||पाणिनीयधातुपाठः सूची स्वरविरहित ||
||अथ धातुपाठसूची ||
अंस (अंस्)| चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| अंस समाघाते १०. ४६० ||
अंह् | भ्वा० सेट् आ० | अहि गतौ १. ७२२ ||
अंह् | चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| अहि- [[भाषार्थः]च]१०. ३२८ ||
अक् | भ्वा० सेट् प० | अक(म्)- [कुटिलायां गतौ]१. ९०१ ||
अक्ष् | भ्वा० सेट् प० | अक्षू व्याप्तौ १. ७४२ ||
अग् | भ्वा० सेट् प० | अग(म्)कुटिलायां गतौ १. ९०२ ||
अङ्क (अङ्क्)| चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| अङ्क पदे लक्षणे च १०. ४७३ ||
अङ्क् | भ्वा० सेट् आ० | अकि लक्षणे १. ९२ ||
अङ्ग (अङ्ग्)| चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| अङ्ग [पदे लक्षणे]च १०. ४७४ ||
अङ्ग् | भ्वा० सेट् प० | अगि- [गत्यर्थः]१. १५५ ||
अङ्घ् | भ्वा० सेट् आ० | अघि- [गत्याक्षेपे | गतौ गत्यारम्भे चेत्यपरे]१. ११५ ||
अच् | भ्वा० सेट् उ० | अचु [गतौ याचने च]इत्येके १. ९९९ ||
अज् | भ्वा० सेट् प० | अज गतिक्षपनयोः १. २६२ ||
अञ्च् | भ्वा० सेट् उ० | अचि [गतौ याचने च]इत्येपरे १. १००० ||
अञ्च् | भ्वा० सेट् उ० | अञ्चु गतौ याचने च १. ९९८ ||
अञ्च् | भ्वा० सेट् प० | अञ्चु गतिपूजनयोः १. २१५ ||
अञ्च् | चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| अञ्चु विशेषणे १०. २६६ ||
अञ्ज् | चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| अजि- [[भाषार्थः]च]१०. ३१६ ||
अञ्ज् | रु० सेट् प० | अञ्जू व्यक्तिम्रक्षणकान्तिगतिषु (व्यक्तिमर्षणकान्तिगतिषु)७. २१ ||
अट् | भ्वा० सेट् प० | अट- [गतौ]१. ३३२ ||
अट्ट् | भ्वा० सेट् आ० | अट्ट अतिक्रमणहिंसनयोः (अतिक्रमहिंसयोः)१. २८७ ||
अट्ट् | चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| अट्ट- [अनादरे]१०. ३७ ||
अड् | भ्वा० सेट् प० | अड उद्यमे १. ४१४ ||
अड्ड् | भ्वा० सेट् प० | अड्ड (अद्ड)अभियोगे १. ४०३ ||
अण् | भ्वा० सेट् प० | अण- [शब्दार्थः]१. ५१२ ||
अण् | दि० सेट् आ० | अण प्राणने ४. ७१ ||
अण्ठ् | भ्वा० सेट् आ० | अठि गतौ १. २९४ ||
अत् | भ्वा० सेट् प० | अत सातत्यगमने १. ३८ ||
अद् | अ० अनिट् प० | अद भक्षणे २. १ ||
अद्ड् | भ्वा० सेट् प० | अड्ड (अद्ड)अभियोगे १. ४०३ ||
अधी | अधि- इ | अ० अनिट् प० | इङ् अध्ययने (नित्यमधिपूर्वः)२. ४१ ||
अधी | अधि- इ | अ० अनिट् प० | इक् स्मरणे (अयमप्यधिपूर्वः)२. ४२ ||
अनुरुध् | अनु- रुध् | दि० अनिट् आ० | अनोरुध कामे ४. ७० ||
अन् | अ० सेट् प० | अन च [प्राणने]२. ६५ ||
अन् | दि० सेट् आ० | अन [प्राणने]इत्येके ४. ७२ ||
अन्त् | भ्वा० सेट् प० | अति- [बन्धने]१. ६३ ||
अन्द् | भ्वा० सेट् प० | अदि बन्धने १. ६४ ||
अन्ध (अन्ध्)| चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| अन्ध दृष्ट्युपघाते | उपसंहार इत्यन्ये १०. ४७१ ||
अभ्र् | भ्वा० सेट् प० | अभ्र- [गत्यर्थः]१. ६३७ ||
अम् | [न]अमि- [मित्]१. ९५० ||
अम् | भ्वा० सेट् प० | अम गत्यादिषु (गतौ शब्दे सम्भक्तौ च)१. ५३६ ||
अम् | चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| अम रोगे १०. २४५ ||
अम्ब् | भ्वा० सेट् आ० | अबि शब्दे १. ४३८ ||
अम्भ् | भ्वा० सेट् आ० | अभि- [[शब्दे]क्वचित्पठ्यते]१. ४४८ ||
अय् | भ्वा० सेट् आ० | अय- [गतौ]१. ५४६ ||
अय् | भ्वा० सेट् उ० | (अय गतौ)१. १०३१ ||
अर्क् | चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| अर्क स्तवने १०. १४५ ||
अर्घ् | भ्वा० सेट् प० | (अर्घ मूल्ये)१. १८५ ||
अर्च् | भ्वा० सेट् प० | अर्च पूजायाम् १. २३२ ||
अर्च् | चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| अर्च पूजायाम् १०. ३४० ||
अर्ज् | भ्वा० सेट् प० | अर्ज- [अर्जने]१. २५६ ||
अर्ज् | चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| अर्ज प्रतियत्ने (सम्पादने च)१०. २५० ||
अर्थ (अर्थ्)| चु० सेट् आ० | अर्थ उपयाच्ञायाम् १०. ४४७ ||
अर्द् | भ्वा० सेट् प० | अर्द गतौ याचने च १. ५७ ||
अर्द् | चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| अर्द (अर्द)हिंसायाम् १०. ३६५ ||
अर्ब् | भ्वा० सेट् प० | अर्ब- [गतौ]१. ४८१ ||
अर्व् | भ्वा० सेट् प० | अर्व- [हिंसायाम्]१. ६६७ ||
अर्ह् | भ्वा० सेट् प० | अर्ह पूजायाम् १. ८४१ ||
अर्ह् | चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| अर्ह पूजायाम् १०. २५७ ||
अर्ह् | चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| अर्ह पूजायाम् १०. ३६७ ||
अल् | भ्वा० सेट् प० (उ०)| अल (अल)भूषणपर्याप्तिवारणेषु १. ५९३ ||
अव् | भ्वा० सेट् प० | अव रक्षणगतिकान्तिप्रीतितृप्त्यवगमप्रवेशश्रवणस्वाम्यर्थयाचनक्रियेच्चादीप्त्यवाप्त्यालिङ्गनहिंसादानभागवृद्धिषु १. ६८४ ||
अश् | स्वा० सेट् आ० | अशू व्याप्तौ सङ्घाते च ५. २० ||
अश् | क्र्या० सेट् प० | अश भोजने ९. ५९ ||
अष् | भ्वा० सेट् उ० | अष [गतिदीप्त्यादानेषु]इत्येके १. १०३० ||
अस् | भ्वा० सेट् उ० | अस गतिदीप्त्यादानेषु १. १०२९ ||
अस् | अ० सेट् प० | अस भुवि २. ६० ||
अस् | दि० सेट् प० | असु क्षेपने ४. १०६ ||
अह् | स्वा० सेट् प० | अह व्याप्तौ ५. २९ ||
आक्रन्द् | आङ्- क्रन्द् | चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| आङः क्रन्द सातत्ये १०. २५२ ||
आञ्च् | भ्वा० सेट् प० | आचि आयामे १. २३७ ||
आप् | चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| आपॢ (आपॢ)लम्भने १०. ३७६ ||
आप् | स्वा० अनिट् प० | आपॢ व्याप्तौ ५. १६ ||
आशंस् | आङ्- शंस् | भ्वा० सेट् आ० | आङः शसि इच्चायाम् १. ७१६ ||
आशास् | आङ्- शास् | अ० सेट् आ० | आङः शासु इच्चायाम् २. १२ ||
आसद् | आङ्- सद् | चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| आङः षद पद्यर्थे १०. ३६८ ||
आस् | अ० सेट् आ० | आस उपवेशने २. ११ ||
इ | अ० अनिट् आ० | इङ् अध्ययने | नित्यमधिपूर्वः २. ४१ ||
इ | अ० अनिट् प० | इक् स्मरणे | अयमप्यधिपूर्वः २. ४२ ||
इ | अ० अनिट् प० | इण् गतौ २. ४० ||
इख् | भ्वा० सेट् प० | इख- [गत्यर्थः]१. १४८ ||
इङ्ख् | भ्वा० सेट् प० | इखि- [गत्यर्थः]१. १४९ ||
इङ्ग् | भ्वा० सेट् प० | इगि- [गत्यर्थः]१. १६३ ||
इट् | भ्वा० सेट् प० | इट- [गतौ]१. ३५७ ||
इन्द् | भ्वा० सेट् प० | इदि परमैश्वर्ये १. ६५ ||
इन्ध् | रु० सेट् आ० | ञि- इन्धी दीप्तौ ७. ११ ||
इन्व् | भ्वा० सेट् प० | इवि व्याप्तौ १. ६७० ||
इल् | चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| इल प्रेरणे १०. १६७ ||
इल् | तु० सेट् प० | इल स्वप्नक्षेपनयोः ६. ८४ ||
इष् | दि० सेट् प० | इष [ईष]गतौ ४. २२ ||
इष् | तु० सेट् प० | इष (इषु)इच्चायाम् ६. ७८ ||
इष् | क्र्या० सेट् प० | इष आभीक्ष्ण्ये ९. ६१ ||
ई | दि० अनिट् आ० | ईङ् गतौ ४. ३८ ||
ईक्ष् | भ्वा० सेट् आ० | ईक्ष दर्शने १. ६९४ ||
ईख् | भ्वा० सेट् प० | ईखि- [गत्यर्थः]१. १५० ||
ईङ्ख् | भ्वा० सेट् प० | ईखि- [गत्यर्थः]१. १५१ ||
ईज् | भ्वा० सेट् आ० | ईज गतिकुत्सनयोः १. २०७ ||
ईञ्ज् | भ्वा० सेट् आ० | ईजि [गतिकुत्सनयोः]इत्येके १. २०८ ||
ईड् | चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| ईड स्तुतौ १०. १८३ ||
ईड् | अ० सेट् आ० | ईड स्तुतौ २. ९ ||
ईर् | चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| ईर क्षेपे १०. ३४२ ||
ईर् | अ० सेट् आ० | ईर गतौ कम्पने च २. ८ ||
ईर्क्ष्य् | भ्वा० सेट् प० | ईर्क्ष्य- [ईर्ष्यार्थः]१. ५८७ ||
ईर्ष्य् | भ्वा० सेट् प० | ईर्ष्य ईर्ष्यार्थाः १. ५८८ ||
ईश् | अ० सेट् आ० | ईश ऐश्वर्ये २. १० ||
ईष् | भ्वा० सेट् आ० | ईष गतिहिंसादर्शनेषु १. ६९५ ||
ईष् | भ्वा० सेट् प० | ईष उञ्चे १. ७८० ||
ईह् | भ्वा० सेट् आ० | ईह चेष्टायाम् १. ७१९ ||
उ | भ्वा० अनिट् आ० | उङ्- [शब्दे]१. ११०२ ||
उक्ष् | भ्वा० सेट् प० | उक्ष सेचने १. ७४५ ||
उख् | भ्वा० सेट् प० | उख- [गत्यर्थः]१. १३६ ||
उङ्ख् | भ्वा० सेट् प० | उखि- [गत्यर्थः]१. १३७ ||
उच् | दि० सेट् प० | उच समवाये ४. १३५ ||
उच् | भ्वा० सेट् प० | उची विवासे १. २४४ ||
उच् | तु० सेट् प० | उची विवासे ६. १५ ||
उज्झ् | तु० सेट् प० | उज्झ- (उद्झ)उत्सर्गे ६. २४ ||
उञ्च् | भ्वा० सेट् प० | उचि उञ्चे १. २४३ ||
उञ्च् | तु० सेट् प० | उचि उञ्चे ६. १४ ||
उठ् | भ्वा० सेट् आ० | उठ उपघाते (प्रतिघाते)१. ८५२ ||
उठ् | भ्वा० सेट् प० | उठ [उपघाते]इत्येके १. ३९२ ||
उत्कण्ठ् | चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| कठि शोके | प्रायेणोत्पूर्व उत्कण्ठावचनः १०. ३८५ ||
उद्झ् | तु० सेट् प० | उज्झ- (उद्झ)उत्सर्गे ६. २४ ||
उध्रस् | चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| उघ्रस [उञ्चे]इत्येके १०. २७१ ||
उन्द् | रु० सेट् प० | उन्दी क्लेदने ७. २० ||
उब्ज् | तु० सेट् प० | उब्ज आर्जवे ६. २३ ||
उभ् | तु० सेट् प० | उभ- [पूरणे]६. ४४ ||
उम्भ् | तु० सेट् प० | उम्भ पूरणे ६. ४५ ||
उर्द् | भ्वा० सेट् आ० | उर्द माने क्रीडायां च १. २० ||
उर्व् | भ्वा० सेट् प० | उर्वी- [हिंसार्थः]१. ६५० ||
उष् | भ्वा० सेट् प० | उष दाःए १. ७९२ ||
उह् | भ्वा० सेट् प० | उहिर् अर्दने १. ८४० ||
ऊठ् | भ्वा० सेट् प० | ऊठ उपघाते १. ३९१ ||
ऊन (ऊन्)| चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| ऊन परिहाणे १०. ४३० ||
ऊय् | भ्वा० सेट् आ० | ऊयी तन्तुसन्ताने १. ५५६ ||
ऊर्ज् | चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| ऊर्ज बलप्राणनयोः १०. २३ ||
ऊर्णु | अ० सेट् उ० | ऊर्णुञ् आच्चादने २. ३४ ||
