महाभारत अनुक्रमणिका
| अनुक्रमणीपर्व | १ |
| पर्वसंग्रहपर्व | २ |
| पौष्यपर्व | ३ |
| पौलोमपर्व | ४-१२ |
| आस्तीकपर्व | १३-५३ |
| आदिवंशावतरणपर्व | ५४-६१ |
| संभवपर्व | ६२-१२३ |
| शंकुतलोपाख्यानम् | ६२-६९ |
| ययात्युपाख्यानम् | ७०-८० |
| उत्तरयायातम् | ८१-८८ |
| संभवपर्व | ८९-१२३ |
| जतुगृहदाहपर्व | १२४-१३८ |
| हिडिम्बवधपर्व | १३९-१४२ |
| बकवधपर्व | १४३-१५२ |
| चैत्ररथपर्व | १५३-१७३ |
| तापस्योपाख्यानम् | १६०-१६३ |
| वासिष्ठोपाख्यानम् | १६४-१६८ |
| और्वोपाख्यानम् | १६९-१७३ |
| द्रौपदीस्वयंवरपर्व | १७४-१८९ |
| पञ्चेन्द्रोपाख्यानम् | १८९ |
| वैवाहिकपर्व | १९०-१९१ |
| विदुरागमनपर्व | १९२-१९८ |
| राज्यालम्भपर्व | १९९ |
| अर्जुनवनवासपर्व | २००-२१० |
| सुन्दोपसुन्दोपाख्यानम् | २०१-२०४ |
| सुभद्राहरणपर्व | २११-२१२ |
| हरणहारिकपर्व | २१३ |
| खाण्डवदाहपर्व | २१४-२२५ |
| शार्ङ्गकोपाख्यानम् | २२०-२२५ |
| सभापर्व | १-११ |
| मन्त्रपर्व | १२-१७ |
| जरासंधपर्व | १८-२२ |
| दिग्विजयपर्व | २३-२९ |
| राजसूयपर्व | ३०-३२ |
| अर्घाभिहरणपर्व | ३३-३६ |
| शिशुपालवधपर्व | ३७-४२ |
| द्यूतपर्व | ४३-६५ |
| अनुद्यूतपर्व | ६६-७२ |
| आरण्यकपर्व | १-११ |
| किर्मीरवधपर्व | १२ |
| कैरातपर्व | १३-४२ |
| सौभवधोपाख्यानम् | १५-२३ |
| इन्द्रलोकाभिगमनपर्व | ४३-७९ |
| नलोपाख्यानम् | ५०-७८ |
| तीर्थयात्रापर्व | ८०-१५३ |
| अगस्त्योपाख्यानम् | ९३-१०९ |
| ऋश्यशृङ्गोपाख्यानम् | ११०-११३ |
| कार्तवीर्योपाख्यानम् | ११५-११७ |
| सुकन्योपाख्यानम् | १२२-१२५ |
| मान्धात्रुपाख्यानम् | १२६-१२७ |
| जन्तूपाख्यानम् | १२८ |
| श्येनकपोतीयम् | १२९-१३१ |
| अष्टावक्रीयम् | १३२-१३४ |
| यवक्रीतोपाख्यानम् | १३५-१४० |
| सौगन्धिकाहरणम् | १४६-१५३ |
| जटासुरबधपर्व | १५४ |
| यक्षयुद्धपर्व | १५५-१७२ |
| आजगरपर्व | १७३-१७८ |
| मार्कण्डेयसमास्यापर्व | १७९-२२१ |
| मत्स्योपाख्यानम् | १८५ |
| मण्डूकोपाख्यानम् | १९० |
| इन्द्रद्युम्नोपाख्यानम् | १९१ |
| धुन्धुमारोपाख्यानम् | १९२-१९५ |
| पतिव्रतोपाख्यानम् | १९६-१९७ |
| ब्राह्मणव्याधसंवादः | १९८-२०६ |
| आङ्गिरसम् | २०७-२२१ |
| द्रौपदिसत्यभामासंवादपर्व | २२२-२२४ |
| घोषयात्रापर्व | २२५-२४३ |
| मृगस्वप्नभयपर्व | २४४ |
| व्रीहिद्रौणिकपर्व | २४५-२४७ |
| द्रौपदीहरणपर्व | २४८-२८३ |
| रामोपाख्यानम् | २५८-२७६ |
| सावित्र्युपाख्यानम् | २७७-२८३ |
| कुण्डलाहरणपर्व | २८४-२९४ |
| आरणेयपर्व | २९५-२९९ |
