॥ श्रीयादगिरि लक्ष्मीनृसिंह प्रपत्तिः ॥

लक्ष्मीनृसिंह ललनाम् जगतोस्यनेत्रीम् मातृस्वभाव महिताम् हरितुल्य शीलाम् लोकस्य मङ्गळकरीम् रमणीय रूपाम् पद्मालयाम् भगवतीम् शरणम् प्रपद्ये ॥ १॥ श्रीयादनामकमुनींद्रतपोविशेषात् श्रीयादशैलशिखरे सतत प्रकाशौ भक्तानुरागभरितौ भवरोग वैद्यौ लक्ष्मीनृसिंह चरणौ शरणम् प्रपद्ये ॥ २॥ देवस्वरूप विकृतावपिनैजरुपौ सर्वोत्तरौ सुजन सरु निशेव्यमानौ सर्वस्य जीवनकरौ सद्रृशस्वरूपौ लक्ष्मीनृसिंह चरणौ शरणम् प्रपद्ये ॥ ३॥ लक्ष्मीशते प्रपदने सहकारभूतौ त्वत्तोप्यति प्रियतमौ शरणागतानाम् रक्षाविचक्षण पटू करुणालयौ श्री लक्ष्मीनृसिंह चरणौ शरणम् प्रपद्ये ॥ ४॥ प्रह्लाद पौत्र बलिदानव भूमिदान कालप्रकाशित निजान्य जघन्य भावौ लोकप्रमाण करणौ शुभदौ सुरानाम् लक्ष्मीनृसिंह चरणौ शरणम् प्रपद्ये ॥ ५॥ कायादवीय शुभमानस राजहंसौ वेदान्त कल्पतरु पल्लव टल्लि जौतौ सद्भक्त मूलधनमित्युदित प्रभावौ लक्ष्मीनृसिंह चरणौ शरणम् प्रपद्ये ॥ ६॥ ॥ इति श्री वंगीपुरम् नरसिंहाचार्य विरचितं श्री यादगिरि लक्ष्मीनृसिंह प्रपत्तिः समाप्तं ॥ Encoded and proofread by Venkata N Vangeepuram vangeepuram@rediffmail.com
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% engtitle              : yAdagiri laxmInRisi.nha prapattiH
% Category              : vishhnu, vishnu_misc, stotra, vAngIpuram-narasinhAchArya
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% Sublocation           : vishhnu
% SubDeity              : vishnu_misc
% Texttype              : stotra
% Author                : va.ngIpuram narasi.nhAchArya
% Language              : Sanskrit
% Subject               : philosophy/hinduism/religion
% Transliterated by     : http://www.mypurohith.com
% Proofread by          : Venkata N Vangeepuram vangeepuram at rediffmail.com Grandson of the composer
% Latest update         : December 15, 2004
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