ऊष् | भ्वा० सेट् प० | ऊष रुजायाम् १. ७७९ ||
ऊह् | भ्वा० सेट् आ० | ऊह वितर्के १. ७३५ ||
ऋ | भ्वा० अनिट् प० | ऋ गतिप्रापणयोः १. १०८६ ||
ऋ | जु० अनिट् प० | ऋ- [गतौ]३. १७ ||
ऋ | स्वा० सेट् प० | ऋ [हिंसायाम्][इत्येके]५. ३८ ||
ऋच् | तु० सेट् प० | ऋच स्तुतौ ६. २२ ||
ऋच् | तु० सेट् प० | ऋच गतीन्द्रियप्रलयमूर्तिभावेषु ६. १६ ||
ऋज् | भ्वा० सेट् आ० | ऋज गतिस्थानार्जनोपार्जनेषु १. २०० ||
ऋञ्ज् | भ्वा० सेट् आ० | ऋजि- [भर्जने]१. २०१ ||
ऋण् | त० सेट् उ० | ऋणु गतौ ८. ५ ||
ऋध् | दि० सेट् प० | ऋधु वृद्धौ ४. १६० ||
ऋध् | स्वा० सेट् प० | ऋधु वृद्धौ ५. २७ ||
ऋफ् | तु० सेट् प० | ऋफ- [हिंसायाम्]६. ४० ||
ऋम्फ् | तु० सेट् प० | ऋम्फ हिंसायाम् ६. ४१ ||
ऋष् | तु० सेट् प० | ऋषी गतौ ६. ७ ||
ॠ | क्र्या० सेट् प० | ॠ गतौ ९. ३२ ||
एज् | भ्वा० सेट् आ० | एजृ- [दीप्तौ]१. २०३ ||
एज् | भ्वा० सेट् प० | एजृ कम्पने १. २६७ ||
एठ् | भ्वा० सेट् आ० | एठ च [विबाधायां]१. ३०० ||
एध् | भ्वा० सेट् आ० | एध वृद्धौ १. २ ||
एष् | भ्वा० सेट् आ० | एषृ [प्रयत्ने]इत्येके १. ७०१ ||
एष् | भ्वा० सेट् आ० | एषृ- [गतौ]१. ७०५ ||
ओख् | भ्वा० सेट् प० | ओखृ- [शोषणालमर्थ्योः]१. १२९ ||
ओण् | भ्वा० सेट् प० | ओणृ अपनयने १. ५२३ ||
ओलण्ड् | चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| ओलडि [उत्क्षेपने]इत्येके १०. १४ ||
कंस् | अ० सेट् आ० | कसि गतिशासनयोः २. १४ ||
कक् | भ्वा० सेट् आ० | कक लौल्ये १. ९५ ||
कख् | भ्वा० सेट् प० | कख हसने १. १२८ ||
कख् | भ्वा० सेट् प० | कखे(म्)हसने १. ८९३ ||
कग् | भ्वा० सेट् प० | कगे(म्)नोच्यते | क्रियासामान्यार्थत्वात् | अनेकार्थत्वादित्यन्ये १. ९०० ||
कङ्क् | भ्वा० सेट् आ० | ककि- [गत्यर्थः]१. ९९ ||
कच् | भ्वा० सेट् आ० | कच बन्धने १. १९२ ||
कज् | भ्वा० सेट् प० | कज मदे इत्येके १. २६५ ||
कञ्च् | भ्वा० सेट् आ० | कचि- [दीप्तिबन्धनयोः]१. १९३ ||
कट् | भ्वा० सेट् प० | कटी गतौ १. ३५९ ||
कट् | भ्वा० सेट् प० | कटे वर्षावरणयोः १. ३३० ||
कठ् | भ्वा० सेट् प० | कठ कृच्च्रजीवने १. ३८५ ||
कड् | भ्वा० सेट् प० | कड मदे १. ४१७ ||
कड् | तु० सेट् प० | कड मदे ६. १०८ ||
कड्ड् | भ्वा० सेट् प० | कड्ड (कद्ड)कार्कश्ये १. ४०४ ||
कण् | भ्वा० सेट् प० | कण(म्)- [गतौ]१. ९०३ ||
कण् | भ्वा० सेट् प० | कण- [शब्दार्थः]१. ५१७ ||
कण् | चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| कण निमीलने १०. २४० ||
कण्ठ् | भ्वा० सेट् आ० | कठि शोके १. २९७ ||
कण्ठ् | चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| कठि शोके | प्रायेणोत्पूर्व उत्कण्ठावचनः १०. ३८५ ||
कण्ड् | भ्वा० सेट् आ० | कडि मदे १. ३१६ ||
कण्ड् | भ्वा० सेट् प० | कडि [मदे]इत्येके १. ४१८ ||
कण्ड् | चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| कडि खण्डने (भेदने)१०. ६७ ||
कत्त्र (कत्त्र्)| चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| कत्र (कत्त्र)शैथिल्ये १०. ४५६ ||
कत्थ् | भ्वा० सेट् आ० | कत्थ श्लाघायाम् १. ३७ ||
कत्र (कत्र्)| चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| कत्र (कत्त्र)शैथिल्ये १०. ४५६ ||
कथ (कथ्)| चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| कथ वाक्यप्रबन्धे (वाक्यप्रबन्धने)१०. ३८९ ||
कद् | भ्वा० सेट् आ० | कद(म्)- [[वैक्लव्ये | वैकल्य इत्येके]इत्यन्ये]१. ८८१ ||
कद्ड् | भ्वा० सेट् प० | कड्ड (कद्ड)कार्कश्ये १. ४०४ ||
कन् | भ्वा० सेट् प० | कनी दीप्तिकान्तिगतिषु १. ५३१ ||
कन्द् | भ्वा० सेट् आ० | कदि(म्)- [वैक्लव्ये | वैकल्य इत्येके]१. ८७८ ||
कन्द् | भ्वा० सेट् प० | कदि- [आःवाने रोदने च]१. ७३ ||
कप् | भ्वा० सेट् आ० | कप(म्)[कृपायां गतौ च]इत्यन्ये १. ८७७ ||
कब् | भ्वा० सेट् आ० | कबृ वर्णे १. ४४० ||
कम् | भ्वा० सेट् आ० | कमु कान्तौ १. ५११ ||
कम् | न कमि- [मित्]१. ९४९ ||
कम्प् | भ्वा० सेट् आ० | कपि चलने १. ४३५ ||
कर्ज् | भ्वा० सेट् प० | कर्ज व्यथने १. २६० ||
कर्ण (कर्ण्)| चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| कर्ण भेदने (इति धात्वन्तरमित्यपरे)१०. ४७० ||
कर्त (कर्त्)| चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| कर्त इत्यप्येके १०. ४५७ ||
कर्द् | भ्वा० सेट् प० | कर्द कुत्सिते शब्दे १. ६१ ||
कर्ब् | भ्वा० सेट् प० | कर्ब- [गतौ]१. ४८६ ||
कर्व् | भ्वा० सेट् प० | कर्व- [दर्पे]१. ६६४ ||
कल (कल्)| चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| कल गतौ सङ्ख्याने च १०. ४०४ ||
कल् | भ्वा० सेट् आ० | कल शब्दसङ्ख्यानयोः १. ५७० ||
कल् | चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| कल- [क्षेपे]१०. ९३ ||
कल्ल् | भ्वा० सेट् आ० | कल्ल अव्यक्ते शब्दे | अशब्द इत्येके १. ५७१ ||
कश् | अ० सेट् आ० | कश [गतिशासनयोः]इत्यन्ये (इत्यपि)२. १६ ||
कष् | भ्वा० सेट् प० | कष- [हिंसार्थः]१. ७८१ ||
कस् | भ्वा० सेट् प० | कस गतौ १. ९९६ ||
कस् | अ० सेट् आ० | कस [गतिशासनयोः]इत्येके २. १५ ||
काङ्क्ष् | भ्वा० सेट् प० | काक्षि- [काङ्क्षायाम्]१. ७६० ||
काञ्च् | भ्वा० सेट् आ० | काचि दीप्तिबन्धनयोः १. १९४ ||
काल (काल्)| चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| काल [कालोपदेशे]च | इति पृथग्धातुरित्येके १०. ४२२ ||
काश् | भ्वा० सेट् आ० | काशृ दीप्तौ १. ७३४ ||
काश् | दि० सेट् आ० | काशृ दीप्तौ ४. ५८ ||
कास् | भ्वा० सेट् आ० | कासृ शब्दकुत्सायाम् १. ७१० ||
कि | जु० अनिट् प० | कि ज्ञाने ३. २० ||
किट् | भ्वा० सेट् प० | किट- [गतौ]१. ३५८ ||
किट् | भ्वा० सेट् प० | किट- [त्रासे]१. ३३८ ||
कित् | भ्वा० सेट् प० | कित निवासे रोगापनयने च १. ११४८ ||
कित् | जु० सेट् प० | (कित [ज्ञाने]च)३. २१ ||
किल् | तु० सेट् प० | किल श्वैत्यक्रीडनयोः (श्वैत्ये)६. ८० ||
कीट् | चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| कीट वर्णे (वरणे)१०. १४२ ||
कील् | भ्वा० सेट् प० | कील बन्धने १. ६०२ ||
कुंश् | चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| कुशि- [भाषार्थः]१०. २९६ ||
कुंश् | दि० सेट् प० | कुंश [संश्लेषणे (श्लेषणे)]इत्यपरे ४. १२८ ||
कुंस् | चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| कुसि- [भाषार्थः]१०. २९४ ||
कुंस् | दि० सेट् प० | कुंस [संश्लेषणे (श्लेषणे)]इत्यन्ये ४. १२७ ||
कु | भ्वा० अनिट् आ० | कुङ्- [शब्दे]१. ११०३ ||
कु | अ० अनिट् प० | कु शब्दे २. ३७ ||
कु | तु० सेट् आ० | कुङ् शब्दे ६. १३६ ||
कुक् | भ्वा० सेट् आ० | कुक- [आदाने]१. ९६ ||
कुच् | भ्वा० सेट् प० | कुच शब्दे तारे १. २११ ||
कुच् | भ्वा० सेट् प० | कुच सम्पर्चनकौटिल्यप्रतिष्टम्भविलेखनेषु १. ९९३ ||
कुच् | तु० सेट् प० | कुच सङ्कोचने ६. ९५ ||
कुज् | भ्वा० सेट् प० | कुजु- स्तेयकरणे १. २२६ ||
कुञ्च् | भ्वा० सेट् प० | कुञ्च- [कौटिल्याल्पीभावयोः]१. २१२ ||
कुञ्ज् | भ्वा० सेट् प० | कुजि अव्यक्ते शब्दे १. २५५ ||
कुट् | चु० सेट् आ० | कुट [चेदने]इत्येके १०. २२२ ||
कुट् | तु० सेट् प० | कुट कौटिल्ये ६. ९३ ||
कुट्ट् | चु० सेट् आ० | कुट्ट प्रतापने १०. २२६ ||
कुट्ट् | चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| कुट्ट चेदनभर्त्सनयोः १०. ३४ ||
कुड् | तु० सेट् प० | कुड बाल्ये ६. ११३ ||
कुण (कुण्)| चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| कुण- [आमन्त्रणे]१०. ४३५ ||
कुण् | तु० सेट् प० | कुण शब्दोपकरणयोः (शब्दोपतापयोः)६. ६१ ||
कुण्ट् | भ्वा० सेट् प० | कुटि [वैकल्ये]इत्येके १. ३६३ ||
कुण्ठ् | भ्वा० सेट् प० | कुठि च [गतिप्रतिघाते (प्रतिघाते)इत्येके]१. ३९७ ||
कुण्ठ् | चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| कुठि [[रक्षणे]वेष्टने (च)| रक्षण इत्येके]इत्यन्ये १०. ७० ||
कुण्ड् | भ्वा० सेट् आ० | कुडि दाःए १. ३०३ ||
कुण्ड् | भ्वा० सेट् प० | कुडि वैकल्ये १. ३६२ ||
कुण्ड् | चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| कुडि [अनृतभाषणे]इत्यपरे १०. ९ ||
कुण्ड् | चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| कुडि रक्षणे १०. ६८ ||
कुत्स् | चु० सेट् आ० | कुत्स अवक्षेपने १०. २२० ||
कुथ् | दि० सेट् प० | कुथ पूतीभावे ४. १२ ||
कुद् | चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| कुदृ [अनृतभाषणे]इत्येके १०. ८ ||
कुन्थ् | भ्वा० सेट् प० | कुथि- [हिंसासङ्क्लेशनयोः]१. ४५ ||
कुन्थ् | क्र्या० सेट् प० | कुन्थ संश्लेषणे ९. ५० ||
कुन्द्र् | चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| कुद्रि अनृतभाषणे १०. ७ ||
कुप् | चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| कुप- (कृप- )[भाषार्थः]१०. ३१० ||
कुप् | दि० सेट् प० | कुप क्रोधे ४. १४६ ||
कुमार (कुमार्)| चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| कुमार क्रीडायाम् १०. ४१८ ||
कुम्ब् | भ्वा० सेट् प० | कुबि आच्चादने (चादने)१. ४९२ ||
कुम्ब् | चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| कुबि आच्चादने (चादने)१०. १५७ ||
कुम्भ् | चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| कुभि [आच्चादने (चादने)]इत्येके १०. १५८ ||
कुर् | तु० सेट् प० | कुर शब्दे ६. ६७ ||
कुर्द् | भ्वा० सेट् आ० | कुर्द- [क्रीडायामेव]१. २१ ||
कुल् | भ्वा० सेट् प० | कुल संस्त्याने बन्धुषु च १. ९७६ ||
कुश् | दि० सेट् प० | कुश [संश्लेषणे (श्लेषणे)]इत्येके ४. १२६ ||
कुष् | क्र्या० सेट् प० | कुष निष्कर्षे ९. ५४ ||