| यक्षप्रश्नाः | २९७-२९८ |
| वैराटपर्व | १-१२ |
| कीचकवधपर्व | १३-२३ |
| गोग्रहणपर्व | २४-६२ |
| वैवाहिकपर्व | ६३-६७ |
| उद्योगपर्व | १-२१ |
| इन्द्रविजयोपाख्यानम् | ९-१८ |
| संजययानपर्व | २२-३२ |
| प्रजागरपर्व | ३३-४१ |
| सनत्सुजातपर्व | ४२-४५ |
| यानसंधिपर्व | ४६-६९ |
| भगवद्यानपर्व | ७०-१३७ |
| गालवचरितम् | १०४-१२१ |
| विदुरापुत्रानुशासनम् | १३१-१३४ |
| कर्णोपनिवादपर्व | १३८-१४८ |
| अभिनिर्याणपर्व | १४५-१५२ |
| भीष्माभिषेचनपर्व | १५३-१५६ |
| उलूकयानपर्व | १५७-१६० |
| रथातिरथसंख्यानपर्व | १६१-१६९ |
| अम्बोपाख्यानपर्व | १७०-१९७ |
| जम्बूखण्डविनिर्माणपर्व | १-११ |
| भूमिपर्व | १२- १३ |
| भगवद्गीतापर्व | १४- ४० |
| भीष्मवधपर्व | ४१- ११७ |
| प्रथमयुद्धदिवसः | ४१-४५ |
| द्वितीययुद्धदिवसः | ४६-५१ |
| तृतीययुद्धदिवसः | ५२-५५ |
| चतुर्थयुद्धदिवसः | ५६-५७ |
| पञ्चमयुद्धदिवसः | ५८-७० |
| षष्ठयुद्धदिवसः | ७१-७५ |
| सप्तमयुद्धदिवसः | ७६-८२ |
| अष्टमयुद्धदिवसः | ८३-९२ |
| नवमयुद्धदिवसः | ९३-१०२ |
| दशमयुद्धदिवसः | १०३-११७ |
| द्रोणाभिषेकपर्व | १- १५ |
| संशप्तकवधपर्व | १६- ३१ |
| अभिमन्युवधपर्व | ३२- ५१ |
| प्रतिज्ञापर्व | ५२- ६० |
| जयद्रथवधपर्व | ६१- १२१ |
| घटोत्कचवधपर्व | १२२- १५४ |
| द्रोणवधपर्व | १५५- १६५ |
| नारायणास्त्रमोक्षपर्व | १६६- १७३ |
| कर्णवधपर्व | १- ६९ |
| धृतराष्ट्रसंजयसंवादः | १- २ |
| धृतराष्ट्रशोकः | ३ |
| संजयवचनम् | ५ |
| धृतराष्ट्रजल्पनम् | ५ |
| कर्णाभिषेकः | ६? |
| षोडशयुद्धदिवसः | ७-२१ |
| सप्तदशयुद्धदिवसः | २२-६७ |
| शल्यसारथ्याभ्युपगमः | २३ |
| त्रिपुरवधोपाख्यानम् | २४ |
| मद्रककुत्सनम् | २७ |
| हंसकाकीयोपाख्यानम् | २८ |
| बाल्हीकमद्रककुत्सनम् | ३० |
| युधिष्ठिरार्जुनयोः विवादः | ४८-५० |
| कृष्णकृतम् सांत्वनम् | ४८-५० |
| दुःशासनवधः | ६०-६१ |
| कर्णार्जुनयुद्धम् | ६३-६६ |
| कर्णवधः | ६७ |
| रणभूमिवर्णनम् | ६८ |
| युधिष्ठिरानन्दः | ६९ |
| शल्यवधपर्व | १- १६ |
| ह्रदप्रवेशपर्व | १७- २८ |
| तीर्थयात्रापर्व | २९- ५३ |
| त्रितोपाख्यानम् | ३५ |
| स्कन्दाभिषेकः | ४३-४५ |
| स्रुचावत्युपाख्यानम् | ४७ |
| जैगीषव्योपाख्यानम् | ४९ |
| वृद्धकन्योपाख्यानम् | ५१ |
| गदायुद्धपर्व | ५४- ६४ |
| दुर्योधनोरुभङ्गः | ५७ |
| बलदेववासुदेवसंवादः | ५९ |
| द्रौणिसेनापत्याभिषेकः | ६४ |
| सौप्तिकपर्व | १- ९ |
| कौशिकदर्शनम् | १ |
| शिवस्तुतिः | ७ |
| ऐषीकपर्व | १०- १८ |
