॥ श्री बाला अष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् ॥

अथ श्री बाला अष्टोत्तर शतनामस्तोत्रम् । कल्याणी त्रिपुरा बाला माया त्रिपुरसुन्दरी । सुन्दरी सौभाग्यवती क्लींकारी सर्वमङ्गला ॥ १॥ ह्रींकारी स्कन्दजननी परा पञ्चदशाक्षरी । त्रिलोकी मोहनाधीशा सर्वेशी सर्वरूपिणी ॥ २॥ सर्वसंक्षोभिणी पूर्णा नवमुद्रेश्वरी शिवा । अनङ्गकुसुमा ख्याता अनङ्गा भुवनेश्वरी ॥ ३॥ जप्या स्तव्या श्रुतिर्निता नित्यक्लिन्नाऽमृतोद्भवा । मोहिनी परमाऽऽनन्दा कामेशतरुणा कला ॥ ४॥ कलावती भगवती पद्मरागकिरीटिनी । सौगन्धिनी सरिद्वेणी मन्त्रिणि मन्त्ररूपिणि ॥ ५॥ तत्त्वत्रयी तत्त्वमयी सिद्धा त्रिपुरवासिनी । श्रीर्मतिश्च महादेवी कौलिनी परदेवता ॥ ६॥ कैवल्यरेखा वशिनी सर्वेशी सर्वमातृका । विष्णुस्वसा देवमाता सर्वसंपत्प्रदायिनी ॥ ७॥ किङ्करी माता गीर्वाणी सुरापानानुमोदिनी । आधाराहितपत्नीका स्वाधिष्ठानसमाश्रया ॥ ८॥ अनाहताब्जनिलया मणिपूरासमाश्रया । आज्ञा पद्मासनासीना विशुद्धस्थलसंस्थिता ॥ ९॥ अष्टात्रिंशत्कलामूर्ति स्सुषुम्ना चारुमध्यमा । योगेश्वरी मुनिध्येया परब्रह्मस्वरूपिणी ॥ १०॥ चतुर्भुजा चन्द्रचूडा पुराणागमरूपिनी । ऐंकारादिर्महाविद्या पञ्चप्रणवरूपिणी ॥ ११॥ भूतेश्वरी भूतमयी पञ्चाशद्वर्णरूपिणी । षोढान्यास महाभूषा कामाक्षी दशमातृका ॥ १२॥ आधारशक्तिः तरुणी लक्ष्मीः त्रिपुरभैरवी । शाम्भवी सच्चिदानन्दा सच्चिदानन्दरूपिणी ॥ १३॥ माङ्गल्य दायिनी मान्या सर्वमङ्गलकारिणी । योगलक्ष्मीः भोगलक्ष्मीः राज्यलक्ष्मीः त्रिकोणगा ॥ १४॥ सर्वसौभाग्यसंपन्ना सर्वसंपत्तिदायिनी । नवकोणपुरावासा बिन्दुत्रयसमन्विता ॥ १५॥ नाम्नामष्टोत्तरशतं पठेन्न्याससमन्वितं । सर्वसिद्धिमवाप्नोती साधकोभीष्टमाप्नुयात् ॥ १६॥ इति श्री रुद्रयामलतन्त्रे उमामहेश्वरसंवादे श्री बाला अष्टोत्तर शतनामस्तोत्रम् संपूर्णम् ।
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