कुस् | दि० सेट् प० | कुस संश्लेषणे (श्लेषणे)४. १२५ ||
कुस्म् | चु० सेट् आ० | कुस्म नाम्नो वा | कुत्सिस्मयने १०. २३६ ||
कुह (कुह्)| चु० सेट् आ० | कुह विस्मापने १०. ४४३ ||
कू | तु० सेट् आ० | कूङ् [शब्दे]इत्येके ६. १३७ ||
कूज् | भ्वा० सेट् प० | कूज- [अव्यक्ते शब्दे]१. २५४ ||
कूट (कूट्)| चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| कूट परितापे | परिदाःअ इत्यन्ये १०. ४३२ ||
कूट् | चु० सेट् आ० | कूट अप्रदाने | अवसादन इत्येके १०. २२५ ||
कूण (कूण्)| चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| कूण [श्रावणे निमन्त्रणे च]सङ्कोचने- पि १०. ४३८ ||
कूण् | चु० सेट् आ० | कूण सङ्कोचने १०. २११ ||
कूल् | भ्वा० सेट् प० | कूल आवरणे १. ६०३ ||
कृ | भ्वा० अनिट् उ० | (कृञ् करणे)१. १०४८ ||
कृ | स्वा० अनिट् उ० | कृञ् हिंसायाम् ५. ७ ||
कृ | त० अनिट् उ० | डुकृञ् करणे ८. १० ||
कृड् | तु० सेट् प० | कृड घनत्वे ६. ११२ ||
कृण्व् | भ्वा० सेट् प० | कृवि हिंसाकरणयोश्च १. ६८२ ||
कृत् | तु० सेट् प० | कृती चेदने ६. १७१ ||
कृत् | रु० सेट् प० | कृती वेष्टने ७. १० ||
कृप (कृप्)| चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| कृप- [दौर्बल्ये]१०. ४०८ ||
कृप् | भ्वा० सेट् आ० | कृप(म्)[क्रप(म्)कप(म्)]कृपायां गतौ च १. ८७५ ||
कृप् | भ्वा० सेट् आ० | कृपू सामर्थ्ये १. ८६६ ||
कृप् | चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| कृपेश्च [अवकल्कने | मिश्रीकरण इत्येके | चिन्तन इत्यन्ये]१०. २७८ ||
कृश् | दि० सेट् प० | कृश तनूकरणे ४. १४० ||
कृष् | भ्वा० अनिट् प० | कृष विलेखने १. ११४५ ||
कृष् | तु० अनिट् उ० | कृष विलेखने ६. ६ ||
कॄ | तु० सेट् प० | कॄ विक्षेपे (निक्षेपे)६. १४५ ||
कॄ | क्र्या० सेट् उ० | कॄञ् हिंसायाम् ९. १८ ||
कॄ | क्र्या० सेट् प० | कॄ हिंसायाम् ९. ३१ ||
कॄत् | चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| कॄत संशब्दने १०. १५५ ||
कॢप् | भ्वा० सेट् आ० | कृपू सामर्थ्ये १. ८६६ ||
केत (केत्)| चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| केत श्रावणे निमन्त्रणे च १०. ४३७ ||
केप् | भ्वा० सेट् आ० | केपृ- [[कम्पने]च]१. ४२६ ||
केल् | भ्वा० सेट् प० | केलृ- [चलने]१. ६१६ ||
केव् | भ्वा० सेट् आ० | केवृ [सेवने]इत्यप्येके १. ५८३ ||
कै | भ्वा० अनिट् प० | कै- [शब्दे]१. १०६४ ||
क्नथ् | भ्वा० सेट् प० | क्नथ(म्)- [हिंसार्थः]१. ९११ ||
क्नस् | दि० सेट् प० | क्नसु ह्वरणदीप्त्योः ४. ७ ||
क्नस् | क्नसु- [मित्]१. ९३९ ||
क्नू | क्र्या० सेट् उ० | क्नूञ् शब्दे ९. १२ ||
क्नूय् | भ्वा० सेट् आ० | क्नूयी शब्द उन्दे च १. ५५८ ||
क्मर् | भ्वा० सेट् प० | क्मर हूर्चने १. ६३६ ||
क्रथ् | भ्वा० सेट् प० | क्रथ(म्)- [हिंसार्थः]१. ९१२ ||
क्रद् | भ्वा० सेट् आ० | क्रद(म्)- [[वैक्लव्ये | वैकल्य इत्येके]इत्यन्ये]१. ८८२ ||
क्रन्द् | भ्वा० सेट् आ० | क्रदि(म्)- [वैक्लव्ये | वैकल्य इत्येके]१. ८७९ ||
क्रन्द् | भ्वा० सेट् प० | क्रदि- [आःवाने रोदने च]१. ७४ ||
क्रप् | भ्वा० सेट् आ० | क्रप(म्)[कृपायां गतौ च]इत्येके १. ८७६ ||
क्रम् | भ्वा० सेट् प० | क्रमु पादविक्षेपे १. ५४५ ||
क्री | क्र्या० अनिट् उ० | डुक्रीञ् द्रव्यविनिमये ९. १ ||
क्रीड् | भ्वा० सेट् प० | क्रीडृ विहारे १. ४०५ ||
क्रुञ्च् | भ्वा० सेट् प० | क्रुञ्च कौटिल्याल्पीभावयोः १. २१३ ||
क्रुड् | तु० सेट् प० | क्रुड- [निमज्जने इत्येके]६. १२८ ||
क्रुध् | दि० अनिट् प० | क्रुध क्रोधे (कोपे)४. ८६ ||
क्रुश् | भ्वा० अनिट् प० | क्रुश आःवाने रोदने च १. ९९२ ||
क्लथ् | भ्वा० सेट् प० | क्लथ(म्)हिंसार्थाः १. ९१३ ||
क्लद् | भ्वा० सेट् आ० | क्लद(म्)[वैक्लव्ये | वैकल्य इत्येके]इत्यन्ये १. ८८३ ||
क्लन्द् | भ्वा० सेट् आ० | क्लदि(म्)वैक्लव्ये | वैकल्य इत्येके इत्यन्ये १. ८८० ||
क्लन्द् | भ्वा० सेट् प० | क्लदि आःवाने रोदने च १. ७५ ||
क्लप् | चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| क्लप [व्यक्तायां वाचि]इत्येके १०. १६२ ||
क्लम् | दि० सेट् प० | क्लमु ग्लानौ ४. १०४ ||
क्लिद् | दि० सेट् प० | क्लिदू आद्रीभावे ४. १५७ ||
क्लिन्द् | भ्वा० सेट् आ० | क्लिदि परिदेवने १. १५ ||
क्लिन्द् | भ्वा० सेट् प० | क्लिदि परिदेवने १. ७६ ||
क्लिश् | दि० सेट् आ० | क्लिश उपतापे ४. ५७ ||
क्लिश् | क्र्या० सेट् वेट् प० | क्लिशू विबाधने ९. ५८ ||
क्लीब् | भ्वा० सेट् आ० | क्लीबृ अधार्ष्ठ्ये १. ४४१ ||
क्लु | भ्वा० अनिट् आ० | क्लुङ् [गतौ]इत्येके १. १११३ ||
क्लेश् | भ्वा० सेट् आ० | क्लेश अव्यक्तायां वाचि | बाधन इत्यन्ये (इति दुर्गः)१. ६९१ ||
क्वण् | भ्वा० सेट् प० | क्वण- [शब्दार्थः]१. ५१८ ||
क्वथ् | भ्वा० सेट् प० | क्वथे निष्पाके १. ९८१ ||
क्षञ्ज् | भ्वा० सेट् आ० | क्षजि(म्)गतिदानयोः १. ८७३ ||
क्षञ्ज् | चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| क्षजि कृच्च्रजीवने १०. ११३ ||
क्षण् | त० सेट् उ० | क्षणु हिंसायाम् ८. ३ ||
क्षप (क्षप्)| चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| क्षप प्रेरणे १०. ४८७ ||
क्षप् | भ्वा० सेट् प० | - क्षपयश्च [मित्][इति भोजः]१. ९३५ ||
क्षम् | भ्वा० सेट् आ० | क्षमूष् सहने १. ५१० ||
क्षम् | दि० सेट् वेट् प० | क्षमू सहने ४. १०३ ||
क्षम्प् | चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| क्षपि क्षान्त्याम् १०. ११२ ||
क्षर् | भ्वा० सेट् प० | क्षर सञ्चलने १. ९८६ ||
क्षल् | चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| क्षल शौचकर्मणि १०. ८६ ||
क्षि | भ्वा० अनिट् प० | क्षि क्षये १. २६९ ||
क्षि | स्वा० सेट् प० | क्षि- [क्षी- ][हिंसायाम्]| क्षिर्भाषायामित्येके ५. ३३ ||
क्षि | तु० अनिट् प० | क्षि निवासगत्योः ६. १४३ ||
क्षिण् | त० सेट् उ० | क्षिणु [हिंसायाम्]च ८. ४ ||
क्षिप् | दि० अनिट् प० | क्षिप प्रेरने ४. १५ ||
क्षिप् | तु० अनिट् उ० | क्षिप प्रेरणे ६. ५ ||
क्षिव् | भ्वा० सेट् प० | क्षिवु- (क्षीवु- )[निरसने]१. ६४८ ||
क्षी | स्वा० सेट् प० | क्षी [हिंसायाम्]इत्येके | क्षिर्भाषायामित्येके ५. ३९ ||
क्षीज् | भ्वा० सेट् प० | क्षीज अव्यक्ते शब्दे १. २७० ||
क्षीब् | भ्वा० सेट् आ० | क्षीबृ मदे १. ४४२ ||
क्षीव् | भ्वा० सेट् आ० | क्षीवृ [मदे]इत्येके १. ४४३ ||
क्षीष् | क्र्या० अनिट् प० | क्षीष् हिंसायाम् ९. ४२ ||
क्षु | अ० सेट् प० | टुक्षु शब्दे २. ३१ ||
क्षुद् | रु० अनिट् उ० | क्षुदिर् सम्प्रेषणे ७. ६ ||
क्षुध् | दि० अनिट् प० | क्षुध बुभुक्षायाम् ४. ८७ ||
क्षुभ् | भ्वा० सेट् आ० | क्षुभ सञ्चलने १. ८५४ ||
क्षुभ् | दि० सेट् प० | क्षुभ सञ्चलने ४. १५४ ||
क्षुभ् | क्र्या० सेट् प० | क्षुभ सञ्चलने ९. ५५ ||
क्षुर् | भ्वा० सेट् प० | क्षुर सञ्चये १. ९८७ ||
क्षुर् | तु० सेट् प० | क्षुर विलेखने ६. ७० ||
क्षेव् | भ्वा० सेट् प० | क्षेवु निरसने १. ६४९ ||
क्षै | भ्वा० अनिट् प० | क्षै- [क्षये]१. १०६१ ||
क्षोट (क्षोट्)| चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| क्षोट क्षेपे १०. ४१६ ||
क्ष्णु | अ० सेट् प० | क्ष्णु तेजने २. ३२ ||
क्ष्माय् | भ्वा० सेट् आ० | क्ष्मायी विधूनने १. ५५९ ||
क्ष्मील् | भ्वा० सेट् प० | क्ष्मील निमेषणे १. ५९८ ||
क्ष्विद् | भ्वा० सेट् आ० | ञिक्ष्विदा [स्नेहनमोचनयोः (गात्रप्रस्रवणे)| स्नेहनमोहनयोरित्येके]चेत्येके १. ८४६ ||
क्ष्विद् | भ्वा० सेट् प० | ञिक्ष्विदा अव्यक्ते शब्दे १. ११३३ ||
क्ष्विद् | दि० सेट् प० | ञिक्ष्विदा स्नेहनमोचनयोः ४. १५९ ||
क्ष्वेल् | भ्वा० सेट् प० | क्ष्वेलृ- [चलने]१. ६१८ ||
खच् | क्र्या० सेट् प० | खच भूतप्रादुर्भावे ९. ६७ ||
खज् | भ्वा० सेट् प० | खज मन्थे १. २६४ ||
खञ्ज् | भ्वा० सेट् प० | खजि गतिवैकल्ये १. २६६ ||
खट् | भ्वा० सेट् प० | खट काङ्क्षायाम् १. ३४६ ||
खट्ट् | चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| खट्ट संवरणे १०. १२७ ||
खड् | चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| खड- [खण्डने (भेदने)]१०. ६५ ||
खण्ड् | भ्वा० सेट् आ० | खडि मन्थे १. ३१७ ||
खण्ड् | चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| खडि- [खण्डने (भेदने)]१०. ६६ ||
खद् | भ्वा० सेट् प० | खद स्थैर्ये हिंसायां च १. ५२ ||
खन् | भ्वा० सेट् उ० | खनु अवदारणे १. १०२० ||
खर्ज् | भ्वा० सेट् प० | खर्ज [व्यथने]पूजने च १. २६१ ||
खर्द् | भ्वा० सेट् प० | खर्द दन्दशूके १. ६२ ||
खर्ब् | भ्वा० सेट् प० | खर्ब- [गतौ]१. ४८७ ||
खर्व् | भ्वा० सेट् प० | खर्व- [दर्पे]१. ६६५ ||
खल् | भ्वा० सेट् प० | खल [सञ्चलने]सञ्चये (च)१. ६२६ ||
खव् | क्र्या० सेट् प० | खव [भूतप्रादुर्भावे]इत्येके ९. ६८ ||
खष् | भ्वा० सेट् प० | खष- [हिंसार्थः]१. ७८२ ||
खाद् | भ्वा० सेट् प० | खादृ भक्षणे १. ५१ ||
खिट् | भ्वा० सेट् प० | खिट त्रासे १. ३३९ ||
खिद् | दि० अनिट् आ० | खिद दैन्ये ४. ६६ ||
खिद् | तु० अनिट् प० | खिद परिघाते (परिघातने)६. १७२ ||
खिद् | रु० अनिट् आ० | खिद दैन्ये ७. १२ ||
खु | भ्वा० अनिट् आ० | खुङ्- [शब्दे]१. ११०४ ||
खुज् | भ्वा० सेट् प० | खुजु स्तेयकरणे १. २२७ ||
खुड् | तु० सेट् प० | खुड- [[संवरणे]इत्येके]६. ११९ ||
खुण्ड् | चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| खुडि खण्डने १०. ७२ ||
खुर् | तु० सेट् प० | खुर चेदने ६. ६८ ||
खुर्द् | भ्वा० सेट् आ० | खुर्द- [क्रीडायामेव]१. २२ ||
खेट (खेट्)| चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| खेट भक्षणे १०. ४१३ ||