| द्रौपदीपरिदेवितम् | ११ |
| ऐषीकोत्सर्गः | १३-१५ |
| द्रौपदीप्रसादः | १६ |
| रुद्रमाहात्म्यम् | १७-१८ |
| विशोकपर्व | १- ८ |
| स्त्रीपर्व | ९- २५ |
| अयोभीमभञ्जनम् | ११ |
| उत्तराविलापः | २० |
| श्राद्धपर्व | २६ |
| जलप्रदानिकपर्व | २७ |
| राजधर्मपर्व | १- १२८ |
| ऋषिशकुनिसंवादः | ११ |
| जनकोपाख्यानम् | १८ |
| देवस्थानवाक्यम् | २०-२१ |
| शङ्खलिखितोपाख्यानम् | २४ |
| हयग्रीवोपाख्यानम् | २५ |
| सेनजिद् वाक्यम् | २६ |
| अश्मजनकसंवादः | २८ |
| षोडशराजकीयोपाख्यानम् | २९ |
| सुवर्णष्टीव्युपाख्यानम् | ३१ |
| चार्वाकचरितकथनम् | ३९ |
| कृष्णनामशतस्तुतिः | ४३ |
| भीष्मस्तवराजः | ४७ |
| जामदग्न्योपाख्यानम् | ४९ |
| इन्द्रमान्धातृसंवादः | ६४-६५ |
| मनुराजकरणोपन्यासः | ६७ |
| बृहस्पतिकौसल्यसंवादः | ६८ |
| पुरुरवःपवनसंवादः | ७३ |
| ऐलकश्यपसंवादः | ७४ |
| मुचकुन्दोपाख्यानम् | ७५ |
| केकयराजराक्षससंवादः | ७८ |
| वासुदेवनारदसंवादः | ८२ |
| कालकवृक्षीयोपाख्यानम् | ८३ |
| शक्रबृहस्पतिसंवादः | ८५ |
| उतथ्यगीता | ९१-९२ |
| वामदेवगीता | ९३-९५ |
| इन्द्राम्बरीषसंवादः | ९९ |
| इन्द्रबृहस्पतिसंवादः | १०४ |
| कालकवृक्षीयम् | १०५-१०७ |
| व्याघ्रगोमायुसंवादः | ११२ |
| उष्ट्रशिरोग्रीवकथनम् | ११३ |
| सरित्सागरसंवादः | ११४ |
| श्वर्षिसंवादः | ११७-११९ |
| वसुहोममान्धातृसंवादः | १२२ |
| कामन्दाङ्गारिष्टसंवादः | १२३ |
| ऋषभसुमित्रसंवादः | १२५-१२६ |
| यमगौतमसंवादः | १२७ |
| आपद्धर्मपर्व | १२९- १६७ |
| कापव्यानुशासनम् | १३३ |
| शकुलाख्यानम् | १३५ |
| मार्जारमूषकसंवादः | १३६ |
| ब्रह्मदत्तपूजनीसंवादः | १३७ |
| क्वणिक्वशत्रुंतपसंवादः | १३८ |
| विश्वामित्रश्वपचसंवादः | १३९ |
| कपोतलुब्धकसंवादः | १४१-१४५ |
| इन्द्रोतशौनकपारिक्षितीयम् | १४६-१४८ |
| गृध्रजम्बुकसंवादः | १४९ |
| शल्मलिपवनसंवादः | १५०-१५१ |
| खड्गोत्पत्तिः | १६० |
| कृतघ्नगौतमोपाख्यानम् | १६२-१६७ |
| मोक्षधर्मपर्व | १६८- ३५३ |
| सेनजित्पिङ्गलागीते | १६८ |
| पितापुत्रसंवादः | १६९ |
| शम्याकगीता | १७० |
| मङ्किगीता | १७१ |
| प्रह्रादाजगरसंवादः | १७२ |
| कश्यपसृगालसंवादः | १७३ |
| भृगुभरद्वाजसंवादः | १७५-१८५ |
| अध्यात्मकथनम् | १८७ |
| ध्यानयोगः | १८८ |
| जापकोपाख्यानम् | १८९-१९३ |
| मनुबृहस्पतिसंवादः | १९४-१९९ |
| केशवमाहात्य्मम् | २०० |
| दिक्पालकीर्तनम् | २०१ |
| विष्णोः वराहरूपम् | २०२ |
| गुरुशिष्यसंवादः (वार्ष्णेयाध्यात्मं) | २०३-२१० |
