॥ श्रीयादगिरि लक्ष्मीनृसिंहस्तोत्रम् ॥

नरसिंह रमेश कृपा जलधे सुरवैरि हिरण्य विदारणतः नरलोक हितार्दरतस्सततम् विजयीभव यादगिरीश विभो! ॥ १॥ करुणारसपूर विधेयतयाऽ सुरबालक बाधनिवारणतः सममेव विदारितवानसुरम् विजयीभव यादगिरीश विभो! ॥ २॥ नरकेसरि रूपनिरूपणतः सुरशेखर रूप निरूपकताम् गमयन् शमयन् नरलोकरुजम् विजयीभव यादगिरीश विभो! ॥ ३॥ जनताभिमतार्पण शीलपते भवभीत समुद्धरणैकमते सुरनायक नायक लोकपते विजयीभव यादगिरीश विभो! ॥ ४॥ नरलोकभयानक रूपमिदम् प्रधितम् रचयन् नरलोकभियाम् सकलस्यतु शांति करोभिमतः विजयीभव यादगिरीश विभो! ॥ ५॥ अवतार गणेश्वति चित्रपदम् नरकेसरि मिश्रित रूपमिदम् प्रकटीकुरुतेऽघटिते घटनाम् तवदिव्यविधाम् नरसिंह विभो! ॥ ६॥ करुणाकलयाखिल लोकमिदम् सकलार्थ समृद्धि रमाभरणम् कलयन् जनिकारणकारणभो विजयीभव यादगिरीश विभो! ॥ ७॥ पिताश्रीनृसिंहः विभुश्रीनृसिंहः गतिश्रीनृसिंहः धनम् श्रीनृसिंहः भजेश्रीनृसिंहम् - भजे श्रिनृसिंहम् नृसिंहम् भजे यादशैलेशमीशम् ॥ ८॥ नमेज्ञानमात्यंतिको भक्तिभावः नमेसाधुचर्यात्वमेवासि सर्वम् इतीवापिविश्वास ऐषः त्वदीयः त्वदीयोप्यहम् सर्वमेवम् त्वदीयम् ॥ ९॥ त्वदीयेसमस्ते मदीयत्वभावात् चिरात्संभृतात् मोहितोनाथसत्यम् इदानीम् तु लक्ष्मीशसेवाविशेषात् निरस्तम् हि मे मोहजातम् समस्तम् ॥ १०॥ अजानतामयानाथ! जन्मकोटिशतैरपि कृतानि सर्वपापानि क्षंतव्यानि दयामय ॥ ११॥ ॥ इति श्री वांगीपुरम् नरसिंहाचार्य विरचितं श्री यादगिरि लक्ष्मीनृसिंह स्तोत्रम् समाप्तम् ॥ Encoded and proofread by Venkata N Vangeepuram vangeepuram@rediffmail.com

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% Author                : vA.ngIpuram narasi.nhAchArya
% Language              : Sanskrit
% Subject               : philosophy/hinduism/religion
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% Proofread by          : Venkata N Vangeepuram vangeepuram at rediffmail.com Great grandson of the composer
% Latest update         : December 15, 2004
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