॥ गुरु अष्टोत्तरशतनामावली ॥

गुरु बीज मन्त्र - ॐ ग्राँ ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः ॥ ॐ गुणाकराय नमः ॥ ॐ गोप्त्रे नमः ॥ ॐ गोचराय नमः ॥ ॐ गोपतिप्रियाय नमः ॥ ॐ गुणिने नमः ॥ ॐ गुणवतां श्रेष्थाय नमः ॥ ॐ गुरूणां गुरवे नमः ॥ ॐ अव्ययाय नमः ॥ ॐ जेत्रे नमः ॥ ॐ जयन्ताय नमः ॥ ॐ जयदाय नमः ॥ ॐ जीवाय नमः ॥ ॐ अनन्ताय नमः ॥ ॐ जयावहाय नमः ॥ ॐ आङ्गिरसाय नमः ॥ ॐ अध्वरासक्ताय नमः ॥ ॐ विविक्ताय नमः ॥ ॐ अध्वरकृत्पराय नमः ॥ ॐ वाचस्पतये नमः ॥ ॐ वशिने नमः ॥ ॐ वश्याय नमः ॥ ॐ वरिष्ठाय नमः ॥ ॐ वाग्विचक्षणाय नमः ॥ ॐ चित्तशुद्धिकराय नमः ॥ ॐ श्रीमते नमः ॥ ॐ चैत्राय नमः ॥ ॐ चित्रशिखण्डिजाय नमः ॥ ॐ बृहद्रथाय नमः ॥ ॐ बृहद्भानवे नमः ॥ ॐ बृहस्पतये नमः ॥ ॐ अभीष्टदाय नमः ॥ ॐ सुराचार्याय नमः ॥ ॐ सुराराध्याय नमः ॥ ॐ सुरकार्यकृतोद्यमाय नमः ॥ ॐ गीर्वाणपोषकाय नमः ॥ ॐ धन्याय नमः ॥ ॐ गीष्पतये नमः ॥ ॐ गिरीशाय नमः ॥ ॐ अनघाय नमः ॥ ॐ धीवराय नमः ॥ ॐ धिषणाय नमः ॥ ॐ दिव्यभूषणाय नमः ॥ ॐ देवपूजिताय नमः ॥ ॐ धनुर्धराय नमः ॥ ॐ दैत्यहन्त्रे नमः ॥ ॐ दयासाराय नमः ॥ ॐ दयाकराय नमः ॥ ॐ दारिद्र्यनाशनाय नमः ॥ ॐ धन्याय नमः ॥ ॐ दक्षिणायनसंभवाय नमः ॥ ॐ धनुर्मीनाधिपाय नमः ॥ ॐ देवाय नमः ॥ ॐ धनुर्बाणधराय नमः ॥ ॐ हरये नमः ॥ ॐ अङ्गिरोवर्षसंजताय नमः ॥ ॐ अङ्गिरःकुलसंभवाय नमः ॥ ॐ सिन्धुदेशाधिपाय नमः ॥ ॐ धीमते नमः ॥ ॐ स्वर्णकायाय नमः ॥ ॐ चतुर्भुजाय नमः ॥ ॐ हेमाङ्गदाय नमः ॥ ॐ हेमवपुषे नमः ॥ ॐ हेमभूषणभूषिताय नमः ॥ ॐ पुष्यनाथाय नमः ॥ ॐ पुष्यरागमणिमण्डलमण्डिताय नमः ॥ ॐ काशपुष्पसमानाभाय नमः ॥ ॐ इन्द्राद्यमरसंघपाय नमः ॥ ॐ असमानबलाय नमः ॥ ॐ सत्त्वगुणसम्पद्विभावसवे नमः ॥ ॐ भूसुराभीष्टदाय नमः ॥ ॐ भूरियशसे नमः ॥ ॐ पुण्यविवर्धनाय नमः ॥ ॐ धर्मरूपाय नमः ॥ ॐ धनाध्यक्षाय नमः ॥ ॐ धनदाय नमः ॥ ॐ धर्मपालनाय नमः ॥ ॐ सर्ववेदार्थतत्त्वज्ञाय नमः ॥ ॐ सर्वापद्विनिवारकाय नमः ॥ ॐ सर्वपापप्रशमनाय नमः ॥ ॐ स्वमतानुगतामराय नमः ॥ ॐ ऋग्वेदपारगाय नमः ॥ ॐ ऋक्षराशिमार्गप्रचारवते नमः ॥ ॐ सदानन्दाय नमः ॥ ॐ सत्यसंधाय नमः ॥ ॐ सत्यसंकल्पमानसाय नमः ॥ ॐ सर्वागमज्ञाय नमः ॥ ॐ सर्वज्ञाय नमः ॥ ॐ सर्ववेदान्तविदे नमः ॥ ॐ ब्रह्मपुत्राय नमः ॥ ॐ ब्राह्मणेशाय नमः ॥ ॐ ब्रह्मविद्याविशारदाय नमः ॥ ॐ समानाधिकनिर्मुक्ताय नमः ॥ ॐ सर्वलोकवशंवदाय नमः ॥ ॐ ससुरासुरगन्धर्ववन्दिताय नमः ॥ ॐ सत्यभाषणाय नमः ॥ ॐ बृहस्पतये नमः ॥ ॐ सुराचार्याय नमः ॥ ॐ दयावते नमः ॥ ॐ शुभलक्षणाय नमः ॥ ॐ लोकत्रयगुरवे नमः ॥ ॐ श्रीमते नमः ॥ ॐ सर्वगाय नमः ॥ ॐ सर्वतो विभवे नमः ॥ ॐ सर्वेशाय नमः ॥ ॐ सर्वदातुष्टाय नमः ॥ ॐ सर्वदाय नमः ॥ ॐ सर्वपूजिताय नमः ॥ ॥ इति गुरु अष्टोत्तरशतनामावलिः सम्पूर्णम् ॥ Propitiation of Jupiter (Thursday) CHARITY: Donate a peepal sapling, saffron, turmeric, sugar, a horse, or yellow flowers to a brahmin (priest) on Thursday morning. FASTING: On Thursday, especially during Jupiter transits and major or minor Jupiter periods. MANTRA: To be chanted on Thursday, one hour before sunset, especially during major or minor Jupiter periods: RESULT: The planetary diety Brihaspati is propitiated increasing satisfaction and facilitating marriage and childbirth. Transliteration and information by Dr. S. Kalyanaraman kalyan97@yahoo.com Proofread by Detlef Eichler DetlefEichler(@at)gmx.net More information http://members.tripod.com/ऽnavagraha
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% File name             : guru108.itx
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% engtitle              : guru aShTottarashatanAmAvalI
% Category              : aShTottarashatanAmAvalI, navagraha, nAmAvalI
% Location              : doc_z_misc_navagraha
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% Language              : Sanskrit
% Subject               : philosophy/hinduism/religion
% Transliterated by     : Dr. S. Kalyanaraman (kalyan97 at yahoo.com)
% Proofread by          : Dr. S. Kalyanaraman (kalyan97 at yahoo.com), Detlef Eichler DetlefEichler at gmx.net
% Description-comments  : 108 names for guru
% Source                : Ashtoththara Shathanamavali Shatakam, Edited by R.M uralikrishna Srowthigal, Published by VIDVATH SABHA, Chennai - 600073
% Indexextra            : (108 names)
% Latest update         : Jan 25, 1998, June 3, 2007
% Send corrections to   : Sanskrit@cheerful.com
% Site access           : https://sanskritdocuments.org

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