| जनकपञ्चशिखसंवादः | २११-२१२ |
| इन्द्रप्रह्रादसंवादः | २१५ |
| बलिवासवसंवादः | २१६-२१८ |
| शक्रनमुचिसंवादः | २१९ |
| बलिवासवसंवादः | २२० |
| श्रीवासवसंवादः | २२१ |
| जैगीषव्यासितसंवादः | २२२ |
| वासुदेवोग्रसेनसंवादः | २२३ |
| शुकानुप्रश्नः | २२४-२४७ |
| (अविकम्पनारदसंवादे) मृत्यूत्पत्तिः | २४८-२५० |
| तुलाधारजाजलिसंवादः | २५३-२५६ |
| विचख्नुगीता | २५७ |
| चिरकारिकोपाख्यानम् | २५८ |
| सत्यवद् द्युमत्सेनसंवादः | २५९ |
| कपिलगोसंवादः | २६०-२६२ |
| कुण्डधारोपाख्यानम् | २६३ |
| उञ्छवृत्तेः पुरावृत्तम् | २६४ |
| नारददेवलसंवादः | २६७ |
| माण्डव्यजनकसंवादः | २६८ |
| हारीतगीता | २६९ |
| वृत्रगीता | २७०-२७१ |
| वृत्रवधः | २७२-२७३ |
| ज्वरोत्पत्तिः | २७४ |
| नारदसमङ्गसंवादः | २७५ |
| नारदगालवसंवादः | २७६ |
| अरिष्टनेमिसगरसंवादः | २७७ |
| काव्योपाख्यानम् | २७८ |
| पराशरगीता | २७९-२८७ |
| हंससाध्यसंवादः | २८८ |
| योगकथनम् | २८९ |
| सांख्यवर्णनम् | २९० |
| वसिष्ठकरालजनकसंवादः | २९१-२९६ |
| भृगुजनकसंवादः | २९७ |
| याज्ञवल्क्यजनकसंवादः | २९८-३०६ |
| पञ्चशिखजनकसंवादः | ३०७ |
| सुलभाजनकसंवादः | ३०८ |
| यावकाध्यायः (द्वैपायनशुकसंवादः) | ३०९ |
| शुकचरितम् | ३१०-३२० |
| नरनारायणीयम् | ३२१-३३९ |
| महापुरुषस्तवः | ३२५ |
| भगवन्नामनिर्वचनम् | ३२८ |
| ब्राह्मणमाहात्म्यमग्निषोमीयात्मकम् | ३२९ |
| भगवन्नामनिर्वचनम् | ३३० |
| उञ्छवृत्युपाख्यानम् | ३४०-३५३ |
| दानधर्मपर्व | १- १५२ |
| मृत्युगौतम्यादिसंवादः | १ |
| सुदर्शनोपाख्यानम् | २ |
| विश्वामित्रोपाख्यानम् | ३-४ |
| शुक्रवासवसंवादः | ५ |
| दैवपुरुषकारबलाबलम् | ६ |
| कर्मफलवर्णनम् | ७ |
| पूज्यवर्णनम् | ८ |
| सृगालवानरसंवादः | ९ |
| नीचस्योपदेशनिषेधः | १० |
| श्रियो निवासस्थानानि | ११ |
| भङ्गाश्वनोपाख्यानम् | १२ |
| शुभाशुभकर्मफलम् | १३ |
| उपमन्यूपाख्यानम् | १४-१७ |
| शिवस्तवः | १४ |
| शिवसहस्रनाम | १७ |
| शिवस्तुतिमाहात्म्यम् | १८ |
| अष्टावक्रदिक्संवादः | १९-२२ |
| पात्रपरीक्षा | २३ |
| दैवपित्र्यदानफलम् | २४ |
| ब्रह्मघातिस्वरूपम् | २५ |
| तीर्थप्रशंसा | २६ |
| गङ्गाप्रशंसनम् | २७ |
| मतङ्गोपाख्यानम् | २८ |
| इन्द्रमतङ्गसंवादः | २९-३० |
| वीतहव्योपाख्यानम् | ३१ |
| पूज्यपुरुषवर्णनम् | ३२ |
| ब्राह्मणप्रशंसा | ३३-३६ |
| पृथिवीवासुदेवसंवादः | ३४ |
| पात्रपरीक्षा | ३७ |
| स्त्रीस्वभावकथनम् | ३८-३९ |
| विपुलोपाख्यानम् | ४०-४३ |