खेड (खेड्)| चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| खेड [भक्षणे]इत्येके १०. ४१४ ||
खेल् | भ्वा० सेट् प० | खेलृ- [चलने]१. ६१७ ||
खेव् | भ्वा० सेट् आ० | खेवृ- [[सेवने]इत्यप्येके]१. ५८१ ||
खै | भ्वा० अनिट् प० | खै खदने १. १०६० ||
खोट (खोट्)| चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| खोट [भक्षणे]इत्यन्ये १०. ४१५ ||
खोर् | भ्वा० सेट् प० | खोरृ गतिप्रतिघाते १. ६३३ ||
खोल् | भ्वा० सेट् प० | खोलृ- [गतिप्रतिघाते]१. ६३२ ||
ख्या | अ० अनिट् प० | ख्या प्रकथने २. ५५ ||
गज् | भ्वा० सेट् प० | गज- [शब्दार्थः]१. २७९ ||
गज् | चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| गज- [शब्दार्थः]१०. १४९ ||
गञ्ज् | भ्वा० सेट् प० | गजि- [शब्दार्थः]१. २८० ||
गड् | भ्वा० सेट् प० | गड(म्)सेचने १. ८८६ ||
गण (गण्)| चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| गण सङ्ख्याने १०. ३९१ ||
गण्ड् | भ्वा० सेट् प० | गडि वदनैकदेशे १. ४१९ ||
गण्ड् | भ्वा० सेट् प० | गडि वदनैकदेशे १. ६८ ||
गद (गद्)| चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| गदी देवशब्दे १०. ३९९ ||
गद् | भ्वा० सेट् प० | गद व्यक्तायां वाचि १. ५४ ||
गन्ध् | चु० सेट् आ० | गन्ध अर्दने १०. २०४ ||
गम् | भ्वा० अनिट् प० | गमॢ- [गतौ]१. ११३७ ||
गर्ज् | भ्वा० सेट् प० | गर्ज शब्दे १. २५८ ||
गर्ज् | चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| गर्ज- [शब्दे]१०. १७७ ||
गर्द् | भ्वा० सेट् प० | गर्द शब्दे १. ५९ ||
गर्द् | चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| गर्द शब्दे १०. १७८ ||
गर्ध् | चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| गर्ध अभिकाङ्क्षायाम् १०. १७९ ||
गर्ब् | भ्वा० सेट् प० | गर्ब- [गतौ]१. ४८८ ||
गर्व (गर्व्)| चु० सेट् आ० | गर्व माने १०. ४४९ ||
गर्व् | भ्वा० सेट् प० | गर्व दर्पे १. ६६६ ||
गर्ह् | भ्वा० सेट् आ० | गर्ह- [कुत्सायाम्]१. ७२३ ||
गर्ह् | चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| गर्ह विनिन्दने १०. ३८३ ||
गल् | भ्वा० सेट् प० | गल अदने (भक्षणे स्रावे च)१. ६२७ ||
गल् | चु० सेट् आ० | गल स्रवणे १०. २२३ ||
गल्भ् | भ्वा० सेट् आ० | गल्भ धार्ष्ट्ये १. ४५७ ||
गल्ह् | भ्वा० सेट् आ० | गल्ह कुत्सायाम् १. ७२४ ||
गवेष (गवेष्)| चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| गवेष मार्गणे १०. ४२५ ||
गा | भ्वा० अनिट् आ० | गाङ् गतौ १. ११०१ ||
गा | जु० अनिट् प० | गा स्तुतौ ३. २६ ||
गाध् | भ्वा० सेट् आ० | गाधृ प्रतिष्ठालिप्सयोर्ग्रन्थे च १. ४ ||
गाह् | भ्वा० सेट् आ० | गाहू विलोडने १. ७३६ ||
गु | भ्वा० अनिट् आ० | गुङ् अव्यक्ते शब्दे १. ११०० ||
गु | भ्वा० अनिट् आ० | गुङ्- [शब्दे]१. ११०५ ||
गु | तु० अनिट् प० | गु पुरीषोत्सर्गे ६. १३४ ||
गुज् | भ्वा० सेट् प० | गुज- [अव्यक्ते शब्दे]१. २३० ||
गुज् | तु० सेट् प० | गुज शब्दे ६. ९६ ||
गुञ्ज् | भ्वा० सेट् प० | गुजि अव्यक्ते शब्दे १. २३१ ||
गुड् | तु० सेट् प० | गुड रक्षायाम् ६. ९७ ||
गुण (गुण्)| चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| गुण चामन्त्रणे १०. ४३६ ||
गुण्ठ् | चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| गुठि [[रक्षणे]वेष्टने (च)| रक्षण इत्येके]इत्यपरे १०. ७१ ||
गुण्ड् | चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| गुडि [रक्षणे]वेष्टने (च)| रक्षण इत्येके १०. ६९ ||
गुद् | भ्वा० सेट् आ० | गुद क्रीडायामेव १. २४ ||
गुध् | दि० सेट् प० | गुध परिवेष्टने ४. १४ ||
गुध् | क्र्या० सेट् प० | गुध रोषे ९. ५३ ||
गुप् | भ्वा० सेट् आ० | गुप गोपने १. ११२५ ||
गुप् | भ्वा० सेट् प० | गुपू रक्षणे १. ४६१ ||
गुप् | चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| गुप- [भाषार्थः]१०. ३०२ ||
गुप् | दि० सेट् प० | गुप व्याकुलत्वे ४. १४७ ||
गुफ् | तु० सेट् प० | गुफ- [ग्रन्थे]६. ४२ ||
गुम्फ् | तु० सेट् प० | गुम्फ ग्रन्थे ६. ४३ ||
गुर् | तु० सेट् आ० | गुरी उद्यमने ६. १३१ ||
गुर्द् | भ्वा० सेट् आ० | गुर्द- [क्रीडायामेव (गुडक्रीडायामेव)]१. २३ ||
गुर्द् | चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| गुर्द पूर्वनिकेतने | निकेतने इत्यन्ये १०. १८० ||
गुर्व् | भ्वा० सेट् प० | गुर्वी उद्यमने १. ६५५ ||
गुह् | भ्वा० सेट् उ० | गुहू संवरणे १. १०४३ ||
गूर् | चु० सेट् आ० | गूर उद्यमने १०. २१७ ||
गूर् | दि० सेट् आ० | गूरी हिंसागत्योः ४. ४९ ||
गूह् | भ्वा० सेट् आ० | गृहू ग्रहणे १. ७३७ ||
गृ | भ्वा० अनिट् प० | गृ- [सेचने]१. १०८७ ||
गृज् | भ्वा० सेट् प० | गृज- [शब्दार्थः]| गज मदने च १. २८१ ||
गृञ्ज् | भ्वा० सेट् प० | गृजि- [शब्दार्थः]१. २८२ ||
गृध् | दि० सेट् प० | गृधु अभिकाङ्क्षायाम् ४. १६१ ||
गृह (गृह्)| चु० सेट् आ० | गृह ग्रहणे १०. ४४१ ||
गॄ | चु० सेट् आ० | गॄ विज्ञाने १०. २३१ ||
गॄ | तु० सेट् प० | गॄ निगरणे ६. १४६ ||
गॄ | क्र्या० सेट् प० | गॄ शब्दे ९. ३३ ||
गेप | भ्वा० सेट् आ० | गेपृ- [[कम्पने]च]१. ४२७ ||
गेव् | भ्वा० सेट् आ० | गेवृ- [सेवने]१. ५७५ ||
गेष् | भ्वा० सेट् आ० | गेषृ अन्विच्चायाम् १. ६९८ ||
गै | भ्वा० अनिट् प० | गै शब्दे १. १०६५ ||
गोम (गोम्)| चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| गोम उपलेपने १०. ४१७ ||
गोष्ट् | भ्वा० सेट् आ० | गोष्ट- [सङ्घाते]१. २९० ||
ग्रन्थ् | भ्वा० सेट् आ० | ग्रथि कौटिल्ये १. ३६ ||
ग्रन्थ् | चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| ग्रन्थ बन्धने १०. ३६२ ||
ग्रन्थ् | चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| ग्रन्थ सन्दर्भे १०. ३७५ ||
ग्रन्थ् | क्र्या० सेट् प० | ग्रन्थ सन्दर्भे ९. ४९ ||
ग्रस् | भ्वा० सेट् आ० | ग्रसु- [अदने]१. ७१७ ||
ग्रस् | चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| ग्रस ग्रहणे १०. २७९ ||
ग्रह् | क्र्या० सेट्० उ० | ग्रह उपादाने ९. ७१ ||
ग्राम (ग्राम्)| चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| ग्राम- [आमन्त्रणे]१०. ४३४ ||
ग्रुच् | भ्वा० सेट् प० | ग्रुचु- स्तेयकरणे १. २२४ ||
ग्लस् | भ्वा० सेट् आ० | ग्लसु अदने १. ७१८ ||
ग्लह् | भ्वा० सेट् आ० | ग्लह [ग्रहणे]च (अपादाने)१. ७३८ ||
ग्ला | ग्ला- [[अनुपसर्गाद्वा]च][मित्]१. ९४५ ||
ग्लुच् | भ्वा० सेट् प० | ग्लुचु- स्तेयकरणे १. २२५ ||
ग्लुञ्च् | भ्वा० सेट् प० | ग्लुञ्च- [गतौ]१. २२८ ||
ग्लेप् | भ्वा० सेट् आ० | ग्लेपृ च [कम्पने]१. ४२८ ||
ग्लेप् | भ्वा० सेट् आ० | ग्लेपृ दैन्ये १. ४२४ ||
ग्लेव् | भ्वा० सेट् आ० | ग्लेवृ- [सेवने]१. ५७६ ||
ग्लेष् | भ्वा० सेट् आ० | ग्लेषृ [अन्विच्चायाम्]इत्येके १. ६९९ ||
ग्लै | भ्वा० अनिट् प० | ग्लै- [हर्षक्षये]१. १०५१ ||
ग्लै | भ्वा० सेट् प० | ग्ला- [[अनुपसर्गाद्वा]च][मित्]१. ९४५ ||
घग्घ् | भ्वा० सेट् प० | घग्घ [हसने]इत्येके १. १८० ||
घघ् | भ्वा० सेट् प० | घघ हसने १. १७९ ||
घट् | भ्वा० सेट् आ० | घट(म्)चेष्टायाम् १. ८६७ ||
घट् | चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| घट सङ्घाते | हन्त्यर्थाश्च १०. २४८ ||
घट् | चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| घट- [भाषार्थः]१०. २९७ ||
घट्ट् | भ्वा० सेट् आ० | घट्ट चलने १. २९२ ||
घट्ट् | चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| घट्ट चलने १०. १२५ ||
घण्ट् | चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| घटि- [भाषार्थः]१०. २९८ ||
घष् | भ्वा० सेट् आ० | घष [कान्तिकरणे]इति केचित् १. ७४० ||
घस् | भ्वा० सेट् प० | घसॢ अदने १. ८१२ ||
घिण्ण् | भ्वा० सेट् आ० | घिणि- [ग्रहणे]१. ५०२ ||
घुंष् | भ्वा० सेट् आ० | घुषि कान्तिकरणे १. ७३९ ||
घु | भ्वा० अनिट् आ० | घुङ्- [शब्दे]१. ११०६ ||
घुट् | भ्वा० सेट् आ० | घुट परिवर्तने १. ८४८ ||
घुट् | तु० सेट् प० | घुट प्रतिघाते ६. ११५ ||
घुण् | भ्वा० सेट् आ० | घुण- [भ्रमणे]१. ५०५ ||
घुण् | तु० सेट् प० | घुण- [भ्रमणे]६. ६४ ||
घुण्ण् | भ्वा० सेट् आ० | घुणि- [ग्रहणे]१. ५०३ ||
घुर् | तु० सेट् प० | घुर भीमार्थशब्दयोः ६. ७१ ||
घुष् | भ्वा० सेट् प० | घुषिर् अविशब्दने | शब्द इत्यन्ये पेठुः १. ७४१ ||
घुष् | चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| घुषिर् विशब्दने १०. २५१ ||
घूर् | दि० सेट् आ० | घूरी- [हिंसावयोहन्योः]४. ५० ||
घूर्ण् | भ्वा० सेट् आ० | घूर्ण भ्रमणे १. ५०६ ||
घूर्ण् | तु० सेट् प० | घूर्ण भ्रमणे ६. ६५ ||
घृ | भ्वा० अनिट् प० | घृ सेचने १. १०८८ ||
घृ | चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| घृ प्रस्रवणे | स्रावण इत्येके १०. १५२ ||
घृ | जु० अनिट् प० | घृ क्षरणदीप्त्योः ३. १५ ||
घृण् | त० सेट् उ० | घृणु दीप्तौ ८. ७ ||
घृण्ण् | भ्वा० सेट् आ० | घृणि ग्रहणे १. ५०४ ||
घृष् | भ्वा० सेट् प० | घृषु सङ्घर्षे १. ८०५ ||
घ्रा | भ्वा० अनिट् प० | घ्रा गन्धोपादाने (घ्राणे)१. १०७५ ||
घ्राघ् | भ्वा० सेट् आ० | ध्राघृ [सामर्थ्ये]इत्यपि केचित् १. १२१ ||
ङु | भ्वा० अनिट् आ० | ङुङ् शब्दे १. ११०७ ||
चकास् | अ० सेट् प० | चकासृ दीप्तौ २. ६९ ||
चक् | भ्वा० सेट् आ० | चक तृप्तौ प्रतिघाते च १. ९८ ||
चक् | भ्वा० सेट् प० | चक(म्)तृप्तौ १. ८९२ ||
चक्क् | चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| चक्क- [व्यथने]१०. ८४ ||
चक्ष् | अ० अनिट् आ० | चक्षिङ् व्यक्तायां वाचि | अयं दर्शने- पि २. ७ ||
