॥ दशावतार हरिगाथा ॥

प्रलयोदन्वदुदीर्ण-जलविहारा-निविशाङ्गम् । कमलाकान्त-मण्डित-विभवाब्धिं हरिमीडे ॥ १॥ चरमाङ्गोद्ध्ऱ्६इत-मन्दरतटिनं कूर्मशरीरम् । कमलाकान्त-मण्डित-विभवाब्धिं हरिमीडे ॥ २॥ सित-दंष्ट्रोद्धृत-काश्यपतनयम् सूकररूपम् । कमलाकान्त-मण्डित-विभवाब्धिं हरिमीडे ॥ ३॥ निशित-प्राग्र-नखेन जित-सुरारिं नरसिंहम् । कमलाकान्त-मण्डित-विभवाब्धिं हरिमीडे ॥ ४॥ त्रिपद-व्याप्त-चतुर्दश-भुवनं वामनरूपम् । कमलाकान्त-मण्डित-विभवाब्धिं हरिमीडे ॥ ५॥ क्षपित-क्षत्रियवंश-नगधरं भार्गवरामम् । कमलाकान्त-मण्डित-विभवाब्धिं हरिमीडे ॥ ६॥ दयिताचोर-निबर्हण-निपुणं राघवरामम् । कमलाकान्त-मण्डित-विभवाब्धिं हरिमीडे ॥ ७॥ मुरली-निस्वन-मोहितवनितं यादवकृष्णम् । कमलाकान्त-मण्डित-विभवाब्धिं हरिमीडे ॥ ८॥ पटुचाटिकृत-निस्फुट-जननं श्रीघनसंज्ञम् । कमलाकान्त-मण्डित-विभवाब्धिं हरिमीडे ॥ ९॥ परिनिर्मूलित-दुष्टजन-कुलं विष्णुयशोजम् । कमलाकान्त-मण्डित-विभवाब्धिं हरिमीडे ॥ १०॥ अकृतेमां विजयध्वजवरतीर्थो हरिगाथाम् । अयते प्रीतिमलं सपदि यया श्रीरमणोयम् ॥ ११॥ ॥ इति श्री विजयध्वजतीर्थकृता दशावतारहरिगाथा समाप्ता॥ Encoded and proofread by N.Balasubramanian bbalu at satyam.net.in

% Text title            : dashAvatAra harigAthA
% File name             : dashAvatAraharigAthA.itx
% itxtitle              : dashAvatAra harigAthA
% engtitle              : dashAvatAra harigAthA
% Category              : vishhnu, dashAvatAra, stotra
% Location              : doc_vishhnu
% Sublocation           : vishhnu
% SubDeity              : dashAvatAra
% Texttype              : stotra
% Author                : vijayadhvajatIrtha
% Language              : Sanskrit
% Subject               : philosophy/hinduism/religion
% Transliterated by     : N.Balasubramanian bbalu at satyam.net.in
% Proofread by          : N.Balasubramanian bbalu at satyam.net.in
% Latest update         : June 5, 2006
% Send corrections to   : Sanskrit@cheerful.com
% Site access           : http://sanskritdocuments.org
This text is prepared by volunteers and is to be used for personal study and research. The file is not to be copied or reposted for promotion of any website or individuals or for commercial purpose without permission. Please help to maintain respect for volunteer spirit.

BACK TO TOP