| विवाहधर्माः | ४४-४६ |
| रिक्थविभागः | ४७ |
| वर्णसंकरः | ४८ |
| पुत्रप्रणिधिः | ४९ |
| च्यवनोपाख्यानम् | ५० |
| च्यवननहुषसंवादः | ५१ |
| च्यवनकुशिकसंवादः | ५२-५६ |
| यमनियमफलानि | ५७ |
| ब्राह्मणप्रशंसा | ५८ |
| अतिथियज्ञः | ५९ |
| क्षत्रियधर्माः | ६० |
| भूमिदानप्रशंसा | ६१ |
| अन्नदानप्रशंसा | ६२ |
| नक्षत्रयोगदानम् | ६३ |
| काञ्चनादिदानम् | ६४ |
| तिलादिदानफलम् | ६५ |
| पानीयदानफलम् | ६६ |
| तिलादिदानप्रशंसा | ६७ |
| गोदानफलम् | ६८ |
| नृगोपाख्यानम् | ६९ |
| नाचिकेतोपाख्यानम् | ७० |
| गोप्रदानिकम् | ७१-७३ |
| व्रतनियमफलम् | ७४ |
| गोप्रदानिकम् | ७५-८० |
| श्रीगोसंवादः | ८१ |
| गोलोकप्रश्नः | ८२ |
| सुवर्णोत्पत्तिः | ८३-८५ |
| कार्त्तिकेयोत्पत्तिः | ८४ |
| तारकवधः | ८६ |
| श्राद्धकल्पः | ८७-९२ |
| व्रतविशेषाः | ९३ |
| प्रतिग्रहदोषाः | ९४ |
| शपथाध्यायः | ९५-९६ |
| छत्रोपानहोत्पत्तिः | ९७ |
| छत्रोपानहदानम् | ९८ |
| आरामादिनिर्माणम् | ९९ |
| बलिप्रदानम् | १०० |
| दीपादिदानम् | १०१ |
| पुष्पादिदानफलम् | १०२ |
| दीपादिदानफलम् | १०३ |
| ब्रह्मस्वहरणम् | १०४ |
| हस्तिकूटम् | १०५ |
| अनशनमाहात्म्यम् | १०६ |
| आयुष्याख्यानम् | १०७ |
| ज्येष्ठकनिष्ठवृत्तिः | १०८ |
| उपवासविधिः | १०९ |
| उपवासफलम् | ११० |
| शौचानुपृच्छा | १११ |
| संसारचक्रम् | ११२-११४ |
| अहिंसाफलम् | ११५-११७ |
| कीटोपाख्यानम् | ११८-१२० |
| मैत्रेयभिक्षा | १२१-१२३ |
| शाण्डिलीसुमनासंवादः | १२४ |
| सान्त्वप्रशंसा | १२५ |
| उमामहेश्वरसंवादः | १२६-१३४ |
| विष्णुसहस्रनाम | १३५ |
| ब्राह्मणप्रशंसा | १३६ |
| पवनार्जुनसंवादः | १३७-१४२ |
| कृष्णमाहात्म्यम् | १४३ |
| दुर्वासोमाहात्म्यम् | १४४ |
| ईश्वरप्रशंसा | १४५-१४६ |
| धर्मनिर्णयः | १४७-१४८ |
| युधिष्ठिरप्रश्नः | १४९ |
| धर्मसंशयः | १५० |
| वंशानुकीर्तनम् | १५१ |
| युधिष्ठिरप्रतिप्रयाणम् | १५२ |
| भीष्मस्वर्गारोहणपर्व | १५३- १५४ |
| भीष्मस्वर्गानुज्ञा | १५३ |
| भीष्मस्वर्गगमनम् | १५४ |
| अश्वमेधपर्व | १- ९६ |
| युधिष्ठिरसांत्वनम् | १ |
| व्यासवाक्यम् | २ |
| संवर्तमरुत्तीयम् | ३-१० |
| वासुदेववाक्यम् | ११-१३ |
| हास्तिनापुरप्रवेशः | १४ |
| इन्द्रप्रस्थे कृष्णार्जुनयोः सभाविहारः | १५ |
| अनुगीता | १६-५० |
| कृष्णद्वारकाप्रस्थानाम् | ५१ |
| उत्तङ्कोपाख्यानम् | ५२-५७ |
| वासुदेवेन वसुदेवं प्रति युद्धाख्यानम् | ५८-६० |
| वसुदेवेन अभिमन्योः श्राद्धदानम् | ६१ |
