॥ शिवजयवादस्तोत्रम् ॥

श्रीगणेशाय नमः ॥ जय जय गिरिजालङ्कृतविग्रह, जय जय विनताखिलदिक्पाद । जय जय सर्वविपत्तिविनाशन, जय जय शङ्कर दीनदयाल ॥ १॥ जय जय सकलसुरासुरसेवित, जय जय वाञ्छितदानवितन्द्र । जय जय लोकालोकधुरन्धर जय जय नागेश्वर धृतचद्र ॥ २॥ जय जय हिमाचलनिवासिन् जय जय करुणाकल्पितलिङ्ग । जय जय संसृतिरचनाशिल्पिन् जय जय भक्तहृदम्बुजभृङ्ग ॥ ३॥ जय जय भोगिफणामणिरञ्जित, जय जय भूतिविभूषितदेह । जय जय पितृवनकेलिपरायण, जय जय गौरीविभ्रमगेह ॥ ४॥ जय जय गङ्गातरङ्गलुलितजट, जय जय मङ्गलपूरसमुद्र । जय जय बोधविजृम्भणकारण जय जय मानसपूर्तिविनिद्र ॥ ५॥ जय जय दयातरङ्गितलोचन, जय जय चित्रचरित्रपवित्र । जय जय शब्दब्रह्मविकाशक जय जय किल्बिषतापधवित्र ॥ ६॥ जय जय तन्त्रनिरूपणतत्पर, जय जय योगविकस्वरधाम । जय जय मदनमहाभटभञ्जन, जय जय पूरितपूजककाम ॥ ७॥ जय जय गङ्गाधर विश्वेश्वर, जय जय पतितपवित्रविधान । जय जव बम्बन्नाद कृपाकर, जय जय शिव शिव सौख्यनिधान ॥ ८॥ य इमं शिवजयवादमुदारं, पठति सदा शिवधाम्नि । तस्य सदाशिवशासनयोगान्माद्यति सम्पन्नाम्नि ॥ ९॥ इति शिवजयवादस्तोत्रं सम्पूर्णम् ॥ Proofread by PSA Easwaran psaeaswaran at gmail.com

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% Latest update         : February 28, 2017
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