चञ्च् | भ्वा० सेट् प० | चञ्चु- [गत्यर्थः]१. २१७ ||
चट् | भ्वा० सेट् प० | चटे [वर्षावरणयोः]इत्येके १. ३३१ ||
चट् | चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| चट- [भेदने]१०. २४६ ||
चण् | भ्वा० सेट् प० | चण(म्)- [[गतौ]दाने च]१. ९०५ ||
चण्ड् | भ्वा० सेट् आ० | चडि कोपे १. ३१२ ||
चण्ड् | चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| चडि कोपे | चण्ड इत्यन्ये १०. ७५ ||
चत् | भ्वा० सेट् उ० | चते- [[परिभाषणे]याचने (च)]१. १००३ ||
चद् | भ्वा० सेट् उ० | चदे [परिभाषणे]याचने (च)१. १००४ ||
चन् | भ्वा० सेट् प० | चन(म्)च [हिंसार्थः]१. ९१४ ||
चन् | चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| चन श्रद्धोपहननयोरित्येके १०. ३७८ ||
चन्द् | भ्वा० सेट् प० | चदि आह्लादे दीप्तौ च १. ७१ ||
चप् | भ्वा० सेट् प० | चप सान्त्वने १. ४६५ ||
चप् | चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| चप(म्)[परिकल्पने]इत्येके १०. १२१ ||
चम् | [न]- चमाम् [मित्]१. ९५१ ||
चम् | भ्वा० सेट् प० | चमु- [अदने]१. ५४० ||
चम् | स्वा० सेट् प० | चमु भक्षणे ५. ३१ ||
चम्प् | चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| चपि गत्याम् १०. १११ ||
चय् | भ्वा० सेट् आ० | चय- [गतौ]१. ५५० ||
चर् | भ्वा० सेट् प० | चर गत्यर्थाः | चरतिर्भक्षणर्थो- पि (चर भक्षणे च)(चरतिर्भक्षणे- पि)१. ६४० ||
चर् | चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| चर संशये १०. २७४ ||
चर्च् | भ्वा० सेट् प० | चर्च- [परिभाषणहिंसातर्जनेषु]१. ८१४ ||
चर्च् | चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| चर्च अध्ययने १०. २३७ ||
चर्च् | तु० सेट् प० | चर्च- [परिभाषणभर्त्सनयोः]६. १९ ||
चर्ब् | भ्वा० सेट् प० | चर्ब गतौ | चर्ब अदने च १. ४९१ ||
चर्व् | भ्वा० सेट् प० | चर्व अदने १. ६६० ||
चल् | भ्वा० सेट् प० | चल कम्पने १. ९६६ ||
चल् | चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| चल भृतौ १०. ९७ ||
चल् | तु० सेट् प० | चल विलसने ६. ८३ ||
चल् | कम्पने चलिः [मित्]१. ९२४ ||
चष् | भ्वा० सेट् उ० | चष भक्षणे १. १०३४ ||
चह (चह्)| चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| चह परिकल्कने १०. ४०५ ||
चह् | भ्वा० सेट् प० | चह परिकल्कने १. ८३० ||
चह् | चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| चह(म्)परिकल्पने १०. १२० ||
चाय् | भ्वा० सेट् उ० | चायृ पूजानिशामनयोः १. १०२३ ||
चि | चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| चि- (जुचि जिवि)[[भाषार्थः]च]१०. ३२५ ||
चि | चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| चिञ्(म्)चयने १०. १२४ ||
चि | स्वा० अनिट् उ० | चिञ् चयने ५. ५ ||
चिट् | भ्वा० सेट् प० | चिट परप्रैष्ये (परप्रेष्ये)१. ३५३ ||
चित् | भ्वा० सेट् प० | चिती सञ्ज्ञाने १. ३९ ||
चित् | चु० सेट् आ० | चित सञ्चेतने १०. १९२ ||
चित्र (चित्र्)| चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| चित्र चित्रीकरणे | कदाचिद्दर्शने १०. ४५९ ||
चिन्त् | चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| चिति स्मृत्याम् १०. २ ||
चिरि | स्वा० सेट् प० | चिरि- [हिंसायाम्]५. ३४ ||
चिल् | तु० सेट् प० | चिल वसने ६. ८२ ||
चिल्ल् | भ्वा० सेट् प० | चिल्ल शैथिल्ये भावकरणे च १. ६११ ||
चीक् | चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| चीक [आमर्षणे]च १०. ३६४ ||
चीब् | भ्वा० सेट् उ० | चीबृ [आदानसंवरणयोः]इत्येके १. १०२२ ||
चीब् | चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| चीव- (चीब- )[भाषार्थः]१०. ३०५ ||
चीभ् | भ्वा० सेट् आ० | चीभृ च [कत्थने]१. ४४६ ||
चीव् | भ्वा० सेट् उ० | चीवृ आदानसंवरणयोः १. १०२१ ||
चीव् | चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| चीव- (चीब- )[भाषार्थः]१०. ३०५ ||
चुक्क् | चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| चुक्क व्यथने १०. ८५ ||
चुच्य् | भ्वा० सेट् प० | चुच्य [अभिषवे]इत्येके १. ५९१ ||
चुट् | चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| चुट चेदने १०. १०३ ||
चुट् | तु० सेट् प० | चुट- [चेदने]६. १०४ ||
चुट्ट् | चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| चुट्ट अल्पीभावे १०. ३६ ||
चुड् | तु० सेट् प० | चुड- [संवरणे]६. १२६ ||
चुड्ड् | भ्वा० सेट् प० | चुड्ड (चुद्ड)भावकरणे १. ४०२ ||
चुण्ट् | चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| चुटि चेदने १०. १६४ ||
चुण्ड् | भ्वा० सेट् प० | चुडि अल्पीभावे १. ३६८ ||
चुद् | चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| चुद सञ्चोदने १०. ८१ ||
चुद्ड् | भ्वा० सेट् प० | चुड्ड (चुद्ड)भावकरणे १. ४०२ ||
चुप् | भ्वा० सेट् प० | चुप मन्दायां गतौ १. ४६९ ||
चुम्ब् | भ्वा० सेट् प० | चुबि वक्त्रसंयोगे १. ४९५ ||
चुम्ब् | चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| चुबि हिंसायाम् १०. १३० ||
चुर् | चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| चुर स्तेये १०. १ ||
चुल् | चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| चुल समुच्च्राये १०. ९१ ||
चुल्ल् | भ्वा० सेट् प० | चुल्ल भावकरणे १. ६०९ ||
चूर् | दि० सेट् आ० | चूरी दाःए ४. ५३ ||
चूर्ण् | चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| चूर्ण प्रेरणे १०. २६ ||
चूर्ण् | चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| चूर्ण सङ्कोचने १०. १४३ ||
चूष् | भ्वा० सेट् प० | चूष पाने १. ७६७ ||
चृत् | तु० सेट् प० | चृती हिंसाग्रन्थनयोः ६. ४९ ||
चृप् | चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| चृप- [सन्दीपने (इत्येके)]१०. ३५३ ||
चेल् | भ्वा० सेट् प० | चेलृ- [चलने]१. ६१५ ||
चेष्ट् | भ्वा० सेट् आ० | चेष्ट चेष्टायाम् १. २८९ ||
च्यु | चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| च्यु हसने | सहने चेत्येके १०. २७५ ||
च्युत् | भ्वा० सेट् प० | च्युतिर् आसेचने १. ४० ||
चञ्ज् | चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| चजि [कृच्च्रजीवने]इत्येके १०. ११४ ||
चद (चद्)| चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| चद अपवारणे १०. ४८१ ||
चद् | चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| चद अपवारणे १०. ३७० ||
चद् | चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| चद संवरणे १०. ३५९ ||
चद् | चदिर् ऊर्जने [मित्]१. ९२५ ||
चन्द् | चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| चदि संवरणे १०. ६२ ||
चम् | भ्वा० सेट् प० | चमु- [अदने]१. ५४१ ||
चर्द् | चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| चर्द (चृद)वमने १०. ७८ ||
चष् | भ्वा० सेट् उ० | चष हिंसायाम् १. १०३५ ||
चिद् | रु० अनिट् उ० | चिदिर् द्वैधीकरणे ७. ३ ||
चिद्र (चिद्र्)| चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| चिद्र कर्णभेदने | करणभेदन इत्येके १०. ४६९ ||
चुट् | तु० सेट् प० | चुट चेदने ६. १०५ ||
चुड् | तु० सेट् प० | चुड [संवरणे]इत्येके ६. १२० ||
चुप् | तु० अनिट् प० | चुप स्पर्शे ६. १५४ ||
चुर् | तु० सेट् प० | चुर चेदने ६. ९९ ||
चृद् | चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| चृदी सन्दीपने १०. ३५२ ||
चृद् | रु० सेट् उ० | उचृदिर् दीप्तिदेवनयोः ७. ८ ||
चृप् | चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| चृप- [सन्दीपने (इत्येके)]१०. ३५४ ||
चेद (चेद्)| चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| चेद द्वैधीकरणे १०. ४८० ||
चो | दि० अनिट् प० | चो चेदने ४. ४१ ||
जंस् | चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| जसि रक्षणे | मोक्षण इत्येके १०. १८२ ||
जक्ष् | अ० सेट् प० | जक्ष भक्ष्यहसनयोः २. ६६ ||
जज् | भ्वा० सेट् प० | जज- [युद्धे]१. २७५ ||
जञ्ज् | भ्वा० सेट् प० | जजि युद्धे १. २७६ ||
जट् | भ्वा० सेट् प० | जट- [सङ्घाते]१. ३४२ ||
जन् | जु० सेट् प० | जन जनने ३. २५ ||
जन् | दि० सेट् आ० | जनी प्रादुर्भावे ४. ४४ ||
जन् | जनी- [मित्]१. ९३७ ||
जप् | भ्वा० सेट् प० | जप- [व्यक्तायां वाचि]| जप मानसे च १. ४६३ ||
जभ् | भ्वा० सेट् आ० | जभी- [गात्रविनामे]१. ४५३ ||
जम् | भ्वा० सेट् प० | जमु- [अदने]१. ५४२ ||
जम्भ् | चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| जभि नाशने १०. २४१ ||
जर्च् | भ्वा० सेट् प० | जर्त्स- (जर्ज- जर्च- )[परिभाषणहिंसातर्जनेषु]१. ८१३ ||
जर्ज् | भ्वा० सेट् प० | जर्त्स- (जर्ज- जर्च- )[परिभाषणहिंसातर्जनेषु]१. ८१३ ||
जर्ज् | तु० सेट् प० | जर्ज- [परिभाषणभर्त्सनयोः]६. १८ ||
जर्त्स् | भ्वा० सेट् प० | जर्त्स- (जर्ज- जर्च- )[परिभाषणहिंसातर्जनेषु]१. ८१३ ||
जल् | भ्वा० सेट् प० | जल घातने १. ९६७ ||
जल् | चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| जल अपवारणे १०. १५ ||
जल्प् | भ्वा० सेट् प० | जल्प व्यक्तायां वाचि १. ४६४ ||
जष् | भ्वा० सेट् प० | जष- [हिंसार्थः]१. ७८४ ||
जस् | चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| जसु ताडने १०. २४३ ||
जस् | चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| जसु हिंसायाम् १०. १८४ ||
जस् | दि० सेट् प० | जसु मोक्षने ४. १०८ ||
जागृ | अ० सेट् प० | जागृ निद्राक्षये २. ६७ ||
जि | भ्वा० अनिट् प० | जि जये १. ६४२ ||