| पाण्डवानाम् मरुत्तनिधिलाभः | ६२-६४ |
| परिक्षित्संजीवनम् | ६५-६९ |
| युधिष्ठिरस्य यज्ञदीक्षा | ७०-७१ |
| अर्जुनस्य अश्वानुसरणम् | ७२-७९ |
| त्रैगर्तविजयः | ७३ |
| वज्रदत्तपराजयः | ७४-७५ |
| सैन्धवपराजयः | ७६-७७ |
| बभ्रुवाहनयुद्धम् | ७८-८२ |
| मागधपराजयः | ८३ |
| एकलव्यसुतपराजयः | ८४ |
| गान्धारपराजयः | ८५ |
| यज्ञायतननिर्माणम् | ८६ |
| यज्ञसमृद्धिः | ८७ |
| अर्जुनप्रत्यागमनम् | ८८-८९ |
| यूपोच्छ्रयः | ९० |
| यज्ञसमाप्तिः | ९१ |
| नकुलोपाख्यानम् | ९१-९६ |
| आश्रमवासपर्व | १- ३५ |
| धृतराष्ट्रशुश्रूषा | १-३ |
| भीमापनयः | ४ |
| धृतराष्ट्रस्य वनगमनसंकल्पः | ५-६ |
| व्यासागमनम् | ७ |
| व्यासवाक्यम् | ८ |
| युधिष्ठिरानुशासनम् | ९-१२ |
| धृतराष्ट्रवाक्यम् | १३-१६ |
| भीमसेनवाक्यम् | १७ |
| अर्जुनयुधिष्ठिरयोः वाक्ये | १८ |
| विदुरवाक्यम् | १९ |
| श्राद्धयज्ञः | २० |
| धृतराष्ट्रस्य वनगमनम् | २१ |
| कुन्तीवाक्यम् | २२-२३ |
| धृतराष्ट्रादीनां व्यासाश्रमगमनम् | २५ |
| शतयूपप्रश्नः | २७ |
| पाण्डवशोकः | २८ |
| पाण्डवानां धृतराष्ट्राश्रमाभिगमनम् | २९-३१ |
| पाण्डववर्णनम् | ३२ |
| विदुरसायुज्यम् | ३३ |
| व्यासागमनम् | ३४ |
| व्यासवाक्यम् | ३५ |
| पुत्रदर्शनपर्व | ३६- ४४ |
| कर्णजन्मकथनम् | ३८ |
| दुर्योधनादिदर्शनम् | ४०-४१ |
| वैशंपायनवाक्यम् | ४२ |
| जनमेजयस्य परिक्षिद् दर्शनम् | ४३ |
| युधिष्ठिरनिवर्तनम् | ४४ |
| नारदागमनपर्व | ४५- ४७ |
| धृतराष्ट्रादीनां दावाग्नौ दाहः | ४५ |
| युधिष्ठिरशोकः | ४६ |
| धृतराष्ट्रश्राद्धकरणम् | ४७ |
| मौसलपर्व | १- ९ |
| मुनिशापात्साम्बस्य मुसलप्रसवः | २ |
| उत्पातदर्शनम् | ३ |
| वृष्ण्यन्धकादिविनाशः | ४ |
| रामकृष्णावतारसमाप्तिः | ५ |
| अर्जुनागमनम् | ६ |
| वसुदेवविलापः | ७ |
| वसुदेवनिधनम् । वज्राभिषेकः | ८ |
| व्यासार्जुनसमागमः | ९ |
| महाप्रस्थानिकपर्व | १- ३ |
| पाण्डवप्रव्रजनम् | १ |
| भीमादिपतनम् | २ |
| इन्द्रयुधिष्ठिरसंवादः | ३ |
| स्वर्गारोहणपर्व | १- ५ |
| स्वर्गे नारदवाक्यम् | १ |
| देवदूतविसर्जनम् | २ |
| युधिष्ठिरस्वर्गारोहणम् | ३-५ |
The numbering in the encoded महाभारत lists the main
पर्व number ranging from 1 to 18 followed by the
अध्याय number followed by the श्लोक number.
The secondary पर्व numbers ranging
from 1 to 95 are not relevant to the encoding.
Encoded and proofread by Avinash Sathaye at sohum@ms.uky.edu