सीताष्टकम् रत्नपञ्चकम् २

सीताष्टकम् रत्नपञ्चकम् २

(रत्नपञ्चके द्वितीयं रत्नम् ।) सीता सदा प्रकृतिरेव परात्मशक्ति- र्वागीश्वरी सकलवेदमयी प्रपूर्णा । श्रीरामचन्द्रचरणे सततं विलीना मायामयी निखिलदेवमयी वरेण्या ॥ १॥ सत्याऽमृता संसृतिबीजरूपा साकाररूपं सकलं दधाना । श्रीरामसान्निध्यवशात्स्वतन्त्रा ज्ञेया मनुष्येन्द्रसुरासुरैश्च ॥ २॥ महामाया सीता निखिलजगदुत्पादनकरी महालक्ष्मीर्देवी सकलफलदात्री त्रिभुवने । क्रियाशक्तिः साक्षादनवरतविद्यानिधिपरा निमेषोन्मेषात्सा भुवनलयकर्त्री जनकजा ॥ ३॥ नित्यानन्दा परमसुखदा नित्यतृप्ता प्रसन्ना पञ्चभ्रान्तिप्रणिरसनतश्चात्मबोधप्रदात्री । विद्याविद्यासकलभवभीभ्रान्तिभेदप्रहन्त्री सर्वोत्कृष्टा हृदयकमले जानकी मे सदाऽस्ति ॥ ४॥ भद्रा दुर्गा ज्ञानविज्ञानरूपा ॥ शान्ता काली भुक्तिमुक्तिप्रदात्री । नित्या पूर्णा विश्वमाताऽऽत्मविद्या लब्धा सीता शारदा वेदमाता ॥ ५॥ तुरीयातीता मा परमवरदा श्रीश्च धनदा विधात्री सावित्री सकलसुखदात्री ह्यभयदा । सकामानां भीतिर्न तु भवभयं स्वात्मसुखिनां सुसौख्यं चित्पूर्ण भजति मनुजो मातृकृपया ॥ ६॥ वेदान्तार्थस्वरूपा परमसमरसा व्यापिनी ज्ञप्तिरूपा रुद्रादित्यादिरूपाऽखिलविधसुखदा मोक्षदा ज्ञानगङ्गा । मुक्तालङ्कारयुक्ताऽभयवरदकरा सिद्धिदा रामपत्नी पद्माक्षी पद्महस्तामलतमवपुषी सन्ततं शं तनोतु ॥ ७॥ सीता सिता प्रभवदा प्रणवात्मिकेयं प्राणेश्वरी परतमा परमाऽन्नपूर्णा । सूर्येन्दुशक्रशिवरामसुदेहधात्री चिच्चेतनामतिकलास्वसुखैकदात्री ॥ ८॥ कल्याणसेवकहृदिस्थसरस्वती या सीता प्रभा कमलजा भगवत्प्रिया मा । व्यक्ता सुवाक्सकलकामदुहा च धेनुः सर्वान्सदा विमलभक्तजनान्प्रपातु ॥ ९॥ इति श्रीसमर्थरामदास-कल्याणपदान्वित- कल्याणसेवकप्रणीत रत्नपञ्चके द्वितीयं रत्नं सीताऽष्टाकं सम्पूर्णम् । - Proofread by Brahatha Mohan
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% Author                : Kalyanasevaka
% Language              : Sanskrit
% Subject               : philosophy/hinduism/religion
% Proofread by          : Brahatha Mohan
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% Latest update         : May 22, 2026
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