जि | भ्वा० अनिट् प० | जि- [अभिभवे]१. १०९६ ||
जि | चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| जि- [[भाषार्थः]च]१०. ३२४ ||
जिन्व् | भ्वा० सेट् प० | जिवि प्रीणनार्थाः १. ६७८ ||
जिन्व् | चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| चि- (जुचि जिवि)[[भाषार्थः]च]१०. ३२५ ||
जिम् | भ्वा० सेट् प० | जिमु [अदने]इति केचित् १. ५४४ ||
जिरि | स्वा० सेट् प० | जिरि- [हिंसायाम्]५. ३५ ||
जिष् | भ्वा० सेट् प० | जिषु- [सेचने]१. ७९३ ||
जीव् | भ्वा० सेट् प० | जीव प्राणधारणे १. ६४३ ||
जु | भ्वा० अनिट् आ० | जुङ्- [गतौ]१. १११० ||
जु | भ्वा० अनिट् प० | जु इति सौत्रो धातुः गत्यर्थः १. १०९८ ||
जुङ्ग्? | भ्वा० सेट् प० | जुगि- [वर्जने]१. १७६ ||
जुञ्च् | चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| चि- (जुचि जिवि)[[भाषार्थः]च]१०. ३२५ ||
जुट् | तु० सेट् प० | जुट [बन्धने]इत्येके ६. १०७ ||
जुड् | चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| जुड प्रेरणे १०. १४८ ||
जुड् | तु० सेट् प० | जुड गतौ ६. ५१ ||
जुड् | तु० सेट् प० | जुड बन्धने ६. १०६ ||
जुत् | भ्वा० सेट् आ० | जुतृ भासणे १. ३२ ||
जुन् | तु० सेट् प० | जुन [गतौ]इत्येके ६. ५२ ||
जुष् | चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| जुष परितर्कने | परितर्पण इत्यन्ये १०. ३७१ ||
जुष् | तु० सेट् आ० | जुषी प्रीतिसेवनयोः ६. ८ ||
जूर् | दि० सेट् आ० | जूरी हिंसावयोहन्योः ४. ५१ ||
जूष् | भ्वा० सेट् प० | जूष च [हिंसायाम्]१. ७७६ ||
जृम्भ् | भ्वा० सेट् आ० | जृभि गात्रविनामे १. ४५४ ||
जॄ | चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| जॄ वयोहानौ १०. ३४६ ||
जॄ | दि० सेट् प० | जॄष्- [वयोहानौ]४. २५ ||
जॄ | क्र्या० सेट् प० | जॄ वयोहानौ ९. २७ ||
जॄ | जॄष्- [मित्]१. ९३८ ||
जेष् | भ्वा० सेट् आ० | जेषृ- [गतौ]१. ७०३ ||
जेह् | भ्वा० सेट् आ० | जेहृ- [प्रयत्ने]जेहृ गतावपि १. ७३१ ||
जै | भ्वा० अनिट् प० | जै- [क्षये]१. १०६२ ||
ज्ञप् | चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| ज्ञप(म्)[ज्ञप]ज्ञानज्ञापनमारणतोषणनिशाननिशामनेषु १०. ११८ ||
ज्ञा | चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| ज्ञा नियोगे १०. २५८ ||
ज्ञा | क्र्या० अनिट् प० | ज्ञा अवबोधने ९. ४३ ||
ज्ञा | मारणतोषणनिशामनेषु ज्ञा [मित्]| मारणतोषणनिशानेष्विति पाठान्तरम् १. ९२३ ||
ज्या | क्र्या० अनिट् प० | ज्या वयोहानौ ९. ३४ ||
ज्यु | भ्वा० अनिट् आ० | ज्युङ्- [गतौ]१. ११०९ ||
ज्युत् | भ्वा० सेट् प० | ज्युतिर् भासने १. ४३ ||
ज्रि | भ्वा० अनिट् प० | ज्रि अभिभवे १. १०९७ ||
ज्रि | चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| ज्रि [वयोहानौ]च १०. ३४७ ||
ज्वर् | भ्वा० सेट् प० | ज्वर(म्)रोगे १. ८८५ ||
ज्वल् | भ्वा० सेट् प० | ज्वल दीप्तौ १. ९६५ ||
ज्वल् | भ्वा० सेट् प० | ज्वल(म्)दीप्तौ १. ९१६ ||
ज्वल् | ज्वल- [अनुपसर्गाद्वा][मित्]१. ९४१ ||
झट् | भ्वा० सेट् प० | झट सङ्घाते १. ३४३ ||
झम् | भ्वा० सेट् प० | झमु अदने १. ५४३ ||
झर्ज् | भ्वा० सेट् प० | झर्त्स (झर्झ झर्ज)परिभाषणहिंसातर्जनेषु १. ८१५ ||
झर्झ् | भ्वा० सेट् प० | झर्त्स (झर्झ झर्ज)परिभाषणहिंसातर्जनेषु १. ८१५ ||
झर्झ् | तु० सेट् प० | झर्झ परिभाषणभर्त्सनयोः ६. २० ||
झर्त्स् | भ्वा० सेट् प० | झर्त्स (झर्झ झर्ज)परिभाषणहिंसातर्जनेषु १. ८१५ ||
झष् | भ्वा० सेट् उ० | झष आदानसंवरणयोः १. १०३६ ||
झष् | भ्वा० सेट् प० | झष- [हिंसार्थः]१. ७८५ ||
झॄ | दि० सेट् प० | झॄष् वयोहानौ ४. २६ ||
झॄ | क्र्या० सेट् प० | झॄ [वयोहानौ]इत्येके ९. २८ ||
टङ्क् | चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| टकि बन्धने १०. १३५ ||
टल् | भ्वा० सेट् प० | टल- [वैकल्ये]१. ९६८ ||
टिक् | भ्वा० सेट् आ० | टिकृ- [गत्यर्थः]१. १०८ ||
टीक् | भ्वा० सेट् आ० | टीकृ- [गत्यर्थः]१. १०९ ||
ट्वल् | भ्वा० सेट् प० | ट्वल वैकल्ये १. ९६९ ||
डप् | चु० सेट् आ० | डप- [सङ्घाते]१०. १९६ ||
डिप् | चु० सेट् आ० | डिप सङ्घाते १०. १९७ ||
डिप् | चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| डिप क्षेपे १०. १८९ ||
डिप् | दि० सेट् प० | डिप क्षेपे ४. १४५ ||
डिप् | तु० सेट् प० | डिप क्षेपे ६. ९८ ||
डी | भ्वा० सेट् आ० | डीङ् विहायसा गतौ १. ११२३ ||
डी | दि० अनिट् आ० | (ओ)डीङ् विहायसा गतौ ४. ३० ||
ढौक् | भ्वा० सेट् आ० | ढौकृ- [गत्यर्थः]१. १०३ ||
तंस् | भ्वा० सेट् प० | तसि अलङ्कारे १. ७७८ ||
तंस् | चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| तसि- [अलङ्कारे]१०. २५४ ||
तक् | भ्वा० सेट् प० | तक हसने १. १२४ ||
तक्ष् | भ्वा० सेट् प० | तक्ष त्वचने १. ७५६ ||
तक्ष् | भ्वा० सेट् प० | तक्षू- [तनूकरणे]१. ७४३ ||
तङ्क् | भ्वा० सेट् प० | तकि कृच्च्रजीवने १. १२५ ||
तङ्ग् | भ्वा० सेट् प० | तगि- [गत्यर्थः]१. १५८ ||
तञ्च् | भ्वा० सेट् प० | तञ्चु- [गत्यर्थः]१. २१८ ||
तञ्च् | रु० सेट् प० | तञ्चू सङ्कोचने ७. २२ ||
तट् | भ्वा० सेट् प० | तट उच्च्राये १. ३४५ ||
तड् | चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| तड आघाते १०. ६४ ||
तण्ड् | भ्वा० सेट् आ० | तडि ताडने १. ३१४ ||
तण्ड् | चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| तड- [[भाषार्थः]च]१०. ३३२ ||
तन् | चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| तनु श्रद्धोपकरणयोः | उपसर्गाच्च दैर्घ्ये १०. ३७७ ||
तन् | त० सेट् उ० | तनु विस्तारे ८. १ ||
तन्त्र् | चु० सेट् आ० | तत्रि कुटुम्बधारणे १०. १९८ ||
तप् | भ्वा० अनिट् प० | तप सन्तापे १. ११४० ||
तप् | चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| तप दाःए १०. ३५० ||
तप् | दि० अनिट् आ० | तप [दाःए]ऐश्वेर्ये वा ४. ५४ ||
तम् | दि० सेट् प० | तमु काङ्क्षायाम् ४. ९९ ||
तय् | भ्वा० सेट् आ० | तय- [गतौ]१. ५५१ ||
तर्क् | चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| तर्क- [भाषार्थः]१०. ३११ ||
तर्ज् | भ्वा० सेट् प० | तर्ज भर्त्सने १. २५९ ||
तर्ज् | चु० सेट् आ० | तर्ज- [सन्तर्जने (तर्जने)]१०. २०१ ||
तर्द् | भ्वा० सेट् प० | तर्द हिंसायाम् १. ६० ||
तल् | चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| तल प्रतिष्ठायाम् १०. ८७ ||
तस् | दि० सेट् प० | तसु उपक्षये ४. १०९ ||
ताय् | भ्वा० सेट् आ० | तायृ सन्तानपालनयोः १. ५६२ ||
तिक् | भ्वा० सेट् आ० | तिकृ- [गत्यर्थः]१. ११० ||
तिक् | स्वा० सेट् प० | तिक- [[आस्कन्दने]गतौ च]५. २२ ||
तिग् | स्वा० सेट् प० | तिग [आस्कन्दने]गतौ च ५. २३ ||
तिज् | भ्वा० सेट् आ० | तिज निशाने १. ११२६ ||
तिज् | चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| तिज निशाने (निशातने)१०. १५४ ||
तिप् | भ्वा० अनिट् आ० | तिपृ- [क्षरणार्थः]१. ४२० ||
तिम् | दि० सेट् प० | तिम- [आर्द्रीभावे]४. १७ ||
तिल् | भ्वा० सेट् प० | तिल गतौ १. ६१२ ||
तिल् | चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| तिल स्नेहने १०. ९६ ||
तिल् | तु० सेट् प० | तिल स्नेहने (स्नेहे)६. ८१ ||
तिल्ल् | भ्वा० सेट् प० | तिल्ल [गतौ]इत्येके १. ६१३ ||
तीक् | भ्वा० सेट् आ० | तीकृ- [गत्यर्थः]१. १११ ||
तीम् | दि० सेट् प० | तीम- [आर्द्रीभावे]४. १८ ||
तीर (तीर्)| चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| तीर कर्मसमाप्तौ १०. ४५४ ||
तीव् | भ्वा० सेट् प० | तीव- [स्थौल्ये]१. ६४६ ||
तु | अ० सेट् (अनिट्)प० | तु (तु)गतिवृद्धिहिंसासु (वृद्ध्यर्थः)| इति सौत्रो धातुः २. २९ ||
तुज् | भ्वा० सेट् प० | तुज हिंसायाम् १. २७७ ||
तुज् | चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| तुज- [हिंसाबलादाननिकेतनेषु]१०. ४४ ||
तुञ्ज् | भ्वा० सेट् प० | तुजि पालने १. २७८ ||
तुञ्ज् | चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| तुजि- [भाषार्थः]१०. २८५ ||
तुञ्ज् | चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| तुजि- [हिंसाबलादाननिकेतनेषु]१०. ४५ ||
तुट् | तु० सेट् प० | तुट कलहकर्मणि ६. १०३ ||
तुड् | भ्वा० सेट् प० | तुडृ तोडने १. ४०६ ||
तुड् | तु० सेट् प० | तुड तोडने ६. ११६ ||
तुण् | तु० सेट् प० | तुण कौटिल्ये ६. ५८ ||
तुण्ड् | भ्वा० सेट् आ० | तुडि तोडने १. ३०९ ||
तुण्ड् | चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| (तुडि- [प्रेरणे])१०. १६६ ||
तुत्थ (तुत्थ्)| चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| तुत्थ आवरणे १०. ४८९ ||
तुद् | तु० अनिट् उ० | तुद व्यथने ६. १ ||
तुप् | भ्वा० सेट् प० | तुप- [हिंसार्थः]१. ४७० ||
तुप् | तु० सेट् प० | तुप- [हिंसायाम्]६. ३२ ||
तुफ् | भ्वा० सेट् प० | तुफ- [हिंसार्थः]१. ४७४ ||
तुफ् | तु० सेट् प० | तुफ- [हिंसायाम्]६. ३४ ||
तुभ् | भ्वा० सेट् आ० | तुभ हिंसायाम् १. ८५६ ||
तुभ् | दि० सेट् प० | तुभ हिंसायाम् ४. १५६ ||
तुभ् | क्र्या० सेट् प० | तुभ हिंसायाम् ९. ५७ ||
तुम्प् | भ्वा० सेट् प० | तुम्प- [हिंसार्थः]१. ४७१ ||
तुम्प् | तु० सेट् प० | तुम्प- [हिंसायाम्]६. ३३ ||
तुम्फ् | भ्वा० सेट् प० | तुम्फ- [हिंसार्थः]१. ४७५ ||
तुम्फ् | तु० सेट् प० | तुम्फ हिंसायाम् ६. ३५ ||
तुम्ब् | भ्वा० सेट् प० | तुबि अर्दने १. ४९४ ||
तुम्ब् | चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| तुबि अदर्शने | अर्दन इत्येके १०. १६० ||
तुर् | जु० सेट् प० | तुर त्वरणे ३. २२ ||
तुर्व् | भ्वा० सेट् प० | तुर्वी- [हिंसार्थः]१. ६५१ ||
