्टं दारय दारय दुरितं हन हन पापं मथ मथ आरोग्यं कुरु कुरु हुं हुं फट् स्वाहा । अनेन मूलमन्त्रेण पुरश्चरणं कृत्वा तदा आयुधसान्निध्यं भवति भवति ॥ ३॥ अथ शत्रुनाशन प्रयोगमन्त्रः ॐ ह्रीं ह्रीं ह्रूं सुदर्शनचक्रराजन् दुष्टान् दह दह सर्वदुष्टान् भयं कुरु कुरु विदारय विदारय परमन्त्रान् ग्रासय ग्रासय भक्षय भक्षय द्रावय द्रावय हुं हुं फट् ॥ ४॥ अथ मोहनमन्त्रः ॐ हुं हन हन ह्रां ह्रां हन हन ओङ्कार हन हन ओं ह्रीं सुदर्शनचक्र सर्वजनवश्यं कुरु कुरु ठः ह्रा ठः ठः स्वाहा ॥ ५॥ अथ लक्ष्मीप्राप्ति प्रयोगमन्त्रः ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ह्रां ह्रां सुदर्शनचक्र ममगॄहे अष्टसिद्धिं कुरु कुरु ऐं क्लीं स्वाहा ॥ ६॥ अथ आकर्षण प्रयोगमन्त्रः ॐ ह्रां ह्रीं ह्रीं क्लीं क्लीं जम्भय जम्भय अमुकं आकर्षय आकर्षय मम वश्यं ज्री ज्री कुरु कुरु स्वाहा ॥ ७॥ ॐ ह्रां षोडशवारं पूरकं कॄत्वा श्रों ह्रां त्रिषष्टि वारं कुम्भकं कृत्वा ॐ ह्रां द्वात्रिंशद्वारं रेचकं कुर्यात् । इति प्राणायामः ।
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% Proofread by          : Dinesh Agarwal  dinesh.garghouse at gmail.com, PSA Easwaran psaeaswaran at gmail.com
% Source                : http://archive.org/details/HindiBook-danikPrarthnastrotaKavach  printed pages 66-67
% Latest update         : July 31, 2013
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