॥ ऊर्ध्वाम्नायोक्त सिद्ध वीरौघगुरुकवचम् ॥

॥ गुरु ध्यानम् ॥ ध्यायेच्छिरसि शुक्लाब्जे द्विनेत्रं द्विभुजं गुरुम् । श्वेताम्बरपरीधानं श्वेतमाल्यानुलेपनम् ॥ २॥ वराभयकरं शान्तं करुणामयविग्रहम् । वामेनोत्पलधारिण्या शक्त्यालिङ्गितविग्रहम् ॥ स्मेराननं सुप्रसन्नं साधकाभीष्टसिद्धिदम् । ॥ कवचस्तोत्रम् ॥ परनाथादिनाथश्च ब्रह्मरन्ध्रे सहस्रके । दिव्यचक्रे च मे पातु सर्वविश्वेश्वरेश्वरः ॥ १॥ श्रीनाथः पातु शिरसि सिद्धिदले तु श्रीपतिः । वाग्देवी दुर्गनाथश्च दुर्गा दुर्गतिनाशिनी ॥ २॥ षोडशारे सदा पातु कण्ठदेशे स्वरे तथा । ईश्वरो भैरवीनाथो कालमीशानभैरवः ॥ ३॥ द्वादशारे च मे पातु वीरभद्रो कालान्तकृत् । दशारे नाभिदेशे च रुरुनाथश्च भैरवः ॥ ४॥ परात्परगुरुर्देवो चक्रनाथो सदाऽवतु । षड्दले कामनेत्रे च कामदेवो सदाऽवतु ॥ ५॥ मत्स्येन्द्रो मत्स्यनाथश्च रक्षतु चाण्डकोषके । गोरक्षश्च वेदपद्मे आधारे पातु मे सदा ॥ ६। var गोरक्षनाथः चतुरारे भर्तृहरिः गुरुर्मे सर्वचक्रके । शीर्षादौ गुदपर्यन्तं पातु नाथो गुरुश्च मे ॥ ७॥ पादादिशीर्षपर्यन्तं विश्वनाथो विभुर्गुरुः । इष्टो इष्टपतिर्नाथो विश्वसृक् पातु मे सदा ॥ ८॥ ॥ इति ऊर्ध्वाम्नायोक्त सिद्ध वीरौघगुरुकवचम् सम्पूर्णम् ॥
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% engtitle              : UrdhvAmnAyokta siddha vIraughagurukavacham
% Category              : kavacha, deities_misc, gurudev
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% SubDeity              : gurudev
% Language              : Sanskrit
% Subject               : philosophy/hinduism/religion
% Transliterated by     : Puneet Joshi puneetrph at yahoo
% Proofread by          : Puneet Joshi puneetrph at yahoo, NA
% Description-comments  : The kavacha is mentioend in the Vishvasara tantra
% Latest update         : September 1, 2014
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% Site access           : http://sanskritdocuments.org
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