तुल् | चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| तुल उन्माने १०. ८८ ||
तुष् | दि० अनिट् प० | तुष प्रीतौ ४. ८१ ||
तुस् | भ्वा० सेट् प० | तुस- [शब्दे]१. ८०७ ||
तुह् | भ्वा० सेट् प० | तुहिर्- [अर्दने]१. ८३८ ||
तूड् | भ्वा० सेट् प० | तूडृ [तोडने]इत्येके १. ४०७ ||
तूण् | चु० सेट् आ० | तूण पूरणे १०. २१२ ||
तूर् | दि० सेट् आ० | तूरी गतित्वरणहिंसनयोः ४. ४७ ||
तूल् | भ्वा० सेट् प० | तूल निष्कर्षे १. ६०५ ||
तूष् | भ्वा० सेट् प० | तूष तुष्टौ १. ७६८ ||
तृंह् | तु० सेट् प० | तृंहू हिंसार्थाः ६. ७७ ||
तृक्ष् | भ्वा० सेट् प० | तृक्ष- [गतौ]१. ७५० ||
तृण् | त० सेट् उ० | तृणु अदने ८. ६ ||
तृद् | रु० सेट् उ० | उतृदिर् हिंसानादरयोः ७. ९ ||
तृप् | चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| तृप तृप्तौ | सन्दीपन इत्येके १०. ३५१ ||
तृप् | चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| तृप- [सन्दीपने (इत्येके)]१०. ३५५ ||
तृप् | दि० अनिट् वेट् (७. २. ४५ | रधादि०)प० | तृप प्रीणने ४. ९२ ||
तृप् | स्वा० सेट् प० | तृप प्रीणन इत्येके ५. २८ ||
तृप् | तु० सेट् प० | तृप- [तृप्तौ]६. २८ ||
तृफ् | तु० सेट् प० | तृफ- [[तृप्तौ]इत्येके]६. ३० ||
तृम्प् | तु० सेट् प० | तृम्प- तृप्तौ ६. २९ ||
तृम्फ् | तु० सेट् प० | तृम्फ [तृप्तौ]इत्येके ६. ३१ ||
तृष् | दि० सेट् प० | ञितृष (ञितृषा)पिपासायाम् ४. १४१ ||
तृह् | तु० सेट् प० | तृहू- [हिंसार्थः]६. ७५ ||
तृह् | रु० सेट् प० | तृह हिंसायाम् ७. १८ ||
तॄ | भ्वा० सेट् प० | तॄ प्लवनतरणयोः १. ११२४ ||
तेज् | भ्वा० सेट् प० | तेज पालने १. २६३ ||
तेप् | भ्वा० सेट् आ० | तेपृ- [क्षरणार्थः]| तेपृ कम्पने च १. ४२१ ||
तेव् | भ्वा० सेट् आ० | तेवृ- [देवने]१. ५७२ ||
त्यज् | भ्वा० अनिट् प० | त्यज हानौ १. ११४१ ||
त्रंस् | चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| त्रसि- [भाषार्थः]१०. २९२ ||
त्रक्ष् | भ्वा० सेट् प० | त्रक्ष- [गतौ]१. ७४८ ||
त्रख् | भ्वा० सेट् प० | त्रख- [गत्यर्थः [इत्यपि केचित्]]१. १७२ ||
त्रङ्क् | भ्वा० सेट् आ० | त्रकि- [गत्यर्थः]१. १०२ ||
त्रङ्ग् | भ्वा० सेट् प० | त्रगि- [गत्यर्थः]१. १६० ||
त्रन्द् | भ्वा० सेट् प० | त्रदि चेष्टायाम् १. ७२ ||
त्रप् | भ्वा० सेट् आ० | त्रपूष् लज्जायाम् १. ४३४ ||
त्रप् | भ्वा० सेट् प० | त्रपि- [मित्][इति भोजः]१. ९३४ ||
त्रस् | चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| त्रस धारणे | ग्रहण इत्येके | वारण इत्यन्ये (धारणग्रहणवारणेषु)१०. २६९ ||
त्रस् | दि० सेट् प० | त्रसी उद्वेगे ४. ११ ||
त्रिङ्ख् | भ्वा० सेट् प० | त्रिखि- [गत्यर्थः [इत्यपि केचित्]]१. १७३ ||
त्रुट् | चु० सेट् आ० | त्रुट चेदने १०. २२१ ||
त्रुट् | तु० सेट् प० | त्रुट चेदने ६. १०२ ||
त्रुप् | भ्वा० सेट् प० | त्रुप- [हिंसार्थः]१. ४७२ ||
त्रुफ् | भ्वा० सेट् प० | त्रुफ- [हिंसार्थः]१. ४७६ ||
त्रुम्प् | भ्वा० सेट् प० | त्रुम्प- [हिंसार्थः]१. ४७३ ||
त्रुम्फ् | भ्वा० सेट् प० | त्रुम्फ हिंसार्थाः १. ४७७ ||
त्रै | भ्वा० अनिट् आ० | त्रैङ् पालने १. ११२० ||
त्रौक् | भ्वा० सेट् आ० | त्रौकृ- [गत्यर्थः]१. १०४ ||
त्वक्ष् | भ्वा० सेट् प० | त्वक्षू तनूकरणे १. ७४४ ||
त्वङ्ग् | भ्वा० सेट् प० | त्वगि- [गत्यर्थः]| त्वगि कम्पने च १. १५९ ||
त्वच् | तु० सेट् प० | त्वच संवरणे ६. २१ ||
त्वञ्च् | भ्वा० सेट् प० | त्वञ्चु- [गत्यर्थः]१. २१९ ||
त्वर् | भ्वा० सेट् आ० | ञित्वरा(म्)सम्भ्रमे १. ८८४ ||
त्विष् | भ्वा० अनिट् उ० | त्विष दीप्तौ १. ११५६ ||
त्सर् | भ्वा० सेट् प० | त्सर चद्मगतौ १. ६३५ ||
थङ्क् | भ्वा० सेट् प० | (थकि- )[गत्यर्थः [इत्यपि केचित्]]१. १६७ ||
थुड् | तु० सेट् प० | थुड- [संवरणे]६. ११७ ||
थुर्व् | भ्वा० सेट् प० | थुर्वी- [हिंसार्थः]१. ६५२ ||
दंश् | भ्वा० अनिट् प० | दंश दशने १. ११४४ ||
दंश् | चु० सेट् आ० | दशि दंशने (दर्शनदंशनयोः)१०. १९३ ||
दंश् | चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| दशि- [भाषार्थः]१०. २९५ ||
दंस् | चु० सेट् आ० | दसि दर्शनदंशनयोः १०. १९४ ||
दंस् | चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| दसि- [[भाषार्थः]च]१०. ३१७ ||
दक्ष् | भ्वा० सेट् आ० | दक्ष वृद्धौ शीघ्रार्थे च १. ६९२ ||
दक्ष् | भ्वा० सेट् आ० | दक्ष(म्)गतिहिंसनयोः (गतिशासनयोः)(वृद्धौ शीघ्रार्थे च)१. ८७४ ||
दघ् | स्वा० सेट् प० | दघ घातने पालने च ५. ३० ||
दङ्घ् | भ्वा० सेट् प० | दघि पालने १. १८१ ||
दण्ड (दण्ड्)| चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| दण्ड दण्डनिपाते १०. ४७२ ||
दद् | भ्वा० सेट् आ० | दद दाने १. १७ ||
दध् | भ्वा० सेट् आ० | दध धारणे १. ८ ||
दम् | दि० सेट् प० | दमु उपशमे ४. १०० ||
दम्भ् | स्वा० सेट् प० | दम्भु दम्भने (दम्भे)५. २६ ||
दय् | भ्वा० सेट् आ० | दय दानगतिरक्षणहिंसादानेषु १. ५५३ ||
दरिद्रा | अ० सेट् प० | दरिद्रा दुर्गतौ २. ६८ ||
दल् | भ्वा० सेट् प० | दल विशरणे १. ६२९ ||
दल् | भ्वा० सेट् प० | दलि- [मित्][इति भोजः]१. ९२९ ||
दल् | चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| दल विदारणे १०. २८१ ||
दश् | स्वा० सेट् प० | दाश- [हिंसायाम्]५. ३६ ||
दस् | चु० सेट् आ० | दस [दर्शनदंशनयोः]इत्यप्येके १०. १९५ ||
दस् | दि० सेट् प० | दसु च [उपक्षये]४. ११० ||
दह् | भ्वा० अनिट् प० | दःअ भस्मीकरणे १. ११४६ ||
दा | भ्वा० अनिट् प० | दाण् दाने १. १०७९ ||
दा | अ० अनिट् प० | दाप् लवने २. ५४ ||
दा | जु० अनिट् उ० | डुदाञ् दाने ३. १० ||
दान् | भ्वा० सेट् उ० | दान खण्डने (अवखण्डने)१. ११४९ ||
दाश् | भ्वा० सेट् उ० | दाशृ दाने १. १०२५ ||
दास् | भ्वा० सेट् उ० | दासृ दाने १. १०४१ ||
दिन्व् | भ्वा० सेट् प० | दिवि- [प्रीणनार्थः]१. ६७६ ||
दिव् | चु० सेट् आ० | दिवु परिकूजने १०. २३० ||
दिव् | चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| दिवु मर्दने १०. २४९ ||
दिव् | दि० सेट् प० | दिवु क्रीडाविजिगीषाव्यवहारद्युतिस्तुतिमोदमदस्वप्नकान्तिगतिषु ४. १ ||
दिश् | तु० अनिट् उ० | दिश अतिसर्जने ६. ३ ||
दिह् | अ० अनिट् उ० | दिःअ उपचये २. ५ ||
दी | दि० सेट् आ० | (ओ)दीङ् क्षये ४. २९ ||
दीक्ष् | भ्वा० सेट् आ० | दीक्ष मौण्ड्येज्योपनयननियमव्रतादेशेषु १. ६९३ ||
दीधी | अ० सेट् आ० | दीधीङ् दीप्तिदेवनयोः २. ७१ ||
दीप् | दि० सेट् आ० | दीपी दीप्तौ ४. ४५ ||
दुःख (दुःख्)| चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| दुःख तत्क्रियायाम् १०. ४७६ ||
दु | भ्वा० अनिट् प० | दु- [गतौ]१. १०९४ ||
दु | स्वा० अनिट् प० | टुदु उपतापे ५. ११ ||
दुर्व् | भ्वा० सेट् प० | दुर्वी- [हिंसार्थः]१. ६५३ ||
दुल् | चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| दुल उत्क्षेपे १०. ८९ ||
दुष् | दि० अनिट् प० | दुष वैकृत्ये ४. ८२ ||
दुह् | भ्वा० सेट् प० | दुहिर्- [अर्दने]१. ८३९ ||
दुह् | अ० अनिट् उ० | दुःअ प्रपूरणे २. ४ ||
दू | दि० सेट् आ० | (ओ)दूङ् परितापे ४. २८ ||
दृंह् | भ्वा० सेट् प० | दृहि- [वृद्धौ]१. ८३५ ||
दृ | तु० अनिट् आ० | दृङ् आदरे ६. १४७ ||
दृप् | चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| दृप सन्दीपने [इत्येके]१०. ३५६ ||
दृप् | दि० अनिट् वेट् (७. २. ४५ | रधादि०)प० | दृप हर्षमोहनयोः ४. ९३ ||
दृप् | तु० सेट् प० | दृप- [उत्क्लेशे]६. ३६ ||
दृफ् | तु० सेट् प० | दृफ- [[उत्क्लेशे]इत्येके]६. ३८ ||
दृभ् | चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| दृभ सन्दर्भे १०. ३५८ ||
दृभ् | चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| दृभी भये (ग्रन्थे)१०. ३५७ ||
दृभ् | तु० सेट् प० | दृभी ग्रन्थे ६. ४८ ||
दृम्प् | तु० सेट् प० | दृम्प उत्क्लेशे ६. ३७ ||
दृम्फ् | तु० सेट् प० | दृम्फ [उत्क्लेशे]इत्येके ६. ३९ ||
दृश् | भ्वा० अनिट् प० | दृशिर् प्रेक्षणे १. ११४३ ||
दृह् | भ्वा० सेट् प० | दृह- [वृद्धौ]१. ८३४ ||
दॄ | भ्वा० सेट् प० | दॄ(म्)भये १. ९२० ||
दॄ | स्वा० सेट् प० | दॄ हिंसायाम् ५. ३७ ||
दॄ | क्र्या० सेट् प० | दॄ विदारणे ९. २६ ||
दे | भ्वा० अनिट् आ० | देङ् रक्षणे १. १११७ ||
देव् | भ्वा० सेट् आ० | देवृ देवने १. ५७३ ||
दै | भ्वा० अनिट् प० | दैप् शोधने १. १०७३ ||
दो | दि० अनिट् प० | दो अवखण्डने ४. ४३ ||
द्यु | अ० अनिट् प० | द्यु अभिगमने २. ३५ ||
द्युत् | भ्वा० सेट् आ० | द्युत दीप्तौ १. ८४२ ||
द्यै | भ्वा० अनिट् प० | द्यै न्यक्करणे १. १०५३ ||
द्रम् | भ्वा० सेट् प० | द्रम- [गतौ]१. ५३७ ||
द्रा | अ० अनिट् प० | द्रा कुत्सायां गतौ २. ४९ ||
द्राख् | भ्वा० सेट् प० | द्राखृ- [शोषणालमर्थ्योः]१. १३२ ||
द्राघ् | भ्वा० सेट् आ० | द्राघृ सामर्थ्ये | [द्राघृ आयामे च]१. १२० ||
द्राङ्क्ष् | भ्वा० सेट् प० | द्राक्षि- [[काङ्क्षायाम्]घोरवासिते च]१. ७६३ ||
द्राड् | भ्वा० सेट् आ० | द्राडृ- [विशरेणे]१. ३२२ ||
द्राह् | भ्वा० सेट् आ० | द्राहृ निद्राक्षये | निक्षेप इत्येके १. ७३३ ||
द्रु | भ्वा० अनिट् प० | द्रु गतौ १. १०९५ ||
द्रुण् | तु० सेट् प० | द्रुण हिंसागतिकौटिल्येषु ६. ६३ ||
द्रुह् | दि० अनिट् वेट् (७. २. ४५ | रधादि०)प० | द्रुःअ जिघांसायाम् ४. ९४ ||
द्रू | क्र्या० सेट् उ० | द्रूञ् हिंसायाम् ९. १३ ||
द्रेक् | भ्वा० सेट् आ० | द्रेकृ- [शब्दोत्साःअयोः]१. ८३ ||
द्रै | भ्वा० अनिट् प० | द्रै स्वप्ने १. १०५४ ||
द्विष् | अ० अनिट् उ० | द्विष अप्रीतौ २. ३ ||
द्वृ | भ्वा० अनिट् प० | द्वृ संवरणे (वरणे)१. १०८३ ||
धक्क् | चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| धक्क नाशने १०. ८३ ||
धण् | भ्वा० सेट् प० | धण [शब्दार्थः]इत्यपि केचित् १. ५२२ ||
धन् | जु० सेट् प० | धन धान्ये ३. २४ ||
धन्व् | भ्वा० सेट् प० | धवि गत्यर्थाः १. ६८१ ||
धा | जु० अनिट् उ० | डुधाञ् धारणपोषणयोः | दान इत्यप्येके ३. ११ ||
धाव् | भ्वा० सेट् उ० | धावु गतिशुद्ध्योः १. ६८५ ||
धि | तु० अनिट् प० | धि धारणे ६. १४२ ||
धिक्ष् | भ्वा० सेट् आ० | धिक्ष सन्दीपनक्लेशनजीवनेषु १. ६८७ ||
धिन्व् | भ्वा० सेट् प० | धिवि- [प्रीणनार्थः]१. ६७७ ||
धिष् | जु० सेट् प० | धिष शब्दे ३. २३ ||
धी | दि० अनिट् आ० | (ओ)धीङ् आधारे ४. ३१ ||
धु | स्वा० अनिट् उ० | धुञ् कम्पने ५. ९ ||
धु | तु० सेट् प० | धू (धु)विधूनने ६. १३३ ||
धुक्ष् | भ्वा० सेट् आ० | धुक्ष- [सन्दीपनक्लेशनजीवनेषु]१. ६८६ ||
धुप् | चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| धूप- [धुप- ][भाषार्थः]१०. ३०३ ||
धुर्व् | भ्वा० सेट् प० | धुर्वी हिंसार्थाः १. ६५४ ||
धू | चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| धूञ् कम्पने १०. ३७२ ||
धू | स्वा० अनिट् उ० | धूञ् [कम्पने]इत्येके ५. १० ||
धू | तु० सेट् प० | धू (धु)विधूनने ६. १३३ ||
धू | क्र्या० सेट् उ० | धूञ् कम्पने ९. २० ||
धूप् | भ्वा० सेट् प० | धूप सन्तापे १. ४६२ ||
धूप् | चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| धूप- (धुप- )[भाषार्थः]१०. ३०३ ||
धूर् | दि० सेट् आ० | धूरी- [हिंसागत्योः]४. ४८ ||
धूश् | चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| धूश [कान्तिकरणे]इत्यपरे १०. १४१ ||
धूष् | चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| धूष [कान्तिकरणे]इत्येके १०. १४० ||
धूस् | चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| धूस कान्तिकरणे १०. १३९ ||
धृ | भ्वा० अनिट् आ० | धृङ् अवध्वंसने १. १११५ ||
धृ | भ्वा० अनिट् उ० | धृञ् धारणे १. १०४७ ||
धृ | तु० अनिट् आ० | धृङ् अवस्थाने ६. १४८ ||
धृज् | भ्वा० सेट् प० | धृज- [गतौ]१. २४९ ||
धृञ्ज् | भ्वा० सेट् प० | धृजि- [गतौ]१. २५० ||
धृष् | चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| धृष प्रसहने १०. ३८८ ||
धृष् | स्वा० सेट् प० | ञिधृषा प्रागल्भ्ये ५. २५ ||
धॄ | क्र्या० सेट् प० | धॄ [वयोहानौ]इत्यन्ये ९. २९ ||
धे | भ्वा० अनिट् प० | धेट् पाने १. १०५० ||
धेप् | भ्वा० सेट् आ० | धेपृ च [गतौ]१. ४३३ ||
धोर् | भ्वा० सेट् प० | धोरृ गतिचातुर्ये १. ६३४ ||
ध्मा | भ्वा० अनिट् प० | ध्मा शब्दाग्निसंयोगयोः १. १०७६ ||
ध्माङ्क्ष् | भ्वा० सेट् प० | ध्माक्षि [[काङ्क्षायाम्]घोरवासिते च]इत्येके १. ७६६ ||
ध्यै | भ्वा० अनिट् प० | ध्यै चिन्तायाम् १. १०५६ ||
ध्रज् | भ्वा० सेट् प० | ध्रज- [गतौ]१. २४५ ||
ध्रञ्ज् | भ्वा० सेट् प० | ध्रजि- [गतौ]१. २४६ ||
ध्रण् | भ्वा० सेट् प० | ध्रण- शब्दे १. ५२९ ||
ध्रस् | चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| उध्रस [उघ्रस]उञ्चे १०. २७० ||
ध्रस् | क्र्या० सेट् प० | उध्रस उञ्चे ९. ६० ||
ध्राख् | भ्वा० सेट् प० | ध्राखृ शोषणालमर्थ्योः १. १३३ ||
ध्राङ्क्ष् | भ्वा० सेट् प० | ध्राक्षि- [[काङ्क्षायाम्]घोरवासिते च]१. ७६४ ||
ध्राड् | भ्वा० सेट् आ० | ध्राडृ विशरेणे १. ३२३ ||
ध्रिज् | भ्वा० सेट् प० | (ध्रिज [गतौ]च)१. २५३ ||
ध्रु | भ्वा० अनिट् प० | ध्रु स्थैर्ये १. १०९३ ||
ध्रु | तु० अनिट् प० | ध्रु गतिस्थैर्ययोः | ध्रुव इत्येके ६. १३५ ||
ध्रेक् | भ्वा० सेट् आ० | ध्रेकृ शब्दोत्साःअयोः १. ८४ ||
ध्रै | भ्वा० अनिट् प० | ध्रै तृप्तौ १. १०५५ ||
ध्वंस् | भ्वा० सेट् आ० | ध्वंसु- [अवस्रंसने]| ध्वंसु गतौ च १. ८५८ ||
ध्वज् | भ्वा० सेट् प० | ध्वज- [गतौ]१. २५१ ||
ध्वञ्ज् | भ्वा० सेट् प० | ध्वजि गतौ १. २५२ ||
ध्वण् | भ्वा० सेट् प० | ध्वण शब्दार्थाः १. ५२१ ||
ध्वन (ध्वन्)| चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| ध्वन शब्दे १०. ४३१ ||
ध्वन् | भ्वा० सेट् प० | ध्वन शब्दे [मित्]१. ९२८ ||
ध्वन् | भ्वा० सेट् प० | ध्वन शब्दे १. ९६२ ||
ध्वन् | भ्वा० सेट् प० | ध्वनि- [मित्][इति भोजः]१. ९३३ ||
ध्वाङ्क्ष् | भ्वा० सेट् प० | ध्वाक्षि [ध्माक्षि][काङ्क्षायाम्]घोरवासिते च १. ७६५ ||
ध्वृ | भ्वा० अनिट् प० | ध्वृ हूर्चने १. १०८९ ||
नक्क् | चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| नक्क- [नाशने]१०. ८२ ||
नक्ष् | भ्वा० सेट् प० | णक्ष गतौ १. ७५२ ||
नख् | भ्वा० सेट् प० | णख- [गत्यर्थः]१. १४२ ||
नङ्ख् | भ्वा० सेट् प० | णखि- [गत्यर्थः]१. १४३ ||
नट् | भ्वा० सेट् प० | णट (नट)नृतौ १. ३४७ ||
नट् | भ्वा० सेट् प० | णट(म्)नृत्तौ | नतावित्येके | गतावित्यन्ये १. ८९० ||
नट् | चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| नट अवस्यन्दने १०. १८ ||
नट् | चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| नट- [[भाषार्थः]च]१०. ३२२ ||
नड् | चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| णड- [भाषार्थः]१०. ३०९ ||
नद् | भ्वा० सेट् प० | णद अव्यक्ते शब्दे १. ५६ ||
नन्द् | भ्वा० सेट् प० | टुनदि समृद्धौ १. ७० ||
नभ् | भ्वा० सेट् आ० | णभ- हिंसायाम् [अभावे- पि]१. ८५५ ||
नभ् | दि० सेट् प० | णभ- [हिंसायाम्]४. १५५ ||
नभ् | क्र्या० सेट् प० | णभ- [हिंसायाम्]९. ५६ ||
नम् | - नमामनुपसर्गाद्वा [मित्]१. ९४४ ||
नम् | भ्वा० अनिट् प० | णम प्रह्वत्वे शब्दे च १. ११३६ ||
नय् | भ्वा० सेट् आ० | णय गतौ | णय रक्षणे च १. ५५२ ||
नर्द् | भ्वा० सेट् प० | नर्द- [शब्दे]१. ५८ ||
नल् | भ्वा० सेट् प० | णल गन्धे | बन्धन इत्येके १. ९७२ ||
नल् | चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| नल [भाषार्थः]च १०. ३३३ ||
नश् | दि० अनिट् वेट् (७. २. ४५ | रधादि०)प० | णश अदर्शने ४. ९१ ||
नस् | भ्वा० सेट् आ० | णस कौटिल्ये १. ७१४ ||
नह् | दि० अनिट् उ० | णःअ बन्धने ४. ६२ ||
नाथ् | भ्वा० सेट् आ० | नाथृ याच्ञोपतापैश्वर्याशीष्षु १. ७ ||
नाध् | भ्वा० सेट् आ० | नाधृ- [याच्ञोपतापैश्वर्याशीष्षु]१. ६ ||
नास् | भ्वा० सेट् आ० | णासृ- [शब्दे]१. ७१२ ||
निंस् | अ० सेट् आ० | णिसि चुम्बने २. १७ ||
निक्ष् | भ्वा० सेट् प० | णिक्ष चुम्बने १. ७४७ ||
निज् | जु० अनिट् उ० | णिजिर् शौचपोषणयोः ३. १२ ||
निञ्ज् | अ० सेट् आ० | णिजि शुद्धौ २. १८ ||
निद् | भ्वा० सेट् उ० | णिदृ- [कुत्सासन्निकर्षयोः]१. १०१२ ||
निन्द् | भ्वा० सेट् प० | णिदि कुत्सायाम् १. ६९ ||
निन्व् | भ्वा० सेट् प० | णिवि सेचने | सेचने चेत्येके १. ६७३ ||
निल् | तु० सेट् प० | णिल गहने ६. ८७ ||
निवास (निवास्)| चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| निवास आच्चादने १०. ४२७ ||
निश् | भ्वा० सेट् प० | णिश समाधौ १. ८२३ ||
निष् | भ्वा० सेट् प० | णिषु सेचने १. ७९६ ||
निष्क् | चु० सेट् आ० | निष्क परिमाणे १०. २०९ ||
नी | भ्वा० अनिट् उ० | णीञ् प्रापणे १. १०४९ ||
नील् | भ्वा० सेट् प० | णील वर्णे १. ६०० ||
नीव् | भ्वा० सेट् प० | णीव स्थौल्ये १. ६४७ ||
नु | अ० सेट् प० | णु स्तुतौ २. ३० ||
नु | तु० सेट् प० | णू (णु)स्तुतौ ६. १३२ ||
नुद् | तु० अनिट् उ० | णुद प्रेरणे ६. २ ||
नुद् | तु० अनिट् प० | णुद प्रेरणे ६. १६२ ||
नू | तु० सेट् प० | णू (णु)स्तुतौ ६. १३२ ||
नृत् | दि० सेट् प० | नृती गात्रविक्षेपे ४. १० ||
नॄ | भ्वा० सेट् प० | नॄ(म्)नये १. ९२१ ||
नॄ | क्र्या० सेट् प० | नॄ नये ९. ३० ||
नेद् | भ्वा० सेट् उ० | णेदृ कुत्सासन्निकर्षयोः १. १०१३ ||
नेष् | भ्वा० सेट् आ० | णेषृ- [गतौ]१. ७०४ ||
पंश् | चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| पसि [नाशने]इत्येके १०. १०८ ||
पंस् | चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| पसि नाशने १०. १०७ ||
पक्ष् | भ्वा० सेट् प० | पक्ष परिग्रःअ इत्येके १. ७५७ ||
पक्ष् | चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| पक्ष परिग्रःए १०. २४ ||
पच् | भ्वा० अनिट् उ० | डुपचष् पाके १. ११५१ ||
पञ्च् | भ्वा० सेट् आ० | पचि व्यक्तीकरणे १. १९८ ||
पञ्च् | चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| पचि विस्तारवचने १०. १५३ ||
पट (पट्)| चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| पट- [ग्रन्थे]१०. ३९४ ||
पट् | भ्वा० सेट् प० | पट गतौ १. ३३३ ||
पट् | चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| पट- [भाषार्थः]१०. २८२ ||
पठ् | भ्वा० सेट् प० | पठ व्यक्तायां वाचि १. ३८१ ||
पण् | भ्वा० सेट् आ० | पण व्यवहारे स्तुतौ च १. ५०७ ||
पण्ड् | भ्वा० सेट् आ० | पडि गतौ १. ३१५ ||
पण्ड् | चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| पडि- [नाशने]१०. १०६ ||
पत (पत्)| चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| पत [देवशब्दे]गतौ (वा)| वादन्त इत्येके १०. ४०० ||
पत् | भ्वा० सेट् प० | पतॢ गतौ १. ९७९ ||
पथ् | भ्वा० सेट् प० | पथे गतौ १. ९८२ ||
पथ् | चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| पथ [प्रक्षेपे]इत्येके १०. २९ ||
पद (पद्)| चु० सेट् आ० | पद गतौ १०. ४४० ||
पद् | दि० अनिट् आ० | पद गतौ ४. ६५ ||
पन् | भ्वा० सेट् आ० | पन च [व्यवहारे स्तुतौ च]१. ५०८ ||
पन्थ् | चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| पथि गतौ १०. ६० ||
पय् | भ्वा० सेट् आ० | पय- [गतौ]१. ५४८ ||
पर्ण (पर्ण्)| चु० सेट् उ० (१. ३. ७४)| पर्